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टैग: प्यार

  • ख्वाबों का आसमान…

    ख्वाबों का आसमान…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    अंदर अंदर खुद से खुद

    ही को सहेजे रखा है,

    हां मैंने अपने हृदय में जीवंत

    ख्वाबों का आसमान समेटे रखा है,

    सकारात्मक ऊर्जा का स्त्रोत है

    नकारात्मक प्रभाव से दूर एक 

    अलग ही जहां सजा के रखा है

    हां मैंने खुद में खुद को ही छुपा

    कर रखा है  , ये मेरी दुनिया है 

    मेरे ख्वाहिशों और प्रेम की दुनिया 

    छल कपट और वीरानियों से

    इसे बहुत दूर रखा है,

    हां मैंने किसी अपने खास के लिए

    ख्वाबों का आसमान बना कर रखा है …!!

     

  • प्रेम वो है…

    प्रेम वो है…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    प्रेम वो नहीं, जो दुनिया को दिखाने का नाम हो,

    प्रेम वो है, जो तन्हाई में भी सिर्फ उसका गुलाम हो।

    दूरी होने पर जो दूसरों में सुकून ढूँढने लगे वो समझौता है,

    प्रेम वो है, जिसके लिए गैर की छुअन भी एक इल्जाम हो।

    ​प्रेम वो नहीं, जो उसूलों की बेड़ियों में दम तोड़ दे,

    और फिर हालात का नाम लेकर हाथ छोड़ दे…

    प्रेम वो है,

    जो पत्थर की दीवारों के बीच भी, मिलने का रास्ता ढूँढ ले।

    ​प्रेम वो नहीं, जो सिर्फ साथ हँसने का वादा करे,

    प्रेम वो है, जो तुम्हारे दर्द की अनुभव तुमसे ज्यादा करे।

    जो टूटकर भी, जुड़ने की सिर्फ एक वजह माँगे,

    और बिखरकर भी, तुम्हारी सलामती की दुआ अदा करे।

    ​चंदर ने चाहा… पर सिर्फ अपने ख्यालों में,

    हकीकत से भागकर, उलझा रहा अपने ही सवालों में…

    ​और सुधा ने?

    ​सुधा ने उस प्रेम को कफ़न की तरह ओढ़ लिया

    जैसे वो कोई ऐसी मन्नत हो,

    जो खुदा ने सुन तो ली, पर कभी पूरी नहीं की।

    गुनाहों का देवता 📖

  • निभा नहीं सकते

    निभा नहीं सकते

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    तुम निभा नहीं सकते, तो हम ज़ाहिर क्यों करें,

    तुम चार कदम चल नहीं सकते, तो हम हाथ क्यों थामें,

    • एक तरफ है प्यार मेरा,

    तो इसे एक तरफ ही क्यों ना रहने दें।

  • एक गलती

    एक गलती

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    सौरभ कॉलेज का बिगड़ा हुआ लड़का था, जिसे पढ़ाई में कोई रुचि नहीं थी। वो हमेशा क्लास में लेट आता और पढ़ाई से ज्यादा समय नशे और दोस्तों के साथ बिताता था। एक दिन, कॉलेज में एक नया लड़का आया, जिसका नाम आकाश था। आकाश बेहद गंभीर और संजीदा था, लेकिन उसकी सोच और व्यवहार में एक अलग तरह की गहराई थी।

    आकाश ने सौरभ को पहले दिन ही देखा और समझा कि वह एक कठिन दौर से गुजर रहा है। उसने सौरभ से दोस्ती करने का फैसला किया। शुरुआत में सौरभ ने इसे हल्के में लिया, लेकिन आकाश की मेहनत और दोस्ती ने धीरे-धीरे उसका मन बदल दिया। आकाश ने सौरभ को समझाया कि जीवन में सही दिशा में चलना कितना ज़रूरी है और पढ़ाई की अहमियत को जाने बिना भविष्य को संवारना मुश्किल है।

    एक दिन, आकाश ने सौरभ को एक किताब दी और कहा, “ये किताब तुझे सोचने पर मजबूर करेगी।” सौरभ ने शुरुआत में अनमने तरीके से पढ़ना शुरू किया, लेकिन जैसे-जैसे वह पढ़ता गया, उसके अंदर की जिज्ञासा जाग गई। आकाश ने उसे न केवल पढ़ाई की दिशा में प्रेरित किया, बल्कि उसे अपनी जिंदगी के प्रति नई दृष्टि भी दी।

    एक दिन सौरभ ने आकाश से कहा चलो क्लब चलते हैं आकाश तो माना करते है लेकिन सौरभ के जिंदा करने पर वो चला जाता हैं। लेकिन ओह सौरभ से एक भूल हो जाती है मजाक मजाक में उसने आकाश को दारू पीला देता है

    सौरभ ने जब देखा कि आकाश धीरे-धीरे नशे के असर में डूबता जा रहा है, तो उसे यह एहसास हुआ कि उसकी ये मजाकिया हरकत कहीं न कहीं उनकी दोस्ती के लिए खतरा बन गई है। शुरू में तो वह सोचता रहा कि वह बस थोड़ी मस्ती कर रहा है, लेकिन जैसे-जैसे आकाश की स्थिति बिगड़ती गई, सौरभ को समझ में आया कि यह मजाक की सीमा से बाहर जा चुका है।

    उसने जल्दी से आकाश को पकड़ा और उसे बाथरूम ले जाकर उसे पानी पीने के लिए कहा। “आकाश, मैं माफ़ी चाहता हूँ, मैं जानता था कि मैंने मजाक किया, लेकिन मैंने तुम्हें बहुत अधिक पीने दिया। तुम ठीक हो जाओ,” सौरभ ने कहा, उसकी आवाज़ में चिंता थी।

    आकाश ने मुस्कुराते हुए कहा, “कोई बात नहीं, सौरभ। लेकिन तुम समझते हो कि ये मजाक और जिम्मेदारी का मिक्सचर नहीं होता है। मैं जानता था कि तुम मुझे उत्साहित करने के लिए ये कर रहे हो, लेकिन कभी-कभी मजाक अपनी सीमाएं पार कर जाता है।”

    आकाश की तबियत धीरे धीरे ओर बिगड़ती जा रही थी।

    सौरभ ने आकाश को बाथरूम में लिटाया और उसके माथे पर पानी का छींटा मारकर उसे जगाने की कोशिश की। आकाश की आंखें थकी-थकी थीं, और उसके शरीर में झुनझुनी आ चुकी थी। सौरभ को भय लगने लगा था। जब उसे लगा कि आकाश बेहोश हो रहा है, उसने तुरंत उसे उठाने की कोशिश की, लेकिन आकाश की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी।

    “आकाश! तुम्हें सुनाई दे रहा है? तुम ठीक हो जाओ!” सौरभ ने चिल्लाया। वह बेताब हो गया था, और उसके अंदर एक भयावह डर समाने लगा। आकाश की तबियत और बिगड़ती गई, और अंततः उसे पता चला कि उसके मजाक ने एक गंभीर मोड़ ले लिया है। उसकी उंगलियां कांपने लगीं और उसका दिल तेजी से धड़कने लगा।

    सौरभ बिना समय गंवाए, अपने दोस्त को अपने कंधों पर लेकर बाहर की ओर भागा। क्लब का माहौल अब पूरी तरह बदल चुका था। सभी लड़के-लड़कियों की नजरें उन पर थी, और कुछ लोग उनकी मदद के लिए आए। “क्या हुआ? क्या उसने कुछ खाया या पीया?” एक छात्र ने पूछा।

    “वो ठीक नहीं है! उसे जल्दी अस्पताल लेजाने की जरूरत है!” सौरभ ने तेजी से उत्तर दिया, उसके गले में एक भारी भावुकता थी। भीड़ में से कुछ छात्र मदद के लिए आगे बढ़े और उन्होंने आकाश को सहारा दिया। सौरभ ने अपने दोस्तों को कहा, “किसी को एम्बुलेंस बुलाने दो! हमें जल्दी करना होगा!”

    कुछ ही क्षणों में, एम्बुलेंस वहां पहुंची। सौरभ ने आकाश को सारा ध्यान देकर एम्बुलेंस में लिटाया। उसकी आंखों में आंसू थे, और दिल में पछतावा। “मैंने तुम्हें इस हालत में नहीं देखना चाहा था, आकाश,” वह बुदबुदाया। आकाश की आंखें अब आधी बंद थीं, लेकिन उसने धीरे से सौरभ को देखा।

    “सौरभ,” उसने मुश्किल से कहा, “यह तुम्हारी गलती नहीं है। लेकिन हम सबको अपनी सीमाएं जाननी चाहिए।”

    सौरभ ने गहरी सांस लेते हुए कहा, “मैंने तुम्हें समझने की बजाय मजाक में लेने की गलती की। मैं नहीं जानता था कि यह सब इतनी गंभीरता से बदल जाएगा।” वह खुद को कोसने लगा। एम्बुलेंस में डॉक्टर ने जांच शुरू की, और सौरभ ने अपनी दीर्घकालिक चिंता को बाहर नहीं आने दिया।

    जब एम्बुलेंस अस्पताल पहुंची, तो सौरभ आकाश के
    माथे पर हाथ रखे हुए उसके साथ आया। अस्पताल के अंदर, डॉक्टर और नर्सों ने तुरंत आकाश का इलाज शुरू किया। सौरभ की धड़कनें तेजी से चल रही थीं। वह इंतज़ार के दौरान अपने किए पर पछताने लगा। उसने सोचा, “अगर मैंने उस दिन मजाक नहीं किया होता, तो आज यह सब नहीं होता।”

    कुछ समय बाद, एक डॉक्टर ने आकर सौरभ से कहा, “उसकी हालत स्थिर है, लेकिन उसे कुछ समय की ज़रूरत होगी। हम उसे सामान्य स्थिति में वापस लाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।” सौरभ ने राहत की सांस ली, लेकिन उसका दिल अभी भी भारी था।

    आकाश थोड़ी देर बाद होश में आया। उसने धीरे-धीरे आँखें खोलीं और सौरभ को देखा। “सौरभ, क्या हुआ?” उसने मिचली आवाज़ में पूछा।

    “तुम ठीक हो, लेकिन तुमने बहुत ज़्यादा पी लिया था। मुझे माफ कर दो, मैंने तुम्हारे साथ जो किया वो गलत था,” सौरभ ने कहा, उसकी आँखों में आँसू थे।

    आकाश ने मुस्कुराकर कहा, “मैं जानता हूँ, तुमने क्या सोचा। लेकिन याद रखो, ज़िन्दगी में मजाक और जिम्मेदारी के बीच में एक सही संतुलन होना चाहिए। हर बात में सीमाएं होती हैं।”

    सौरभ ने सिर झुकाया और सोचा कि आकाश की सोच कितनी मज़बूत है, भले ही वह खुद मुश्किल में था। “मैंने तुम्हें समझा नहीं, दोस्त। कभी-कभी हम अपनी मस्ती के लिए दूसरों को खतरे में डालते हैं।”

    आकाश ने कहा, “जो हुआ, वह हुआ। हम समझने लगे हैं कि हमारी दोस्ती का क्या महत्व है। हम एक-दूसरे के लिए क्या कर सकते हैं, यह जानना ज्यादा ज़रूरी है।”

    अस्पताल में कुछ समय बिताने के बाद, आकाश ठीक होने लगा। इस घटना ने सौरभ को गहराई से प्रभावित किया। उसने पढ़ाई में भी ध्यान देना शुरू कर दिया, और आकाश के साथ विचार साझा करने लगा।

    सौरभ ने आकाश से कुछ किताबें उधार लीं और उनके बारे में चर्चाएं करने लगा। आकाश की प्रेरणादायक बातें अब सौरभ के लिए एक नए सिरे से जीवन जीने का माध्यम बन गईं। अब वह अपनी ज़िंदगी में सकारात्मक बदलाव लाना चाहता था।

    उनकी दोस्ती अब और भी मजबूत हो चुकी थी। आकाश ने सौरभ को सिखाया कि सुधार केवल तब संभव है जब हम अपने गलतियों से सीखते हैं। सौरभ ने आकाश को वादा किया कि वह अपने जीवन को सही दिशा में ले जाएगा, और वह अपने लक्ष्य की ओर मेहनत करेगा।

    “जब हम एक-दूसरे का साथ देंगे, तो हम और भी मजबूत होंगे,” सौरभ ने कहा।

    “बिल्कुल, यही दोस्ती का असली अर्थ है,” आकाश ने मुस्कुराते हुए कहा।

    ऐसे ही, सौरभ और आकाश की दोस्ती ने साबित कर दिया कि सही दोस्त की मौजूदगी ही इंसान को सही दिशा में ले जा सकती है और मुश्किल परिस्थितियों में मदद कर सकती है।

    Lakshmi Kumari

  • सोनिया का सपना

    सोनिया का सपना

    पढ़ने का समय : 7 मिनट

    सोनिया एक चकाचौंध से भरे शहर में रहने वाली एक होशियार और महत्वाकांक्षी लड़की थी। उसका सपना था कि वह शिक्षा के क्षेत्र में अपने पांव जमा सके और एक शिक्षक बनकर न सिर्फ अपने सपनों को साकार करे, बल्कि अपने पिता का सपना भी पूरा करे। उसके पिता एक शिक्षक थे और वे हमेशा सोनिया को उच्च शिक्षा की ओर प्रेरित करते रहे थे।

    सोनिया कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी, जहाँ उसे अपने अध्यापकों से लेकर सहपाठियों तक सभी का प्यार और सम्मान मिलता था। वह पढ़ाई में अव्‍वल थी और अपने भविष्य को लेकर बेहद गंभीर थी। लेकिन, अचानक उसकी ज़िंदगी में एक मोड़ आया। कॉलेज में उसकी मुलाकात अजय से हुई, जो उसकी कक्षा का होशियार लड़का था। दोनों के बीच दोस्ती जल्दी ही गहरी हो गई और प्यार का रंग भी उन पर चढ़ने लगा।

    सोनिया ने अपने सपने को छोड़कर अजय के साथ विवाह करने का निर्णय लिया। उसके मन में एक ख्याल था कि शादी के बाद वह अपने सपनों को फिर से आगे बढ़ा सकेगी। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, उसे एहसास हुआ कि विवाह के बाद उसकी जिम्मेदारियों में इजाफा हो गया। घर, परिवार और अन्य ज़िम्मेदारियों ने उसे अपने सपनों से दूर कर दिया।

    अजय एक व्यवसाय में व्यस्त हो गया और सोनिया को घर के कामकाज और परिवार की देखभाल में वक्त गुजारना पड़ा। धीरे-धीरे उसने अपने अध्यापक बनने के सपने को भुला दिया। उसे यह समझ में आया कि प्यार में पड़ने के चक्कर में उसने अपनी शिक्षा और अपने भविष्य को अधूरा छोड़ दिया।

    उस समय सोनिया को यह एहसास हुआ कि सपने सिर्फ देखने से नहीं पूरे होते; उन्हें पाने के लिए मेहनत और सही निर्णय लेना जरूरी है। उसने अपने पिता के सपने को याद करते हुए ठान लिया कि वह अपनी पढ़ाई फिर से शुरू करेगी और अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।

    सोनिया ने अपने सपनों को जीवित रखने का फैसला किया। पहले कुछ महीने चुनौतीपूर्ण रहे, क्योंकि उसे घर के कामों और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच अपनी पढ़ाई के लिए समय निकालना था। लेकिन उसने दृढ़ निश्चय किया कि अब वह अपने लक्ष्य को हासिल करेगी।

    वह दिन की शुरुआत जल्दी करती, सुबह के नाश्ते के बाद कुछ समय पढ़ाई के लिए समर्पित करती और फिर घर के दूसरे काम करती। जब उसके पति अजय घर आते, वह उनकी मदद करती, लेकिन पढ़ाई का समय हमेशा अपने लिए निर्धारित रखती। धीरे-धीरे अजय ने सोनिया के प्रयासों की सराहना की और उसे प्रोत्साहित करने लगा।

    सोनिया ने कॉलेज के अपने शिक्षकों से संपर्क किया और अपने पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए फिर से प्रवेश लिया। उसने कड़ी मेहनत की, और अपने बीच के खोए हुए वर्षों को जल्दी से पूरा करने के लिए रात-रात भर पढ़ाई की। उसने अपने साथियों से मदद ली, अध्ययन समूहों में शामिल हुई और फिर से अपने पैरों पर खड़ी होने में सफल हो गई।

    सोनिया ने अपनी मेहनत के फल देखने शुरू कर दिए। उसने परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त किए, और अंततः वह स्नातक की डिग्री प्राप्त करने में सफल रही। उसे अपनी मेहनत का फल मिला और वह अपने कॉलेज में टॉपर भी बनी।

    अब सोनिया अपने पिता के सपने को पूरा करने के एक कदम और करीब थी। उसने तुरंत टीचर ट्रेनिंग की पढ़ाई शुरू की। उसके मन में एक आध्यात्मिक उद्देश्य जाग उठा था कि वह न केवल एक शिक्षक बनेगी, बल्कि एक प्रेरणा स्रोत भी।

    अजय, जो पहले थोड़ा सहज था, अब देख रहा था कि सोनिया ने कितनी मेहनत की है और उसने अपने सपनों को पुनर्जीवित किया है। उसने भी उसे सपोर्ट करना शुरू किया, और दोनों ने मिलकर एक खुशहाल जीवन जीने का संकल्प लिया।

    सोनिया टीचर ट्रेनिंग में भी अव्‍वल रही और उसे अपनी कठिनाईयों से उबरना इतना सरल नहीं था। लेकिन उसने कभी हार नहीं मानी। आखिरकार, एक दिन वह अपने पहले क्लासरूम में खड़ी थी। जब उसने अपने छात्रों का सामना किया, तो उसे अपने सपनों की उस हकीकत का एहसास हुआ जिसका वह लंबे समय से इंतजार कर रही थी।

    उसे उन बच्चों के चेहरों में वो संभावना दिखाई दी, जिसे उसने कभी अपने अंदर देखा था। सोनिया ने उन्हें पढ़ाने का काम सिर्फ सेकेण्डरी या हाई स्कूल की किताबों तक सीमित नहीं रखा; उसने उन्हें जीवन के महत्त्वपूर्ण पाठ भी पढ़ाए। उसने उन्हें सिखाया कि सपने देखना और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत करना सबसे ज्यादा जरूरी है।

    सोनिया का संघर्ष न केवल उसके लिए, बल्कि उसके परिवार और सभी छात्रों के लिए प्रेरणा बन गया। उसने यह साबित कर दिया कि जीवन में चुनौतियाँ आ सकती हैं, लेकिन अगर अपने सपनों के प्रति समर्पण हो, तो कोई भी बाधा उसे आगे बढ़ने से रोक नहीं सकती।

    सोनिया की शिक्षिका बनने की यात्रा ने उसे न केवल एक पेशेवर बना दिया, बल्कि एक सशक्त महिला भी बना दिया। जैसे-जैसे वह अपने छात्रों के साथ समय बिताती, उसने देखा कि कई बच्चे उनके सपनों को पाने में कठिनाइयों का सामना कर रहे थे। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति, सामाजिक प्रथाओं और सीमाओं ने उनके सपनों के रास्ते में बाधाएं डाली थीं। सोनिया ने इस स्थिति को बदलने का संकल्प लिया और अपने छात्रों की मदद करने के लिए एक नया रास्ता चुनने का निश्चय किया।

    सोनिया ने छात्रों की शिक्षा में सुधार लाने के लिए एक नई पहल शुरू की। उसने स्कूल में ट्यूशन क्लासेस आयोजित कीं, जहाँ उसने वंचित बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने का फैसला किया। उसकी इस पहल ने स्कूल में पठन-पाठन की गुणवत्ता को बेहतर करने में मदद की और कई बच्चों को उनकी पढ़ाई के प्रति उत्साहित किया। सोनिया की मेहनत और प्रतिबद्धता ने उसके छात्रों के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला।

    उसने अन्य शिक्षकों को भी इस मुहिम में अपने साथ जोड़ने का प्रयास किया। उसने एक वर्कशॉप का आयोजन किया जिसमें शिक्षकों को समर्पण और प्रेरणा के साथ छात्रों को पढ़ाने की तकनीक सिखाई गई। इस वर्कशॉप में यह सिखाया गया कि किस तरह से बच्चों के साथ सही से संवाद किया जाए और उनके समस्याओं को समझा जाए।

    सोनिया के इस प्रयास से न केवल छात्रों की शिक्षा में सुधार हुआ, बल्कि शिक्षकों के बीच भी एक नई ऊर्जा आई। सभी ने मिलकर एक समुदाय बनाया जो पढ़ाई को आसान और मजेदार बनाने के लिए कार्य कर रहा था। सोनिया का नाम अब न केवल उसके विद्यालय में, बल्कि पूरे शहर में सुनाई देने लगा।

    समय के साथ, सोनिया की शिक्षिका के रूप में पहचान बढ़ी और उसे विभिन्न शैक्षणिक मंचों पर बोलने के लिए आमंत्रित किया जाने लगा। उसने अपने अनुभव साझा किए और अन्य युवाओं को शिक्षा के महत्व के बारे में बताया। इसके अलावा, उसने महिलाओं के सशक्तिकरण पर भी बात की, यह बताते हुए कि कैसे शिक्षा एक महिला को अपने सपनों को पूर्ण करने की शक्ति देती है।

    अपनी सफलता के साथ, सोनिया ने एक चैरिटी फाउंडेशन शुरू किया, जिसका उद्देश्य कमज़ोर और वंचित बच्चों को शिक्षा प्रदान करना था। उसने इस फाउंडेशन के माध्यम से कई बच्चों को scholarships प्रदान की और उनके लिए आवश्यक शैक्षणिक सामग्री भी उपलब्ध कराई।

    सोनिया के इस प्रयास ने न केवल उसके जीवन को बदल दिया, बल्कि कई बच्चों और उनके परिवारों के जीवन में भी सकारात्मक परिवर्तन लाया। उसकी कहानी ने पूरे समाज में एक नई सोच को जन्म दिया। लोग अब शिक्षा को केवल एक जरूरत नहीं, बल्कि विकास और संभावनाओं का रास्ता मानने लगे।

    समाज में सोनिया का योगदान और उसकी प्रेरक कहानी ने उसे एक रोल मॉडल बना दिया। वह हमेशा इस विश्वास में रही कि एक शिक्षिका न केवल पाठ्यक्रम पढ़ाती है, बल्कि वह अपने छात्रों के जीवन में एक दिशा दिखाने का भी काम करती है।

    सोनिया ने खुद को संजोते हुए अपने पति अजय के साथ मिलकर परिवार को भी संभाला। अजय उसके सपनों का सबसे बड़ा समर्थक बन गया था। उसने सोनिया के सभी कार्यों में उसका साथ दिया और उन्हें प्रोत्साहित किया। दोनों ने मिलकर एक खुशहाल परिवार बनाया, जिसमें सपनों को साकार करने का मजा था।

    आखिरकार, सोनिया ने अपने पिता के सपनों को सच करने के साथ-साथ अपने अपने सपनों को भी पूरा किया। उसकी जीवन यात्रा ने यह साबित कर दिया कि मेहनत, समर्पण और शिक्षा किसी भी बाधा को पार कर सकती है। उसने यह दिखाया कि अगर आप अपने सपनों की ओर निरंतर बढ़ते रहें, तो कोई भी चीज़ आपको रोक नहीं सकती।

    सोनिया की कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों का पीछा कर रहा है। चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी चुनौतीपूर्ण हों, अगर आपके पास जुनून और दृढ़ता हो, तो आप अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं।

    Lakshmi Kumari

     

  • 💞💞 प्यार का नशा..पार्ट 9💞💞

    💞💞 प्यार का नशा..पार्ट 9💞💞

    पढ़ने का समय : 2 मिनट

    कहानी अब आगे,

     

    अमानत को यह सुनकर गुस्सा आता है, लेकिन वह डरी हुई भी है। वह रिशाल से कहती है, “मैं तुम्हारी गुलाम नहीं हूँ। मैं अपने फैसले खुद लेती हूँ और आगे भी लुंगी ।”

     

     

    रिशाल हँसता है और कहता है, “तुम्हारे फैसले अब मैं लूँगा। तुम्हारी जिंदगी मेरे हाथ में है। तुम्हारा भाई मेरे पास है मेरी हर बात माननी ही होंगी अगर भाई से इतना प्यार है तो, ताकि मे तुम्हारे भाई को सही सलामत छोड़ दू अब उसकी आजादी तुम्हारे हाथो मे है तो तुम सोच लो क्या करना है क्या नहीं मे तब तक यहाँ बैठता हु ये कहते हुए रिशाल अग्निहोत्री अमानत का हाथ छोड़ देता है और खुद सोफे पर बैठ पैर पर पैर राख कर डेविल स्माइल के साथ अमानत के तरफ देखने लगता है !!!!!

     

     

    अमानत को लगता है कि वह फँस गई है। वह सोचती है कि कैसे रिशाल से खुद को और अपने भाई को बचा सकती है। “

     

    वह रिशाल से कहती है, “मैं तुम्हारी हर बात मानूंगी , लेकिन तुम्हें मुझे प्रोमिस करना होगा की तुम मेरे भाई को कुछ भी नहीं करोगे और वो सुरक्षित होगा जहा भी होगा मेरी उससे बात करवाओगे ताकि मे उसे कह पाऊ की कोई बात नहीं है सब ठीक है और वो डरे नहीं वो मेरे छोटा भाई है मुझे उसकी फ़िक्र है और मे उसे अच्छे से जनता हु अभी वो डर रहा होगा की आखिर हूआ क्या जो उसे और मुझे यु अलग कर दिया गया है ।”

     

     

    रिशाल मुस्कराता है और कहता है, “मैं तुम्हे ये प्रॉमिस तो करना नहीं चाहता क्युकी में रिशाल अग्निहोत्री हु और रिशाल अग्निहोत्री का जब मन जो करने का वही करता है, पर मे इतना भी बुरा नहीं हु इसीलिए चलो मे प्रॉमिस करता हु की मे तुम्हारे भाई को कुछ भी नहीं करूँगा पर wait wait wait…., 

     

    अमानत,”अब क्या हूआ तुम वादा करो मेरे भाई को कुछ भी नहि करोगे और उसे सही सलामत रखोगे बोलो?”

     

    रिशाल अग्निहोत्री, ” हाँ बिलकुल पर तब तक ही जब तक तुम मेरी गुलामी करोगी और मेरी कहीं हर बात को मानोगी उसके बाद ही मे तुम्हे ये वादा कर सकता हु तो बोलो मंजूर है???? “

     

    क्या अमानत रिशाल को वादा कर पाएगी कि वह उसकी गुलाम बन कर ही रहेगी ? क्या वह अपने भाई को बचाने के लिए बन जाएगी गुलाम ?

     

     

     

    आज के लिए बस इतना ही, कल फिर मिलेंगे कहानी के एक नए भाग के साथ, तब तक अपना ख्याल रखिये | 

  • नुकसान

    नुकसान

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    दूर जाने के फ़ायदे तो बहुत हैं,

    अब खुद को दर्द नहीं देंगे,

    बस एक नुकसान रहेगा 

    हम चुपके-चुपके रो लेंगे।

     

  • पायल

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    पायल हो तुम, इतना क्यों हँसती हो,

    पैरों में ही सजना है तुम्हें,

    सर का ताज नहीं हो तुम

  • अधूरा इश्क

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

    अधूरा इश्क

     

    EPISODE 1 — पहली दस्तक

     

    रागिनी को हमेशा से अंधेरे कमरों से अजीब-सी खींच महसूस होती थी।

    उसके नए किराए के घर में एक कमरा था जिसका दरवाज़ा ताला लगा था। मालिक ने कहा था “कभी मत खोलना।”

     

    एक रात बिजली चली और वही कमरे से हल्की दस्तक आई। रागिनी डरते हुए बोली “क…कौन?”

     

    अंदर से एक धीमी, टूटी आवाज़ आई “डरो मत… मैं भी कैद हूँ…”

     

    अगली बार बिजली जाने पर आवाज़ फिर आई।

    इस बार कमरे का ताला अपने आप गिरा।

    और अंदर था… सिर्फ़ अंधेरा।

     

    पर उसी अंधेरे में एक परछाई उभर रही थी एक लड़का… बेहद खूबसूरत, पर धुंध जैसा।

     

    उसने कहा “मेरा नाम आरव है… मैं इंसान नहीं हूँ, पर तुम्हें कोई नुक़सान नहीं पहुँचाऊँगा।”

     

    रागिनी चाहकर भी उस कमरे से दूर नहीं रह पाती।

    आरव उसे हर रात मिलता कभी बातों में, कभी बस खामोशी में।

     

    रागिनी ने महसूस किया कि वह आरव की तरफ़ खिंच रही है… डर और प्यार के बीच फँसकर।

     

    आरव हमेशा कहता “मेरी दुनिया में मत आना रागिनी… वो अंधेरा तुम्हें वापस नहीं लौटने देगा।”

     

    एक दिन रागिनी ने पूछ ही लिया “तुम कौन हो? क्या हो?”

     

    आरव की आँखों में अजीब-सा दर्द चमका“एक गलती ने मुझे इस दुनिया के बीच कहीं अटका दिया है… ना मैं ज़िंदा हूँ, ना मरा हुआ।”

     

    रागिनी उससे और गहराई से जुड़ने लगी, वह डर खत्म हो चुका था। बस एक अजीब-सी मोहब्बत जन्म ले चुकी थी।

     

    अब रागिनी हर दिन सूरज ढलने का इंतज़ार करती।

    रात होते ही आरव उसके पास आ जाता उसे कहानियाँ सुनाता, कभी हवा बनकर उसके बालों को छूता, कभी उसके आँसू पोंछता।

     

    दोनों जानते थे ये रिश्ता नामुमकिन है। पर इश्क़ कभी इजाज़त थोड़े ही पूछता है।

     

    एक रात कमरे में सिर्फ आरव नहीं आया… उसके पीछे कुछ और भी था।

     

    काली, गुर्राती परछाइयाँ जो रागिनी पर झपट पड़ीं।

     

    आरव चिल्लाया “भागो! ये मेरी दुनिया के भूखे साए हैं—तुम्हें ले जाएँगे!”

     

    आरव ने उन्हें रोक लिया… पर उसके शरीर का आधा हिस्सा अंधेरे में गायब हो गया।

     

    रागिनी रो पड़ी “मैं तुम्हें खो दूँगी क्या?”

     

    आरव बोला “मैं पहले ही खो चुका हूँ…”

     

    आरव कमज़ोर पड़ने लगा। वह कहने लगा “रागिनी… जब तक मैं हूँ, तुम सुरक्षित हो। पर मेरा समय ख़त्म हो रहा है। इस कमरे को छोड़कर किसी और शहर चली जाओ।”

     

    पर रागिनी ने साफ़ कह दिया “इश्क़ भागता नहीं, लड़ता है।”

     

    उस रात हवा में अजीब सरसराहट थी। कमरा खुद-ब-खुद खुल गया। अंधेरा गाढ़ा और डरावना।

     

    आरव ने रागिनी का हाथ पकड़ लिया पहली और आखिरी बार… उसका स्पर्श ठंडा, पर गहरा था।

     

    “मेरे साथ मत आना…”

     

    पर रागिनी ने कहा “मैं अकेली रह ही नहीं सकती तुम्हारे बिना।”

     

    अंधेरा दोनों के चारों तरफ घूमने लगा।

     

    अगली सुबह घर का दरवाज़ा खुला मिला। कमरा बिल्कुल शांत। आरव की परछाई गायब थी। रागिनी भी गायब थी।

     

    बस दीवार पर उभरी एक धुँधली लाइन “अंधेरों में किया इश्क़… दोनों को उजाला कभी नहीं मिला।”

     

    कई साल बाद, उसी घर में नए किरायेदार आते हैं।

    पहली ही रात, बिजली जाती है… और बंद कमरे से आवाज़ आती है “डरो मत… मैं भी कैद हूँ…”

     

    इस बार कमरे में दो परछाइयाँ दिखाई देती हैं एक धुँधला लड़का… और उसके कंधे पर सिर रखे एक लड़की।

     

    दोनों की आँखों में एक ही बात उनकी कहानी कभी पूरी नहीं हुई… और शायद कभी होगी भी नहीं।

     

    “अंधेरों का इश्क़… अधूरा ही सही, पर अमर रहा।”

     

  • अधूरी मोहब्बत के ‘इंतज़ार का साया

    अधूरी मोहब्बत के ‘इंतज़ार का साया

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    अधूरी मोहब्बत के ‘इंतज़ार का साया

    नयन और आरुषि का मिलना किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था। पहली मुलाकात दिल्ली विश्वविद्यालय के पुराने आर्ट्स फैकल्टी की कैंटीन में हुई थी, जब पहली बरसात ने जून की तपती गर्मी को अचानक ठंडक में बदल दिया था। आरुषि अपनी किताबों और बिखरे हुए नोट्स को समेटने की हड़बड़ी में थी, और नयन, एक शांत, गंभीर चेहरा लिए, वहीं कोने की मेज पर बैठा उसे देख रहा था।
    “माफ़ करना, मेरा छाता आज धोखा दे गया,” आरुषि ने भीगे बालों से पानी झटकते हुए कहा।
    नयन ने बिना कुछ कहे, अपना जैकेट उसकी ओर बढ़ा दिया। “भीग जाओगी।”
    वह जैकेट, जिसकी महक में मिट्टी की सोंधी खुशबू और उसकी अपनी एक हल्की सी सिगरेट की गंध मिली हुई थी, आरुषि के लिए पहला तोहफ़ा था। वह जैकेट नयन की तरह ही था,  बाहर से रूखा, पर अंदर से बेहद गर्म और सुरक्षा देने वाला।
    धीरे धीरे वह एक छोटी मुलाक़ात कब दोस्ती में बदली और दोस्ती कब इश्क़ की एक गहरी नदी में, उन्हें पता ही नहीं चला। उनका रोमांस किताबों के पन्नों, देर रात की कॉफ़ी और दिल्ली की सर्द रातों में गर्माहट देने वाली लंबी ड्राइव में पनपा। आरुषि को नयन की खामोशियाँ पढ़ना आता था, और नयन को आरुषि की आँखों में छिपे हर सपने को साकार करना था।

    नयन की उंगलियां जब आरुषि के उलझे बालों को सुलझाती थीं, तो उस स्पर्श में सदियों का इकरार होता था। उनका प्रेम सिर्फ शब्दों का मोहताज नहीं था, वह एक-दूसरे की रूह में उतर चुका था। हर चुंबन, हर आलिंगन एक वादा था, हमेशा साथ रहने का।

    एक रात, इंडिया गेट पर, मद्धम रोशनी के बीच, नयन ने आरुषि का हाथ अपने हाथ में लेकर भींच लिया था।
    “तुम मेरी हो, आरुषि। आख़िरी साँस तक।”
    आरुषि ने मुस्कुराते हुए अपनी आँखें बंद कर ली थीं, जैसे उसने ब्रह्मांड के सबसे बड़े सच को स्वीकार कर लिया हो।

    लेकिन हर प्रेम कहानी की तरह उनकी प्रेम कहानी में एक मोड़ आना बाकी था, जो किसी भी प्रेम कहानी को पूरा नहीं होने देता।
    नयन एक मध्यवर्गीय परिवार से था, पर महत्वाकांक्षाएँ पहाड़ जितनी ऊँची थीं। उसके पिता का सपना था कि वह सिविल सर्विसेज़ में जाए। और नयन भी आरुषि के परिवार की तरह तथा अन्य लोंगों की तरह जानता था कि सरकारी नौकरी ही समाज में उनकी प्रेम कहानी को स्वीकार्यता दिला सकती है।
    “एक साल, बस एक साल और, आरुषि,” नयन ने उसे समझाते हुए कहा था, जब आरुषि ने उसे रोज़ मिलने से मना करने पर शिकायत की थी, तो नयन ने लगभग गिड़गिड़ाते हुए बोला, बस इस एक साल के बाद तुम्हें वो सब दूँगा जिसका तुम सपना देखती हो, एक सुरक्षित भविष्य, एक छोटा-सा घर, और हर पल मेरा साथ।

    वह एक साल, इंतज़ार और विरह का है। उनका रोमांस अब फ़ोन कॉल्स, चोरी-छिपे की मुलाक़ातों और ख़त में सिमट गया था।
    परीक्षा की तैयारी चरम पर थी, और तभी किस्मत ने अपना क्रूर खेल खेला। नयन के पिता को अचानक दिल का दौरा पड़ा। परिवार की सारी जमापूंजी इलाज में लग गई, और नयन को अपनी पढ़ाई छोड़कर, परिवार को संभालने के लिए एक छोटी-सी निजी कम्पनी में नौकरी करनी पड़ी।
    टूट गए सारे वादे, बिखर गए सारे सपने।
    कुछ दिनों तक जब आरुषि की बातचीत और कोई संपर्क नयन से नही हुआ,  तो अचानक एक दोपहर, आरुषि, नयन के पुराने कमरे में पहुँची। कमरा खाली था, सिर्फ़ कोने में रखी किताबों पर धूल जमी थी। नयन उसे यह सब बताने की हिम्मत नहीं जुटा पाया था, उसने बस एक छोटा-सा संदेश छोड़ा था:
    आरुषि, मैं टूट गया हूँ। मैं तुम्हें वो ज़िंदगी नहीं दे सकता जिसका तुम हक़ रखती हो। मेरा प्रेम स्वार्थी नहीं है कि मैं तुम्हें भी अपने साथ इस अंधेरे में खींच लूँ। मुझे भूल जाना। यह हमारे इश्क़ का दर्दनाक अंत है।”

    नयन के उस एकतरफ़ा फ़ैसले ने आरुषि को अंदर तक झकझोर दिया। वह रोई, चिल्लाई, पर नयन का  कुछ भी पता नहीं चला। नयन यह जानता था कि आरुषि के परिवार वाले कभी एक असफल और आर्थिक रूप से टूटे हुए लड़के से उसकी शादी नहीं करेंगे। इसलिए उसने खुद को दूर करके, अपनी मोहब्बत को एक तरह से बलिदान कर दिया था।

    धीरे धीरे देखते देखते कब पांच साल गुज़र गए, किसी को पता भी नही चला।
    आरुषि की शादी एक सफल व्यवसायी से हो चुकी थी। अब उसके पास ऐशो-आराम के लिए सब कुछ था, बंगला, गाड़ी, ऐशो-आराम। पर उसकी आँखों में नयन का इंतज़ार आज भी ज़िंदा था। वह आज भी हर बारिश में नयन के जैकेट की महक खोजती थी।
    उसकी ज़िंदगी में रोमांस था, पर इश्क़ नहीं। उसका पति उसे बहुत प्यार करता था, पर वह स्पर्श, वह जुड़ाव जो नयन की नज़रों में था, उसे वह कहीं नहीं मिला।
    एक रात, बारिश ज़ोरों पर थी। आरुषि अपने बेडरूम की बालकनी में खड़ी थी, आँखें मूँदकर। उसके मन में नयन के साथ बिताई गई हर अंतरंग मुलाक़ात, हर मीठी शरारत घूम रही थी। उसे याद आया, कैसे नयन उसे पहली बार अपने सीने से लगाया था और कैसे उनके होंठ एक कसक भरी चाहत में मिले थे।
    आरुषि ने अपनी आँखें खोलीं और उसकी नज़रों के सामने नयन का चेहरा घूम गया, एक दर्द भरा प्रेम, एक अनसुलझा बंधन। उसके दिल में एक टीस उठी।

    संयोगवश उसी शहर में, नयन ने भी खुद को अपने परिवार के लिए संभाला था। वह एक छोटी-सी प्रिंटिंग प्रेस चलाता था, जो ठीक-ठाक चल जाती थी। वह भी एक खालीपन में जी रहा था। उसका सबसे बड़ा डर था कि वह आरुषि को किसी और के साथ खुश देखेगा। पर जब उसने दूर से आरुषि को एक बार अपनी कार में देखा, तो उसकी आँखों की उदासी ने नयन को बता दिया कि आरुषि अभी भी उसी अधूरी मोहब्बत के पिंजरे में कैद है।
    नयन ने हर शाम एक डायरी लिखी, जिसमें वह आरुषि को अपनी ज़िंदगी के हर पल का हिसाब देता था।
    आज मैंने तुम्हारे पसंदीदा फूल देखे।
    आज चाय बनाते हुए तुम्हारा ख़याल आया।
    आज बारिश हुई, और मुझे तुम्हारा भीगा हुआ चेहरा याद आया।
    यह डायरी, उसके लिए आरुषि से रोज़ बात करने का ज़रिया थी। उसका प्रेम अब भी ज़िंदा था, पर सिर्फ़ कागज़ों पर।

    छठे साल, एक कला प्रदर्शनी में, किस्मत ने उन्हें एक बार फिर मिला दिया।
    आरुषि, अपने पति के साथ, एक पेंटिंग के सामने खड़ी थी, जिसका शीर्षक था, इंतज़ार का साया’। उस पेंटिंग में, एक लड़की दूर क्षितिज को देख रही थी, और उसके साये में एक धुंधला-सा पुरुष का चेहरा छिपा था।
    जब आरुषि ने पलटा, तो उसके सामने नयन खड़ा था। समय थम गया। पाँच सालों का दर्द, विरह, और प्रेम उनकी आँखों में भर आया।
    नयन का शरीर पहले से ज़्यादा थका हुआ लग रहा था, पर उसकी आँखें आज भी वही थीं, गहरी और आरुषि के लिए अटूट प्रेम से भरी।
    “आरुषि…” नयन की आवाज़ काँपी।
    “नयन…” आरुषि ने केवल इतना कहा, और उसके होंठ काँपने लगे।
    आरुषि के पति ने नयन को देखा, पर उन्हें लगा कि वह कोई पुराना सहपाठी है। उन्होंने सम्मानपूर्वक हाथ मिलाया और थोड़ी देर में उन्हें अकेला छोड़ दिया।
    वे दोनों गैलरी के शांत कोने में बैठ गए।
    “तुमने क्यों किया ऐसा, नयन?” आरुषि की आवाज़ में पाँच सालों का दर्द था। “तुमने क्यों मान लिया कि मेरा प्यार इतना कमज़ोर है कि वह तुम्हारी मुश्किलों को नहीं सह पाएगा?”
    नयन ने उदास नज़रों से उसे देखा। “मैं स्वार्थी नहीं बन सकता था, आरुषि। मैं तुम्हें अंधेरे और अभाव की ज़िंदगी नहीं देना चाहता था। मेरा प्रेम आज भी उतना ही सच्चा है, पर मैं तुम्हें यह सब देने के बाद तुम्हारे सपनों को मरते हुए नहीं देख पाता।”
    उस शाम, वे घंटों बातें करते रहे। उन्होंने अपने अधूरे प्रेम के हर मोड़ को छुआ। उनका प्रेम, जो कभी शारीरिक आलिंगनों में व्यक्त होता था, आज सिर्फ़ आत्मिक जुड़ाव में सिमट गया था।
    आरुषि ने नयन का हाथ पकड़ा। वह स्पर्श आज भी उतना ही सुरक्षित और अपनापन देने वाला था।
    “हम अब भी एक-दूसरे से प्यार करते हैं, नयन।”
    नयन की आँखों से आँसू बह निकले। “हाँ, करते हैं। पर अब यह प्यार हमारा नहीं रहा, यह बस एक दर्द भरी याद है।”
    नयन ने अपनी जेब से एक मुड़ी हुई डायरी निकाली। “यह तुम्हारी अमानत है। इसमें हमारे हर अधूरे पल का हिसाब है।”
    “क्या अब हम…?” आरुषि ने हिम्मत करके पूछा।
    नयन ने मुस्कुराने की कोशिश की, पर उसकी मुस्कुराहट में केवल पीड़ा थी।
    “हम हमेशा एक-दूसरे के रहेंगे, आरुषि, पर अब केवल सपनों में। तुम्हारी ज़िंदगी में अब एक सफ़र है जिसे तुम्हें पूरा करना है। और मेरी ज़िंदगी… मेरी ज़िंदगी तो उसी दिन खत्म हो गई थी जब मैंने तुम्हें खोने का फ़ैसला किया था।”
    आरुषि ने वह डायरी ले ली। वह डायरी नहीं थी, वह उनके इश्क़ का मज़ार था।
    नयन उठा। यह उनकी अंतिम, और सबसे दर्द भरी मुलाक़ात थी। उसने आरुषि के माथे को धीरे से छुआ, बिना कोई चुंबन दिए, बिना कोई आलिंगन दिए। यह स्पर्श, किसी भी गहरे शारीरिक मिलन से ज़्यादा पवित्र और गहरा था, क्योंकि इसमें केवल त्याग और निस्वार्थ प्रेम था।
    “ख़ुश रहना, आरुषि। तुम जहाँ हो, ख़ुश रहना।”
    “और तुम?”
    “मैं? मैं हमेशा तुम्हारा हूँ।”
    नयन मुड़ा और भीड़ में कहीं खो गया। आरुषि वहीं खड़ी रही। उसके पास प्रेम की सबसे बड़ी निशानी थी, वह अधूरी डायरी।
    आज भी, आरुषि अपने आलीशान घर में रात की तन्हाई में उस डायरी के पन्ने पढ़ती है। वह जानती है कि उसका पति उसे भौतिक सुख दे सकता है, पर उसकी रूह हमेशा नयन की रहेगी।
    उनकी मोहब्बत अधूरी रही, पर उनका इश्क़ अमर हो गया, एक मीठा, दर्द भरा एहसास जो हर साँस के साथ ज़िंदा रहता है।
    समाप्त
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