तकरीबन सवा साल बीत गया था उसे गए हुए,
कल अचानक उसका एक मैसेज आया
सिर्फ एक शब्द लिखा था,
“सुनो…”
मैंने फोन हाथ में लिया, पर उंगलियाँ कांप रही थीं,
दिल ने कहा सब कह डालो जो इन महीनों में सहा है,
दिमाग ने कहा खामोश रहो, उसने तुम्हें कब का भुला दिया है।
मैंने टाइप करना शुरू किया
“पता है? तुम्हारे जाने के बाद मैंने हंसना छोड़ दिया है,” (फिर मिटा दिया…) फिर लिखा
“आज भी रात को जब नींद खुलती है, तो फोन में तुम्हारा नाम ढूंढते है,” (फिर मिटा दिया…)
आखिर में मैंने सिर्फ इतना लिखा “कहो, कैसे हो?” उसका जवाब आया
“बस यूं ही याद आ गई थी, लगा तुम बदल गए होगे।” मैंने मन ही मन मुस्कुराया,
अंदर एक टीस उठी और आंखों के कोर भीग गए।
बदल तो वो लोग जाते हैं जिनके पास कोई और होता है,
हम जैसे लोग तो बस एक ही याद के सहारे पूरी उम्र गुज़ार देते हैं।
तभी स्क्रीन पर ‘Typing…’ दिखा और फिर गायब हो गया,
शायद उसे भी एहसास हो गया था…
कि कुछ सवाल पूछने के लिए अब बहुत देर हो चुकी है।
उस दिन फिर समझ आया
कुछ लोग हाल पूछने नहीं,
सिर्फ ये तसल्ली करने आते हैं,
कि तुम आज भी उनकी यादों की कैद में हो या रिहा हो गए!💔💔💔

NSW नया लेखक -🥉


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