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लेखक: shalini rawat

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shalini rawat

NSW उभरते लेखक – 🥈 लेखक नहीं हूं। फिर भी कुछ ना कुछ लिखती हूं।

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अप्रैल 2026
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  • साथ हमेशा ❤️❤️

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    कंधे पर तेरे मेरा सर हो

    मैं इस दुनिया से बेखबर हूं,

    शाम गहराने लगी है खामोशियां 

     हमारी गुनगुनाने लगी है 

    और हमें क्या चाहिए बस…

    एक दूसरे का साथ ताउम्र चाहिए,

    ये नदियों का कल – कल 

    ये हवाओं की बहती मीठी धुन 

    यूं तुम्हारा मेरे साथ रहते हुए संगीत सुनाना 

    ये ढलते सूर्य की लाली ये दूरियां अम्बर से हमारी 

    और ये बढ़ती नजदीकियां हमारी सच कहूं तो मुझे दीवाना

    तुम्हारा करती जा रही है 

    ये साथ हमारा हमेशा 

    यूं ही बना रहेगा ❤️❤️❤️❤️…

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  • आत्मग्लानि भाग 4

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

    अब तक आपने पढ़ा :-––

    कुछ दिनों की छुट्टी ले ली थी रीया ने स्कूल से क्योंकि मन तो वैसे ही खिन्न हो गया था उसका संजय व्यास जी की अनदेखी से इससे बेहतर उसने घर रहकर खुद को अपने परिवार के साथ रहना सही समझा, 

    अब आगे :—–

    और जल्दी ही संजय व्यास जी को अपना बनाने की कोशिश करेगी यह सोचकर खुद को शांत किया ।

    इधर संजय जी को फर्क तो नहीं पड़ रहा था रीया के आने या ना जाने से लेकिन स्कूल में एक छात्रा के साथ नाम जुड़ना एक बहुत ही शर्मनाक बात थी जिससे वो परेशान रहने लगे, एक शाम वो थके हुए से घर पहुंचे और सोफे पर टाई ढी़ली करते हुए आंखों को बंद करके बैठे रहे तभी उनके माथे पर उंगलियों के पोरों से हल्की सी मालिश महसूस हुई और संजय जी के होंठों पर मुस्कान आ गई और उन्होंने अपनी आंखों को खोलकर अपने सर के ऊपर गर्दन घुमाकर देखा तो उनकी बीवी होंठों पर मुस्कान सजाये उन्हें ही देखते दिखाई दी और हौले से संजय जी के माथे पर अपने होंठ रख दिए जिससे संजय जी के होंठों पर मुस्कान आ गई और उन्होंने अपनी आंखों को सुकून से बंद कर दिया है कुछ सेकंड बाद खोलकर अपनी बीवी को अपने नजदीक बैठा लिया और उनके कोमल चेहरे को देखने लगे जो प्रेग्नेंसी की वजह से थकान से चूर चूर लग रहा था, उन्होंने अपनी हथेलियों में उनका चेहरा थाम लिया और प्रेम से उसे देखने लगे, और बोले – ” संध्या तुम्हारे बिना मैं अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकता “, अगर तुम मेरी जिंदगी में शामिल नहीं होती तो न जाने मैं अपने होशोहवास कब का खोकर दर-बदर भटक रहा होता , “संध्या तुम मेरी जिंदगी में सुनहरी सुबह बनकर आई और मेरी जिंदगी में बहार हो गई ” मैं खुशनसीब हूं जो तुम संग मेरी जिंदगी है और अब हम दो से तीन होने वाले हैं “…।।

    संजय जी की बात सुनकर संध्या मुस्कुरा दी और बोली आप परेशान लग रहें हैं कुछ हुआ है क्या, संजय जी इस बात पर चुप हो गए और बोले ” नहीं ! कुछ नहीं हुआ है। भला क्या होगा, तुम ज्यादा मत सोचो, तुम्हारे और हमारे बच्चे के लिए ठीक नहीं है , और अपने होंठ संध्या के माथे पर रखकर पीछे हो गये, संध्या! जिसे कुछ कहना था उनके हल्के से चुम्बन से शांत हो गई और मुस्कुराते हुए उन्हें देखने लगी और बोली ” मैं जानती इस अवस्था में आपकी परेशानियों की भागीदार नहीं बनाना चाहते आप मुझे, लेकिन याद रखना कोई बात हो जो आपको परेशान कर रही है तो प्लीज़ मुझे बता दीजियेगा, हम साथ मिलकर हल कर सकते हैं हर परिस्थिति का., संजय जी ने स्नेह से संध्या को गले लगा लिया और बोले मैं जानता हूं मेरी अर्धांगिनी, तुम चिंता मत करो सब ठीक है…..।।

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  • आत्मग्लानि भाग 3

    आत्मग्लानि भाग 3

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

                   आत्मग्लानि …

    अब तक आपने पढ़ा :–

    संजय जी ने उसपर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और ना ही कोई कभी उस विषय पर बहस की , क्योंकि वह उनके लिए एक बच्ची मात्र थी जिसे उन्हें पढ़ाना था । बस ! इससे ज्यादा वो कुछ नहीं उसके बारे में सोचते थे । ऐसे ही अनदेखी में सर जी के दिन गुजर रहे थे और उनकी नजरंदाजी रीया को बहुत खल रही थी, जिससे वो अंदर ही अंदर खल रही थी और उसका ध्यान अपनी पढ़ाई पर से हटता जा रहा था । जिसके परिणामस्वरूप उसकी तबीयत बिगड़ती गई और उसके परिवार वालों को उसकी चिंता होने लगी , अब उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि रीया को क्या हुआ है? जो लड़की घर की जान थी वो गुमसुम सी क्यों रहती है ऐसा क्या दुःख हुआ जो वो बता भी नहीं रही है? 

    उसके माता-पिता उसे शहर के एक जाने माने डाक्टर के पास ले गए, डाक्टर ने रीया की अच्छी तरह जांच पड़ताल की और प्रेम से बोले – बेटा तुम्हे कुछ नहीं हुआ है, तुम बिल्कुल ठीक हो, तुम बाहर बैठो, मुझे तुम्हारी मां से कुछ बातें करनी हैं और मुस्कुरा दिए, रीया ने नजरें उठाकर उन्हें देखा और चुपचाप कमरे से बाहर निकल गई, मां और पिताजी ने डर से डाक्टर को देखा तो डाक्टर उनकी मंशा भांप कर कहने लगे ” चिंता की कोई बात नहीं है ऐसा वैसा कुछ नहीं हुआ है, बस कोई बात है जो उसने अपने मन में दबा रखी है, आप उसकी मां हैं प्रेम से उसके मन को टटोलने की कोशिश कीजिए, इस उम्र में बच्चे अपनी इच्छाओं को अपने अंदर दबा दिया करते हैं कभी अपने माता-पिता के डर से कभी समाज के डर से। मां – डाक्टर चिंता की तो कोई बात नहीं है ना, हमारी बेटी ही हमारे जी़ीने का सहारा है और वो हाथ जोड़कर रोने लगी । डाक्टर ने कहा” देखिए ऐसे ना कीजिए वो ठीक है बस उसके मन को टटोलने की कोशिश कीजिए और जानिए उसके मन में क्या है जो वो दबा कर बैठी है किसी को बता नहीं रही, मैं एक डाक्टर हूं नींद आने के लिए दवाईयां लिख देता हूं वो दीजिए लेकिन विश्वास भी रखिए अपनी बेटी पर और दवाओं से ज्यादा प्यार से ठीक होगी इसका विचार अपने दिल में रखकर बात कीजिए वो आपको नहीं बताएगी तो किसे बताएगी ? इसलिए उसका ध्यान और प्रेम ज्यादा दीजिए। डाक्टर की बातों से आश्वस्त होकर वह दोनों रीया को लेकर घर आ गए और आराम करने को कहकर रीया को उसके कमरे में भेज दिया। मां ने सारी बात घर वालों को बताई तो एक बार सब चिंता में पड़ गए लेकिन पिता जी के कहने पर कि हमें उसका ध्यान प्रेम और विश्वास सबको बनाए रखना है जिससे वो हमसे अपने मन की बात कह सके, उनकी बातें सुनकर सबने सहमति जताई और रीया पर विशेष ध्यान देना शुरू कर दिया। कुछ दिनों के लिए स्कूल से छुट्टी ले ली रीया ने, मन तो वैसे भी संजय व्यास जी की अनदेखी से खिन्न हो गया था, तो सोचा कुछ दिन घर में ही रहेगी।

     

     

     

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  • सिर्फ थोड़ी सी मोहब्बत 💞💞

    सिर्फ थोड़ी सी मोहब्बत 💞💞

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    सिर्फ थोड़ी सी मोहब्बत 💞 💞 

    निगाहों में निगाहें तुम संग मिलानी है,

    जो बात होंठों से हो ना सकी ,

    धड़कनों से बातें करते हुए सपनों में लानी है,

    मुझे ज्यादा न सही थोड़ी सी ही सही,

    सिर्फ थोड़ी सी मोहब्बत तुम संग निभानी है…।।

    हाथों को तुम्हारी बाहों में समेट दिया 

    जन्मभर के लिए यह विश्वास सबको दिलानी,

    तुम से ही शामें मेरी सारी हैं,

    ये एहसास कराती सांसों को काबू में रखकर

    हसीन ख्वाब के साथ सपने सजाती 

    आंखों को बेआवाज बहाना है ,

    खुद के लिए सिर्फ #मेरे लिए हो तुम #

    ये आसमान पर लिखते जाना है ,

    सिर्फ थोड़ी सी मोहब्बत ही सही

    तुमसे ही प्यार की कहानी लिखती जानी है,

    #मैं तुम्हारे लिए #हर लम्हा जीते जी

    मर जाऊंगी बस मुझे अपने हिस्से में

    शामिल करना ये वादे मैं तुमसे चाहूंगी…

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  • आत्मग्लानि (भाग 2)

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

                        आत्मग्लानि …

    अब तक हमने पढ़ा :— 

    शाम को घर पर पापा, चाचा ताऊ जी अपने काम से वापस आये तो उन्हें बताया कि ना जाने आज रीया को क्या हुआ है । वो स्कूल से आते ही अपने कमरे में चली गई और दरवाजा बंद कर दिया, ना कुछ खाया है ना शाम की चाय पी है, न जाने आज क्या हुआ है उसे । सभी लोग ये सुनकर चिंतित हो गए और पापा उठकर उसके कमरे के बाहर खड़े होकर उसका नाम पुकारा, थोड़ी देर बाद रीया ने दरवाजा खोला तो पापा ने स्नेह से उसके सर पर हाथ फेरते हुए पूछा ” क्या हुआ है मेरी बेटी को” स्कूल में किसी से कोई कहा सुनी हो गई है क्या जिसका गुस्सा खाने पर निकाला जा रहा है!! रीया ने चुपचाप गर्दन नीचे झुका लिया और बोली ऐसा कुछ नहीं है पापा, वो! सब्जेक्ट समझ नहीं आया तो सर ने डांट दिया था, बस! और कोई बात नहीं है, मैं बहुत कोशिश करती हूं कि सब अच्छे से हो जाए पर कहीं ना कहीं आकर मैं अटक जाती हूं, ये बोलते वक्त उसके दिल दिमाग में संजय व्यास जी  थे , उसकी बातें सुनकर सबके दिलों में सुकून उतर आया कि कोई बड़ी बात नहीं है.! उन्हें ख़बर नहीं थी कि उसके पैर किस दिशा में बढ़ गये हैं ।।

    दूसरे दिन भी उसका वही हाल रहा क्लास में , जब भी संजय जी क्लास में पढ़ाने आते वो उन्हें एकटक देखने में समय लगाती, क्या पढ़ा रहे हैं, क्या बोल रहे हैं कुछ दिखाई सुनाई देना बंद कर दिया, वो बस चुपचाप उन्हें देखा करती और आहें भरकर अपने मन को समझाती कि ” रीया! संजय जी सिर्फ तुम्हारे हैं, वो तुमसे प्यार करते हैं बस जताते नहीं हैं” और शर्माते हुए अपनी हथेलियों में अपना मुंह छुपा लेती..!!

    संजय जी ने उसपर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और ना ही उससे कोई कभी दुबारा इस विषय पर बहस की, क्योंकि वह उनके लिए एक बच्ची मात्र थी, जिसे उन्हें पढ़ाना था।। बस! इससे ज्यादा वो कुछ नहीं उसके बारे में सोचते थे । ऐसे ही अनदेखी में सर जी के दिन गुजर रहे थे और उनकी नजरंदाजी रीया को बहुत खल रही थी जिससे वो अंदर ही अंदर खल रही थी और इस वजह से उसका ध्यान अपनी पढ़ाई और खुद पर से हटता जा रहा था जिसके परिणामस्वरूप उसकी तबीयत धीरे धीरे बिगड़ती गई और परिवार वालों को उसकी चिंता होने लगी…..

    क्या हुआ है रीया को? और क्या संजय जी इस परेशानी से बाहर आ जाएंगे या और फंसते चले जाएंगे, जानते हैं कल के भाग में , लाईक कमेंट करें और मेरी कहानी को शेयर भी करें 🙏 ☺️ ☺️ 

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    shalini rawat

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  • आत्मग्लानि

    आत्मग्लानि

    पढ़ने का समय : 5 मिनट

                     आत्मग्लानि …  

    रीया! यहीं नाम है उसका , उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में अपने भरे पूरे परिवार के साथ हंसीं खुशी रहती है, अपने मम्मी पापा की इकलौती संतान, तो जाहिर सी बात है लाड प्यार से भरण पोषण हो रहा था, ताऊ जी और चाचा जी जान छिड़कते थे उसपर क्योंकि अपने परिवार में वही एकमात्र बेटी थी, भाई प्यार बहुत करते थे उससे इसलिए थोड़ी जिद्दी ज्यादा हो गई थी, जो बात ठान लें तो बस…. 

    इसी प्रकार हंसते खेलते उसने अपनी ग्यारहवीं कक्षा पास की और बारहवीं कक्षा में प्रवेश किया, पढ़ाई-लिखाई में भी अव्वल है तो शिक्षकों की भी पसंदीदा विद्यार्थी बनी रही । बारहवीं कक्षा में आने के कुछ दिनों बाद इंग्लिश सब्जेक्ट की माया मैडम का किसी और विद्यालय में ट्रांसफर हो गया । उनकी जगह एक दूसरे शिक्षक आये जिनका हाल -फिलहाल में इस जगह तबादला किया गया था.।।

    संजय व्यास…. विद्यालय में आते ही इनकी खूबसूरती के चर्चे होने लगे, 6.2  लम्बी हाईट , गोरा रंग, आंखों पर पतली फ्रेम का चश्मा लगाए रहते जिससे भी उनकी गहरी आंखों को छुपाना मुश्किल होता था, हंसमुख स्वभाव के धनी, पतली सी गर्दन, पढ़ाते वक्त कभी कभी अपनी शर्ट की आस्तीन की बाज़ू को कोहनी तक फोल्ड कर देते जिससे उनके हाथों की मांसपेशियों का कसाव दिखाई दे जाता, आते ही उन्होंने सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया विद्यार्थी तो विद्यार्थी कुछ मैडम भी उन्हें ठंडी आहें भरकर देखा करती थी., पर वो बिना किसी पर ध्यान दिए अपने पढ़ाने पर ध्यान देते, धीरे धीरे बात फैल गई कि शिक्षक महोदय विवाहित जीवन व्यतीत कर रहे हैं, जिससे कयी मैडमों के अरमानों पर पानी फिर गया और वो सब अपनी अपनी किस्मत पर रश्क करके रह जाती..।।

    रीया भी उनकी दिवानी हुए बिना नहीं रह सकी, वो जब भी कक्षा में प्रवेश करते रीया की नजरें उनसे हटती ही नहीं, वो चोरी चोरी उनको देखा करती, उनके बोलने का अंदाज, उनके हाथों की कसावट, उनका पढ़ाते समय अपने चश्मे को ठीक करना, चाॅक को पढ़ाते समय हल्के से अपने मुंह में दबाना, ये सब रीया को उनकी ओर आकर्षित कर रहा था जिससे वो एकदम अंजान थे। रीया उनकी सुध – बुध में खोती चली गई और अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना बंद कर दिया, टेस्ट पेपर में जब उसने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया तो उसकी विज्ञान की मैडम को हैरानी हुई क्योंकि ऐसा कोई विषय नहीं था जिसमें रीया अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई हो, मैडम ने उसे बुलाया और पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान केंद्रित करने की , रीया ने चुपचाप उनकी बातें सुन ली और आकर अपनी बैंच पर बैठकर किताब खोलकर पढ़ने लगी लेकिन वो अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रही थी क्योंकि बार बार संजय व्यास जी का जादू उसके दिल दिमाग पर हावी हो गया था, उम्र कितनी है मासूम की, महज़ 19साल, इस उम्र में आकर्षित होना किसी के प्रति आम बात है..। वो सुनहरे सपने सजाती उनके जीवन के साथ अपने, ये न जाने कब उन्हें पाने की ज़िद बन गया खुद उसे पता नहीं चला। धीरे धीरे बात पूरी तरह विद्यालय में फैल गई कि रीया अपने शिक्षक महोदय को पसंद करती है और उनके साथ जीवन बिताना चाहती है, प्रिंसिपल ने संजय व्यास जी को बुलाया और बात की छानबीन की, संजय जी खुद हैरान रह गए ये जानकर कि जिस बच्चे को वो शिक्षा का ज्ञान देते हैं वो उनके लिए ऐसी भावनाएं रखती है, उन्होंने प्रिंसिपल की बात को सिरे से खारिज किया और खुद रीया से मुलाकात करने कक्षा में चले गए, इस समय छुट्टी का समय था तो सभी स्टूडेंट्स निकल गये कक्षा से, रीया भी जा रही थी जब संजय कक्षा में चले आये, उनको अपने सामने देखकर रीया की नजरें झुक गई और होंठों पर हसीन मुस्कान आ गई, इस लड़की की ऐसी हरकतें देखकर संजय जी हैरान रह गए और अपना गला साफ करके बोलें —

    रीया , क्या मैं जो बातें सुन रहा हूं वो सच है?? रीया ने चुपचाप नजरें झुकाई रखी और धीरे धीरे उनकी तरफ अपने कदम बढ़ा दिए जिससे संजय जी डर गये और खुद पीछे हो गये, उनके कदम पीछे लेने से रीया ने नजरें उठाकर उन्हें देखा और अपनी जगह खड़ी रही और बोली –” मुझे नहीं पता आपने किससे क्या सुना है” ” लेकिन मैं आपको बताना चाहती हूं कि मैं आपको चाहने लगी हूं और आपसे शादी करके आपके साथ रहना चाहती हूं, मुझे आप बहुत अच्छे लगते हैं,  मैं आपके गले में हाथ डालकर आपको अपनी सांसों में बसाए रखना चाहती हूं, ” बोलिए करेंगे ना आप मुझसे शादी?? 

    संजय जी हैरान रह गए एक बच्ची के मुंह से अपने लिए ऐसे शब्द सुनकर, उन्होंने रीया को समझाया, ” देखो रीया, अभी तुम बच्ची हो, अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए तुम्हें,ना कि इन फिजूल की बातों पर, मैं तुम्हारा अध्यापक हूं शिक्षा देना मेरा काम है, तुम अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो और परीक्षा में सफल हो जाओ, मैं समझूंगा मेरी तपस्या सफल हो गयी, प्लीज़ अपने भविष्य को संवारने में जुटी रहो इन सब चक्करों में नहीं पड़ो, और मैं वैसे भी एक शादीशुदा इंसान हूं तो मेरे बारे में सोचना भी तुम्हारे लिए गलत है, अपनी बात कहकर वो कक्षा से बाहर निकल गये, रीया आंखों में आंसू लिए उन्हें जाते देखती रही और चुपचाप अपने घर निकल गई, घर में आकर उसने अपने कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर दिया और घंटों रोती रही, मां चाची ताई जी सबने दरवाजा खटखटाया और उसके व्यवहार से चिंतित हो गई कि क्या बात है जो घर की बेटी दरवाजा बंद करके रो रही है और बोलने से भी दरवाजा नहीं खोल रही,  सब बुलाती रही और हार ग्रीन शाम को पापा चाचा ताऊ जी के आने पर उनको बताया तो वो सब भी चिंता में पड़ गए कि न जाने क्या हुआ होगा 😔, दरवाजा खटखटाया गया और इस बार पापा ने स्नेह से अभिभूत होकर रीया से दरवाजा खोलने को कहा. । दरवाजा खुला….. और….

     

     

     

    आगे क्या हुआ होगा इसके लिए अगले अध्याय का इंतजार करें और हां प्लीज़ मेरी कहानी को लाईक कमेंट शेयर जरुर करें 🙏🙏☺️☺️……

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    shalini rawat

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  • ख़त…

    ख़त…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

                 खत … 

    आज मुद्दतों बाद मैंने खुद से मुलाकात की है,

    आसमान में घिर आये हैं हजारों बादल 

    मेरे दिल में उतर आये हैं तुम्हारी यादों का सावन ,

    अपनी पसंदीदा चीजें सहेज रखी है

    अपनी अलमारी में , चंद खतों में तुम्हारा नाम मिला,

    कागज़ पर स्याही उतरी सी है,

    जैसे धड़कन मेरी उजली सी है ,

    चंद खतों में तुम्हारा खत दिखा 

    यादों की लहर सी दौड़ आई,

    मेरी उम्मीदों पर पानी की चंद बूंदें चमक आई,

    तुम ना जाने क्या क्या सपने सजाए जाते 

    और मैं तुम्हारे साथ हाथों में हाथ डाल 

    मुस्कान लिए बैठी रहती , अब न तुम हो पास मेरे,

    बस एक ठंडी आह होंठों पर मेरी आई,

    ख़त नहीं था ये कभी मेरे लिए 

    तुम्हारी नजदीकिया महसूस करने का जरिया बना,

    इश्क लगता है वाकई सिर्फ खतों तक 

    तुम्हारा सीमित रहा , न समझ सके तुम 

    मुझे न मेरी आत्मा की गहराई को,

    इसलिए शायद बस अब खतों के 

    जरिए तुम मेरे पास हो ….।।

     

     

     

     

     

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  • दोस्ती : एक अनमोल रिश्ता

    दोस्ती : एक अनमोल रिश्ता

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

                          दोस्ती : एक अनमोल रिश्ता

     

     वो जो दूर रहकर भी मेरे पास सदा रहता है,

    हर लम्हा मेरे हिस्से में खुशियां ही आएं

    ऐसी दुआ करता है, ऐसा ही एक अनमोल

    रिश्ता दोस्ती के रूप में मैंने संजो रखा है ,

    रोज छोटी छोटी बातों में मुझसे लड़ पड़ता है, मेरे साथ बिना बोले जिसका दिन नहीं कटता है,

    हां! ऐसे ही एक शख्स को अपना

    दोस्त मैंने बना रखा है , मेरी जिंदगी में

    शामिल हुआ है वह ऐसे जैसे धड़कन

    बनकर बस गया है मुझमें,

    ना जाने कितने आए और साथ निभाने

    का वादा करके निकल गये,

    बस ये एक बिना किसी कारण और

    वादों के मेरे साथ ठहरा है ,

    “दोस्ती ” ये उससे मैंने जानी है 

    सब रिश्ते में सबसे खूबसूरत रिश्ता 

    दोस्ती का है, जो उसने मुझे समझा दिया है ….

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    shalini rawat

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    लेखक नहीं हूं। फिर भी कुछ ना कुछ लिखती हूं।

  • ” प्रेम : एक अधूरा अध्याय”

    ” प्रेम : एक अधूरा अध्याय”

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

                        “प्रेम : एक अधूरा अध्याय “  

    उसका नाम प्रेम था, हां मेरा वाला प्रेम, जो सिर्फ मेरा था, लोग कहते हैं अधूरा प्यार दर्द देता है, मैं हंसती थी उनकी बातों पर , जब तक प्रेम मुझे छोड़कर नहीं गया , 

    मेरी पहली मुलाकात उससे हमारी काॅलोनी के शर्मा जी के यहां हुई थी, वहां मैंने पहली दफा उसे देखा था, वैसे तो और लोग भी शामिल थे वहां क्योंकि शर्मा जी ने अपने घर में सत्यनारायण भगवान की पूजा रखवाई थी और हमें सपरिवार आमंत्रित किया गया था, मैं अपने परिवार के साथ उनके यहां सम्मिलित हुई थी, वहीं वो मुझे मिला, पता करने से पहले ही उसने हमारे बारे में जानकारी ली उनसे, बाद में हमें पता चला कि वो शर्मा जी के रिश्ते में दूर का भतीजा लगता है , पूजा करते वक्त भी किसी गैर की नजरें खुद पर महसूस करते हुए मैंने नज़रें उठाई तो वो मुझे ही देखता मिला, जिससे मैं असहज महसूस करते हुए अपनी आंखों को बंद करते हुए पूजा में ध्यान लगाने लगी, थोड़ी देर में पूजा समाप्त हो गई और प्रसाद लेकर हम-सब घर वापस आ गए, 

    वो मेरा ग्रेजुएशन का पहला साल था जिसकी वजह से मुझे खूब मेहनत करनी थी, मेरा पूरा ध्यान अपनी पढ़ाई पर लगा रहता था, मोबाइल फोन मेरे लिए सपने जैसा था, क्योंकि पापा ने कहा था कि पहले रिजल्ट अच्छा लाओ फिर मोबाइल फोन मिलेगा, घर में मोबाइल फोन भी मम्मी-पापा के पास ही था, हमें अनुमति नहीं थी,जब तक हम काबिल नहीं हो जाते, एक कारण मेरी पढ़ाई का ये भी था क्योंकि स्कूल में अपने सहपाठियों के पास देखा करती थी उसके फंक्शन और सैल्फि का पागलपन जो धीरे-धीरे मुझे अपनी ओर आकर्षित कर रहा था, खैर यह सब सोचते हुए मैं अपनी पढ़ाई कर रही थी तभी शर्मा जी की बेटी ” स्वीटी” उस लड़के को लेकर मेरे पास आई और जियोग्राफी के प्रोजेक्ट्स के बारे में मुझसे जानकारी लेने लगी, वो मेरी ही क्लास में पढ़ती थी लेकिन ध्यान नहीं देती थी, मेरी भी पड़ोसी होने के नाते मैं उसे प्रोजेक्ट्स दे दिया करती थी, उस शाम वह उसे लेकर आई और उसका नाम ” प्रेम ” है कहकर संबोधित करते हुए बोली ये मेरे दूर के भाई हैं कुछ दिन हमारे साथ ही रहेंगे, ” मैंने हाथ जोड़कर अभिवादन किया वो मुस्कुरा कर बोले – “हम सब हमउम्र है तो हाय हेलो से काम चल सकता है ” मैं अपनी बेवकूफी पर मुस्कुराई और बैठने को बोलकर हम बातों में मशगूल हो गए, सच कहूं ! तो ये जिंदगी का पहला अनुभव था कि किसी अंजान शख्स के साथ मैं इतनी जल्दी घुल-मिल गयी और मुझे अच्छा भी लगा, ऐसे ही धीरे धीरे हम दोनों आप से तुम तक आ गये, प्रेम भी मेरे साथ बहुत अच्छा व्यवहार करते थे और खुद आगे बढ़कर मेरे लिए कभी कभी कोई चाॅकलेट या टेडीबियर ले आते, मुझे यह सब अच्छा लगने लगा था, कि कोई ऐसा है जो मुझे एहमियत दे रहा है जो मुझे समझता है, पढ़ाई तो समझो जैसे भूल गयी मैं, वो रोज शाम को घर आते, मम्मी-पापा भी घुल मिल गए थे तो कोई दिक्कत नहीं थी, एक दिन ऐसे ही ये मुझे बाज़ार ले गए और एक कैफे में काॅफी पीते हुए प्रेम बोले – स्मृति देखो मैं जानता हूं ये बात तुम्हारे लिए अजीब सी है , लेकिन मैं अब अपने दिल की बात कहे बिना नहीं रह सकता, मैं सतर्क हो गई कि ये किस विषय में बात कर रहे हैं? , उन्होंने हिम्मत करके अचानक मेरा हाथ पकड़ लिया और बोले -” स्मृति! मैं तुमसे प्यार करता हूं, मैं नहीं जानता कबसे, लेकिन ये सच है मुझे तुम बहुत अच्छी लगती हो, तुम्हारी बातें, तुम्हारी ये मुस्कान, तुम्हारी ये प्यारी आंखें, मुझे तुम्हारी तरफ खिंचती है, मैं चाहकर भी तुम्हें नजरंदाज नहीं कर सकता, प्लीज़ मुझे अपना लो, उनकी बातें मेरे दिल दिमाग में असर कर रही थी, सच्चाई तो यह है कि मैं भी उन्हें पसंद करने लगी थी, लेकिन कहने की हिम्मत मुझमें नहीं थी, जब उन्होंने अपने जज्बात को मेरे सामने रखा तो मैं कुछ पल सुन्न हो गई फिर हौले से उन्होंने हाथ को दबाया तो मैं अपने होशोहवास में आईं और मुस्कुरा कर कहा – “प्रेम सच तो यह है कि मैं भी आपसे प्यार करती हूं, लेकिन कहने की हिम्मत नहीं हुई कभी ” ये सुनकर वो हल्के से मुस्कुराए और मेरे हाथों को अपने लबों तक ले गए और उन्हें चूम लिया, सच कहो तो एक अजीब सी हलचल मच गई मेरे बदन में, मैंने अपने हाथ खींच लिये वो मुस्कुरा कर मुझे देखते रहे और हम बातें करते हुए सपनों की उड़ान भरने लगे, उस समय मुझे जरा भी पता नहीं था कि ये सब मेरे लिए एक सपने जैसा हो जाएगा, हमारी नजदीकिया बढ़ने लगी और वो मुझे कभी कभी स्वीटी के साथ सिनेमाहॉल भी ले जाते मेरे परिवार से पूछकर, ऐसे ही खुशनुमा मेरे दिन बीत रहे थे, एक शाम प्रेम आए और बोले -” मुझे किसी काम से घर जाना है,हमारी जमीनी कार्यवाही कोर्ट में चल रही है, जिसके लिए मुझे पापा के साथ रहकर सारे कागजात देखने पड़ सकते हैं,हो सकता है मुझे वापस आने में कुछ दिन लग जाए, उनकी बातें सुनकर मेरी आंखों से आंसू निकलने लगे, उन्होंने प्यार से मेरा हाथ थामा और बोले -” स्मृति! तुमसे दूर रहकर मुझे भी अच्छा नहीं लगता लेकिन क्या करूं जाना जरूरी भी तो है, अगर तुम ऐसे रोओगी तो मैं कैसे जा पाऊंगा? प्लीज़ मुझे हंसते हंसते विदा करो, मैं वादा करता हूं जल्दी आने की कोशिश करुंगा, मैं भी उनकी बातों में आ गई और उन्हें मुस्कान बिखेरते हुए विदा किया, मेरा प्यार मेरा साथ मेरी आत्मा तक प्रेम अपने साथ ले गए थे,मेरा किसी चीज में मन नहीं लगता था, बहुत दिन हो गए और प्रेम वापस नहीं आये तो मैं स्वीटी के घर चली गई और बातों ही बातों में उनके बारे में पूछा, स्वीटी ने जो बताया उसे सुनकर मेरी आत्मा तक हिल गई, ऐसा कुछ मेरे साथ होगा 😔 मैंने सपने में भी नहीं सोचा था, उसने बताया कि प्रेम की बीवी प्रेगनेंट थी और उन्हें एक बेटा हुआ है, ये सुनते ही मेरे सपनों का संसार एक क्षण में धराशाई हो गया, प्रेम शादीशुदा थे यह मुझे पता नहीं था और ना ही कभी उन्होंने बताया, मैंने स्वीटी से भी कभी उनके जीवन के बारे में नहीं पूछा था तो किस मुंह से हमारे रिश्ते के बारे में उसे बताती, मैं बिखरी हुई सी किसी तरह अपने घर लौटी और कमरा बंद करके बिस्तर पर सिसकियां लेते हुए रोने लगी, ये कैसा प्यार था मेरा जो सपने सजाती आंखों से दिल में उतर गया और बेशुमार दर्द की अनुभूति दे गया, मैं शिकायत करूं भी तो किससे करुं, वो शख्स जो अजनबी बनकर मेरी जिंदगी में शामिल हुआ और दिल में घर कर गया था, मेरे हिस्से की आत्मा को घायल किया और चला गया, मेरा प्यार जिसे सबकुछ मान बैठी थी वहीं दगा दे गया, कड़वी सच्चाई को सामने रखा और प्रेम से मेरा भरोसा तोड़ दिया…

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    shalini rawat

    NSW उभरते लेखक – 🥈 लेखक नहीं हूं। फिर भी कुछ ना कुछ लिखती हूं।

  • प्रेम…

    प्रेम…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

                          प्रेम ….

    मैं अपने दर्द भी भूल जाऊं जो तेरी बाहों में आऊं 

    ना चाहतें हैं मुझे सुनहरे सपनों की,

    ना चाहते है मुझे किसी अपने की,

    तेरे कंधे पर सर रखकर सुकून 

    दिल में उतर जाता है,

    मैं कैसे कहूं तुम पर मुझे कितना प्यार आता है,

    तुम मेरी भीगती आंखों को अपनी

    हथेलियों में थाम लो,

    मैं कहता हूं मैं ठीक हूं फिर भी

    तुम खुद के गले से लगा लो,

    ना जाने ये कैसी कशिश है जो तेरी

    आंखों से नजरें मेरी हटती नहीं ,

    मैं जाना चाहूं कहीं भी दूर तुमसे फिर भी

    शाम ढले दिल मेरा तेरा ही नाम पुकारे ,

    प्यार भरा रिश्ता ये तुम्हारा मुझ को

    लगता है जग में सबसे प्यारा , तुम से

    मिलकर सुकून दिल में उतर जाता है ,

    तेरे होठों की हंसी मेरे अल्फ़ाज़ से

    मिलकर एक ख्वाहिश सी दिल में जगाती है ,

    मैं एक घायल परिंदा तेरी बाहों में

    सिमट कर नयी सांसों को पाता हूं 

     

     

     

     

     

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    shalini rawat

    NSW उभरते लेखक – 🥈

    लेखक नहीं हूं। फिर भी कुछ ना कुछ लिखती हूं।