*तुझे एक बार फिर बता दूँ…. तेरे अलावा कोई नहीं है मेरा…*
न कोई ऐसा जिससे दिल की बात कह सकूँ, न *कोई ऐसा जिसके सामने बिना डरे टूट सकूँ..*..
दुनिया में लोग बहुत हैं, पर अपना सिर्फ तुझे माना है मैंने…
*शायद इसी लिए तेरी छोटी सी बेरुख़ी भी दिल को बहुत तकलीफ़ देती है…*
क्योंकि जहाँ पूरा भरोसा होता है, वहीं सबसे ज़्यादा डर भी होता है…
तू साथ रहे या न रहे, ये तेरी मर्जी है….
*मगर सच इतना सा है कि मेरे दिल ने तेरे बाद किसी और को अपना माना ही नहीं…*💝💕💘
NSW अनुभवी लेखक -🥇
जो हमसे दूर हुए..
हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏
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