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टैग: प्यार रोमांस

  • No love clause

    No love clause

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    भाग 1

     

    शुरुआत

     

    मुंबई… जिसे सपनों का शहर, माया नगरी जाने क्या क्या कहा जाता है। 

    लेकिन ऐसा नहीं है यहाँ आकर सभी के सपने पूरे हुए हों, बहुत ऐसे भी होते हैं जिनके सपने रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।

     

    कुछ सपने पैसों के आगे दम तोड़ देते हैं।

     

    और कुछ… अपनों की साँसों के साथ जुड़ जाते हैं।

     

    तो आइए कहानी की शुरुआत करते हैं।

     

     

    “मैम… प्लीज़ जल्दी आइए!”

     

    नर्स की घबराई हुई आवाज़ सुनते ही वेदा लगभग दौड़ती हुई अस्पताल के आईसीयू की तरफ भागी।

    उसके चेहरे पर डर साफ़ दिखाई दे रहा था।

    (ये है, वेदा शर्मा, 24 वर्षीय कहानी की हीरोइन)

    “क्या हुआ मेरे भाई को?” वेदा ने घबराई हुई आवाज में पूछा। 

     

    आवाज सुनकर डॉक्टर ने गंभीर नज़रों से उसकी तरफ देखा। “विहान की हालत पहले से ज़्यादा बिगड़ गई है।”

    (विहान, वेदा का भाई है और इस दुनिया में एकमात्र रिश्ता। इसकी उम्र 18 वर्ष है और ये एक सीरियस बीमारी से जूझ रहा है।)

     

    डॉक्टर की बात सुनकर वेदा का दिल जैसे धड़कना भूल गया। क्योंकि विहान के सिवा उसका पूरी दुनिया में कोई नहीं था।

     

    उसे वो पल याद आया तीन साल पहले जब उसकी मां ने दम तोड़ते हुए उससे वचन लिया था कि वो हमेशा अपने भाई का ध्यान रखेगी 

     

    वेदा ने अपने बाप को तो कभी देखा ही नहीं था, बस अपनी मां सविता जी से सुना था कि उसके भाई के जन्म के कुछ ही समय बाद उसके बाप ने उसकी मां को घर से निकाल कर दर बदर ठोकरें खाने को मजबूर कर दिया था।

     

    सविता जी ने बड़ी मुश्किल से नौकरी करके अपने दोनों बच्चों को पाला पोसा। 

     

    वेदा ने कुछ सोचते हुए कहा, “लेकिन डॉक्टर कल तो आपने कहा था कि, मेरा भाई मेरा विहान अब ठीक हो रहा है…” 

    उसने बहुत उम्मीद के साथ डॉक्टर की तरफ देखा। 

    डॉक्टर ने बहुत ही शांत लहजे में कहा, “हमने पूरी कोशिश की, लेकिन अब सिर्फ़ दवाइयों से काम नहीं चलेगा। जितनी जल्दी हो सके ऑपरेशन करना पड़ेगा।”

     

    “ ऑपरेशन…” ये सुनते ही वेदा का चेहरा सफेद पड़ गया।

     

    डॉक्टर बोला, “ अब इसके सिवा दूसरा कोई रास्ता नहीं है।”

     

    वेदा ने खुद को संभाला, ऐसे समय पर वो टूट नहीं सकती थी। “क… कितना खर्च आएगा?” उसने पूछा।

    डॉक्टर ने फाइल बंद की। फिर कुछ देर सोचने की मुद्रा में बैठे रहे। फिर बहुत देर बाद सोच विचारकर बोले, “करीब करीब एक करोड़ बीस लाख रुपये।”

    “ थोड़ा बहुत कम या ज्यादा भी हो सकता है।”

    वेदा के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। एक करोड़ बीस लाख… उसने ज़िंदगी में इतने पैसे कभी देखे तक नहीं थे।

    उसे संभलने के लिए कुर्सी का सहारा लेना पड़ा।

     

    “डॉक्टर… मैं एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करती हूँ। इतनी बड़ी रकम…” उसकी आंखों में आंसू भरे हुए थे, लेकिन उसने उन्हें बाहर नहीं आने दिया।

    “मुझे अफसोस है, लेकिन हमारे पास समय बहुत कम है।” डॉक्टर ने अपनी बात रखी। 

     

    वेदा की आँखें भर आईं। “कितना समय है मेरे पास?”

     

    डॉक्टर बोला, “ज़्यादा से ज़्यादा बीस दिन।”

    बस… बीस दिन। अगर पैसे नहीं आए… तो उसका इकलौता भाई… उसका इकलौता सहारा… नहीं।

     

    उसने तुरंत उस खयाल को अपने मन से निकाल दिया। वह विहान को कुछ नहीं होने देगी।

     

    चाहे इसके लिए उसे पूरी दुनिया से लड़ना पड़े।

     

     

    ICU के अंदर…

     

    अठारह साल का विहान ऑक्सीजन मास्क लगाए बेहोशी की हालत में लेटा था। वो पहले से बहुत कमजोर दिखाई दे रहा था। 

    वेदा धीमे कदमों से उसके पास आकर बैठ गई, उस कमरे में मशीनों को बीप बीप की आवाज सुनाई दे रही थी।

     

    वैसे तो ICU में जाने की इजाजत किसी को नहीं थी, लेकिन वेदा को सिर्फ पाँच मिनट का समय दिया गया था।

     

    वेदा उसके बेड के पास रखे स्टूल पर बैठ गई और उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया।

    “कुछ नहीं होगा तुझे…”  उसकी आवाज़ काँप रही थी।

     

    “तेरी दीदी है ना… मैं तुझे कुछ नहीं होने दूँगी।” उसकी आँखों से आँसू टपककर विहान के हाथ पर गिर पड़े।

     

    उसी समय उसका मोबाइल बज उठा। उसने जल्दी से अपने बैग में से मोबाइल निकाला और सबसे पहले उसे साइलेंट किया क्योंकि वहाँ शोर बिल्कुल भी अलाउड नहीं था।

     

    फिर वो वहाँ से उठकर बाहर आ गई अभी भी फोन की स्क्रीन चमक रही थी और उसपर लिखा हुआ था

    अपर्णा Calling…

    (अपर्णा वेदा की बहुत अच्छी सहेली है, जिससे वो अपने दिल की हर एक बात साझा कर सकती है। और दोनों एक ही कम्पनी में जॉब भी करती है। )

     

    “हैलो?” वेदा ने धीरे से कहा। 

     

    दूसरी तरफ से अपर्णा की जल्दी में आवाज आई, “वेदा… तू ऑफिस नहीं आई?”

     

    वेदा ने खुद को संभालने की कोशिश की। “मैं अस्पताल में हूँ…”

     

    अपर्णा की आवाज़ बदल गई। “विहान?”

     

    वेदा ने सिर हिलाया, “ हाँ… यार!” उसकी आवाज में अजीब सी टूटन थी।

    अपर्णा ने तुरंत उसकी आवाज में छुपा सूनापन पहचान लिया आखिर उनकी दोस्ती को एक लम्बा समय हो चुका था और दोनों ही एक दुसरे की खामोशी को, पानी के पीछे छिपे आंसुओं को भी पहचान लेती थी। 

     

    अपर्णा को समझ आ गया था उसकी दोस्त को अभी उसकी जरूरत है। वो बोली, “ चल मैं आधे घंटे में तेरे पास आ रही हूँ, तू परेशान मत हो।”

    कहकर उसने दूसरी तरफ से कॉल काट दिया। 

     

     

    उसी समय…

     

    मुंबई के सबसे ऊँचे कॉर्पोरेट टॉवर की टॉप फ्लोर पर…

     

    राजावत ग्रुप के बोर्डरूम में सन्नाटा पसरा हुआ था। लंबी टेबल के आखिर में बैठा एक आदमी बिना कोई भाव बदले सामने रखी फाइल देख रहा था।

     

    उसकी ठंडी नजरें फाइल में बहुत ही तल्लीनता से गढ़ी हुई थी।  चेहरे पर ऐसा रौब कि किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी उसकी तरफ देखने की।

     

    वह था, अग्नि सिंह राजावत। राजावत ग्रुप का सीईओ।

     

    “सर…” कंपनी के लीगल एडवाइज़र ने धीरे से कहा।

     

    “आपके दादाजी की वसीयत के अनुसार आपके सत्ताईसवें जन्मदिन से पहले आपका विवाह होना अनिवार्य है।” 

     

    अग्नि ने बिना सिर उठाए पूछा,  “अगर नहीं करूँ तो?”

     

    “आधी संपत्ति चैरिटी ट्रस्ट को चली जाएगी… और बाकी आपके रिश्तेदारों में बाँट दी जाएगी।” लीगल एडवाइजर ने डरते हुए बात को पूरा किया। 

     

    कमरे में फिर खामोशी छा गई। कुछ सेकंड बाद… अग्नि ने फाइल बंद की। उसकी आँखों में कोई घबराहट नहीं थी… बस बर्फ जैसी ठंडक।

     

    “शादी…”  उसने हल्की-सी हँसी हँसी। “दुनिया का सबसे महँगा सौदा।” 

     

    वह अपनी कुर्सी से उठा और काँच की दीवार के सामने जाकर पूरे मुंबई शहर को देखने लगा।

    दादा जी अच्छे से जानते हैं, “ मुझे शादी जैसे रिश्तों में बिल्कुल भी विश्वास नहीं… इसलिए…”

    “ खेल रहे हैं वो मेरे साथ।”

     

    कहकर उसने अपने पॉकेट में से सिगरेट निकालकर उसे सुलगाया। 

    “ लेकिन वो शायद भूल रहे हैं… मैं भी उनका ही पोता हूँ।”

     

    फिर उसने अपने लीगल एडवाइजर की तरफ देखा, “ तुम चिंता मत करो… अगर वो चाहते हैं तो उनका ये पोता शादी जरूर करेगा लेकिन अपनी शर्तों पर।”

     

    क्रमशः…

  • तेरी मेरी”

    तेरी मेरी”

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

     

    तेरी मेरी कहानी कुछ अधूरी सी है,

    पर इसमें भी एक मिठास पूरी  है।

    न मिले तो क्या हुआ हम दोनों,

    रूह की डोर अब भी जुड़ी है।

     

    तेरी हँसी में मेरी धड़कन में छिपी है,

    तेरी खामोशी में मेरी साँसें बसी है।

    तू दूर सही, पर एहसास पास है,

    तेरे बिना भी तू मेरे आस-पास है।

     

    तेरी मेरी राहें जुदा सही लगे,

    पर मंज़िल में अब भी तू ही बसी।

    हर शाम तेरे नाम से ढलती है,

    हर सुबह तेरी याद में खिलती है।

     

    ना वादा है, ना कसमें हैं,

    बस एहसासों की हल्की सरगम है।

    तेरी मेरी ये नज़रों की बात, कह न पाए,

    पर सब कुछ कह गई रात हैं।

     

    Lakshmi Kumari………….