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श्रेणी: कविता

  • साजन साजन तेरी दुल्हन_तुझको पुकारे_आजा_❤️❤️

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    तेरी राहों में बिछे हैं मेरे अरमान सारे,

    • तेरे बिना अधूरे हैं ये ख्वाब हमारे।

    साजन, तेरी दुल्हन हर पल तुझे ही पुकारे,

    आ जा कि थम जाएँ ये इंतज़ार के किनारे।

    सिंदूर की लकीरों में बस तेरा ही नाम है,

    मेरी हर धड़कन पे लिखा तेरा पैगाम है।

    साजन, तेरी दुल्हन सजी बैठी है चौखट पे,

    आ जा कि तेरे बिना सब कुछ वीरान है।

    भीगी सी पलकों में तेरी तस्वीर बसाई है,

    तेरे ख्यालों से ही ये दुनिया सजाई है।

    साजन, तेरी दुल्हन अब और ना तरसाए खुद को,

    आ जा कि तेरे बिना हर खुशी पर परछाई है।

    रूठी हुई रातें भी तुझसे ही मानेंगी,

    सूनी ये बाहें बस तुझको ही जानेंगी।

    साजन, तेरी दुल्हन तेरे कदमों की आहट सुने,

    आ जा कि ये साँसें अब तुझसे ही चलेंगी।

  • तुम्हें लिखूं

    तुम्हें लिखूं

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    मैं हर दिन सिर्फ तुम्हारे

    नाम से जीतीं हूं ,

    हर लम्हा तुम्हें सोचती हूं  ,

    मैं इस कदर पागल हूं

    इश्क में तुम्हारे ,

    तुम्हीं बोलो मैं तुम्हें छोड़कर

    क्या लिखूं  , मैं लिखूं तुम्हें

    अपने हृदय में जीवंत ख्वाबों को

    साकार करते हुए  ,या लिखूं

    तुम्हारी मधुर मुस्कान को,

    चंचल मन की लालायित रचना

    या लिखूं तुम्हारी आंखों की

    चमकती हुई उज्जवला,

    बताओं तुम ही मेरे साथी

    मैं क्या लिखूं ??? ,

    चित्त की पवित्रता या

    लिखूं तुम्हारी मन की विहवलता,

    तुम बिन सजन अधूरी मेरी

    जिंदगी की रचना है,

    तुम्हें देखूं तुमसे बात करूं

    या लिखूं तुम्हारी लिखी गई रचनाओं को ,

    नहीं! मैं लिखूंगी तुम्हें अपने जीवन में ,

    एक दूसरे की खुशी और संतोष में ,

    मैं लिखूंगी तुम्हें अपने प्रेम में ,

    मैं लिखूंगी तुम्हें अपने हृदय की वेदना में ,

    जिसे समझ कर तुम दूर मुझसे ना जा पाओ .,

    हां! मैं लिखूंगी तुम्हें किसी सुरक्षित

    स्थान में ,जहां कोई ना हो तुम्हारे साथ मेरे बिना,

    लिखूं मैं और तुम मुझे समझ जाओ

    ऐसा मुमकिन एहसास लिखूंगी 

    मैं अपने कतरे कतरे से …!!

  • यादों का झोंका

    यादों का झोंका

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

     

    यादों का झोंका

     

    कितना खूबसूरत होता है,

    किसी की यादों का झोंका,

    वो चाहे हमें भूल भी जाए,

    हम उसे भूल नहीं पाते।

     

    रहे वो दूर कहीं भी,

    हमारी यादों में वही बसता है,

    दिल के हर कोने में

    उसका नाम ही सजता है।

     

    जब यादों का झोंका आता है,

    कभी होंठों पर हँसी ले आता है,

    तो कभी चुपके से

    आँखों को नम कर जाता है।

     

    कुछ पल मीठे बन जाते हैं,

    कुछ दर्द भी दे जाते हैं,

    फिर भी ये यादों के झोंके

    दिल को बहुत भाते हैं।

     

    यादों के इस अनमोल झोंके को

    हम उम्रभर संजोए रखते हैं,

    बीते लम्हों की खुशबू को

    सीने से लगाए रखते हैं।

     

    मरते दम तक इंसान

    अच्छी यादों को याद कर मुस्कुराता है,

    क्योंकि यादों का साथ ही

    हर तन्हाई में काम आता है।

    Lakshmi Kumari…….

     

  • ख्वाबों का आसमान…

    ख्वाबों का आसमान…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    अंदर अंदर खुद से खुद

    ही को सहेजे रखा है,

    हां मैंने अपने हृदय में जीवंत

    ख्वाबों का आसमान समेटे रखा है,

    सकारात्मक ऊर्जा का स्त्रोत है

    नकारात्मक प्रभाव से दूर एक 

    अलग ही जहां सजा के रखा है

    हां मैंने खुद में खुद को ही छुपा

    कर रखा है  , ये मेरी दुनिया है 

    मेरे ख्वाहिशों और प्रेम की दुनिया 

    छल कपट और वीरानियों से

    इसे बहुत दूर रखा है,

    हां मैंने किसी अपने खास के लिए

    ख्वाबों का आसमान बना कर रखा है …!!

     

  • प्रेम वो है…

    प्रेम वो है…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    प्रेम वो नहीं, जो दुनिया को दिखाने का नाम हो,

    प्रेम वो है, जो तन्हाई में भी सिर्फ उसका गुलाम हो।

    दूरी होने पर जो दूसरों में सुकून ढूँढने लगे वो समझौता है,

    प्रेम वो है, जिसके लिए गैर की छुअन भी एक इल्जाम हो।

    ​प्रेम वो नहीं, जो उसूलों की बेड़ियों में दम तोड़ दे,

    और फिर हालात का नाम लेकर हाथ छोड़ दे…

    प्रेम वो है,

    जो पत्थर की दीवारों के बीच भी, मिलने का रास्ता ढूँढ ले।

    ​प्रेम वो नहीं, जो सिर्फ साथ हँसने का वादा करे,

    प्रेम वो है, जो तुम्हारे दर्द की अनुभव तुमसे ज्यादा करे।

    जो टूटकर भी, जुड़ने की सिर्फ एक वजह माँगे,

    और बिखरकर भी, तुम्हारी सलामती की दुआ अदा करे।

    ​चंदर ने चाहा… पर सिर्फ अपने ख्यालों में,

    हकीकत से भागकर, उलझा रहा अपने ही सवालों में…

    ​और सुधा ने?

    ​सुधा ने उस प्रेम को कफ़न की तरह ओढ़ लिया

    जैसे वो कोई ऐसी मन्नत हो,

    जो खुदा ने सुन तो ली, पर कभी पूरी नहीं की।

    गुनाहों का देवता 📖

  • तस्वीर…!!

    तस्वीर…!!

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    मै रख लू़ं तुम्हें अपने पास

    क्या ऐसा मुमकिन है ,

    तुम्हें देखूं तुमसे बात करूं

    ये कहां मेरे लिए मुमकिन है ,

    मेरे हिस्से में तुम्हारी जुदाई आई,

    मैं फिर भी खुश हूं तो क्या हुआ

    जो आंख मेरी भर आई, 

    हालातों का हवाला क्यों देते

    हो जब वफाओं का तुमपें जोर नहीं  ,

    हां ये सच है इश्क ❤️ की

    बीमारी सिर्फ मेरे हिस्से आई ,

    तुम जा रहे हो तो मैं नहीं तुम्हें रोकूंगी 

    बस तुम संग एक आखिरी

    तस्वीर ले लूंगी,

    यादों के झरोखों से जब

    भी याद तुम्हारी आयेगी ,

    अलमारी के कोने से

    निकाल तस्वीर तुम्हारी देख लूंगी …!!

  • तेरे जाने के बाद

    तेरे जाने के बाद

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट
    🎧 कहानी सुनें

    🎧 इस कहानी को सुनें

    तेरे जाने के बाद …!!

    रास नहीं आया मुझको मेरे 

    ही घर का कोई कोना,

    सुबह शाम तलक तुम चहकती थी ,

    जहां दिन और रात ,अब काटने को

    दौड़ता है मुझको मेरा ही घर सलोना,

    नहीं पता था ज़िंदगी तुम बिन

    अंधेरे में चली जाएगी,

    तेरे जाने के बाद  हां तेरे

    जाने के बाद एहसास हुआ

    मुझे कमी तेरी कमी यादों की

    चादर इस तरह तड़पाएगी ,

    तेरे जाने के बाद दिल

    खाली – खाली सा लगता है  ,

    तेरी पनाहों में आने को

    दिल कितना तड़पता है  ,

    आंखों से आंसू मेरे झरझर बहते हैं ,

    तेरे बिन कितना अधूरा हूं ये मुझसे कहते हैं…!!

  • निगाहें👀उनकी भी चेहरे से हटती नही..❤️

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    वो आँखों से यूँ शरारत करती है….💖अपनी अदा से भी कयामत करती है,,,निगाहें👀 उनकी भी चेहरे से हटती नही….💖और वो हमारी नजरों से शिकायत करती है।।❤️🔵🔵🔴🔴❤️❤️❤️🔴❤️🔵🔴🔵❤️

  • उसका भाग्य मे ना होना…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    उसका भाग्य मे ना होना भी भाग्य ही है शायद… ✍️✍️

  • जुड़ शीतल की मधुर छांव

    जुड़ शीतल की मधुर छांव

    पढ़ने का समय : 2 मिनट

    जुड़ शीतल आई है लेकर,

    ठंडी हवाओं का संदेश,

    धूप की तपिश से थके मन को,

    देती है सुकून विशेष।

    सुबह-सुबह जब सूरज झांके,

    नव किरणों का हो आगमन,

    ठंडे जल की कोमल बूंदें,

    कर दें मन का हर स्पंदन।

    आम के पत्तों से टपके जल,

    हर आंगन को हरियाली दे,

    स्नेह भरे उस ठंडे छींटे से,

    रिश्तों में फिर खुशहाली दे।

    मां के हाथों का वो पानी,

    जब सिर पर हल्के से गिरता है,

    जैसे हर दुख, हर चिंता को,

    धीरे-धीरे वो हरता है।

    बाबा की ममता, दादी की सीख,

    सबमें बसती ठंडी छांव,

    हर बूंद में आशीष समाई,

    हर दिल में जगती नई चाह।

    छोटे-बड़े सब साथ मिलें,

    हंसी-खुशी का मेला हो,

    जुड़ शीतल के इस पर्व में,

    हर दिल में प्रेम का रेला हो।

    मिट्टी की खुशबू भी कहती,

    अब तो मौसम बदला है,

    शीतलता के इस उत्सव में,

    जीवन ने रंग नया भरा है।

    ना कोई गिला, ना कोई शिकवा,

    बस अपनापन का एहसास,

    जुड़ शीतल सिखा जाती है,

    ठंडक में छुपा है विश्वास।

    धरती भी जैसे मुस्काए,

    जब जल से उसका तन भीगे,

    हर बूंद में छुपा आशीष,

    जीवन को नव रंगों से सींचे।

    खेतों में हरियाली लहराए,

    नदियों में मधुर संगीत बहे,

    हर जन-मन में शांति बस जाए,

    जीवन के हर पल रंग सहे।

    सांझ ढले जब दीप जलें,

    मन में मधुर उजियारा हो,

    दिन भर की उस ठंडी छाया का,

    हर चेहरे पर नज़ारा हो।

    पुरखों की ये प्यारी परंपरा,

    आज भी दिलों में बसती है,

    हर साल ये आकर हमको,

    अपनों से फिर जोड़ती है।

    नव जीवन का संदेश लिए,

    हर दुख को पीछे छोड़ती है,

    जुड़ शीतल की हर एक बूँद,

    मन की थकान को तोड़ती है।

    जुड़ शीतल का ये त्यौहार,

    सिर्फ रिवाज नहीं, एक भावना है,

    प्यार, स्नेह और शांति का,

    हर दिल में बसता खजाना है।

    चलो मिलकर इसे मनाएं,

    मन में प्रेम का दीप जलाएं,

    ठंडे जल की हर एक बूँद से,

    जीवन को सुंदर बनाएं। 🌿💧