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खुद को पाना आसान नहीं….

पढ़ने का समय : < 1 मिनट

खुद को पाना आसान नहीं था जनाब,

मैंने अपना सर्वस्व गँवाकर खुद को पाया है।

 

आसान नहीं था इच्छाओं, आशाओं और उम्मीदों का त्याग,

मैंने हर चाहत को दिल में दफ़नाया है।

 

खुद को पाने की राह में बड़ी यातनाएँ सही हैं मैंने,

हर आँसू को मुस्कान के पीछे छुपाया है।

 

टूटकर, बिखरकर, फिर से खुद को गढ़ा है मैंने,

तब कहीं जाकर अपने अस्तित्व को अपनाया है।

 

खुद को पाना आसान नहीं था जनाब,

मैंने बहुत कुछ खोकर ये मुकाम पाया

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Rani Thakur

NSW अनुभवी लेखक -🥇 जो हमसे दूर हुए.. हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏

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