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सबके हिस्से में नहीं आता है

पढ़ने का समय : < 1 मिनट

                  “सबके हिस्से में नहीं आता है “ 

 

ये जमीन ये आसमान 

ये खुशी ये मुस्कान 

ये रोटी कपड़ा और मकान

सबके हिस्से में नहीं आता है, 

ये प्यार ये एतबार 

ये आंसू ये इंतजार 

सुकून भरा हुआ एक इतवार

सबके हिस्से में नहीं आता है ,

ये गुड्डा-गुड्डी का खेल 

ये मुट्ठी में भरने का आसमान 

सबके हिस्से में नहीं आता है ,

सबके हिस्से में नहीं आता

मां की ममता, पिता का प्यार भरा दुलार 

स्कूल की मस्ती और किताब से प्यार 

कुछ बच्चों को कीमत चुकानी पड़ती है

एक एक निवाले के लिए ,

उनके हिस्से में नहीं आता

उम्मीदों का दामन और खुशियों का आसमान , 

कुछ बच्चों को पसीने से तरबतर

भागदौड़ करनी पड़ती है

अपने परिवार की कहानी कहने के लिए ,

क्या देश की उन्नति का स्त्रोत

इन मासूमों के बचपन का मर्दन करने से होगा 😔🙏..!!

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shalini rawat

NSW उभरते लेखक – 🥈 लेखक नहीं हूं। फिर भी कुछ ना कुछ लिखती हूं।

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