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भाग~47 उँगलियाँ जो छू गईं
दरवाज़े की ओर उठती निगाहें, एक क्षण के लिए जैसे ठहर सी गईं।
रूहानी की साँसों में अचानक एक बोझ-सा उतर आया था, जैसे किसी भूले हुए जख्म पर फिर से कोई उंगली रख दी गई हो।
लेकिन अद्वैत की आवाज़, शांत, स्थिर और कहीं न कहीं संभालने वाली, ने उस पल को टूटने नहीं दिया।
“गुनगुन, cake कट करो, सब wait कर रहे हैं।”
रूहानी ने एक गहरी साँस ली और जैसे किसी अदृश्य धागे ने उसकी आँखों को एकांश से हटा दिया। उसकी नज़र अब फिर से गुनगुन के पास लौट आई, जहाँ मासूमियत और रंगों का जश्न था।
अद्वैत दूर से सब देख रहा था। वो नज़रें पढ़ना नहीं जानता था, लेकिन उसके भीतर कुछ था जो महसूस कर सकता था और वो साफ़ महसूस कर रहा था कि रूहानी की मुस्कान अब पहले जैसी नहीं रही।
उसमें हल्की सी थकान थी, एक अधूरी साँस, जो अभी तक पूरी नहीं हुई थी।
वो धीरे से उसके पास आकर खड़ा हो गया, एक भी शब्द बिना कहे, बस एक साथ होने की ख़ामोश मौजूदगी।
मीना ने एकांश और काम्या को भीतर बुलाया, और दोनों बिना किसी झिझक के आकर रूहानी और अद्वैत की दूसरी तरफ खड़े हो गए।
एकांश की नज़रें कहीं गहराई से रूहानी को देखने लगीं…. जैसे कोई पुराना सपना अब किसी और की हकीकत बन गया हो।
गुनगुन ने केक काटा, चीकू ने सबसे पहले उसकी नाक पर क्रीम पोती और सब हँस पड़े…. वो बेपरवाह हँसी, जो थोड़ी देर के लिए हर अजनबीपन को छुपा लेती है।
लेकिन तभी, स्टाफ एक दूसरा केक ले आया…. सफेद और हल्के lavender icing से सजा हुआ। उस पर लिखा था: “To Stitch & Soul — A Dream Reborn.”

रूहानी की आँखों में हल्की हैरानी तैर गई। “ये…?”
अद्वैत झुका, बहुत हल्के से और रूहानी के कान के पास कहा — “यह सिर्फ गुनगुन का दिन नहीं है… आज इस स्टूडियो का भी नया जन्म हुआ है। और ये तो तुम्हारा आइडिया था कि दोनों celebrations एक साथ हों।”
उसके शब्दों में कोई मोहब्बत का प्रदर्शन नहीं था, न ही कोई dramatic gesture… बस एक समझ थी, और acknowledgment।
रूहानी की साँस एक पल को रुक गई। उसकी आँखें हल्की सी भीग गईं… एकदम अनकहे और अनजाने से। उसे खुद समझ नहीं आया कि ये खुशी थी, या relief… या शायद कोई ऐसी soft recognition, जो किसी ने बहुत दिन बाद उसे दी थी…. बिना माँगे, बिना शर्त, जैसे उसकी अधूरी इबादत आज मुकम्मल होने को थी।
और अद्वेत… वो अब भी उसके पास खड़ा था…. जैसे कोई उधार की गर्माहट हो… जो बिना कहे भी बहुत कुछ दे जाता है।
रूहानी अब तक उसी केक को देख रही थी… सफेद, नर्म, और उस पर सजी नाज़ुक सी lavender icing की परत जैसे किसी ख्वाब की सतह हो।
उसकी आँखों में एक अजीब सी शांति थी, लेकिन भीतर कुछ उलझा हुआ भी। तभी अद्वैत की हथेली ने उसके कंधे को छुआ…. वो छुअन न तो बहुत करीबी थी, न ही पूरी तरह अजनबी।
“रूहानी, केक काटो… darling,” अद्वैत ने हलकी आवाज़ में कहा, लेकिन उसके आख़िरी शब्द ने जैसे समय को धीमा कर दिया।
रूहानी की पलकें फड़कीं, उसकी नज़र चौंकते हुए अद्वैत के चेहरे तक पहुँची। वो मुस्कुरा रहा था…. उस तरह की मुस्कान जो भीड़ के बीच दिखाई जाती है, सिर्फ इसलिए कि बाकी सब कुछ ‘सही’ लगे।
रूहानी ने खुद को संभालते हुए केक काटा। अभी उसने उस छोटे से टुकड़े को अपनी उँगलियों के बीच पकड़ा ही था कि अद्वैत ने बहुत सहजता से उसका हाथ थाम लिया और केक का टुकड़ा खुद के मुँह में डाल लिया।
वो क्षण… नाज़ुक, अनजाना, और बहुत ज़्यादा निकटता से भरा… रूहानी को पूरी तरह surprise कर गया। उसके अंदर कुछ अकबका गया, जैसे कोई अलार्म बजने लगा हो जिसे सिर्फ वही सुन सकती थी।
अभी वो कुछ समझती कि अद्वैत ने केक का एक छोटा टुकड़ा फिर से काटा और उसके होठों तक लाकर पूछा, “May I?”
रूहानी ने अनजाने में सिर हिलाया…. उसकी चेतना अब भी उस टोन की तह तक नहीं पहुँच पाई थी।
अद्वैत ने अपनी उंगलियों को बेहद संतुलन के साथ उसके होठों के करीब लाया, शायद इस कोशिश में कि कहीं भी touch न हो….
लेकिन वो corner, वो millisecond…. जब उसकी उंगलियाँ रूहानी के होंठों से हल्का सा छू गईं, सब कुछ बदल गया।
रूहानी का चेहरा एकदम कड़क हो गया। वो तुरंत एक कदम पीछे हटी, और खुद को संभालते हुए स्टाफ से बोली, “Cake सबको distribute कर दो।”
वो बोल रही थी, लेकिन उसकी आवाज़ में एक किस्म की घबराहट थी। जैसे कुछ छू गया था…. कोई भूला हुआ जज़्बा या कोई बंधा हुआ डर।
अद्वैत वही खड़ा रहा, बिना कोई प्रतिक्रिया दिए। लेकिन उसके भीतर कुछ खिंच गया था। वो जानता था, उनका रिश्ता कोई फिल्मी मोहब्बत नहीं था…. ये एक समझौता था, काग़ज़ पर लिखा हुआ।
लेकिन जब उसकी उंगलियाँ रूहानी के होंठों से छू गईं और उसने उसकी पलकों की थरथराहट देखी…. तो उसे पहली बार महसूस हुआ कि कुछ है… कोई अनकहा स्पेस, जो दोनों के बीच मौजूद तो है, पर परखा नहीं गया।
उसके होठों की मुस्कान अब पहले जैसी नहीं थी…. उसमें एक बेचैनी थी। और आँखों में… शायद एक सवाल… क्या मैंने हद पार कर दी?
एकांश की आँखों के कोने में कुछ सिकुड़ गया था, जैसे वहाँ कोई अनकहा धुआँ जमा हो रहा हो, लेकिन चेहरा अब भी उतना ही शांत….. उतना ही सधा हुआ।
वो हर छोटी हरकत देख रहा था… अद्वैत की उँगलियों का रूहानी के हाथों के पास रुकना, रूहानी की हल्की झिझक, फिर वो केक वाला पल…
काम्या उसके पास खड़ी थी, लेकिन एकांश के अंदर कुछ और चल रहा था…. एक सन्नाटा, जो बाहर की रौशनी में भी ठंडा था।
तभी काम्या मुस्कुराती हुई आगे बढ़ी, “Beautiful studio,” उसके लहज़े में शहद था, मगर नीचे छुपा हुआ कोई काँटा भी।
रूहानी ने सिर्फ मुस्कराकर सर हिलाया, लेकिन उसकी पलकों के नीचे हल्की थकान थी। काम्या की आँखों में कुछ था…. शायद एक मीठा जहर।
“मैंने expect नहीं किया था कि तुम फिर से अपना नया studio खोलने का भी सोचोगी,” काम्या ने कहा, आँखें रूहानी की ड्रेस से लेकर उसके चेहरे तक दौड़ती रहीं, “…well, तुमने शादी भी कर ली — ये जानकर ज़्यादा हैरानी हुई मुझे।”
अद्वैत वहीं पास खड़ा था। उसका चेहरा अब थोड़ा सख़्त हुआ, लेकिन आवाज़ अब भी ठंडी और संतुलित रही।
“Congratulate करने का तुम्हारा तरीका थोड़ा casual नहीं है क्या?”
काम्या ने हँसते हुए कहा, “Oh sorry, Adwait, I forget that.”
फिर वो मुड़ी, एकांश अब तक पीछे खड़ा था, उसकी चुप्पी अब तक सबसे ज़्यादा मुखर थी। काम्या ने उसका हाथ पकड़कर उसे आगे लाया, “चलो, Ruhani का gift साथ में देते हैं।”
एकांश ने थोड़ा रुककर gift box आगे बढ़ाया… सुनहरे wrapping में बंधा….।
लेकिन उससे पहले कि वो रूहानी की ओर पहुँच पाता, अद्वैत ने झटके से वो gift अपने हाथों में ले लिया, और ठहरे हुए लहज़े में कहा, “Ruhani के special event पर सबसे पहला gift तो मुझे देना चाहिए, ना?”
एक क्षण के लिए एकांश की उंगलियाँ हवा में ठहर गईं…. जैसे किसी ने उस पर से कोई हक़ खींच लिया हो।
काम्या ने एक नकली हँसी के साथ, अपनी नज़रों को घुमाते हुए कहा, “Yes, of course…”
माहौल में अब रौशनी कम और चुप्पियाँ ज़्यादा थीं। fairy lights की धीमी टिमटिमाहट के बीच, रूहानी की नज़र एक पल को तीन चेहरों पर ठहर गई….
एक वर्तमान में खड़ा अद्वैत, जो अभी भी अजनबी लगता था;
एक अतीत से लौटे हुए एकांश, जिसकी आंखों में अब भी वो अधूरापन था;
और काम्या, जो सबकी नज़रों में बेनक़ाब थी, रूहानी के लिए अब भी एक ऐसा नाम थी जिसमें साज़िशें छुपी थीं; क्योंकि उसने कभी भी रूहानी के लिए दिल से कुछ अच्छा नहीं चाहा था।
रूहानी का गला सूख गया। उसने नज़रें फेर लीं, लेकिन दिल में कुछ भारी सा अटक गया।
तभी मीना तेज़ क़दमों से अद्वैत के पास आई, और घबराई हुई आवाज़ में बोली, “Sir, मुझे अभी घर लौटना होगा… गुनगुन और चीकू के पापा की तबियत अचानक बहुत बिगड़ गई है।”
अद्वैत ने चौंककर उसे देखा।
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मीना की इस अचानक खबर का सच, सिर्फ बीमारी था… या कुछ और भी था जो छुपाया जा रहा था?
एकांश की उंगलियाँ जो हवा में रुक गई थीं…. क्या वो सिर्फ एक gift से दूर हुई थीं, या किसी पुराने हक़ से भी?
रूहानी… क्या वो वाक़ई अद्वैत की ‘darling’ बन चुकी थी, या ये बस एक नाम था, एक मुखौटा… किसी और नाम को छुपाने के लिए?
लिखकर रूह छूने की कोशिश…..
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