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बदलाव…!!

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घर बदलें गलियां बदलीं

शहरों में मकां बदले,

मौसम ने भी करवट ले कर

अपने रंग दिखाये है ,

तुम कहते हो बदलाव जरूरी है ,

रिश्ते बदले लोगों ने भी

अपने मतलब से वफादारी दिखाई है,

तुम कहते हो बदलाव जरूरी है,

तुम भी बदल रहे हो वक्त के हाथों,

जब बदलाव की आंधी में

खुद को सब बदल रहे तो

मेरे बदलने में क्या बुराई है ,

हवाओं का रुख भी बदला हुआ है  ,

मैं बदलूं खुद को खुद ही की जद्दोजहद से ,

अब नहीं परवाह करनी बेवजह

के लोगों की ,ना ढ़लना मुझे

औरो के कायदों में ,

सुकून के पल खुद के लिए

चुरा लूं जिंदगी से,

बदलाव जरूरी है तो क्यों

ना मैं खुद के लिए जीयूं??

क्यों मेरे लिए ही वक्त की मारमारी है  ,

बदलाव जरूरी है ना तो

दुनिया के ढकोसलों को तुम्हीं सम्हालो  ,

मैं उड़ती रहूं मदमस्त होकर गगन में …!!

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