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लेखक: shalini rawat

  • अकेलापन….!!

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    अपनों के बीच होकर भी गैर हो गया हूं मैं,

    क्या कहूं ऐ जिन्दगी कितना मजबूर हो गया हूं मैं , 

    हंसी होंठों से जाने नहीं देता

    इस दिल से कितना बेगैरत हो गया हूं मैं ,

    यादों की लाली मेरी आंखों से जाती नहीं,

    बस कह नहीं सकता कितना टूट गया हूं मैं, 

    अकेलापन अब तो सालता है मुझे ,

    आ देख! मुझे आकर तेरे बगैर कैसे जी रहा हूं मैं ,

    अकेलापन महसूस किया है मैंने अब तेरी पनाहों में,

    क्या कहूं दिल से कितना मजबूर हो गया हूं मैं …!!

  • बदलाव…!!

    बदलाव…!!

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    घर बदलें गलियां बदलीं

    शहरों में मकां बदले,

    मौसम ने भी करवट ले कर

    अपने रंग दिखाये है ,

    तुम कहते हो बदलाव जरूरी है ,

    रिश्ते बदले लोगों ने भी

    अपने मतलब से वफादारी दिखाई है,

    तुम कहते हो बदलाव जरूरी है,

    तुम भी बदल रहे हो वक्त के हाथों,

    जब बदलाव की आंधी में

    खुद को सब बदल रहे तो

    मेरे बदलने में क्या बुराई है ,

    हवाओं का रुख भी बदला हुआ है  ,

    मैं बदलूं खुद को खुद ही की जद्दोजहद से ,

    अब नहीं परवाह करनी बेवजह

    के लोगों की ,ना ढ़लना मुझे

    औरो के कायदों में ,

    सुकून के पल खुद के लिए

    चुरा लूं जिंदगी से,

    बदलाव जरूरी है तो क्यों

    ना मैं खुद के लिए जीयूं??

    क्यों मेरे लिए ही वक्त की मारमारी है  ,

    बदलाव जरूरी है ना तो

    दुनिया के ढकोसलों को तुम्हीं सम्हालो  ,

    मैं उड़ती रहूं मदमस्त होकर गगन में …!!

  • दहलीज़ के पार…

    दहलीज़ के पार…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    अल्हड सी कन्या मुस्कान

    लिए होंठों पर आई अपने

    साजन के द्वार, कौतूहल

    और जिज्ञासा से हुआ जिसका सत्कार,

    हंसी ठिठोली हवाओं में फैली  ,

    फिर भी चेतायी गई एक बार ,

    देखो! अब तुम हो गृह लक्ष्मी

    इस घर की, इस दहलीज़

    को तुम पहचान लो,

    स्वछंद विचरण करना

    घर के कोने कोने में,

    किन्तु दहलीज़ को पार ना करना ,

    मनोकामनाएं पूर्ण होगीं सभी तुम्हारी ,

    बस दहलीज़ से दूरी बनाए

    रखना , माना आधुनिकता

    का दौर है लेकिन वो क्या है ना,

    हम सामाजिक बंधनों में बंधे हुए हैं  ,

    दहलीज़ के पार जाना ब्याहता

    नारी का ,घर के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाता है,

    अधिक शिक्षित नारी को उद्दंड बनाता है,

    दहलीज़ पे ही सम्मान टिका हुआ है

    ऐसा ढकोसले वालों को लगता है  , 

     

    नारी को सशक्त बनाना उसे उदद्दंड और अनुशासनहीन नहीं बनाता है  , खैर ये कविता रू़ढीवादी विचार धारा को दर्शाती है…!!

  • तुम्हें लिखूं

    तुम्हें लिखूं

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    मैं हर दिन सिर्फ तुम्हारे

    नाम से जीतीं हूं ,

    हर लम्हा तुम्हें सोचती हूं  ,

    मैं इस कदर पागल हूं

    इश्क में तुम्हारे ,

    तुम्हीं बोलो मैं तुम्हें छोड़कर

    क्या लिखूं  , मैं लिखूं तुम्हें

    अपने हृदय में जीवंत ख्वाबों को

    साकार करते हुए  ,या लिखूं

    तुम्हारी मधुर मुस्कान को,

    चंचल मन की लालायित रचना

    या लिखूं तुम्हारी आंखों की

    चमकती हुई उज्जवला,

    बताओं तुम ही मेरे साथी

    मैं क्या लिखूं ??? ,

    चित्त की पवित्रता या

    लिखूं तुम्हारी मन की विहवलता,

    तुम बिन सजन अधूरी मेरी

    जिंदगी की रचना है,

    तुम्हें देखूं तुमसे बात करूं

    या लिखूं तुम्हारी लिखी गई रचनाओं को ,

    नहीं! मैं लिखूंगी तुम्हें अपने जीवन में ,

    एक दूसरे की खुशी और संतोष में ,

    मैं लिखूंगी तुम्हें अपने प्रेम में ,

    मैं लिखूंगी तुम्हें अपने हृदय की वेदना में ,

    जिसे समझ कर तुम दूर मुझसे ना जा पाओ .,

    हां! मैं लिखूंगी तुम्हें किसी सुरक्षित

    स्थान में ,जहां कोई ना हो तुम्हारे साथ मेरे बिना,

    लिखूं मैं और तुम मुझे समझ जाओ

    ऐसा मुमकिन एहसास लिखूंगी 

    मैं अपने कतरे कतरे से …!!

  • याद आती है

    याद आती है

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    खुशियों की चादर तुम से थी मेरी, न जाने कितनी दुआओं का असर हुआ,आंखों में काजल होठों पर हंसी आती थी तुमसे कभी, सुनो! याद तुम्हारी आती है, क़सम से बहुत सताती है….!!

  • याद आती है

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    खुशियों की चादर तुम से थी मेरी, न जाने कितनी दुआओं का असर हुआ,आंखों में काजल होठों पर हंसी आती थी तुमसे कभी, सुनो! याद तुम्हारी आती है, क़सम से बहुत सताती है….!!

  • ख्वाबों का आसमान…

    ख्वाबों का आसमान…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    अंदर अंदर खुद से खुद

    ही को सहेजे रखा है,

    हां मैंने अपने हृदय में जीवंत

    ख्वाबों का आसमान समेटे रखा है,

    सकारात्मक ऊर्जा का स्त्रोत है

    नकारात्मक प्रभाव से दूर एक 

    अलग ही जहां सजा के रखा है

    हां मैंने खुद में खुद को ही छुपा

    कर रखा है  , ये मेरी दुनिया है 

    मेरे ख्वाहिशों और प्रेम की दुनिया 

    छल कपट और वीरानियों से

    इसे बहुत दूर रखा है,

    हां मैंने किसी अपने खास के लिए

    ख्वाबों का आसमान बना कर रखा है …!!

     

  • तस्वीर…!!

    तस्वीर…!!

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    मै रख लू़ं तुम्हें अपने पास

    क्या ऐसा मुमकिन है ,

    तुम्हें देखूं तुमसे बात करूं

    ये कहां मेरे लिए मुमकिन है ,

    मेरे हिस्से में तुम्हारी जुदाई आई,

    मैं फिर भी खुश हूं तो क्या हुआ

    जो आंख मेरी भर आई, 

    हालातों का हवाला क्यों देते

    हो जब वफाओं का तुमपें जोर नहीं  ,

    हां ये सच है इश्क ❤️ की

    बीमारी सिर्फ मेरे हिस्से आई ,

    तुम जा रहे हो तो मैं नहीं तुम्हें रोकूंगी 

    बस तुम संग एक आखिरी

    तस्वीर ले लूंगी,

    यादों के झरोखों से जब

    भी याद तुम्हारी आयेगी ,

    अलमारी के कोने से

    निकाल तस्वीर तुम्हारी देख लूंगी …!!

  • तेरे जाने के बाद

    तेरे जाने के बाद

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    तेरे जाने के बाद …!!

     

    रास नहीं आया मुझको मेरे 

    ही घर का कोई कोना,

    सुबह शाम तलक तुम चहकती थी ,

    जहां दिन और रात ,अब काटने को

    दौड़ता है मुझको मेरा ही घर सलोना,

    नहीं पता था ज़िंदगी तुम बिन

    अंधेरे में चली जाएगी,

    तेरे जाने के बाद  हां तेरे

    जाने के बाद एहसास हुआ

    मुझे कमी तेरी कमी यादों की

    चादर इस तरह तड़पाएगी ,

    तेरे जाने के बाद दिल

    खाली – खाली सा लगता है  ,

    तेरी पनाहों में आने को

    दिल कितना तड़पता है  ,

    आंखों से आंसू मेरे झरझर बहते हैं ,

    तेरे बिन कितना अधूरा हूं ये मुझसे कहते हैं…!!