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लेखक: shalini rawat

  • सांझ की रोशनी में सौन्दर्य

    सांझ की रोशनी में सौन्दर्य

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    सुनो! तुम श्रृंगार ना किया करो,

    अपनी आंखों को यूं ना मुझे देख कर नीचे किया करो ,

    मैं पागल हूं तुम्हारी झील सी आंखों का

    मुझे और ना तुम्हारे लिए पागल किया करो ,

    कजरारी आंखें तुम्हारी देख कर दिल में बेताबी सी छाती है,

    सांझ की रोशनी में चमक तुम्हारे चेहरे की बढ़ जाती है,

    मैं कायल हूं तुम्हारी झील सी आंखों का,

    क्या इरादा रखती हो तुम मुझे डूब कर पार जाने का,

    ये काली घटाओं सी जुल्फ तुम्हारी,

    हार बनने को बेताब है गले का हमारी ,

    यूं जो माथे पर छोटी सी बिंदी जो

    तुम लगाती हो सच कहता हूं कि ,

    तुम जान मेरी लेकर जाती हो , 

    हल्की सी लाली लिए चेहरा तुम्हारा दमकता है,

    निकला ना करो तुम अकेले कहीं दिल मेरा डरता है ,

    ये जो हंसती हो औरों से मिलकर  ,

    नहीं जानती तुम कितना दिल मेरा जलता है ,

    मैं बंदिशों में तुम्हें नहीं बांध रहा हूं ,

    तुम इसे बंदिशें मत समझना ,

    ये दुनिया तुम्हारे लायक नहीं है,

    इसलिए मैं थोड़ा  सा ही सही तुम्हें

    लेकर सम्भल रहा हूं …!!

  • छल ….!!

    छल ….!!

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    तुम दूर हो मुझसे तो

    दूर ही रहो ना क्यों बेफिजूल की

    नजदीकियां बढा़ते हो ,क्या मिला है

    किसी को भी इश्क करके

    जो तुम मेरे पीछे पीछे आते हो,

    मै वाकिफ हूं तुमसे बेहतर ही

    फिर क्यों मुझे बहलाते हो,

    देखा है तुम्हें मैंने गैरों के संग

    भी फिर क्यों मुझे सब्जबाग

    दिखाते हो,

    माना इश्क ❤️ किया है मैंने तुमसे ,

    क्या इसलिए तुम मेरा फायदा उठाते हो,

    दूर दूर ही रहो ना तुम अब मुझसे,

    क्यों अपने झूठे इश्क का

    यकीन दिलाते हो,

    छल कपट से इश्क कभी

    मुकम्मल नहीं होता ,

    क्या हुआ जो अब मैं तन्हा हो जाऊंगी,

    बेशक दिल किलसता रहेगा

    तुम्हारे इन्तजार में ,

    फिर भी मैं भूल नहीं पाऊंगी

    तुम्हारे कपट भरे इजहार को ,

    सच्चाई सिर्फ मुझमें थी ,

    काश ! तुम भी सच्चे दिल से

    इकरार करते, मैं छोड़ देती ये

    जहां जो तुम मेरे साथ होते….!!

  • मेरा चांद…!!

    मेरा चांद…!!

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    रोशन है ऐ चांद तुमसे धरती का कोना- कोना,

    एक चांद मेरे पास भी है जिससे

    रोशन है मेरी जिंदगी का अंधियारा,

    ऐ चांद तुम पर बंदिशें है बादलों,

    बारिशों और आसमान में छाए धुंध की,

    मेरा चांद है मेरे पास मेरे हर लम्हें ,

    मेरे हर वजूद की परछाई में ,

    मैं तुम्हें देखूं जो बादलों से

    आ़खंमिचौली करता है,

    या उसे जो मेरे साथ मेरे हाथों

    में डालें हाथ एकटक तुम्हें निहारता है, 

    वो प्रमाण है मेरी जिंदगी की

    हर उधेड़बुन का,

    तुम्हीं बताओ अब उसे कैसे

    ना देखूं मैं तुमसे पहले ,

    तुम पर हक कविता शायरी

    करने का हक सबको मिला है  ,

    मेरा चांद मेरे दिल का चैन 

    उसने अपने सारे हक़ मेरे नाम किये,

    वो सिर्फ मेरा है  ,

    मेरे इस दिल ,जज़्बात ,ज़िन्दगी ,पर

    हक़ सिर्फ उसका है …!!

  • अकेलापन….!!

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    अपनों के बीच होकर भी गैर हो गया हूं मैं,

    क्या कहूं ऐ जिन्दगी कितना मजबूर हो गया हूं मैं , 

    हंसी होंठों से जाने नहीं देता

    इस दिल से कितना बेगैरत हो गया हूं मैं ,

    यादों की लाली मेरी आंखों से जाती नहीं,

    बस कह नहीं सकता कितना टूट गया हूं मैं, 

    अकेलापन अब तो सालता है मुझे ,

    आ देख! मुझे आकर तेरे बगैर कैसे जी रहा हूं मैं ,

    अकेलापन महसूस किया है मैंने अब तेरी पनाहों में,

    क्या कहूं दिल से कितना मजबूर हो गया हूं मैं …!!

  • बदलाव…!!

    बदलाव…!!

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    घर बदलें गलियां बदलीं

    शहरों में मकां बदले,

    मौसम ने भी करवट ले कर

    अपने रंग दिखाये है ,

    तुम कहते हो बदलाव जरूरी है ,

    रिश्ते बदले लोगों ने भी

    अपने मतलब से वफादारी दिखाई है,

    तुम कहते हो बदलाव जरूरी है,

    तुम भी बदल रहे हो वक्त के हाथों,

    जब बदलाव की आंधी में

    खुद को सब बदल रहे तो

    मेरे बदलने में क्या बुराई है ,

    हवाओं का रुख भी बदला हुआ है  ,

    मैं बदलूं खुद को खुद ही की जद्दोजहद से ,

    अब नहीं परवाह करनी बेवजह

    के लोगों की ,ना ढ़लना मुझे

    औरो के कायदों में ,

    सुकून के पल खुद के लिए

    चुरा लूं जिंदगी से,

    बदलाव जरूरी है तो क्यों

    ना मैं खुद के लिए जीयूं??

    क्यों मेरे लिए ही वक्त की मारमारी है  ,

    बदलाव जरूरी है ना तो

    दुनिया के ढकोसलों को तुम्हीं सम्हालो  ,

    मैं उड़ती रहूं मदमस्त होकर गगन में …!!

  • दहलीज़ के पार…

    दहलीज़ के पार…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    अल्हड सी कन्या मुस्कान

    लिए होंठों पर आई अपने

    साजन के द्वार, कौतूहल

    और जिज्ञासा से हुआ जिसका सत्कार,

    हंसी ठिठोली हवाओं में फैली  ,

    फिर भी चेतायी गई एक बार ,

    देखो! अब तुम हो गृह लक्ष्मी

    इस घर की, इस दहलीज़

    को तुम पहचान लो,

    स्वछंद विचरण करना

    घर के कोने कोने में,

    किन्तु दहलीज़ को पार ना करना ,

    मनोकामनाएं पूर्ण होगीं सभी तुम्हारी ,

    बस दहलीज़ से दूरी बनाए

    रखना , माना आधुनिकता

    का दौर है लेकिन वो क्या है ना,

    हम सामाजिक बंधनों में बंधे हुए हैं  ,

    दहलीज़ के पार जाना ब्याहता

    नारी का ,घर के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाता है,

    अधिक शिक्षित नारी को उद्दंड बनाता है,

    दहलीज़ पे ही सम्मान टिका हुआ है

    ऐसा ढकोसले वालों को लगता है  , 

     

    नारी को सशक्त बनाना उसे उदद्दंड और अनुशासनहीन नहीं बनाता है  , खैर ये कविता रू़ढीवादी विचार धारा को दर्शाती है…!!

  • तुम्हें लिखूं

    तुम्हें लिखूं

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    मैं हर दिन सिर्फ तुम्हारे

    नाम से जीतीं हूं ,

    हर लम्हा तुम्हें सोचती हूं  ,

    मैं इस कदर पागल हूं

    इश्क में तुम्हारे ,

    तुम्हीं बोलो मैं तुम्हें छोड़कर

    क्या लिखूं  , मैं लिखूं तुम्हें

    अपने हृदय में जीवंत ख्वाबों को

    साकार करते हुए  ,या लिखूं

    तुम्हारी मधुर मुस्कान को,

    चंचल मन की लालायित रचना

    या लिखूं तुम्हारी आंखों की

    चमकती हुई उज्जवला,

    बताओं तुम ही मेरे साथी

    मैं क्या लिखूं ??? ,

    चित्त की पवित्रता या

    लिखूं तुम्हारी मन की विहवलता,

    तुम बिन सजन अधूरी मेरी

    जिंदगी की रचना है,

    तुम्हें देखूं तुमसे बात करूं

    या लिखूं तुम्हारी लिखी गई रचनाओं को ,

    नहीं! मैं लिखूंगी तुम्हें अपने जीवन में ,

    एक दूसरे की खुशी और संतोष में ,

    मैं लिखूंगी तुम्हें अपने प्रेम में ,

    मैं लिखूंगी तुम्हें अपने हृदय की वेदना में ,

    जिसे समझ कर तुम दूर मुझसे ना जा पाओ .,

    हां! मैं लिखूंगी तुम्हें किसी सुरक्षित

    स्थान में ,जहां कोई ना हो तुम्हारे साथ मेरे बिना,

    लिखूं मैं और तुम मुझे समझ जाओ

    ऐसा मुमकिन एहसास लिखूंगी 

    मैं अपने कतरे कतरे से …!!

  • याद आती है

    याद आती है

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    खुशियों की चादर तुम से थी मेरी, न जाने कितनी दुआओं का असर हुआ,आंखों में काजल होठों पर हंसी आती थी तुमसे कभी, सुनो! याद तुम्हारी आती है, क़सम से बहुत सताती है….!!

  • याद आती है

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    खुशियों की चादर तुम से थी मेरी, न जाने कितनी दुआओं का असर हुआ,आंखों में काजल होठों पर हंसी आती थी तुमसे कभी, सुनो! याद तुम्हारी आती है, क़सम से बहुत सताती है….!!

  • ख्वाबों का आसमान…

    ख्वाबों का आसमान…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    अंदर अंदर खुद से खुद

    ही को सहेजे रखा है,

    हां मैंने अपने हृदय में जीवंत

    ख्वाबों का आसमान समेटे रखा है,

    सकारात्मक ऊर्जा का स्त्रोत है

    नकारात्मक प्रभाव से दूर एक 

    अलग ही जहां सजा के रखा है

    हां मैंने खुद में खुद को ही छुपा

    कर रखा है  , ये मेरी दुनिया है 

    मेरे ख्वाहिशों और प्रेम की दुनिया 

    छल कपट और वीरानियों से

    इसे बहुत दूर रखा है,

    हां मैंने किसी अपने खास के लिए

    ख्वाबों का आसमान बना कर रखा है …!!