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लेखक: Manoj Divana Namaste Story World

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Manoj Divana Namaste Story World

नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड के लेखक। पाठकों के लिए मनोरंजक और दिल को छू लेने वाली हिंदी कहानियाँ लिखना पसंद करता हूँ।आपका स्वागत है नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड में धन्यवाद 💐💐🌹🌹

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मार्च 2026
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  • जय गुरु देव

    जय गुरु देव

    पढ़ने का समय : 2 मिनट

    आज की ये रात है भक्ति की,  

    आज का ये दिन है श्रद्धा की।  

    गुरु की महिमा गूँजे हर दिशा में,  

    गुरु का आशीष बरसे हर हृदय में।  

     

    गुरु वो दीप हैं, जो अंधकार मिटाते,  

    गुरु वो सागर हैं, जो सत्य सिखाते।  

    गुरु के चरणों में है जीवन का सार,  

    गुरु ही हैं हमारे पथ‑प्रदर्शक अपार।  

     

    आइए मिलकर करें गुरु का वंदन,  

    भक्ति से भर दें हर मन का आलोकन।  

    जय गुरु देव, जय गुरु देव,  

    गूँजे मंच पर यही स्वर नित्य देव।

     

    आइए गुरु शिष्य संवाद के आनंदित पलों का आनंद लें।😊

     

    शिष्य बोला – गुरुजी, पढ़ाई बड़ी कठिन है,  

    गुरु मुस्काए – बेटा, यही तो जीवन का गहना है। 😊

     

    शिष्य बोला – गुरुजी, नींद बहुत सताती है,  

    गुरु हँसे – ज्ञान की रोशनी ही जगाती है। 😂

     

    शिष्य बोला – गुरुजी, सफलता कब आएगी?  

    गुरु बोले – जब मेहनत तेरे कदमों को सजाएगी। 😊

     

    शिष्य बोला – गुरुजी, आपका आशीष चाहिए,  

    गुरु बोले – बेटा, तेरा विश्वास ही सबसे बड़ा उपहार है।😊

     

    शिष्य बोला – गुरुजी, किताबें बहुत भारी हैं,  

    गुरु बोले – बेटा, ज्ञान ही सबसे प्यारी है। 😊

     

    शिष्य बोला – गुरुजी, क्लास में नींद आती है,  

    गुरु बोले – बेटा, यही तो ध्यान की पहली सीढ़ी है। 😊

     

    शिष्य बोला – गुरुजी, परीक्षा में क्या लिखूँगा?  

    गुरु बोले – बेटा, वही जो पढ़ाया है, वरना फिर सुनूँगा! 😊

     

    शिष्य बोला – गुरुजी, आपकी डाँट भी मीठी लगती है,  

    गुरु बोले – बेटा, यही डाँट ही तेरी जीत की सीढ़ी बनती है।😊

     

    गुरु ने कहा – पढ़ ले बेटा, वरना पछताएगा,  

    शिष्य ने कहा – WiFi नहीं है, नेट कहाँ से आएगा! 😂

     

    गुरु ने कहा – ध्यान लगा, मन को शांत कर,  

    शिष्य ने कहा – कर दें मोबाइल साइलेंट पर! 😂

     

    गुरु ने कहा – ज्ञान ही सबसे बड़ा धन है,  

    शिष्य ने कहा – लेकिन UPI से रिचार्ज भी ज़रूरी है! 😂

     

    गुरु पूर्णिमा पर सबने किया गुरु को प्रणाम, 🙏

    गुरु मुस्काए बोले – बेटा, अब कर दो Exam पास तमाम!😊

     

    आपको कैसा लगा पढ़कर

    , अपने विचार रखें नीचे कमेंट में लिखकर 😊😂

  • गुरु की ज्योति

    गुरु की ज्योति

    पढ़ने का समय : 2 मिनट

    गुरु वो दीप हैं, जो तमस हर लेते,  

    ज्ञान की किरणों से जीवन भर देते।  

    उनके चरणों में है सारा संसार,  

    उनसे ही मिलता है सच्चा आधार।  

     

    गुरु वो वृक्ष हैं, छाया में सुकून देते,  

    धूप में भी ठंडक का एहसास देते।  

    उनकी वाणी अमृत सी बरसती,  

    हर शब्द में शिक्षा की गंध बसती।  

     

    गुरु वो सागर हैं, जिनमें सत्य की लहरें,  

    हर प्रश्न का उत्तर, हर मन की डगरें।  

    उनकी दृष्टि में करुणा का सागर,  

    उनके आशीष से मिटता है अंधकार।  

     

    गुरु पूर्णिमा का पावन दिन आया,  

    श्रद्धा का दीप हर मन में जलाया।  

    फूलों की वर्षा, भक्ति की धारा,  

    गुरु चरणों में समर्पित हमारा प्यारा।  

     

    गुरु से ही जीवन का अर्थ समझा,  

    गुरु से ही आत्मा का स्वर मिला।  

    गुरु वो सूरज हैं, जो कभी न ढलते,  

    उनकी रोशनी से सब पथ पलते।  

     

    जय गुरु देव, जय ज्ञान के दाता,  

    आपसे ही जीवन का हर पल निखरता।  

    आपकी कृपा से मन निर्मल होता,  

    आपकी छाया में संसार संवरता।

     

    गुरु वो दीपक हैं, 

    जो अंधियारे में राह दिखाते,

    ज्ञान की गंगा बनकर, 

    जीवन को पावन बनाते।

     

    गुरु वो छाया हैं, 

    जो हर दुख में सहारा देते,

    संस्कारों की ज्योति से, 

    मन को उजियारा देते।

     

    गुरु वो सागर हैं, 

    जिनमें सत्य की लहरें उठतीं,

    भ्रम के रेगिस्तान में, 

    आशा की नदियाँ बहतीं।

     

    गुरु वो पर्वत हैं, 

    अटल, अडिग, स्थिर खड़े,

    शिष्य के हर प्रश्न पर, 

    उत्तर के दीप जलाए खड़े।

     

    गुरु पूर्णिमा का दिन है, 

    श्रद्धा का उत्सव महान,

    गुरु चरणों में अर्पित है, 

    जीवन का सारा सम्मान।

    🙏🙏  जय गुरु देव  🙏🙏

  • संग भींगने का क़रार

    संग भींगने का क़रार

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    बरसात की बूंदों में छुपा है प्यार,  

    आज दिलों ने किया संग भींगने का क़रार।  

    तेरे हाथों में मेरा हाथ थामे,  

    सपनों की राहों पर चलें हम साथ‑साथ।  

     

    भीगी ज़ुल्फ़ों में चाँदनी मुस्काए,  

    तेरी आँखों में मेरा चेहरा झलक जाए।  

    हर बूँद बने इज़हार‑ए‑मोहब्बत,  

    हर लम्हा कहे — तू ही मेरी राहत।  

     

    संग भींगना अब इबादत सा लगे,  

    तेरे संग हर मौसम जन्नत सा लगे।  

    ओ मेरी जान, ओ मेरी दास्तान,  

    तेरे बिना अधूरा है मेरा अरमान।

     

    बरसात की पहली बूँद जब ज़मीं पर उतरी,  

    तेरी मुस्कान ने मेरी रूह को छू ली।  

    आज दिलों ने किया संग भींगने का क़रार,  

    हर लम्हा बने इश्क़ का इज़हार।  

     

    तेरे होंठों पर ठहरी हँसी की चमक,  

    मेरे दिल में जगाए मोहब्बत की ललक।  

    भीगी राहों पर चलें हम साथ‑साथ,  

    तेरे कदमों से सजें मेरी हर बात।  

     

    बूँदों की सरगम में गूँजे तेरा नाम,  

    तेरी बाहों में मिले मुझे आराम।  

    संग भींगना अब दुआ सा लगे,  

    तेरे संग हर मौसम जन्नत सा लगे।  

     

    ओ मेरी जान, ओ मेरी रूहानी गीत,  

    तेरे बिना अधूरी है मेरी हर प्रीत।  

    चलो आज वादा करें इस बरसात में,  

    संग भींगते रहेंगे हर मुलाक़ात में।

  • जिन्न की दास्तान

    जिन्न की दास्तान

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    चलिए एक जिन्न की कहानी गढ़ते हैं — रहस्यमयी, जादुई और थोड़ी भावनात्मक भी।🌌 जिन्न की कहानी: “नीले धुएँ का रहस्य”पुराने किले की तहख़ाने में एक टूटा हुआ दीया पड़ा था। गाँव के बच्चे अक्सर वहाँ खेलने जाते, लेकिन उस दीये को छूने की हिम्मत किसी ने नहीं की।एक दिन मानव नाम का लड़का जिज्ञासा में दीये को उठाता है। जैसे ही उसने उसे रगड़ा, नीले धुएँ का बादल फैल गया और उसमें से एक जिन्न प्रकट हुआ।जिन्न ने कहा —

    “सदियों से मैं इस दीये में कैद हूँ। जिसने मुझे जगाया है, उसकी एक इच्छा पूरी करना मेरा वचन है।”मानव ने थोड़ी देर सोचा। वह सोना‑चाँदी, ताक़त या अमरता माँग सकता था। लेकिन उसने कहा 

    “मेरी इच्छा है कि हमारे गाँव में कभी कोई भूखा न सोए।”जिन्न मुस्कुराया। उसकी आँखों में चमक थी। उसने हाथ उठाया और आसमान में नीली रोशनी फैल गई। उस दिन से गाँव की ज़मीन इतनी उपजाऊ हो गई कि हर खेत सोने जैसी फसल देने लगा। मानव ने समझा कि असली जादू लालच में नहीं, बल्कि दूसरों की भलाई में है। चलिए इस जिन्न की कहानी को श्रृंखला में आगे बढ़ाते हैं।🌆 जिन्न और खोया हुआ शहर मानव  के गाँव में खुशहाली लौट आई थी। लेकिन जिन्न के दिल में अब भी एक रहस्य छिपा था। उसने मानव  से कहा —

    “मेरी असली ताक़त उस खोए हुए शहर में है, जहाँ से मुझे कैद किया गया था। अगर तुम चाहो तो मेरे साथ चलो।”मानव ने हिम्मत जुटाई और जिन्न के साथ नीले धुएँ की सुरंग से गुज़रा। वे पहुँचे एक वीरान शहर में, जहाँ हर पत्थर पर जादू की छाप थी।लेकिन वहाँ एक शाप भी था —

    “जो भी इस शहर का रहस्य खोलेगा, उसे अपनी सबसे प्यारी चीज़ की क़ुर्बानी देनी होगी।”अब मानव को तय करना था: क्या वह जिन्न को आज़ाद करने के लिए अपनी सबसे प्यारी चीज़ छोड़ देगा, या शहर का रहस्य हमेशा के लिए दफ़न रहेगा?🔮जिन्न का आख़िरी वादा खोए हुए शहर की दीवारों पर पुरानी लिपियाँ चमक रही थीं। जिन्न ने मानव  से कहा —

    “यहाँ मेरी असली ताक़त छिपी है। लेकिन इसे पाने के लिए मुझे अपना आख़िरी वादा निभाना होगा।”मानव ने पूछा —

    “कौन‑सा वादा?”जिन्न ने धीमी आवाज़ में बताया —

    “जब मुझे कैद किया गया था, मैंने कसम खाई थी कि अगर कभी आज़ाद हुआ तो इंसानों की सबसे बड़ी कमजोरी — लालच — को मिटाऊँगा। लेकिन इसके लिए मुझे अपनी जादुई शक्ति छोड़नी होगी।”मानव चौंक गया। अगर जिन्न अपनी शक्ति छोड़ देगा तो वह साधारण हो जाएगा। लेकिन जिन्न मुस्कुराया और बोला —

    “दोस्ती का असली मतलब यही है, कि हम अपनी ताक़त दूसरों की भलाई के लिए कुर्बान करें।”जैसे ही जिन्न ने अपना वादा निभाया, शहर की दीवारें टूट गईं और नीली रोशनी आसमान में फैल गई। जिन्न अब साधारण इंसान बन चुका था, लेकिन उसकी आँखों में सुकून था। मानव ने समझा कि असली जादू दोस्ती और त्याग में है।🔮 जिन्न और दोस्ती का इम्तिहान जिन्न अब साधारण इंसान बन चुका था। मानव और वह गाँव लौटे, लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी थी।गाँव में अचानक एक रहस्यमयी यात्री आया। उसने लोगों को सोने‑चाँदी का लालच दिया और कहा —

    “जो मेरे साथ चलेगा, उसे अमरता मिलेगी।”गाँव के कई लोग उसकी बातों में आ गए। मानव ने जिन्न की ओर देखा। जिन्न ने कहा —

    “यह वही इम्तिहान है जिसका डर मुझे था। इंसानों का लालच हमारी दोस्ती को तोड़ सकता है।”मानव  ने गाँव वालों को समझाने की कोशिश की —

    “अमरता का क्या फ़ायदा, अगर हम अपनी इंसानियत खो दें?”लेकिन यात्री ने चुनौती दी —

    “अगर तुम सच में दोस्त हो, तो साबित करो। जिन्न को मेरे साथ भेज दो, और मैं तुम्हें अमर कर दूँगा।”अब मानव के सामने सबसे कठिन चुनाव था:जिन्न को खो देना और अमरता पाना।या जिन्न को अपने पास रखना और इंसानियत बचाना। मानव ने गहरी साँस ली और कहा —

    “दोस्ती ही मेरी अमरता है। मैं जिन्न को कभी नहीं छोड़ूँगा।”यात्री की जादुई छवि टूट गई। असल में वह शहर का पुराना शाप था, जो लालच के रूप में सामने आया था। मानव और जिन्न ने मिलकर उसे हराया।गाँव वालों ने भी समझा कि असली ताक़त दोस्ती और भरोसे में है।🔮 जिन्न और समय का दरवाज़ा गाँव में शांति लौट आई थी, लेकिन जिन्न और मानव  को एक नई रहस्यमयी गुफ़ा मिली। गुफ़ा के भीतर एक विशाल दरवाज़ा था, जिस पर लिखा था —

    “यह दरवाज़ा अतीत और भविष्य दोनों खोलता है। लेकिन जो इसे खोलेगा, उसे अपने वर्तमान की क़ुर्बानी देनी होगी।”जिन्न ने कहा —

    “अगर हम इसे खोलें, तो हम जान पाएँगे कि मेरी कैद कैसे हुई और तुम्हारा भविष्य कैसा होगा। लेकिन हमें तय करना होगा कि क्या हम अपने आज को खोने का जोखिम उठाएँगे।”मानव  ने दरवाज़े को छुआ। अचानक दृश्य बदल गया।पहले उसने अतीत देखा: जिन्न को लालच और सत्ता के कारण कैद किया गया था।फिर उसने भविष्य देखा: गाँव में एक बड़ा संकट आने वाला है, जिसे रोकने के लिए उन्हें अभी से तैयारी करनी होगी।दरवाज़ा धीरे‑धीरे बंद होने लगा। मानव और जिन्न ने समझा कि समय का असली रहस्य यह है —

    “अतीत से सीखो, भविष्य की चिंता करो, लेकिन सबसे बड़ा जादू वर्तमान में जीना है।”वे दरवाज़े से बाहर निकले और गाँव लौट आए, अब पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत और समझदार।🌪️ जिन्न और गाँव का संकट समय के दरवाज़े से लौटते वक्त मानव  ने भविष्य का संकट देखा था। कुछ ही दिनों बाद वह संकट सच हो गया।गाँव पर भयानक सूखा पड़ा। नदियाँ सूख गईं, खेत बंजर हो गए। लोग घबराने लगे कि अब उनका जीवन कैसे चलेगा।जिन्न ने कहा —

    “मेरे पास अब जादुई ताक़त नहीं है, लेकिन हम सब मिलकर इस संकट को हरा सकते हैं।”मानव और जिन्न ने गाँव वालों को एकजुट किया। उन्होंने मिलकर:पुराने कुओं को फिर से खोला।वर्षा जल को इकट्ठा करने के लिए तालाब बनाए।खेतों में नई तकनीक से खेती शुरू की।गाँव वालों ने समझा कि असली ताक़त जादू में नहीं, बल्कि एकता और मेहनत में है।धीरे‑धीरे बादल लौटे और बारिश हुई। गाँव फिर से हरा‑भरा हो गया। जिन्न ने मुस्कुराकर कहा —

    “अब मैं जानता हूँ कि इंसानियत ही सबसे बड़ा जादू है।”🔮जिन्न और अंतिम रहस्य गाँव में सब कुछ शांत था, लेकिन समय के दरवाज़े से लौटते वक्त जिन्न और मानव ने एक अजीब आवाज़ सुनी। वह आवाज़ कह रही थी —

    “तुमने अतीत देखा, भविष्य जाना, लेकिन असली रहस्य अभी बाकी है।”गुफ़ा की गहराई में एक चमकता हुआ पत्थर था। जिन्न ने उसे पहचान लिया —

    “यह वही पत्थर है, जिसमें मेरी कैद का असली कारण छिपा है।”।जिन्न और मानव ने पत्थर को छुआ। अचानक नीली रोशनी फैल गई और एक आवाज़ गूँजी —

    “जिन्न की असली आज़ादी तभी होगी जब वह अपने दिल की सच्चाई स्वीकार करेगा।”जिन्न ने गहरी साँस ली और कहा —

    “मेरी सच्चाई यह है कि मैं अब जादूगर नहीं रहना चाहता। मैं इंसान बनकर तुम्हारे साथ जीना चाहता हूँ।”पत्थर टूट गया। आसमान में नीली लहरें फैल गईं। जिन्न पूरी तरह आज़ाद हो गया और इंसान के रूप में गाँव का हिस्सा बन गया।गाँव वालों ने उसे अपनाया। पूरी सच्चाई सभी गांव वालों के सामने आई:जिन्न को कैद करने वाले लोग कभी उसके दोस्त हीं थे, लेकिन उन्होंने लालच और डर के कारण उसे धोखा दिया था। पत्थर में यह शाप था कि जब तक कोई इंसान निस्वार्थ भाव से जिन्न का साथ न दे, वह कभी आज़ाद नहीं होगा। मानव ने जिन्न का हाथ थामा और कहा —

    “अब तुम्हें किसी शाप की ज़रूरत नहीं। तुम्हारी आज़ादी मेरी दोस्ती है।”पत्थर टूट गया, नीली रोशनी आसमान में फैल गई। जिन्न पूरी तरह आज़ाद हो गया। लेकिन उसने इंसान बने रहने का फ़ैसला किया, ताकि वह मानव और गाँव वालों के साथ रह सके।गाँव वालों ने देखा कि असली जादू न सोने‑चाँदी में था, न अमरता में — बल्कि दोस्ती, भरोसे और त्याग में।कहानी यहीं पूरी होती है, लेकिन उसका संदेश हमेशा जीवित रहेगा।✨

  • चिता की मिठास

    चिता की मिठास

    पढ़ने का समय : 2 मिनट

    नफ़रत करनी है तो इतनी करो,  

    कि मेरी साँसों की आख़िरी धड़कन भी तुम्हें चैन न दे।  

    मेरी चिता की लपटें जब आसमान छू लें,  

    तब तुम्हारे चूल्हे पर खीर मीठी उबलती रहे। 

     नफ़रत करनी है तो इतनी करो,  

    कि मेरी चिता की ज्वाला में भी तेरी आँखें न भरें।  

    जिस दिन धुआँ उठे मेरे अस्तित्व का,  

    तेरे आँगन में मिठास की खुशबू बिखरें।  

     

    मेरे जाने पर आँसू न बहाना,  

    बस अपने घर में मिठास का दीप जलाना।  

    मेरी राख़ हवा में उड़ जाए,  

    मेरे जाने का ग़म न हो तुझको,  

    बस तेरे चूल्हे पर खीर उबलती रहे।  

    मेरी राख़ हवा में घुल जाए,  

    और तेरी हँसी तेरे घर को सजाती रहे।  

    और तेरे आँगन में हँसी की गूँज समा जाए।  

     

    नफ़रत का रंग इतना गाढ़ा हो,  

    कि मेरी याद भी तेरे दिल को न छू पाए।  

    मैं जलकर राख़ हो जाऊँ,  

    पर तेरे घर में खुशियों की धुन बजती जाए।  

    मेरे नाम का ज़िक्र हो तो,  

    तेरे होंठों पर ताना और ठहाका ही आए।  

    मेरी मौत का दिन तेरे लिए उत्सव बने,  

    जहाँ मिठास का स्वाद हर कोने में समाए।  

     

    नफ़रत करनी है तो इतनी करो,  

    कि मेरी चिता की आग भी तेरे लिए रोशनी बने।  

    मैं बुझ जाऊँ इस दुनिया से, 

     नफ़रत का इज़हार इतना गहरा हो,  

    कि मेरी याद भी तेरे दिल को न छू पाए।  

    मैं बुझ जाऊँ आग में,

    पर तेरी ज़िंदगी में मिठास ही मिठास रहे।

  • कोई कुछ नहीं बोलेगा

    कोई कुछ नहीं बोलेगा

    पढ़ने का समय : 7 मिनट

    शीला प्रिंसिपल मैम के सवाल का जवाब देना चाहती थी। पर वो बोलकर नहीं। ये देखते हुए की कोई कुछ नहीं बोल रहा है ।तो प्रिंसिपल मैम दुबारा फिर से,एक सवाल और दुहराईं….

    ” कहीं तुम लोगों ने मिलकर कमल को, पिट पिट कर बेहोश तो नहीं कर दी हो? सच्चाई क्या है? साफ साफ हमें बताओ तुम सब.”

    प्रिंसिपल मैम ने अपनी ऊंगली चारों लड़कियों के तरफ करतीं हुई आंखों में आंखे डाल कर,आवाज ऊंची करतीं हुई बोली थी।

    जब राधा को लगा कि अब मामला बिगड़ने लगी है। तो उसने अपने आप को ज्यादा देर रोक नहीं पाई और बोल पड़ी…

    ”  ऐसा कुछ भी नहीं है मैम , जो कुछ भी आप सब के सामने है ना मैम।सच्चाई इससे कहीं बहुत अलग है । “

    राधा प्रिंसिपल मैम को देखते हुए बोली थी। और फिर एक बार सभी के नज़र राधा पर आ कर टिक गई थी।

    शीला अपने मन में कुछ सोच रही थी। वो वहां से निकल कर धीरे-धीरे बाहर के तरफ चल दी थी। वो अपने पैर में लगी चोट के कारण ठीक से चल भी नहीं पा रही थी। वो चलते हुए लंगड़ा कर चल रही थी। शीला पर कुछ लोगों को छोड़कर बाकी किसी की भी नजर नहीं थी। सभी लोगों का ध्यान कमल और उसके आसपास खड़ी लड़कीयों के उपर ही था। किसी ने भी शीला के उपर ज्यादा ध्यान नहीं दिया था। वो लंगड़ाते हुए मीटिंग हॉल से बाहर निकल गई थी। चांदनी प्रिंसिपल मैम के पास जाती है। और उनके आंखों में आंखें डाल कर धीरे से बोलतीं है ।

    ”  कमल बहुत ही घटिया लड़का है। इसके व्यवहार लड़कीयों के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है।”

     चांदनी बात आगे बढ़ाते हुए बोली।

    ” इस ने राधा और रूपा के साथ बहुत हीं घटिया सलूक किया है।”

    जब रूपा देखी की चांदनी बात खोल दी है। तो वो भी बीच में कुद पड़ी, एक जोरदार लात कमल के कमर के पास मारी। लात लगने से कमल का शरीर हिल कर रह जाता है। यह देखकर कि रूपा ने कमल को लात मारी है। तो कुछ लोग आगे आते हैं,और रूपा को पकड़ कर साइड में कर देते हैं। रूपा का शरीर गुस्से से उबल रही थी। वो सभी को खा जाने वाली नज़रों से देख रही थी। उसके माथे पसीने से भीग गई थी। जब चांदनी प्रिंसिपल मैम से ये बात बोलीं थी। तो प्रिंसिपल मैम भी यह बात सुनकर दंग रह गईं थीं।

    और वो चांदनी के तरफ आश्चर्य से देखती हुई बोली।

    ” क्या हुआ है राधा और रूपा के साथ?बेटा तुम मुझे पुरी बात सच सच बताओ। कोई भी व्यक्ति हमारे कालेज के रूल रेगुलेशन को तोड़े,ये सब मैं बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर सकती हूं।”

    प्रिंसिपल मैम कड़क अंदाज में चांदनी के तरफ देखते हुए बोली थी।

    चांदनी बोली।

    ” मैं सच कह रही हूं मैम,कमल ने राधा और रूपा पर बहुत अत्याचार किया है।उन दोनों को रस्सियों से बांध कर पिटा है। बहुत बदसलूकी की है। उसके साथ  रेप करने की कोशिश किया है।” बोलते बोलते चांदनी के आंखों से आंसू बहने लगती है।

    प्रिंसिपल मैम अपने चेयर से उठ कर चांदनी के बहते आंसुओं को पोंछती है। और चांदनी को अपने गले से लगा लेती है। और बोलतीं हैं।

    ” अगर तुम्हारी बातों में सच्चाई है। तो मैं इसे छोड़ूंगी नहीं, इसे  सजा दिलवा कर रहूंगी।”

    और मुड़ कर प्रोफेसर दयानंद को आदेश देते हुए बोलती हैं।

    ” प्रोफेसर दयानंद जी। आप डाक्टर को फोन लगाइए, वो आकर कमल का चेक अप करे मामला बेहद संवेदनशील है।”

     प्रोफेसर दयानंद हड़बड़ाकर जल्दी से उठते हुए बोलता है।

    ” जी मैडम जी,अभी काल करके बात कर रहा हूं। 

    प्रिंसिपल मैम बोली।

    ” हां थोड़ा जल्दी किजिए, बच्चों के जिंदगी का सवाल है।”

    प्रोफेसर दयानंद अपने जेब में से अपना मोबाइल निकाल कर एक नम्बर डायल करता है। रिंगटोन बजने के बाद काल रिसीव होता है। प्रोफेसर दयानंद फोन पर बात करते हुए बोलता है।

    ” हैलो,हां जी डाक्टर शर्मा जी। आप कृपया करके जल्दी से कालेज में आ जाइए। यहां पर एक बच्चे की हालत गंभीर है।”

    फोन पर दूसरी तरफ से आवाज आती है।

    हैलो, प्रोफेसर दयानंद जी। हाउ आर यू क्या हुआ है? अच्छा ठीक है। मैं अभी निकलता हूं कालेज के लिए ,बस मैं जल्दी पहुंच हीं रहा हूं। आप मेरा इंतजार किजिए।”

    बोलकर डाक्टर शर्मा ने फोन कट कर दिया था।

    वहां मौजूद कुछ स्टूडेंट्स जो कमल के दोस्त थे। वो बिल्कुल भी मानने के लिए तैयार नहीं था कि कमल कभी भी यह घटिया हरकत कर सकता है। उसे लग रहा था कि, जरूर यह सब लड़कियां मिलकर कमल के साथ कोई साजिश कर रही है। उसको झूठ मूठ के जाल में फंसा रही है। एक लड़का जिसका नाम गोविंद था। वो जोर से बोल पड़ता है।

    ” नहीं यह सब झूठ है। मैं नहीं मानता इस तरह के बातों को, कमल कभी भी ऐसा घटिया हरकत कर हीं नहीं सकता है। मैं कमल को अच्छी तरह जानता हूं।”

    यह देखकर एक लड़का और उसके सपोर्ट में खड़ा हुआ और बोला।

    ” ये इन लड़कियों की साज़िश है। ये कमल को फसाना चाहतीं हैं। क्यों की कमल पैसे वाला है।”

     वह लड़का पूरी ताकत से चिल्लाकर बोल रहा था। इसका नाम विशाल है।

    ” विशाल ये तुम कैसी बातें कर रहे हो। कमल एक नंबर का कुत्ता कमीना घटिया इंसान है। वो राधा दीदी को बालात्कार करने वाला था। मेरी आंखों के सामने,सही टाइम पर आकर शीला दीदी और चांदनी दीदी ने उस राक्षस से राधा दीदी को बचा लिया। नहीं तो ये रेपिस्ट ना जाने क्या क्या करता हम दोनों के साथ।”

    रुपा विशाल को नफ़रत भरी नजरों से देखते हुए जोर से बोली थी।

    ” झूठ, तुम झूठ बोल रही हो। बहाना बना रही हो। तुम सब ने मिलकर कमल को मार मारकर बेहोश कर दी हो। अब सजा से बचने केलिए बहाने बना रही हो ।”

     विशाल रूपा के तरफ देखते हुए,वह भी ज़ोर से चीखते हुए बोल रहा था।

    ” सट अप, शांत हो जाओ तुम सब। कोई कुछ नहीं बोलेगा।”

    प्रिंसिपल मैम सभी को डांटते हुए जोर से बोली थी। सुनकर सभी लोग चुप हो गए थे। प्रिंसिपल मैम के आवाज बिना माइक के हीं पुरे मीटिंग हाल में गुंज रही थी। 

    इधर शीला मीटिंग हॉल में से बाहर निकल कर कॉलेज के दो नंबर गेट वाले रास्ते में लंगड़ाती हुई चली जा रही थी। बाहर तेज धूप निकली हुई थी। हल्की हल्की ठंडी हवा बह रही थी। जिससे शीला थोड़ा राहत महसूस कर रही थी। रास्ते के साइडों में हरे भरे पेड़ पौधे लगाए गए थे। जिससे रास्ते में कहीं कहीं छाया भी हो रही थी। शीला चलती हुई कॉलेज के दो नंबर गेट से बाहर निकल कर मार्केट वाले रास्ते में चलने लगती है। चलते चलते एक शॉप से पानी की बोतल खरीद कर आगे बढ़ गई थी। थोड़ी देर आगे चलने के बाद शीला को एक मेडिकल स्टोर दिखाई पड़ती है। शीला उसमें चली जाती है। शीला मेडिकल स्टोर के अंदर आ गई थी। अंदर आकर वो काउंटर पर बैठे आदमी के तरफ देखते हुए बोलती है।

    ” नमस्ते अंकल “

    सुनकर शीला के जवाब में वो आदमी भी बोलते हैं।

    ” नमस्ते बेटा , बोलिए बेटा क्या चाहिए आपको?”

    शीला के तरफ देखते हुए दुकान दार मुस्कुराते हुए बोला था।

    शीला अपनी पानी की बोतल काउंटर पर रख देती है।

    ” अंकल जी, मेरे फ्रेंड को न चोट लग गई है। और वो बेहोश है।ऐसी कोई मेडिसिन है। जिससे वो जल्दी से होश में आ जाए और वह ठीक हो जाए।”

    शीला दुकानदार को उनके तरफ देखते हुए बोली थी।

    ” हां ठीक है, मैं आपको एक दवाई दे रहा हूं। जिसको पिलाने से वो होश में भी आ जायेगा। और उसके बॉडी के अंदर बूस्टर का भी काम करेगा।..”

    शीला को इतना बोलकर वो दुकानदार अंकल अपने जगह से उठ कर दूसरे साइड दवाई लेने चला जाता है। शीला वहीं खड़ी होती है।

    तभी अजय दुकान में दाखिल होता है। और वो भी काउंटर पर आकर खड़ा होता है।उसका ध्यान अभी शीला पर नहीं गया था। वो डोर ओपन करके अंदर आ गया था। लेकिन उसका नजर शीला के लिए दवाई लेने जा रहे दुकानदार अंकल पर हीं था।

    आगे की कहानी पढ़िए कहानी के अगले भाग में……….. प्यार एक एहसास, नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड पर……..

  • बातों का विश्वास

    बातों का विश्वास

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    शीला कमल को मार मारकर उसे बेहोशी की दुनिया में पहुंचा दिया था। कमल के बेहोश होने के बाद भी शीला के लात रुक नहीं रही थी।‌‌ लगातार लातों की बारिश कर रही थी। गुस्से से शीला के चेहरे पसीने में भीग गया था। पिछे से शीला के कंधे पर दो हाथ पड़ने के आभास होता है। और शीला की तंद्रा भंग होती है। वो पिछे मुड़कर देखतीं हैं। रूपा और राधा उसकी कंधों को धिरे से सहला रही थी। दोनों के चेहरे पर एक खुशी झलक रही थी। और दोनों मुस्कुरा रही थी। वो दोनों अपने दीदी के कमल पर हुई जीत पर प्राउड फील कर रही थी।‌‌

     ” दीदी आप शांत हो जाइए,आप को चोट लगी है।”

    चांदनी धिरे धिरे शीला के तरफ बढ़ते हुए कैजुअली अंदाज में बोली थी।

    ” हां दीदी, अब तो आप हम लोगों पर छोड़ दिजिए। हम देख लेंगे की क्या करना है। इस कमिने के साथ।”

    राधा कमल के तरफ इशारा करते हुए बोली थी।

    ” अब हमें कमल को लेकर प्रिंसिपल मैम के पास चलना चाहिए।”

    रुपा अपने कमर पर हाथ रख कर मुस्कुराती हुई बोल रही थी।

    राधा चांदनी और शीला एक साथ बोलती है।

    ” हां ठीक है चलो चलते हैं।”

    कमल को होश तो था नहीं, जो वो चलकर जाता। तो अब उसे लेकर जाने की जिम्मेदारी,इन चारों सहेलियों के कंधे पर थी । चारों सहेलियों ने कमल के एक एक पैर और एक एक हाथ पकड़ कर उठाई और चल दी थी।

    इधर मीटिंग हाल में कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव पर कालेज में फंक्शन की तैयारी करने को लेकर प्रिंसिपल स्टूडेंट प्रोफेसर के बीच बाद संवाद चल रही थी। सभी प्रोफेसर अपने स्टूडेंट को भगवान श्री कृष्ण के जीवन के बारे में तो उनके द्वारा किए गए लीला के बारे में अपने स्टूडेंट के सामने ब्यख्यान कर रहे थे।

    जब प्रोफेसर शुक्ला अपनी बात स्टूडेंट के सामने रख रहे थे। तब एक स्टूडेंट अपने कुर्सी से उठ कर प्रोफेसर शुक्ला से एक सवाल किया।

    दरअसल इस शवाल का जवाब उस स्टूडेंट के साथ साथ आप हम और उस मीटिंग हाल में मौजूद सभी लोगों को चाहिए था। वो लड़का अपनी चेयर से उठा और वो प्रोफेसर शुक्ला को बीच में रोकते हुए बोला।

    ” माफ़ किजियेगा सर, मैं आपको बीच में रोक रहा हूं। सर मैं जानना चाहता हूं। कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव तो हम हमारे कालेज में हर साल मनाते आ रहे हैं। तो फिर हमें इस बार और पहली बार मनाया जाएगा, ऐसा क्यों बताया जा रहा है?”

    उस लड़के ने साफ शब्दों में अपनी बात प्रोफेसर शुक्ला के सामने रख दिया था। उस लड़के की आवाज जब वहां मौजूद सभी लोगों के कानों में जाते हैं। तो सभी के ध्यान उस लड़के पर टिक जाती है। जब ये सवाल उठ हीं गई है तो इसका जवाब जानने कि कोशिश में कुछ लोग और आगे आते हैं। एक लड़की अपनी चेयर से उठ कर बोलती है।

    ” हां सर, हम लोग तो श्री कृष्ण जन्मोत्सव हर साल मनाते हैं। और कॉलेज में अवार्ड फंक्शन का भी आयोजन किया जाता है। तो फिर ये क्यों?”

    उस लड़की ने भी अपने तरफ से एक सवाल पूछ लिया था।इन सवालों के जवाब स्टूडेंट को प्रोफेसर शुक्ला देने वाले हीं थे। कि सभी की नजर मीटिंग हाल के दरवाजे पर पहुंच जाती है।देख कर सभी शौक हो जातें हैं। मीटिंग हाल के माहौल अब बदलने वाला था। जहां तक बदल ही गया था। शीला कमल चांदनी राधा रुपा को देख कर सभी स्तब्ध रह गए थे। सन्नाटा पसर गया था। एक साथ सभी लोगों के जुवान बंद हो गया था। कोई कुछ भी नहीं बोल रहे थे। सभी सीर्फ एक टक उन पांचों को देख रहे थे। अब कोई आगे आकर वेलकम तो करने वाले थे नहीं, तो चारों सहेलियों ने खुद आगे बढ़कर अंदर आने लगी थी। शीला और चांदनी कमल के एक एक हाथ पकड़ कर टांगी हुई थी तो राधा और रूपा एक एक टांग सभी चलकर स्टेज के सामने आकर खड़ी हुई थी।

    खामोशी को भंग करते हुए एक छात्रा इन सभी को देख कर बोली थी।

    ” क्या हुआ है इसे, यह बेहोश क्यों है?”

     उस छात्रा ने अपनी उंगली से कमल को प्वाइंट आऊट करते हुए बोली थी। बीच में से एक और छात्र का आवाज गुंजा।

    ” तुम लोग कमल को ऐसे टांग कर क्यों लाई हो? क्या हुआ है इसके साथ, क्या ये एक्सीडेंट किया है?” 

    उस छात्र ने चारों सहेलियों से सवाल किया था।

    इस सवाल का जवाब आप हम, और ये चारों सहेलियां जानते हैं। लेकिन यहां मीटिंग हाल में मौजूद सभी लोग नहीं जानते थे। अब एक बात और है कि क्या यह सहेलियां जो भी बात बोलेगी क्या वहां मौजूद सभी लोग क्या इनके बात का विश्वास करेंगे? अगर नहीं, तो फिर उसके लिए क्या करना पड़ेगा। वही करने के लिए शीला अपने मन में कुछ सोच कर अपने कदम आगे बढ़ा चुकी थी। सभी कमल को फर्श पर लिटा कर वहीं एक तरफ खड़े हो जाते हैं। अगर कमल की सच्चाई सबके सामने उजागर करना है। तो उसे सबसे पहले होश में लाना होगा, शीला मन-ही-मन ये सोच रही थी। बिना उसको होश में लायें या बिना उसके मुंह से उसके बातों को कोई नहीं मानेगा क्यों मानेगा कैसे मानेगा कोई नहीं मानेगा। हम भी नहीं मानेंगे और आप तो मान हीं नहीं सकते हैं। क्यों की कमल अभी भी बेहोश पड़ा था। चोट उसको लगा था। अब अगर ये चारों सहेलियां बोलेगी की कमल ने उसे परेशान किया है तो इस बात को प्रमाणित भी करना होगा। जो कि कमल के बेहोश रहते संभव नहीं था। यह सीन देख कर प्रोफेसर और प्रिंसिपल मैम भी आश्चर्य चकित रह गए थे।

    प्रिंसिपल मैम इन चारों को देख कर बोलतीं हैं।

    ” शीला चांदनी राधा रूपा क्या है ये सब? तुम सब मिलकर कमल के साथ क्या की हो?”

     थोड़ा रुक कर प्रिंसिपल मैम फिर बोलना शुरू करतीं हैं।

    ” ये बेहोश क्यों हो गया है? सब कुछ सही सही बताओ तुम सब।”

    प्रिंसिपल मैम अपने चेयर पर बैठी हुई हीं इन चारों से सवाल की थीं। शीला प्रिंसिपल मैम को उनके सवाल का जवाब देना चाहती थी। डर इस बात का था कि उसके बात का कोई विश्वास नहीं करेगा।  यही कारण था कि वो कुछ बोलने से बच रही थी। अब प्रिंसिपल मैम उससे सीधा सवाल कर ली थी। तो अब वो चुप कैसे रह सकती थी। 

    क्या होगा जब कमल को होश आयेगा? ये चारों सहेलियां कब तक चुप रहेगी? क्या कमल को होश आयेगा? जब कमल की सच्चाई सभी के सामने आयेगा फिर क्या होगा? इन सभी सवालों के जानने के लिए पढ़ें कहानी का अगला भाग ….. प्यार एक अहसास , कहानी अजय शीला की नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड पर……

     

     

  • ग्रुप कॉल

    ग्रुप कॉल

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    सभी अपने अपने दिशा में कमल को ढूंढने  चल पड़े हैं। चांदनी और राधा अलग अलग दिशा में और रूपा वापस शीला के तरफ चल देती है।उदेस्य तीनो चारों सहेलियों का वही एक कमल को पकड़ कर उसके किये की उसे सजा दिलवाना…

    इधर कमल जो छुप कर सभी पर नजर बनाये हुए था। जब उसे लगा सभी लोग उससे दुर जा चुके हैं। तब उसने राहत की सांस लिया और सोचते हुए बाहर निकल गया,की अब वो दुसरे रास्ते से कॉलेज से बाहर निकल जायेगा। और ये सभी लडकियां कॉलेज में उसे ढूंढती हीं रह जायेगी। कमल अपने मन में यही सब बातें सोचते हुए बाहर निकला और सड़क पर चलने लगा। चलते चलते उसने देखा की एक लड़की सड़क के किनारे बैठी, अपनी पैर पकड़े सर झुकाए अपने पैरों के साथ कुछ कर रही थी। वो लड़की शीला थी शीला को दुसरी साईड घूमी होने के कारण कमल उसे पहचान नहीं पाया था। शीला भी अपना सर नीचे कर के अपने पैर में लगी चोट को मालिश कर ठिक करने की कोशिश कर रही थी। उसकी नजर निचे की तरफ झुकी होने के वजह से उसने भी कमल को नहीं देख पायी थी। कमल भी कोई होगी सोचकर उसे आगे निकल गया था ।जैसे हीं कमल कुछ दूर गया था। कि उसके कानों में सर सराती हुई एक तेज तरार आवाज आकर पड़ी।

    ” वहीं रूक जाओ कमल भागने की बिल्कुल भी कोशिश मत कर ना”

    शीला अपने हांथ से घुटनो का सहारा से उठकर खड़ी होती हुई बोली थी।

    कमल एक दम से चौंका गया और उसके कदम रूक गया वो मुड़ कर आश्चर्य से पिछे देखा उसे शीला दिखी जो उसको अपनी बड़ी बड़ी आंखो से उसके तरफ गुस्से से देख रही थी। कमल शीला को नीचे से उपर तक गौड़ से देखता है। उसे ऐहसास हो जाता है की शीला को चोट लगी है। वो अकेली उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकती है।

    ” हां हां नही भाग रहा हूं मैं,आजा ..देखता हूं क्या कर लेती है मेरा “

    कमल जोर से बोला था।

    ” कमीने मैं तेरा खून पी जाऊंगी।”

    शीला चीख कर जोर से कमल के तरफ बढ़ते हुए बोली थी।

    शीला के पैर के चोट के दर्द बढ़ गयी थी। वो चलते हुए लंगरा भी रही थी। यह देखकर कमल का हौसला और बढ़ गया था।

    ” ख़ून पी जायेगी हा हा हा हा हा “

    बोल कर कमल जोर से हंसा

    ” कुत्ते भागकर तुने अपने लिये और ज्यादा प्रोबलम खड़ी कर लिया है।”

     कमल को देखते हुए शीला दांत पीसकर जोर से बोली थी। शीला चलते हुए लंगरा रही थी ।धिरे धिरे शीला लंगड़ाती हुई कमल के सामने पहुंच जाती है। दोनो के बीच में बहस जारी रहती है। दूर से रूपा शीला और कमल को देख लेती है। वो अपने जेब से मोबाईल निकाल ती है। और अपने फोन में कुछ  टाईप करने लगती है। और ग्रुप कॉल लगा देती है। रींग होने लगती है।

    इधर राधा चलते हुए रास्ते के दोनो साईड नजर घुमा घुमा के देखते हुए आगे के तरफ बढ़ती रहती है।तभी राधा के फोन बजने लगती है।राधा अपनी जेब से मोबाईल बाहर निकालती है। राधा फोन के स्क्रीन में देखती है। जिसमें ग्रुप कॉल आ रही होती है। राधा अंसर बटन पर क्लीक कर के मोबाईल कान में सटा लेती है।

    उधर चांदनी भी कॉल उठा लेती है।जब कॉल रिसीव हो जाती है। तब रूपा जल्दी से जोर से बोलती है।

    ” आप लोग सुन रही हो ना दीदी “

    दूसरी तरफ से आवाज आई जो चांदनी की थी।

    ” हां सुन रही हूं। रूपा बोलो…”

     फिर राधा की भी आवाज आई

    ” क्या हुआ रूपा तुम कहां पर हो बोलो..”

    जबाव देते हुए रूपा बोली

    ” शीला दीदी ने कमल को पकड़ लिया है।आप लोग जल्दी से पहुंचिए।”

    ” ठीक है तुम दीदी के पास पहुंचो मैं भी जल्दी हीं आ रही हूं।”

    चांदनी बोलकर फोन कट कर देती है।

    ” रूपा हम लोग दूर हैं। थोड़ी देर लग सकती है। तुम तेजी से दीदी के पास पहुंचो दीदी को चोट लगी है। ध्यान रखना कमल दीदी को कुछ नुकसान ना पहुंचाए।”

    राधा बोलते हुए घबरा रही थी। उसे शीला की चिन्ता हो रही थी।

    ” ठीक है दीदी मैं जा रही हूं। जल्दी से आईए आप लोग “

    रूपा भी बोलकर फोन काट दी थी।

    फोन काट कर रूपा शीला के तरफ बढ़ने लगती है।  शीला हिम्मत से आगे बढ़कर कमल के कॉलर पकर लेती है।

    ” तेरी इतनी हिम्मत की तुम मेरा कॉलर पकड़ेगी।”

    कमल शीला को जोर से झापड़ मारते हुए चीख कर बोला था ‌।

    शीला थप्पड़ खा कर हिल गयी थी। थप्पड़ लगने के कारण शीला का कमल के कॉलर से पकड़ कमजोर हो गई थी।

    कमल शीला के हांथ को अपने कॉलर से हटाया और हांथ को मरोड़ा जिससे शीला पिछे मुड़ गयी थी। हांथ मुड़ने से शीला को दर्द भी हुआ था। कमल शीला का हांथ मरोड़ कर उसके पीठ पर मुक्का से वार किया था। मुक्के की चोट से शीला को दर्द तो हुआ था। पर अगले हीं पल शीला कमल के हांथ से अपना हांथ झटके से छुड़ाई और सम्भल कर कमल के पेट में एक जोर दार मुक्के से अटैक किया,कमल दर्द के मारे पेट पकड़ लिया था। शीला यहीं नहीं रूकी उसने फुर्ती से कमल के टांग पर वार किया। वो लगातार पांच छह लात लगातार कमल के पैर पर मारी थी। कमल दर्द से छट पटा गया था। वह फिर से क्लास रूम वाला सिच्युशन में चला गया था। वो उम्मीद नही किया था कि, एक अकेली शीला उस पर भारी पड़ जायेगी। वो भी चोट खाई हुई। वो पेट पकड़ कर घुटने के बल बैठ गया था। जैसे हीं कमल बैठा था। की शीला की लात ने उसके गाल पर भार दिया। गाल पर लात पड़ने के वजह से कमल बगल के तरफ उलट गया था। अब जब कमल जमीन पर गीर हीं गया था। तो शीला भी कहां चुकने वाली थी। चल पड़ी अपनी लात दर लात की बरसात करने वो भुल गयी थी की, उसकी पैर में चोट भी लगी है । वो लगातार लात से वार करती रही  कमल पर कभी उसकी लात कमल के पेट तो कभी कमर कभी गर्दन पर लगती थी । शीला हर लात के साथ बस यही बोलती थी।

     ” ये ले कमीने,ये ले कुत्ते, ये ले हरामी।”

    शीला अपनी सारी दर्द भुल कर कमल को मारे जा रही थी।

    मार खा खा के कमल के शरीर से होश गायब हो गया था। मतलब वो बेहोश हो गया था। शीला ये जाने बीना कमल को बीना साबुन के ही धुलाई किये जा रही थी। बे खबर शीला कमल को मारे जा रही थी। पढिए अगले भाग में……प्यार एक अहसास कहानी अजय शीला की……..

  • जुड़ शीतल की मधुर छांव

    जुड़ शीतल की मधुर छांव

    पढ़ने का समय : 2 मिनट

    जुड़ शीतल आई है लेकर,

    ठंडी हवाओं का संदेश,

    धूप की तपिश से थके मन को,

    देती है सुकून विशेष।

    सुबह-सुबह जब सूरज झांके,

    नव किरणों का हो आगमन,

    ठंडे जल की कोमल बूंदें,

    कर दें मन का हर स्पंदन।

    आम के पत्तों से टपके जल,

    हर आंगन को हरियाली दे,

    स्नेह भरे उस ठंडे छींटे से,

    रिश्तों में फिर खुशहाली दे।

    मां के हाथों का वो पानी,

    जब सिर पर हल्के से गिरता है,

    जैसे हर दुख, हर चिंता को,

    धीरे-धीरे वो हरता है।

    बाबा की ममता, दादी की सीख,

    सबमें बसती ठंडी छांव,

    हर बूंद में आशीष समाई,

    हर दिल में जगती नई चाह।

    छोटे-बड़े सब साथ मिलें,

    हंसी-खुशी का मेला हो,

    जुड़ शीतल के इस पर्व में,

    हर दिल में प्रेम का रेला हो।

    मिट्टी की खुशबू भी कहती,

    अब तो मौसम बदला है,

    शीतलता के इस उत्सव में,

    जीवन ने रंग नया भरा है।

    ना कोई गिला, ना कोई शिकवा,

    बस अपनापन का एहसास,

    जुड़ शीतल सिखा जाती है,

    ठंडक में छुपा है विश्वास।

    धरती भी जैसे मुस्काए,

    जब जल से उसका तन भीगे,

    हर बूंद में छुपा आशीष,

    जीवन को नव रंगों से सींचे।

    खेतों में हरियाली लहराए,

    नदियों में मधुर संगीत बहे,

    हर जन-मन में शांति बस जाए,

    जीवन के हर पल रंग सहे।

    सांझ ढले जब दीप जलें,

    मन में मधुर उजियारा हो,

    दिन भर की उस ठंडी छाया का,

    हर चेहरे पर नज़ारा हो।

    पुरखों की ये प्यारी परंपरा,

    आज भी दिलों में बसती है,

    हर साल ये आकर हमको,

    अपनों से फिर जोड़ती है।

    नव जीवन का संदेश लिए,

    हर दुख को पीछे छोड़ती है,

    जुड़ शीतल की हर एक बूँद,

    मन की थकान को तोड़ती है।

    जुड़ शीतल का ये त्यौहार,

    सिर्फ रिवाज नहीं, एक भावना है,

    प्यार, स्नेह और शांति का,

    हर दिल में बसता खजाना है।

    चलो मिलकर इसे मनाएं,

    मन में प्रेम का दीप जलाएं,

    ठंडे जल की हर एक बूँद से,

    जीवन को सुंदर बनाएं। 🌿💧

  • तूं मेरी दुआओं का असर है।

    तूं मेरी दुआओं का असर है।

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    तेरे बिना ये दिल अधूरा सा लगता है,  

    तेरी मुस्कान में ही मेरा जहाँ बसता है।  

    तेरी आँखों में जो चमक है, वो मेरी रौशनी है,  

    तेरे नाम से ही मेरी हर धड़कन जीती है।  

     

    तू पास हो तो हर लम्हा ख़ास बन जाता है,  

    तेरी यादों से ही मेरा हर दिन सज जाता है।  

    इज़हार-ए-मोहब्बत लफ़्ज़ों में कैसे करूँ,  

    दिल की आवाज़ है तू… और तू ही मेरी दास्ताँ है।

     

    तेरे बिना ये रूह भी अधूरी लगती है,  

    तेरी यादों से ही मेरी साँसें पूरी लगती हैं।  

    तेरी आँखों में जो समंदर है, उसमें मैं खो जाना चाहता हूँ,  

    तेरे होंठों की खामोशी में अपना नाम सुनना चाहता हूँ।  

     

    मोहब्बत का इज़हार लफ़्ज़ों से नहीं होता,  

    ये तो दिल की धड़कनों से बयान होता है।  

    तू मेरी दुआओं का वो असर है,  

    जिसे पाने के बाद भी मैं हर रोज़ तुझे माँगता हूँ।