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प्रेम वो है…

पढ़ने का समय : < 1 मिनट

प्रेम वो नहीं, जो दुनिया को दिखाने का नाम हो,

प्रेम वो है, जो तन्हाई में भी सिर्फ उसका गुलाम हो।

दूरी होने पर जो दूसरों में सुकून ढूँढने लगे वो समझौता है,

प्रेम वो है, जिसके लिए गैर की छुअन भी एक इल्जाम हो।

​प्रेम वो नहीं, जो उसूलों की बेड़ियों में दम तोड़ दे,

और फिर हालात का नाम लेकर हाथ छोड़ दे…

प्रेम वो है,

जो पत्थर की दीवारों के बीच भी, मिलने का रास्ता ढूँढ ले।

​प्रेम वो नहीं, जो सिर्फ साथ हँसने का वादा करे,

प्रेम वो है, जो तुम्हारे दर्द की अनुभव तुमसे ज्यादा करे।

जो टूटकर भी, जुड़ने की सिर्फ एक वजह माँगे,

और बिखरकर भी, तुम्हारी सलामती की दुआ अदा करे।

​चंदर ने चाहा… पर सिर्फ अपने ख्यालों में,

हकीकत से भागकर, उलझा रहा अपने ही सवालों में…

​और सुधा ने?

​सुधा ने उस प्रेम को कफ़न की तरह ओढ़ लिया

जैसे वो कोई ऐसी मन्नत हो,

जो खुदा ने सुन तो ली, पर कभी पूरी नहीं की।

गुनाहों का देवता 📖

Comments

“प्रेम वो है…” के लिए प्रतिक्रिया 2

  1. Manoj Divana Namaste Story World अवतार

    Bahut sundar 🌹🌹
    Namaste Story World me Aapka welcome hai Anu ji pahli rachana post karne ke liye bahut bahut dhanyavad Aise hi Likhte rahiye aur aage badhte Rahiye bahut bahut shubhkamana 💐💐🌹🌹

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