एक प्यारी सी बिंदी…!
बिखरी सी….सँवरी सी…ज़ुल्फें…!
एक झुमका बहका हुआ… और !
हल्की सी मुस्कान तुम्हारे होंठों पर…!!
*तुम समझ नहीं आती लेकिन…!*
*कसम से.. मुझे, पसंद बहुत आती हो…!!!❤️💞*
NSW अनुभवी लेखक -🥇
जो हमसे दूर हुए..
हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏
एक प्यारी सी बिंदी…!
बिखरी सी….सँवरी सी…ज़ुल्फें…!
एक झुमका बहका हुआ… और !
हल्की सी मुस्कान तुम्हारे होंठों पर…!!
*तुम समझ नहीं आती लेकिन…!*
*कसम से.. मुझे, पसंद बहुत आती हो…!!!❤️💞*
NSW अनुभवी लेखक -🥇
जो हमसे दूर हुए..
हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏
शुरुआत कुछ यूँ हुई थी,
जैसे सुबह में पहली किरण उतरती है,
सूखे मन के आँगन में
धीरे-धीरे कोई बारिश बिखरती है।
तेरी हँसी ने छू लिया था
मेरे खामोश लफ़्ज़ों का जहान,
और फिर हर धड़कन कहने लगी —
“तू ही मेरी मंज़िल, तू ही मेरी पहचान।”
तेरी आँखों में मैंने
अपने हर ख़्वाब का घर देखा,
तेरे साथ हर मौसम में
प्यार का खिलता असर देखा।
कभी रूठना, कभी मनाना,
कभी बातों में रात गुज़र जाना,
तेरी मेरी प्रेम कहानी में
हर पल था जैसे कोई अफ़साना।
जब दुनिया ने सवाल किए,
हमने मुस्कुराकर साथ निभाया,
हर मुश्किल की धूप में भी
एक-दूजे को छाँव बनाया।
और अब जब वक़्त की किताब में
कई यादों के फूल सजे हैं,
तेरी मेरी प्रेम कहानी के
हर लम्हे आज भी ताज़ा खड़े हैं।
अंत भी ऐसा हो हमारा,
कि साँसें थम जाएँ मगर प्यार न रुके,
तेरा हाथ मेरे हाथ में हो
और दिल आख़िरी धड़कन तक तुझी को पुकारे।
क्योंकि तेरी मेरी प्रेम कहानी
सिर्फ़ शब्दों की बात नहीं,
ये वो एहसास है

NSW. – अनुभवी लेखक -🥇
चाहतों का ऊंचा मुकाम रखती हूं
शब्दो के जरिए अनेकों एहसास लिखती हूँ।
अगर बात मोहब्बत की हैं तो बताओ ना
या फिर कोई गीत हैं तो गुनगुनाओ ना
कब से सब मैं ही कहे जा रहा हूँ
तुम भी कुछ दिल की बात सुनाओ ना
वहां से कहोगी तो अच्छा नहीं लगेगा
दूर क्यों बैठी हो , पास ही आ जाओ ना
मैं कब से बेचैन हूँ जानने को
दिल में क्या छुपाया हैं , जरा दिखाओ ना
इजहार का सोच कर आई हो , तो कहो
एक बार मुझे भी अपने सीने से लगाओ ना…
कुछ तो कहो यु चुप ना रहो.. मेरी बातो को तो समझ पाओ न…
NSW अनुभवी लेखक -🥇
जो हमसे दूर हुए..
हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏
किसी ने पूछा मुझसे
“पसंदीदा औरत कैसी होती है?”
मैंने हँसकर कहा
वो,
जिससे बहस करते-करते भी
आख़िर में दिल उसी की बात मान ले।
जिसकी नाराज़गी
दिन भर जेब में रखे किसी पत्थर जैसी लगे…
हर काम के बीच
चुभती हुई।
और जिसकी हँसी
थके हुए दिन पर
बारिश की पहली बूँद जैसी उतरती हो।
वो,
जिसके होते हुए
घर सिर्फ़ घर नहीं रहता,
एक सुकून बन जाता है।
जिसे दुख दो
तो सबसे पहले
अपनी ही आँखें झुक जाएँ।
जिसकी कुछ बातें
होंठों पर मुस्कान रख जाएँ,
और कुछ ख़ामोशियाँ
रात भर जगाए रखें।
पसंदीदा औरत
सिर्फ़ ख़ूबसूरत नहीं होती…
वो धीरे-धीरे
तुम्हारी आदत बन जाती है।
तुम्हारी रूह में
ऐसे उतरती है
जैसे चाय में घुली शक्कर
दिखती नहीं,
पर हर घूँट में महसूस होती है।
और फिर एक दिन
उसके बिना सब कुछ तो होता है…
मगर ज़िंदगी नहीं होती।
…….. ✍️
किसी ने बहुत खूबसूरत कहीं अपनी बातें… जहाँ भर की गहराई समेटी है सारी जज्बाते…
NSW अनुभवी लेखक -🥇
जो हमसे दूर हुए..
हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏

कुकी ने हिम्मत जुटाई और खरगोशों की ओर बढ़ी। “नमस्कार, मैं कुकी हूँ, क्या मैं आपके साथ खेल सकती हूँ?” उसने शर्माते हुए पूछा। खरगोशों ने उसे घूरा और फिर हंसते हुए कहा, “तुम इतनी धीमी हो, हम तुम्हारे साथ कैसे खेल सकते हैं?”
कुकी का दिल टूट गया, लेकिन उसने हार नहीं मानी। “मैं धीमी हो सकती हूँ, लेकिन मैं आपके साथ खेल का एक नया तरीका ढूंढ सकती हूँ,” उसने कहा। “क्या आप मुझे मौका देंगे?”
बंटी और चंचल एक-दूसरे की ओर देखे और लम्बी श्वास लेते हुए बंटी ने कहा, “ठीक है, हम तुम्हें एक मौका देंगे। लेकिन तुम्हें हमें ज़रूर दिखाना होगा कि तुम हमारी तरह खेल सकती हो।” चंचल ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ, बस हमें दिखाओ कि तुम खेल में कैसे शामिल हो सकती हो।”
कुकी ने खुशी से सहमति जताई। “धन्यवाद, दोस्तों! मैं पूरी कोशिश करूँगी!” अब कुकी के मन में उत्साह भर गया था। उसने सोच लिया कि उसे अपनी ताकत दिखाने का सही मौका मिल गया है। उसने तुरंत एक योजना बनाई।
कुकी ने सोचा कि सबसे पहले उन्हें एक ऐसा खेल खेलना चाहिए जिसमें धैर्य और रणनीति दोनों की आवश्यकता हो। “चलो, हम एक तनावपूर्ण दौड़ का आयोजन करते हैं!” उसने प्रस्ताव रखा। “हम दौड़ते हुए एक दूसरे को कुछ संकेत देंगे और उसके अनुसार खेलेंगे।”
सभी जानवरों को यह विचार पसंद आया क्योंकि इस खेल में उन्हें अंततः अपनी योग्यताओं का इस्तेमाल करने का मौका मिल रहा था। कुकी ने गेम के नियम स्थापित किए:
1. सभी प्रतिस्पर्धियों को एक निश्चित बिंदु से दौड़ना होगा, जो पूरे जंगल में होगा।
2. जहाँ भी रास्ते में रुकावट आएगी, उन्हें बिना भागे सही रास्ता ढूंढना होगा।
3. अंत में, सभी ko मिलकर सुराग भेड़ने होंगे और अपने-अपने रास्ते पर पहुँचने का प्रयास करना होगा।
“यहाँ एक महत्वपूर्ण बात है,” कुकी ने कहा। “हमें धैर्य से काम लेना चाहिए और एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए। जो भी पहले पहुंचा, उसे विजेता का नाम मिलेगा, लेकिन सच्चा विजेता वो होगा जो दूसरों की मदद करेगा।”
खरगोशों ने विचार किया और फिर उनमें से बंटी ने कहा, “अच्छा, यह तो दिलचस्प लग रहा है। चलो देखते हैं कि क्या तुम यह कर सकती हो।” चंचल ने भी उत्साहित होते हुए हंसते हुए कहा, “हमें तुम्हारी मदद से यह देखना होगा कि तुम कितनी अच्छी हो!”
खेल का आरंभ हुआ और सभी जानवर अपने-अपने स्थानों पर खड़े हो गए। कुकी ने सभी को बताना शुरू किया कि उन्हें शुरुआत में क्या करना है। जैसे ही दौड़ शुरू हुई, बंटी और चंचल तेज़ी से दौड़ने लगे। कुकी अपनी धीमी गति के साथ उनके पीछे चलने लगी।
दौड़ में पहले ही मोड़ पर ज़मीन में गड्ढे थे। बंटी और चंचल ने सर्किट को चिह्नित किया और पहले ही आगे बढ़ गए। लेकिन कुकी ने देखा कि गड्ढों के पास एक ऐसा रास्ता था जो दोनों जानवरों ने नहीं देखा। वह गड्ढों को चकमा देकर उस रास्ते पर चलने लगी।
जैसे ही वह गड्ढों को पार कर रही थी, उसके मन में एक विचार आया: “यह मेरी धीमी गति का फायदा है!” इसने उसे यह समझने में मदद की कि कभी-कभी धीमे चलने का मतलब यह नहीं होता कि कोई पीछे रह गया है।
आखिरकार, उसने मोड़ पर पहुँचकर देखा कि बंटी और चंचल एक साथ में खड़े थे और अपने आगे के रास्ते पर विचार कर रहे थे। कुकी ने खुशी-खुशी वहाँ पर पहुँचकर कहा, “मैंने एक और रास्ता देखा जो हमें ज्यादा तेज़ी से आगे बढ़ा सकता है। हमें वहाँ से चलना चाहिए।”
बंटी और चंचल ने कुकी की बात सुनी और उसका ध्यानपूर्वक गौर किया। “तुम सच में सोच रही हो, कुकी!” बंटी ने कहा। “हम बस अपनी गति में चलने के चक्कर में इसे देख नहीं पाए।” चंचल ने सहमति जताते हुए कहा, “हाँ, चलो देखते हैं कि यह रास्ता हमें कहाँ ले जाता है।”
कुकी ने संकेत किया और वे सभी मिलकर उस नए रास्ते पर चलने लगे। यह रास्ता थोड़ा कठिन था, लेकिन कुकी की धारणा और उसके धैर्य ने उन्हें जल्दी ही सही दिशा में पहुँचाने में मदद की। जब वे आगे बढ़ रहे थे, तो कुकी ने ध्यान दिया कि रास्ते में कई ऐसे बाधाएँ थीं, जिनका सामना करना पड़ा।
“हमें एक बड़ा पत्थर पार करना है,” चंचल ने कहा और तुरंत खुद को दौड़कर पत्थर पर चढ़ा दिया। बंटी ने भी उसका अनुसरण किया। लेकिन कुकी अपने धीमे कदमों से पहले झुक गई और सोचने लगी, “क्या मैं इससे आगे निकलने के लिए कोई और उपाय कर सकती हूँ?”
उसने पत्थर के पीछे झुककर देखा और पाया कि वहाँ एक जगह थी जहाँ से वे पत्थर के चारों ओर जा सकते थे। “दोस्तों, यहाँ एक और रास्ता है!” उसने शोर नहीं मचाते हुए कहा। “यहाँ से हम पत्थर के चारों ओर जा सकते हैं।”
बंटी और चंचल ने एक पल के लिए उसे घूरा, लेकिन फिर वे उसके साथ उस हिस्से में गए। धीरे-धीरे और सावधानी पूर्वक वे सभी उस नई रूट से आगे बढ़ने लगे। अब उनमें से कोई भी और तेजी से दौड़ नहीं रहा था, बल्कि सभी कुकी की सुझाई दिशा का अनुसरण कर रहे थे।
जैसे-जैसे दौड़ आगे बढ़ी, कुकी के द्वारा बताई गई हर छोटी सलाह ने उन्हें और अधिक समर्थ बना दिया। उन्होंने समझा कि कुकी की धीमी गति में भी एक विशेषता थी – साहस, धैर्य और सहानुभूति। कुकी ने न केवल अपनी गति से दूसरों को मदद की, बल्कि उसने उन्हें यह भी बताया कि कैसे सहकारिता सबसे महत्वपूर्ण है।
अब जंगली कौन सा जानवर सबसे तेज दौड़ रहा था, इस पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, उन्होंने अपनी ताकतों का सही उपयोग करना शुरू कर दिया। जब भी कोई रुकावट आती, वे मिलकर उसे पार कर जाते। कुकी की बुद्धिमता और सृजनात्मकता ने उन्हें उन बाधाओं को पार करने में मदद की जो पहले कठिन लग रही थीं।
“धन्यवाद, कुकी, तुमने हमें नई रणनीतियों के बारे में बताया!” चंचल ने चहकते हुए कहा। “तुमने साबित कर दिया कि केवल तेज़ दौड़ने से ही नहीं, दोस्तों को मदद कर के भी हम जीत सकते हैं।”
आख़िरकार, जब वे दौड़ समाप्त करने के करीब पहुँच गए, एक तेज़ झरने का भाग उनके सामने आया। बंटी और चंचल थोड़े चिंतित दिखे। “हम इसे कैसे पार करेंगे? हम तैर नहीं सकते!” बंटी ने कहा।
कुकी ने सोचा और फिर कहा, “हम इसे एक-दूसरे की मदद से पार कर सकते हैं। तुम दोनों उस ओर कूदो, मैं तुम्हें एक मजबूत तने से पकड़ने में मदद करूँगी।”
बंटी और चंचल ने एकजुट होकर काम किया और कुकी की योजना के अनुसार पहुँच गए। कुकी ने धीरे-धीरे तने पर चढ़ाई की और अंत में दोनों को सुरक्षित पार कर दिया। अब उन्हें एक पल के लिए कुकी की योजना के बिना जीत की कोई उम्मीद नहीं

NSW अनुभवी लेखक -🥇
माँ की ममता और बलिदान की एक छोटी और भावुक कहानी:
एक बेटा अपनी माँ से बहुत नफरत करता था क्योंकि उसकी माँ की एक आँख नहीं थी। उसे अपनी माँ के ‘अधूरे चेहरे’ से शर्म आती थी। वह बड़ा हुआ, खूब पढ़ा-लिखा और शहर जाकर एक बड़ा आदमी बन गया। उसने शादी कर ली और अपनी माँ को गाँव में ही अकेला छोड़ दिया।
सालों बाद, जब माँ अपने पोते-पोतियों से मिलने शहर पहुँची, तो बेटे ने उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया और चिल्लाकर कहा, “तुम यहाँ क्यों आई हो? तुमने मेरे बच्चों को डरा दिया, यहाँ से चली जाओ!”
माँ चुपचाप वापस लौट गई। कुछ महीनों बाद माँ की मृत्यु हो गई। जब बेटा गाँव पहुँचा, तो उसे माँ की एक चिट्ठी मिली, जिसमें लिखा था:
”मेरे प्यारे बेटे, शायद तुम्हें याद नहीं, पर जब तुम बहुत छोटे थे, तब एक एक्सीडेंट में तुम्हारी एक आँख फूट गई थी। एक माँ होने के नाते मैं तुम्हें एक आँख से नहीं देख सकती थी, इसलिए मैंने अपनी एक आँख तुम्हें दे दी। मुझे गर्व है कि तुम मेरी आँख से इस खूबसूरत दुनिया को देख रहे हो।”
बेटा फूट-फूट कर रोने लगा, लेकिन अब माँ वापस आने वाली नहीं थी।
सीख (Moral)
माँ का प्यार निस्वार्थ होता है। हम अक्सर उनकी अहमियत तब समझते हैं जब वो हमसे दूर चली जाती हैं। समय रहते उनके प्यार और बलिदान का सम्मान करें।
NSW अनुभवी लेखक -🥇
जो हमसे दूर हुए..
हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏
खुद को थोड़ा समय देकर देखो,
तुम्हारी अपनी ही दुनिया सबसे हसीन लगेगी…
जो सुकून तुम ढूंढते फिरते हो,
वो तुम्हारे अंदर ही मुस्कुरा रहा है!!
NSW अनुभवी लेखक -🥇
जो हमसे दूर हुए..
हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏
“सच्चा प्रेम शब्दों से नहीं,
समर्पण और एहसास से दिखाई देता है।
जिस रिश्ते में सम्मान, विश्वास और अपनापन हो,
वहीं प्रेम जीवन को खूबसूरत बना देता है।” ❤️
प्यार केवल पाने का नाम नहीं,
बल्कि किसी की खुशी में खुद को भूल जाने का एहसास है।
NSW अनुभवी लेखक -🥇
जो हमसे दूर हुए..
हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏
तू बैठ सामने
*मैं इश्क़ का इज़हार करता हूँ,*
तू माँगे चाँद
*मैं तारे भी तेरे नाम करता हूँ,*
कभी नाराज़ मत होना मुझसे,
मैं तेरी चाहत की ज़ंजीरों में
*खुद को गिरफ़्तार करता हूँ…!!*
NSW अनुभवी लेखक -🥇
जो हमसे दूर हुए..
हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏