शीला कमल को मार मारकर उसे बेहोशी की दुनिया में पहुंचा दिया था। कमल के बेहोश होने के बाद भी शीला के लात रुक नहीं रही थी। लगातार लातों की बारिश कर रही थी। गुस्से से शीला के चेहरे पसीने में भीग गया था। पिछे से शीला के कंधे पर दो हाथ पड़ने के आभास होता है। और शीला की तंद्रा भंग होती है। वो पिछे मुड़कर देखतीं हैं। रूपा और राधा उसकी कंधों को धिरे से सहला रही थी। दोनों के चेहरे पर एक खुशी झलक रही थी। और दोनों मुस्कुरा रही थी। वो दोनों अपने दीदी के कमल पर हुई जीत पर प्राउड फील कर रही थी।
” दीदी आप शांत हो जाइए,आप को चोट लगी है।”
चांदनी धिरे धिरे शीला के तरफ बढ़ते हुए कैजुअली अंदाज में बोली थी।
” हां दीदी, अब तो आप हम लोगों पर छोड़ दिजिए। हम देख लेंगे की क्या करना है। इस कमिने के साथ।”
राधा कमल के तरफ इशारा करते हुए बोली थी।
” अब हमें कमल को लेकर प्रिंसिपल मैम के पास चलना चाहिए।”
रुपा अपने कमर पर हाथ रख कर मुस्कुराती हुई बोल रही थी।
राधा चांदनी और शीला एक साथ बोलती है।
” हां ठीक है चलो चलते हैं।”
कमल को होश तो था नहीं, जो वो चलकर जाता। तो अब उसे लेकर जाने की जिम्मेदारी,इन चारों सहेलियों के कंधे पर थी । चारों सहेलियों ने कमल के एक एक पैर और एक एक हाथ पकड़ कर उठाई और चल दी थी।
इधर मीटिंग हाल में कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव पर कालेज में फंक्शन की तैयारी करने को लेकर प्रिंसिपल स्टूडेंट प्रोफेसर के बीच बाद संवाद चल रही थी। सभी प्रोफेसर अपने स्टूडेंट को भगवान श्री कृष्ण के जीवन के बारे में तो उनके द्वारा किए गए लीला के बारे में अपने स्टूडेंट के सामने ब्यख्यान कर रहे थे।
जब प्रोफेसर शुक्ला अपनी बात स्टूडेंट के सामने रख रहे थे। तब एक स्टूडेंट अपने कुर्सी से उठ कर प्रोफेसर शुक्ला से एक सवाल किया।
दरअसल इस शवाल का जवाब उस स्टूडेंट के साथ साथ आप हम और उस मीटिंग हाल में मौजूद सभी लोगों को चाहिए था। वो लड़का अपनी चेयर से उठा और वो प्रोफेसर शुक्ला को बीच में रोकते हुए बोला।
” माफ़ किजियेगा सर, मैं आपको बीच में रोक रहा हूं। सर मैं जानना चाहता हूं। कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव तो हम हमारे कालेज में हर साल मनाते आ रहे हैं। तो फिर हमें इस बार और पहली बार मनाया जाएगा, ऐसा क्यों बताया जा रहा है?”
उस लड़के ने साफ शब्दों में अपनी बात प्रोफेसर शुक्ला के सामने रख दिया था। उस लड़के की आवाज जब वहां मौजूद सभी लोगों के कानों में जाते हैं। तो सभी के ध्यान उस लड़के पर टिक जाती है। जब ये सवाल उठ हीं गई है तो इसका जवाब जानने कि कोशिश में कुछ लोग और आगे आते हैं। एक लड़की अपनी चेयर से उठ कर बोलती है।
” हां सर, हम लोग तो श्री कृष्ण जन्मोत्सव हर साल मनाते हैं। और कॉलेज में अवार्ड फंक्शन का भी आयोजन किया जाता है। तो फिर ये क्यों?”
उस लड़की ने भी अपने तरफ से एक सवाल पूछ लिया था।इन सवालों के जवाब स्टूडेंट को प्रोफेसर शुक्ला देने वाले हीं थे। कि सभी की नजर मीटिंग हाल के दरवाजे पर पहुंच जाती है।देख कर सभी शौक हो जातें हैं। मीटिंग हाल के माहौल अब बदलने वाला था। जहां तक बदल ही गया था। शीला कमल चांदनी राधा रुपा को देख कर सभी स्तब्ध रह गए थे। सन्नाटा पसर गया था। एक साथ सभी लोगों के जुवान बंद हो गया था। कोई कुछ भी नहीं बोल रहे थे। सभी सीर्फ एक टक उन पांचों को देख रहे थे। अब कोई आगे आकर वेलकम तो करने वाले थे नहीं, तो चारों सहेलियों ने खुद आगे बढ़कर अंदर आने लगी थी। शीला और चांदनी कमल के एक एक हाथ पकड़ कर टांगी हुई थी तो राधा और रूपा एक एक टांग सभी चलकर स्टेज के सामने आकर खड़ी हुई थी।
खामोशी को भंग करते हुए एक छात्रा इन सभी को देख कर बोली थी।
” क्या हुआ है इसे, यह बेहोश क्यों है?”
उस छात्रा ने अपनी उंगली से कमल को प्वाइंट आऊट करते हुए बोली थी। बीच में से एक और छात्र का आवाज गुंजा।
” तुम लोग कमल को ऐसे टांग कर क्यों लाई हो? क्या हुआ है इसके साथ, क्या ये एक्सीडेंट किया है?”
उस छात्र ने चारों सहेलियों से सवाल किया था।
इस सवाल का जवाब आप हम, और ये चारों सहेलियां जानते हैं। लेकिन यहां मीटिंग हाल में मौजूद सभी लोग नहीं जानते थे। अब एक बात और है कि क्या यह सहेलियां जो भी बात बोलेगी क्या वहां मौजूद सभी लोग क्या इनके बात का विश्वास करेंगे? अगर नहीं, तो फिर उसके लिए क्या करना पड़ेगा। वही करने के लिए शीला अपने मन में कुछ सोच कर अपने कदम आगे बढ़ा चुकी थी। सभी कमल को फर्श पर लिटा कर वहीं एक तरफ खड़े हो जाते हैं। अगर कमल की सच्चाई सबके सामने उजागर करना है। तो उसे सबसे पहले होश में लाना होगा, शीला मन-ही-मन ये सोच रही थी। बिना उसको होश में लायें या बिना उसके मुंह से उसके बातों को कोई नहीं मानेगा क्यों मानेगा कैसे मानेगा कोई नहीं मानेगा। हम भी नहीं मानेंगे और आप तो मान हीं नहीं सकते हैं। क्यों की कमल अभी भी बेहोश पड़ा था। चोट उसको लगा था। अब अगर ये चारों सहेलियां बोलेगी की कमल ने उसे परेशान किया है तो इस बात को प्रमाणित भी करना होगा। जो कि कमल के बेहोश रहते संभव नहीं था। यह सीन देख कर प्रोफेसर और प्रिंसिपल मैम भी आश्चर्य चकित रह गए थे।
प्रिंसिपल मैम इन चारों को देख कर बोलतीं हैं।
” शीला चांदनी राधा रूपा क्या है ये सब? तुम सब मिलकर कमल के साथ क्या की हो?”
थोड़ा रुक कर प्रिंसिपल मैम फिर बोलना शुरू करतीं हैं।
” ये बेहोश क्यों हो गया है? सब कुछ सही सही बताओ तुम सब।”
प्रिंसिपल मैम अपने चेयर पर बैठी हुई हीं इन चारों से सवाल की थीं। शीला प्रिंसिपल मैम को उनके सवाल का जवाब देना चाहती थी। डर इस बात का था कि उसके बात का कोई विश्वास नहीं करेगा। यही कारण था कि वो कुछ बोलने से बच रही थी। अब प्रिंसिपल मैम उससे सीधा सवाल कर ली थी। तो अब वो चुप कैसे रह सकती थी।
क्या होगा जब कमल को होश आयेगा? ये चारों सहेलियां कब तक चुप रहेगी? क्या कमल को होश आयेगा? जब कमल की सच्चाई सभी के सामने आयेगा फिर क्या होगा? इन सभी सवालों के जानने के लिए पढ़ें कहानी का अगला भाग ….. प्यार एक अहसास , कहानी अजय शीला की नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड पर……
नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड के लेखक। पाठकों के लिए मनोरंजक और दिल को छू लेने वाली हिंदी कहानियाँ लिखना पसंद करता हूँ।आपका स्वागत है नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड में धन्यवाद 💐💐🌹🌹

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