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श्रेणी: कविता

  • दोस्ती : एक अनमोल रिश्ता

    दोस्ती : एक अनमोल रिश्ता

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

                          दोस्ती : एक अनमोल रिश्ता

     

     वो जो दूर रहकर भी मेरे पास सदा रहता है,

    हर लम्हा मेरे हिस्से में खुशियां ही आएं

    ऐसी दुआ करता है, ऐसा ही एक अनमोल

    रिश्ता दोस्ती के रूप में मैंने संजो रखा है ,

    रोज छोटी छोटी बातों में मुझसे लड़ पड़ता है, मेरे साथ बिना बोले जिसका दिन नहीं कटता है,

    हां! ऐसे ही एक शख्स को अपना

    दोस्त मैंने बना रखा है , मेरी जिंदगी में

    शामिल हुआ है वह ऐसे जैसे धड़कन

    बनकर बस गया है मुझमें,

    ना जाने कितने आए और साथ निभाने

    का वादा करके निकल गये,

    बस ये एक बिना किसी कारण और

    वादों के मेरे साथ ठहरा है ,

    “दोस्ती ” ये उससे मैंने जानी है 

    सब रिश्ते में सबसे खूबसूरत रिश्ता 

    दोस्ती का है, जो उसने मुझे समझा दिया है ….

  • गुरु की ज्योति

    गुरु की ज्योति

    पढ़ने का समय : 2 मिनट

    गुरु वो दीप हैं, जो तमस हर लेते,  

    ज्ञान की किरणों से जीवन भर देते।  

    उनके चरणों में है सारा संसार,  

    उनसे ही मिलता है सच्चा आधार।  

     

    गुरु वो वृक्ष हैं, छाया में सुकून देते,  

    धूप में भी ठंडक का एहसास देते।  

    उनकी वाणी अमृत सी बरसती,  

    हर शब्द में शिक्षा की गंध बसती।  

     

    गुरु वो सागर हैं, जिनमें सत्य की लहरें,  

    हर प्रश्न का उत्तर, हर मन की डगरें।  

    उनकी दृष्टि में करुणा का सागर,  

    उनके आशीष से मिटता है अंधकार।  

     

    गुरु पूर्णिमा का पावन दिन आया,  

    श्रद्धा का दीप हर मन में जलाया।  

    फूलों की वर्षा, भक्ति की धारा,  

    गुरु चरणों में समर्पित हमारा प्यारा।  

     

    गुरु से ही जीवन का अर्थ समझा,  

    गुरु से ही आत्मा का स्वर मिला।  

    गुरु वो सूरज हैं, जो कभी न ढलते,  

    उनकी रोशनी से सब पथ पलते।  

     

    जय गुरु देव, जय ज्ञान के दाता,  

    आपसे ही जीवन का हर पल निखरता।  

    आपकी कृपा से मन निर्मल होता,  

    आपकी छाया में संसार संवरता।

     

    गुरु वो दीपक हैं, 

    जो अंधियारे में राह दिखाते,

    ज्ञान की गंगा बनकर, 

    जीवन को पावन बनाते।

     

    गुरु वो छाया हैं, 

    जो हर दुख में सहारा देते,

    संस्कारों की ज्योति से, 

    मन को उजियारा देते।

     

    गुरु वो सागर हैं, 

    जिनमें सत्य की लहरें उठतीं,

    भ्रम के रेगिस्तान में, 

    आशा की नदियाँ बहतीं।

     

    गुरु वो पर्वत हैं, 

    अटल, अडिग, स्थिर खड़े,

    शिष्य के हर प्रश्न पर, 

    उत्तर के दीप जलाए खड़े।

     

    गुरु पूर्णिमा का दिन है, 

    श्रद्धा का उत्सव महान,

    गुरु चरणों में अर्पित है, 

    जीवन का सारा सम्मान।

    🙏🙏  जय गुरु देव  🙏🙏

  • संग भींगने का क़रार

    संग भींगने का क़रार

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    बरसात की बूंदों में छुपा है प्यार,  

    आज दिलों ने किया संग भींगने का क़रार।  

    तेरे हाथों में मेरा हाथ थामे,  

    सपनों की राहों पर चलें हम साथ‑साथ।  

     

    भीगी ज़ुल्फ़ों में चाँदनी मुस्काए,  

    तेरी आँखों में मेरा चेहरा झलक जाए।  

    हर बूँद बने इज़हार‑ए‑मोहब्बत,  

    हर लम्हा कहे — तू ही मेरी राहत।  

     

    संग भींगना अब इबादत सा लगे,  

    तेरे संग हर मौसम जन्नत सा लगे।  

    ओ मेरी जान, ओ मेरी दास्तान,  

    तेरे बिना अधूरा है मेरा अरमान।

     

    बरसात की पहली बूँद जब ज़मीं पर उतरी,  

    तेरी मुस्कान ने मेरी रूह को छू ली।  

    आज दिलों ने किया संग भींगने का क़रार,  

    हर लम्हा बने इश्क़ का इज़हार।  

     

    तेरे होंठों पर ठहरी हँसी की चमक,  

    मेरे दिल में जगाए मोहब्बत की ललक।  

    भीगी राहों पर चलें हम साथ‑साथ,  

    तेरे कदमों से सजें मेरी हर बात।  

     

    बूँदों की सरगम में गूँजे तेरा नाम,  

    तेरी बाहों में मिले मुझे आराम।  

    संग भींगना अब दुआ सा लगे,  

    तेरे संग हर मौसम जन्नत सा लगे।  

     

    ओ मेरी जान, ओ मेरी रूहानी गीत,  

    तेरे बिना अधूरी है मेरी हर प्रीत।  

    चलो आज वादा करें इस बरसात में,  

    संग भींगते रहेंगे हर मुलाक़ात में।

  • ” प्रेम : एक अधूरा अध्याय”

    ” प्रेम : एक अधूरा अध्याय”

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

                        “प्रेम : एक अधूरा अध्याय “  

    उसका नाम प्रेम था, हां मेरा वाला प्रेम, जो सिर्फ मेरा था, लोग कहते हैं अधूरा प्यार दर्द देता है, मैं हंसती थी उनकी बातों पर , जब तक प्रेम मुझे छोड़कर नहीं गया , 

    मेरी पहली मुलाकात उससे हमारी काॅलोनी के शर्मा जी के यहां हुई थी, वहां मैंने पहली दफा उसे देखा था, वैसे तो और लोग भी शामिल थे वहां क्योंकि शर्मा जी ने अपने घर में सत्यनारायण भगवान की पूजा रखवाई थी और हमें सपरिवार आमंत्रित किया गया था, मैं अपने परिवार के साथ उनके यहां सम्मिलित हुई थी, वहीं वो मुझे मिला, पता करने से पहले ही उसने हमारे बारे में जानकारी ली उनसे, बाद में हमें पता चला कि वो शर्मा जी के रिश्ते में दूर का भतीजा लगता है , पूजा करते वक्त भी किसी गैर की नजरें खुद पर महसूस करते हुए मैंने नज़रें उठाई तो वो मुझे ही देखता मिला, जिससे मैं असहज महसूस करते हुए अपनी आंखों को बंद करते हुए पूजा में ध्यान लगाने लगी, थोड़ी देर में पूजा समाप्त हो गई और प्रसाद लेकर हम-सब घर वापस आ गए, 

    वो मेरा ग्रेजुएशन का पहला साल था जिसकी वजह से मुझे खूब मेहनत करनी थी, मेरा पूरा ध्यान अपनी पढ़ाई पर लगा रहता था, मोबाइल फोन मेरे लिए सपने जैसा था, क्योंकि पापा ने कहा था कि पहले रिजल्ट अच्छा लाओ फिर मोबाइल फोन मिलेगा, घर में मोबाइल फोन भी मम्मी-पापा के पास ही था, हमें अनुमति नहीं थी,जब तक हम काबिल नहीं हो जाते, एक कारण मेरी पढ़ाई का ये भी था क्योंकि स्कूल में अपने सहपाठियों के पास देखा करती थी उसके फंक्शन और सैल्फि का पागलपन जो धीरे-धीरे मुझे अपनी ओर आकर्षित कर रहा था, खैर यह सब सोचते हुए मैं अपनी पढ़ाई कर रही थी तभी शर्मा जी की बेटी ” स्वीटी” उस लड़के को लेकर मेरे पास आई और जियोग्राफी के प्रोजेक्ट्स के बारे में मुझसे जानकारी लेने लगी, वो मेरी ही क्लास में पढ़ती थी लेकिन ध्यान नहीं देती थी, मेरी भी पड़ोसी होने के नाते मैं उसे प्रोजेक्ट्स दे दिया करती थी, उस शाम वह उसे लेकर आई और उसका नाम ” प्रेम ” है कहकर संबोधित करते हुए बोली ये मेरे दूर के भाई हैं कुछ दिन हमारे साथ ही रहेंगे, ” मैंने हाथ जोड़कर अभिवादन किया वो मुस्कुरा कर बोले – “हम सब हमउम्र है तो हाय हेलो से काम चल सकता है ” मैं अपनी बेवकूफी पर मुस्कुराई और बैठने को बोलकर हम बातों में मशगूल हो गए, सच कहूं ! तो ये जिंदगी का पहला अनुभव था कि किसी अंजान शख्स के साथ मैं इतनी जल्दी घुल-मिल गयी और मुझे अच्छा भी लगा, ऐसे ही धीरे धीरे हम दोनों आप से तुम तक आ गये, प्रेम भी मेरे साथ बहुत अच्छा व्यवहार करते थे और खुद आगे बढ़कर मेरे लिए कभी कभी कोई चाॅकलेट या टेडीबियर ले आते, मुझे यह सब अच्छा लगने लगा था, कि कोई ऐसा है जो मुझे एहमियत दे रहा है जो मुझे समझता है, पढ़ाई तो समझो जैसे भूल गयी मैं, वो रोज शाम को घर आते, मम्मी-पापा भी घुल मिल गए थे तो कोई दिक्कत नहीं थी, एक दिन ऐसे ही ये मुझे बाज़ार ले गए और एक कैफे में काॅफी पीते हुए प्रेम बोले – स्मृति देखो मैं जानता हूं ये बात तुम्हारे लिए अजीब सी है , लेकिन मैं अब अपने दिल की बात कहे बिना नहीं रह सकता, मैं सतर्क हो गई कि ये किस विषय में बात कर रहे हैं? , उन्होंने हिम्मत करके अचानक मेरा हाथ पकड़ लिया और बोले -” स्मृति! मैं तुमसे प्यार करता हूं, मैं नहीं जानता कबसे, लेकिन ये सच है मुझे तुम बहुत अच्छी लगती हो, तुम्हारी बातें, तुम्हारी ये मुस्कान, तुम्हारी ये प्यारी आंखें, मुझे तुम्हारी तरफ खिंचती है, मैं चाहकर भी तुम्हें नजरंदाज नहीं कर सकता, प्लीज़ मुझे अपना लो, उनकी बातें मेरे दिल दिमाग में असर कर रही थी, सच्चाई तो यह है कि मैं भी उन्हें पसंद करने लगी थी, लेकिन कहने की हिम्मत मुझमें नहीं थी, जब उन्होंने अपने जज्बात को मेरे सामने रखा तो मैं कुछ पल सुन्न हो गई फिर हौले से उन्होंने हाथ को दबाया तो मैं अपने होशोहवास में आईं और मुस्कुरा कर कहा – “प्रेम सच तो यह है कि मैं भी आपसे प्यार करती हूं, लेकिन कहने की हिम्मत नहीं हुई कभी ” ये सुनकर वो हल्के से मुस्कुराए और मेरे हाथों को अपने लबों तक ले गए और उन्हें चूम लिया, सच कहो तो एक अजीब सी हलचल मच गई मेरे बदन में, मैंने अपने हाथ खींच लिये वो मुस्कुरा कर मुझे देखते रहे और हम बातें करते हुए सपनों की उड़ान भरने लगे, उस समय मुझे जरा भी पता नहीं था कि ये सब मेरे लिए एक सपने जैसा हो जाएगा, हमारी नजदीकिया बढ़ने लगी और वो मुझे कभी कभी स्वीटी के साथ सिनेमाहॉल भी ले जाते मेरे परिवार से पूछकर, ऐसे ही खुशनुमा मेरे दिन बीत रहे थे, एक शाम प्रेम आए और बोले -” मुझे किसी काम से घर जाना है,हमारी जमीनी कार्यवाही कोर्ट में चल रही है, जिसके लिए मुझे पापा के साथ रहकर सारे कागजात देखने पड़ सकते हैं,हो सकता है मुझे वापस आने में कुछ दिन लग जाए, उनकी बातें सुनकर मेरी आंखों से आंसू निकलने लगे, उन्होंने प्यार से मेरा हाथ थामा और बोले -” स्मृति! तुमसे दूर रहकर मुझे भी अच्छा नहीं लगता लेकिन क्या करूं जाना जरूरी भी तो है, अगर तुम ऐसे रोओगी तो मैं कैसे जा पाऊंगा? प्लीज़ मुझे हंसते हंसते विदा करो, मैं वादा करता हूं जल्दी आने की कोशिश करुंगा, मैं भी उनकी बातों में आ गई और उन्हें मुस्कान बिखेरते हुए विदा किया, मेरा प्यार मेरा साथ मेरी आत्मा तक प्रेम अपने साथ ले गए थे,मेरा किसी चीज में मन नहीं लगता था, बहुत दिन हो गए और प्रेम वापस नहीं आये तो मैं स्वीटी के घर चली गई और बातों ही बातों में उनके बारे में पूछा, स्वीटी ने जो बताया उसे सुनकर मेरी आत्मा तक हिल गई, ऐसा कुछ मेरे साथ होगा 😔 मैंने सपने में भी नहीं सोचा था, उसने बताया कि प्रेम की बीवी प्रेगनेंट थी और उन्हें एक बेटा हुआ है, ये सुनते ही मेरे सपनों का संसार एक क्षण में धराशाई हो गया, प्रेम शादीशुदा थे यह मुझे पता नहीं था और ना ही कभी उन्होंने बताया, मैंने स्वीटी से भी कभी उनके जीवन के बारे में नहीं पूछा था तो किस मुंह से हमारे रिश्ते के बारे में उसे बताती, मैं बिखरी हुई सी किसी तरह अपने घर लौटी और कमरा बंद करके बिस्तर पर सिसकियां लेते हुए रोने लगी, ये कैसा प्यार था मेरा जो सपने सजाती आंखों से दिल में उतर गया और बेशुमार दर्द की अनुभूति दे गया, मैं शिकायत करूं भी तो किससे करुं, वो शख्स जो अजनबी बनकर मेरी जिंदगी में शामिल हुआ और दिल में घर कर गया था, मेरे हिस्से की आत्मा को घायल किया और चला गया, मेरा प्यार जिसे सबकुछ मान बैठी थी वहीं दगा दे गया, कड़वी सच्चाई को सामने रखा और प्रेम से मेरा भरोसा तोड़ दिया…

    ,

  • मेरी चाहत 💗💗💗

    मेरी चाहत 💗💗💗

    पढ़ने का समय : 2 मिनट

    मेरी चाहत… ❤️

     

    मेरी चाहत कोई शोर नहीं,

    जो हर किसी को सुनाई दे।

    ये तो वो खामोश दुआ है,

    जो हर पल बस तुम्हें ही माँगे।

     

    मेरी चाहत तुम्हें पाना भर नहीं,

    तुम्हारे हर दर्द की वजह बनना भी नहीं।

    मेरी चाहत तो बस इतनी है,

    कि तुम्हारी हर मुस्कान की वजह बन सकूँ।

     

    जब भी ज़िंदगी तुम्हें थका दे,

    मैं तुम्हारा सुकून बन जाऊँ।

    जब भी आँखें नम हो जाएँ,

    मैं तुम्हारी हँसी लौटाने की वजह बन जाऊँ।

     

    मेरी चाहत किसी वादे की मोहताज नहीं,

    न किसी रिश्ते के नाम की ज़रूरत है।

    ये तो दिल की वो इबादत है,

    जिसमें बस तुम्हारी खुशियाँ ही मेरी मन्नत हैं।

     

    अगर किस्मत ने हमें साथ लिखा,

    तो हर जन्म तुम्हारा हाथ थामूँगी।

    और अगर बिछड़ना लिखा भी हुआ,

    तो भी हर दुआ में तुम्हारा नाम ही माँगूँगी।

     

    मेरी चाहत तुम हो…

    और शायद हमेशा रहोगे।

    क्योंकि कुछ मोहब्बतें मुकम्मल होकर नहीं,

    दिल में बसकर 

     हमेशा ज़िंदा रहती हैं…! ❤️

  • रिश्तों के बाजार में

    रिश्तों के बाजार में

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

     

    जन्म लेते ही इंसान,

    रिश्तों के एक अनजाने बाज़ार में आ जाता है।

    जहाँ हर रिश्ता,

    अपनी-अपनी कीमत लगाने लगता है।

    माँ हो, बाप हो,

    या भाई-बहन का प्यार,

    वक़्त के साथ अक्सर

    हर रिश्ता अपनी कीमत बताने लगता है।

    जिसके साथ जैसा व्यवहार करो,

    वैसी ही उसकी कीमत तय होने लगती है।

    ज़रा-सी अपनापन कम हो जाए,

    तो रिश्तों की दूरियाँ बढ़ने लगती हैं।

    धीरे-धीरे एहसास पीछे छूट जाते हैं,

    और हिसाब-किताब आगे आ जाता है।

    इस रिश्तों के बाज़ार में

    इंसान अपना संस्कार तक भूल जाता है।

    कौन अपना है, कौन पराया,

    ये भी अक्सर यहीं तय होता है।

    किस रिश्ते की कितनी कीमत है,

    वो इस रिश्तों के बाज़ार में ही दिखता है।

    काश… रिश्ते कीमत से नहीं,

    दिल से निभाए जाते,

    तो शायद दुनिया में

    हर रिश्ता अनमोल कहलाता।

  • मतलबी इंसान..

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    इंसान को

    यूँ ही मतलबी

     

    नहीं कहा जाता,

     

    उसे अपने

    सुख से ज़्यादा,

     

    दूसरे के दुःख में

    मज़ा आता है।

  • सबके हिस्से में नहीं आता है

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

                      “सबके हिस्से में नहीं आता है “ 

     

    ये जमीन ये आसमान 

    ये खुशी ये मुस्कान 

    ये रोटी कपड़ा और मकान

    सबके हिस्से में नहीं आता है, 

    ये प्यार ये एतबार 

    ये आंसू ये इंतजार 

    सुकून भरा हुआ एक इतवार

    सबके हिस्से में नहीं आता है ,

    ये गुड्डा-गुड्डी का खेल 

    ये मुट्ठी में भरने का आसमान 

    सबके हिस्से में नहीं आता है ,

    सबके हिस्से में नहीं आता

    मां की ममता, पिता का प्यार भरा दुलार 

    स्कूल की मस्ती और किताब से प्यार 

    कुछ बच्चों को कीमत चुकानी पड़ती है

    एक एक निवाले के लिए ,

    उनके हिस्से में नहीं आता

    उम्मीदों का दामन और खुशियों का आसमान , 

    कुछ बच्चों को पसीने से तरबतर

    भागदौड़ करनी पड़ती है

    अपने परिवार की कहानी कहने के लिए ,

    क्या देश की उन्नति का स्त्रोत

    इन मासूमों के बचपन का मर्दन करने से होगा 😔🙏..!!

  • हक़ीक़त…

    हक़ीक़त…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    हकीकत की कहानी कहूं या अपने दिल की जुबानी 

    परेशान हूं मैं अपने ही हाथों मजबूर होकर 

    ना चैन आता है दिल को,ना करार है रातों में 

    ये क्या हाल बना लिया है मैंने

    तुमसे बेहद इश्क फरमा के 

    तुम सामने होकर अपने से लगते हो 

    मुझ से दूर जाते ही ना जाने क्यों बेगाने बन जाते हो,

    कहो ये कैसा इश्क है तुम्हारा ,

    इश्क है भी मुझसे या जरिया बन

    कर रह गई हूं सब खेलने का,

    सच कहूं तो अब तकलीफ़ देता है

    मुझे इश्क तुम्हारा , मैं टूट गई हूं बेहद इश्क में,

    ना जाने ये क्या हश्र करेगा आगे,

    हक़ीक़त सामने है फिर भी धोखे में पड़ी हुई हूं ,

    लगता है ये दर्दनाक मौत पसंद आने लगा है मुझे…।।

     

     

     

     

     

     

     

     

     

  • रो गए है…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    उन्हें लगता हम सो गए है… जबकि हम बेहोशी मे खो गए है…

     

    लोगो को लगता हम रोते ही नहीं…

    बिना आंसू लाये जाने कितना रो गए है… 🥹🥹