तेरी मेरी कहानी कुछ अधूरी सी है,
पर इसमें भी एक मिठास पूरी है।
न मिले तो क्या हुआ हम दोनों,
रूह की डोर अब भी जुड़ी है।
तेरी हँसी में मेरी धड़कन में छिपी है,
तेरी खामोशी में मेरी साँसें बसी है।
तू दूर सही, पर एहसास पास है,
तेरे बिना भी तू मेरे आस-पास है।
तेरी मेरी राहें जुदा सही लगे,
पर मंज़िल में अब भी तू ही बसी।
हर शाम तेरे नाम से ढलती है,
हर सुबह तेरी याद में खिलती है।
ना वादा है, ना कसमें हैं,
बस एहसासों की हल्की सरगम है।
तेरी मेरी ये नज़रों की बात, कह न पाए,
पर सब कुछ कह गई रात हैं।
Lakshmi Kumari………….

NSW अनुभवी लेखक -🥇


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