तेरे जाने के बाद …!!
रास नहीं आया मुझको मेरे
ही घर का कोई कोना,
सुबह शाम तलक तुम चहकती थी ,
जहां दिन और रात ,अब काटने को
दौड़ता है मुझको मेरा ही घर सलोना,
नहीं पता था ज़िंदगी तुम बिन
अंधेरे में चली जाएगी,
तेरे जाने के बाद हां तेरे
जाने के बाद एहसास हुआ
मुझे कमी तेरी कमी यादों की
चादर इस तरह तड़पाएगी ,
तेरे जाने के बाद दिल
खाली – खाली सा लगता है ,
तेरी पनाहों में आने को
दिल कितना तड़पता है ,
आंखों से आंसू मेरे झरझर बहते हैं ,
तेरे बिन कितना अधूरा हूं ये मुझसे कहते हैं…!!

NSW उभरते लेखक – 🥈
लेखक नहीं हूं फिर भी कुछ ना कुछ लिखती हूं ,

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