सभी अपने अपने दिशा में कमल को ढूंढने चल पड़े हैं। चांदनी और राधा अलग अलग दिशा में और रूपा वापस शीला के तरफ चल देती है।उदेस्य तीनो चारों सहेलियों का वही एक कमल को पकड़ कर उसके किये की उसे सजा दिलवाना…
इधर कमल जो छुप कर सभी पर नजर बनाये हुए था। जब उसे लगा सभी लोग उससे दुर जा चुके हैं। तब उसने राहत की सांस लिया और सोचते हुए बाहर निकल गया,की अब वो दुसरे रास्ते से कॉलेज से बाहर निकल जायेगा। और ये सभी लडकियां कॉलेज में उसे ढूंढती हीं रह जायेगी। कमल अपने मन में यही सब बातें सोचते हुए बाहर निकला और सड़क पर चलने लगा। चलते चलते उसने देखा की एक लड़की सड़क के किनारे बैठी, अपनी पैर पकड़े सर झुकाए अपने पैरों के साथ कुछ कर रही थी। वो लड़की शीला थी शीला को दुसरी साईड घूमी होने के कारण कमल उसे पहचान नहीं पाया था। शीला भी अपना सर नीचे कर के अपने पैर में लगी चोट को मालिश कर ठिक करने की कोशिश कर रही थी। उसकी नजर निचे की तरफ झुकी होने के वजह से उसने भी कमल को नहीं देख पायी थी। कमल भी कोई होगी सोचकर उसे आगे निकल गया था ।जैसे हीं कमल कुछ दूर गया था। कि उसके कानों में सर सराती हुई एक तेज तरार आवाज आकर पड़ी।
” वहीं रूक जाओ कमल भागने की बिल्कुल भी कोशिश मत कर ना”
शीला अपने हांथ से घुटनो का सहारा से उठकर खड़ी होती हुई बोली थी।
कमल एक दम से चौंका गया और उसके कदम रूक गया वो मुड़ कर आश्चर्य से पिछे देखा उसे शीला दिखी जो उसको अपनी बड़ी बड़ी आंखो से उसके तरफ गुस्से से देख रही थी। कमल शीला को नीचे से उपर तक गौड़ से देखता है। उसे ऐहसास हो जाता है की शीला को चोट लगी है। वो अकेली उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकती है।
” हां हां नही भाग रहा हूं मैं,आजा ..देखता हूं क्या कर लेती है मेरा “
कमल जोर से बोला था।
” कमीने मैं तेरा खून पी जाऊंगी।”
शीला चीख कर जोर से कमल के तरफ बढ़ते हुए बोली थी।
शीला के पैर के चोट के दर्द बढ़ गयी थी। वो चलते हुए लंगरा भी रही थी। यह देखकर कमल का हौसला और बढ़ गया था।
” ख़ून पी जायेगी हा हा हा हा हा “
बोल कर कमल जोर से हंसा
” कुत्ते भागकर तुने अपने लिये और ज्यादा प्रोबलम खड़ी कर लिया है।”
कमल को देखते हुए शीला दांत पीसकर जोर से बोली थी। शीला चलते हुए लंगरा रही थी ।धिरे धिरे शीला लंगड़ाती हुई कमल के सामने पहुंच जाती है। दोनो के बीच में बहस जारी रहती है। दूर से रूपा शीला और कमल को देख लेती है। वो अपने जेब से मोबाईल निकाल ती है। और अपने फोन में कुछ टाईप करने लगती है। और ग्रुप कॉल लगा देती है। रींग होने लगती है।
इधर राधा चलते हुए रास्ते के दोनो साईड नजर घुमा घुमा के देखते हुए आगे के तरफ बढ़ती रहती है।तभी राधा के फोन बजने लगती है।राधा अपनी जेब से मोबाईल बाहर निकालती है। राधा फोन के स्क्रीन में देखती है। जिसमें ग्रुप कॉल आ रही होती है। राधा अंसर बटन पर क्लीक कर के मोबाईल कान में सटा लेती है।
उधर चांदनी भी कॉल उठा लेती है।जब कॉल रिसीव हो जाती है। तब रूपा जल्दी से जोर से बोलती है।
” आप लोग सुन रही हो ना दीदी “
दूसरी तरफ से आवाज आई जो चांदनी की थी।
” हां सुन रही हूं। रूपा बोलो…”
फिर राधा की भी आवाज आई
” क्या हुआ रूपा तुम कहां पर हो बोलो..”
जबाव देते हुए रूपा बोली
” शीला दीदी ने कमल को पकड़ लिया है।आप लोग जल्दी से पहुंचिए।”
” ठीक है तुम दीदी के पास पहुंचो मैं भी जल्दी हीं आ रही हूं।”
चांदनी बोलकर फोन कट कर देती है।
” रूपा हम लोग दूर हैं। थोड़ी देर लग सकती है। तुम तेजी से दीदी के पास पहुंचो दीदी को चोट लगी है। ध्यान रखना कमल दीदी को कुछ नुकसान ना पहुंचाए।”
राधा बोलते हुए घबरा रही थी। उसे शीला की चिन्ता हो रही थी।
” ठीक है दीदी मैं जा रही हूं। जल्दी से आईए आप लोग “
रूपा भी बोलकर फोन काट दी थी।
फोन काट कर रूपा शीला के तरफ बढ़ने लगती है। शीला हिम्मत से आगे बढ़कर कमल के कॉलर पकर लेती है।
” तेरी इतनी हिम्मत की तुम मेरा कॉलर पकड़ेगी।”
कमल शीला को जोर से झापड़ मारते हुए चीख कर बोला था ।
शीला थप्पड़ खा कर हिल गयी थी। थप्पड़ लगने के कारण शीला का कमल के कॉलर से पकड़ कमजोर हो गई थी।
कमल शीला के हांथ को अपने कॉलर से हटाया और हांथ को मरोड़ा जिससे शीला पिछे मुड़ गयी थी। हांथ मुड़ने से शीला को दर्द भी हुआ था। कमल शीला का हांथ मरोड़ कर उसके पीठ पर मुक्का से वार किया था। मुक्के की चोट से शीला को दर्द तो हुआ था। पर अगले हीं पल शीला कमल के हांथ से अपना हांथ झटके से छुड़ाई और सम्भल कर कमल के पेट में एक जोर दार मुक्के से अटैक किया,कमल दर्द के मारे पेट पकड़ लिया था। शीला यहीं नहीं रूकी उसने फुर्ती से कमल के टांग पर वार किया। वो लगातार पांच छह लात लगातार कमल के पैर पर मारी थी। कमल दर्द से छट पटा गया था। वह फिर से क्लास रूम वाला सिच्युशन में चला गया था। वो उम्मीद नही किया था कि, एक अकेली शीला उस पर भारी पड़ जायेगी। वो भी चोट खाई हुई। वो पेट पकड़ कर घुटने के बल बैठ गया था। जैसे हीं कमल बैठा था। की शीला की लात ने उसके गाल पर भार दिया। गाल पर लात पड़ने के वजह से कमल बगल के तरफ उलट गया था। अब जब कमल जमीन पर गीर हीं गया था। तो शीला भी कहां चुकने वाली थी। चल पड़ी अपनी लात दर लात की बरसात करने वो भुल गयी थी की, उसकी पैर में चोट भी लगी है । वो लगातार लात से वार करती रही कमल पर कभी उसकी लात कमल के पेट तो कभी कमर कभी गर्दन पर लगती थी । शीला हर लात के साथ बस यही बोलती थी।
” ये ले कमीने,ये ले कुत्ते, ये ले हरामी।”
शीला अपनी सारी दर्द भुल कर कमल को मारे जा रही थी।
मार खा खा के कमल के शरीर से होश गायब हो गया था। मतलब वो बेहोश हो गया था। शीला ये जाने बीना कमल को बीना साबुन के ही धुलाई किये जा रही थी। बे खबर शीला कमल को मारे जा रही थी। पढिए अगले भाग में……प्यार एक अहसास कहानी अजय शीला की……..
नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड के लेखक। पाठकों के लिए मनोरंजक और दिल को छू लेने वाली हिंदी कहानियाँ लिखना पसंद करता हूँ।आपका स्वागत है नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड में धन्यवाद 💐💐🌹🌹

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