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मे खुद को गिरफ्तार करता हु…

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तू बैठ सामने

*मैं इश्क़ का इज़हार करता हूँ,*

 

तू माँगे चाँद

*मैं तारे भी तेरे नाम करता हूँ,*

 

कभी नाराज़ मत होना मुझसे,

मैं तेरी चाहत की ज़ंजीरों में 

*खुद को गिरफ़्तार करता हूँ…!!*

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