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श्रेणी: कविता

  • हम बिहारी है जी

    हम बिहारी है जी

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

     

    हाँ हम बिहारी हैं जी,

    हाँ हम बिहारी हैं जी,

    थोड़े संस्कारी हैं जी…

    माटी को सोना कर दें,

    ऐसी कलाकारी है जी,

    हाँ हम बिहारी हैं जी…

    मिट्टी पर चित्र बना लेते हैं,

    हर हुनर में जान डाल देते हैं,

    हाँ हम बिहारी हैं जी…

    मिट्टी के बर्तन से पूजा कर लेते हैं,

    कम में भी खुश रह लेते हैं,

    दिल से रिश्ते निभा लेते हैं,

    हाँ हम बिहारी हैं जी…

    सादा जीवन, ऊँचे विचार,

    यही हमारी पहचान है जी,

    दिल से अपनापन देने वाले,

    हाँ हम बिहारी हैं जी… 

  • पंसदीदा औरत…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    किसी ने पूछा मुझसे 

    “पसंदीदा औरत कैसी होती है?”

     

    मैंने हँसकर कहा 

    वो,

    जिससे बहस करते-करते भी

    आख़िर में दिल उसी की बात मान ले।

     

    जिसकी नाराज़गी

    दिन भर जेब में रखे किसी पत्थर जैसी लगे…

    हर काम के बीच

    चुभती हुई।

     

    और जिसकी हँसी

    थके हुए दिन पर

    बारिश की पहली बूँद जैसी उतरती हो।

     

    वो,

    जिसके होते हुए

    घर सिर्फ़ घर नहीं रहता,

    एक सुकून बन जाता है।

     

    जिसे दुख दो

    तो सबसे पहले

    अपनी ही आँखें झुक जाएँ।

     

    जिसकी कुछ बातें

    होंठों पर मुस्कान रख जाएँ,

    और कुछ ख़ामोशियाँ

    रात भर जगाए रखें।

     

    पसंदीदा औरत

    सिर्फ़ ख़ूबसूरत नहीं होती…

    वो धीरे-धीरे

    तुम्हारी आदत बन जाती है।

     

    तुम्हारी रूह में

    ऐसे उतरती है

    जैसे चाय में घुली शक्कर 

    दिखती नहीं,

    पर हर घूँट में महसूस होती है।

     

    और फिर एक दिन

    उसके बिना सब कुछ तो होता है…

    मगर ज़िंदगी नहीं होती।

     

    …….. ✍️

     

    किसी ने बहुत खूबसूरत कहीं अपनी बातें… जहाँ भर की गहराई समेटी है सारी जज्बाते…

  • संतोष और नीतू की प्यार भरी कहानी ❤️

    पढ़ने का समय : 2 मिनट

    एक छोटे से गाँव में संतोष नाम का लड़का रहता था।
    वह बहुत सीधा, मेहनती और सबकी मदद करने वाला था। उसी गाँव में नीतू नाम की लड़की रहती थी। नीतू पढ़ाई में तेज और दिल की बहुत अच्छी थी।

    दोनों की पहली मुलाकात गाँव के मेले में हुई।
    संतोष अपने दोस्तों के साथ घूम रहा था और नीतू अपनी सहेलियों के साथ आई थी। अचानक भीड़ में नीतू का दुपट्टा हवा में उड़ गया। संतोष ने तुरंत पकड़ लिया और मुस्कुराकर उसे वापस दे दिया।

    नीतू ने धीरे से कहा—

    “धन्यवाद…”

    बस वहीं से दोनों की कहानी शुरू हो गई। ❤️

    धीरे-धीरे दोनों रोज़ बात करने लगे।
    कभी खेतों के रास्ते, कभी स्कूल के पास, तो कभी मंदिर के बाहर उनकी मुलाकात हो जाती थी।

    संतोष नीतू का बहुत ख्याल रखता था।
    अगर नीतू उदास होती, तो वह उसे हँसाने की पूरी कोशिश करता।

    एक दिन संतोष ने हिम्मत करके कहा—

    “नीतू, मैं तुम्हारे बिना अपनी जिंदगी की कल्पना भी नहीं कर सकता।”

    नीतू मुस्कुराई और बोली—

    “मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, संतोष।”

    लेकिन उनकी राह आसान नहीं थी।
    घरवालों को यह रिश्ता पसंद नहीं था। दोनों ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने सपनों के लिए मेहनत की और अपने परिवार को समझाया।

    आखिरकार दोनों परिवार मान गए और संतोष और नीतू की शादी पूरे गाँव में धूमधाम से हुई। 🎉❤️

    सीख:
    सच्चा प्यार हमेशा धैर्य, भरोसा और सम्मान मांगता है।

     
     
     
  • अपने काफ़ी है रुलाने के लिए..

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    दुनिया मे आये है तो मुस्कुराना सीख लीजिये दोस्त.

     

    रुलाने के लिए तो अपने रिश्तेदार ही काफ़ी है.. 🥹🥹

  • माँ…

    पढ़ने का समय : 2 मिनट

    माँ की ममता और बलिदान की एक छोटी और भावुक कहानी:

    ​एक बेटा अपनी माँ से बहुत नफरत करता था क्योंकि उसकी माँ की एक आँख नहीं थी। उसे अपनी माँ के ‘अधूरे चेहरे’ से शर्म आती थी। वह बड़ा हुआ, खूब पढ़ा-लिखा और शहर जाकर एक बड़ा आदमी बन गया। उसने शादी कर ली और अपनी माँ को गाँव में ही अकेला छोड़ दिया।

    ​सालों बाद, जब माँ अपने पोते-पोतियों से मिलने शहर पहुँची, तो बेटे ने उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया और चिल्लाकर कहा, “तुम यहाँ क्यों आई हो? तुमने मेरे बच्चों को डरा दिया, यहाँ से चली जाओ!”

    ​माँ चुपचाप वापस लौट गई। कुछ महीनों बाद माँ की मृत्यु हो गई। जब बेटा गाँव पहुँचा, तो उसे माँ की एक चिट्ठी मिली, जिसमें लिखा था:

    ​”मेरे प्यारे बेटे, शायद तुम्हें याद नहीं, पर जब तुम बहुत छोटे थे, तब एक एक्सीडेंट में तुम्हारी एक आँख फूट गई थी। एक माँ होने के नाते मैं तुम्हें एक आँख से नहीं देख सकती थी, इसलिए मैंने अपनी एक आँख तुम्हें दे दी। मुझे गर्व है कि तुम मेरी आँख से इस खूबसूरत दुनिया को देख रहे हो।”

    ​बेटा फूट-फूट कर रोने लगा, लेकिन अब माँ वापस आने वाली नहीं थी।

    ​सीख (Moral)

    ​माँ का प्यार निस्वार्थ होता है। हम अक्सर उनकी अहमियत तब समझते हैं जब वो हमसे दूर चली जाती हैं। समय रहते उनके प्यार और बलिदान का सम्मान करें।

  • Maa

    Maa

    पढ़ने का समय : 2 मिनट
    🎧 कहानी सुनें

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    माँ…

    एक ऐसा शब्द,

    जिसमें पूरी दुनिया समा जाती है।

    जिसकी गोद में सिर रखते ही

    हर दर्द कहीं खो जाता है।

    वह खुद भूखी रह जाती है,

    पर अपने बच्चे को कभी भूखा नहीं सोने देती हैं। 

    अपने आँचल में छुपाकर भी, 

    हर मुसीबत से लड़ जाती है।

    नौ महीने कोख में रखकर,

    हर दर्द हँसकर सहती रहती है,

    और जब पहली बार बच्चा रोता है,

    तब वह आँसुओं में भी मुस्कुराती है।

    उसकी ममता किसी मंदिर की पूजा जैसी,

    उसका प्यार भगवान की दुआ जैसा है 

    वह खुद टूट जाती है,

    पर अपने बच्चे को कभी टूटने नहीं देती।

    बच्चा बीमार हो जाए,

    तो रातभर जागती है,

    अपनी नींद, अपनी खुशियाँ,

    सब उस पर वार जाती है।

    जब बच्चा चलना सीखता है,

    तो माँ का दिल भी उड़ने लगता है,

    उसकी छोटी-सी जीत पर भी

    माँ का सीना गर्व से भर जाता है।

    दुनिया साथ छोड़ दे अगर,

    तब भी माँ साथ निभाती है,

    हर हाल में, हर मोड़ पर,

    बस वही तो याद आती है।

    माँ सिर्फ रिश्ता नहीं शब्द नहीं,

    पूरी जिंदगी होती है,

    जिसके बिना हर खुशी अधूरी है। 

    हर सांस अधूरी लगती है।

    शब्द कम पड़ जाते हैं माँ को लिखने में,

    क्योंकि माँ की ममता

    किसी किताब में नहीं समाती…

    वह तो सिर्फ दिल से महसूस की जाती है। ❤️

    Lakshmi Kumari 

  • जिंदगी

    जिंदगी

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

     

    ज़िंदगी एक प्यारी कहानी,

    कभी हँसी, कभी हैरानी।

     

    कभी धूप है, कभी बरसात,

    कभी मिठास, कभी खट्टी बात।

     

    गिरकर हमें चलना सिखाती,

    आगे बढ़ने का हौसला दिलाती।

     

    सपनों को उड़ान यहाँ मिलती,

    मेहनत से पहचान यहाँ मिलती।

     

    कभी खेल है, कभी इम्तहान,

    कभी सफर, कभी अरमान।

     

    हर दिन नया सबक सिखाती,

    आशा की किरण जगाती।

     

    मुस्कान बाँटो, प्यार लुटाओ,

    ज़िंदगी को खुशियों से सजाओ।

     

    हर लम्हा जी भरकर जीना,

    ज़िंदगी का असली है नगीना।

     

     

    Lakshmi Kumari 

     

  • हमारी बुनी हुई दास्तां

    हमारी बुनी हुई दास्तां

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

     

    हमारी बुनी हुई दास्तां

    कुछ रिश्ते थे… जिन्हें हमने धीरे-धीरे बुना है।
    कुछ ख्वाहिशें थीं… जिन्हें दिल में सहेजकर रखा।
    कुछ लम्हे थे हमारे पास भी,
    जो मिलकर बन गए एक खूबसूरत सा अफसाना—
    हमारी ही बुनी हुई दास्तां का।

    कुछ ख्वाब जो आँखों में पलते रहे,
    हमने उन्हें धागों-सा जोड़ लिया।
    हकीकत में ढाल लिया,
    हर एहसास को प्यार से सजा लिया।

    क्या सुनाएँ ये दास्तां,
    हमें इश्क-मोहब्बत का शोर पसंद नहीं,

    हमने तो खामोशी से रिश्तों को संजोया है,

     

    हर टूटते धागे को फिर से जोड़ा है।

    हमें बस एक ख्वाब सजाना था,
    अपनेपन की गर्माहट से,

    जहाँ हर रिश्ता सच्चाई से चमकता रहे।

    हमारी ये बुनी हुई दास्तां भी,

    एक दिन सबकी जुबां पर होगी,
    क्योंकि इसमें दिखावा नहीं,
    बस सच्चे एहसासों की रोशनी होगी…
    जो हर दिल में हमेशा याद रहेगी।

  • गुरुर

    गुरुर

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

     

    गुरूर है मुझे खुद पर…

    मैं सबसे अलग हूँ।

    मैं सबके जैसी नहीं,

    और यही मेरी पहचान है।

    कोई चाहे या ना चाहे,

    मैं अकेले भी खुश हूँ।

    जैसी भी हूँ,

    अपने माँ-पापा की बेटी हूँ।

    मैं सबसे अलग हूँ,

    पर उनके लिए सबसे प्यारी हूँ।

    गुरूर है मुझे खुद पर…

    क्योंकि मैं जैसी हूँ, वैसी ही खुश हूँ।

  • सांझ की रोशनी में सौन्दर्य

    सांझ की रोशनी में सौन्दर्य

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    सुनो! तुम श्रृंगार ना किया करो,

    अपनी आंखों को यूं ना मुझे देख कर नीचे किया करो ,

    मैं पागल हूं तुम्हारी झील सी आंखों का

    मुझे और ना तुम्हारे लिए पागल किया करो ,

    कजरारी आंखें तुम्हारी देख कर दिल में बेताबी सी छाती है,

    सांझ की रोशनी में चमक तुम्हारे चेहरे की बढ़ जाती है,

    मैं कायल हूं तुम्हारी झील सी आंखों का,

    क्या इरादा रखती हो तुम मुझे डूब कर पार जाने का,

    ये काली घटाओं सी जुल्फ तुम्हारी,

    हार बनने को बेताब है गले का हमारी ,

    यूं जो माथे पर छोटी सी बिंदी जो

    तुम लगाती हो सच कहता हूं कि ,

    तुम जान मेरी लेकर जाती हो , 

    हल्की सी लाली लिए चेहरा तुम्हारा दमकता है,

    निकला ना करो तुम अकेले कहीं दिल मेरा डरता है ,

    ये जो हंसती हो औरों से मिलकर  ,

    नहीं जानती तुम कितना दिल मेरा जलता है ,

    मैं बंदिशों में तुम्हें नहीं बांध रहा हूं ,

    तुम इसे बंदिशें मत समझना ,

    ये दुनिया तुम्हारे लायक नहीं है,

    इसलिए मैं थोड़ा  सा ही सही तुम्हें

    लेकर सम्भल रहा हूं …!!