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चिता की मिठास

पढ़ने का समय : 2 मिनट

नफ़रत करनी है तो इतनी करो,  

कि मेरी साँसों की आख़िरी धड़कन भी तुम्हें चैन न दे।  

मेरी चिता की लपटें जब आसमान छू लें,  

तब तुम्हारे चूल्हे पर खीर मीठी उबलती रहे। 

 नफ़रत करनी है तो इतनी करो,  

कि मेरी चिता की ज्वाला में भी तेरी आँखें न भरें।  

जिस दिन धुआँ उठे मेरे अस्तित्व का,  

तेरे आँगन में मिठास की खुशबू बिखरें।  

 

मेरे जाने पर आँसू न बहाना,  

बस अपने घर में मिठास का दीप जलाना।  

मेरी राख़ हवा में उड़ जाए,  

मेरे जाने का ग़म न हो तुझको,  

बस तेरे चूल्हे पर खीर उबलती रहे।  

मेरी राख़ हवा में घुल जाए,  

और तेरी हँसी तेरे घर को सजाती रहे।  

और तेरे आँगन में हँसी की गूँज समा जाए।  

 

नफ़रत का रंग इतना गाढ़ा हो,  

कि मेरी याद भी तेरे दिल को न छू पाए।  

मैं जलकर राख़ हो जाऊँ,  

पर तेरे घर में खुशियों की धुन बजती जाए।  

मेरे नाम का ज़िक्र हो तो,  

तेरे होंठों पर ताना और ठहाका ही आए।  

मेरी मौत का दिन तेरे लिए उत्सव बने,  

जहाँ मिठास का स्वाद हर कोने में समाए।  

 

नफ़रत करनी है तो इतनी करो,  

कि मेरी चिता की आग भी तेरे लिए रोशनी बने।  

मैं बुझ जाऊँ इस दुनिया से, 

 नफ़रत का इज़हार इतना गहरा हो,  

कि मेरी याद भी तेरे दिल को न छू पाए।  

मैं बुझ जाऊँ आग में,

पर तेरी ज़िंदगी में मिठास ही मिठास रहे।

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