तू बैठ सामने
*मैं इश्क़ का इज़हार करता हूँ,*
तू माँगे चाँद
*मैं तारे भी तेरे नाम करता हूँ,*
कभी नाराज़ मत होना मुझसे,
मैं तेरी चाहत की ज़ंजीरों में
*खुद को गिरफ़्तार करता हूँ…!!*
NSW अनुभवी लेखक -🥇
जो हमसे दूर हुए..
हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏
तू बैठ सामने
*मैं इश्क़ का इज़हार करता हूँ,*
तू माँगे चाँद
*मैं तारे भी तेरे नाम करता हूँ,*
कभी नाराज़ मत होना मुझसे,
मैं तेरी चाहत की ज़ंजीरों में
*खुद को गिरफ़्तार करता हूँ…!!*
NSW अनुभवी लेखक -🥇
जो हमसे दूर हुए..
हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏
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