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टैग: कविता

  • गुरु की ज्योति

    गुरु की ज्योति

    पढ़ने का समय : 2 मिनट

    गुरु वो दीप हैं, जो तमस हर लेते,  

    ज्ञान की किरणों से जीवन भर देते।  

    उनके चरणों में है सारा संसार,  

    उनसे ही मिलता है सच्चा आधार।  

     

    गुरु वो वृक्ष हैं, छाया में सुकून देते,  

    धूप में भी ठंडक का एहसास देते।  

    उनकी वाणी अमृत सी बरसती,  

    हर शब्द में शिक्षा की गंध बसती।  

     

    गुरु वो सागर हैं, जिनमें सत्य की लहरें,  

    हर प्रश्न का उत्तर, हर मन की डगरें।  

    उनकी दृष्टि में करुणा का सागर,  

    उनके आशीष से मिटता है अंधकार।  

     

    गुरु पूर्णिमा का पावन दिन आया,  

    श्रद्धा का दीप हर मन में जलाया।  

    फूलों की वर्षा, भक्ति की धारा,  

    गुरु चरणों में समर्पित हमारा प्यारा।  

     

    गुरु से ही जीवन का अर्थ समझा,  

    गुरु से ही आत्मा का स्वर मिला।  

    गुरु वो सूरज हैं, जो कभी न ढलते,  

    उनकी रोशनी से सब पथ पलते।  

     

    जय गुरु देव, जय ज्ञान के दाता,  

    आपसे ही जीवन का हर पल निखरता।  

    आपकी कृपा से मन निर्मल होता,  

    आपकी छाया में संसार संवरता।

     

    गुरु वो दीपक हैं, 

    जो अंधियारे में राह दिखाते,

    ज्ञान की गंगा बनकर, 

    जीवन को पावन बनाते।

     

    गुरु वो छाया हैं, 

    जो हर दुख में सहारा देते,

    संस्कारों की ज्योति से, 

    मन को उजियारा देते।

     

    गुरु वो सागर हैं, 

    जिनमें सत्य की लहरें उठतीं,

    भ्रम के रेगिस्तान में, 

    आशा की नदियाँ बहतीं।

     

    गुरु वो पर्वत हैं, 

    अटल, अडिग, स्थिर खड़े,

    शिष्य के हर प्रश्न पर, 

    उत्तर के दीप जलाए खड़े।

     

    गुरु पूर्णिमा का दिन है, 

    श्रद्धा का उत्सव महान,

    गुरु चरणों में अर्पित है, 

    जीवन का सारा सम्मान।

    🙏🙏  जय गुरु देव  🙏🙏

  • संग भींगने का क़रार

    संग भींगने का क़रार

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    बरसात की बूंदों में छुपा है प्यार,  

    आज दिलों ने किया संग भींगने का क़रार।  

    तेरे हाथों में मेरा हाथ थामे,  

    सपनों की राहों पर चलें हम साथ‑साथ।  

     

    भीगी ज़ुल्फ़ों में चाँदनी मुस्काए,  

    तेरी आँखों में मेरा चेहरा झलक जाए।  

    हर बूँद बने इज़हार‑ए‑मोहब्बत,  

    हर लम्हा कहे — तू ही मेरी राहत।  

     

    संग भींगना अब इबादत सा लगे,  

    तेरे संग हर मौसम जन्नत सा लगे।  

    ओ मेरी जान, ओ मेरी दास्तान,  

    तेरे बिना अधूरा है मेरा अरमान।

     

    बरसात की पहली बूँद जब ज़मीं पर उतरी,  

    तेरी मुस्कान ने मेरी रूह को छू ली।  

    आज दिलों ने किया संग भींगने का क़रार,  

    हर लम्हा बने इश्क़ का इज़हार।  

     

    तेरे होंठों पर ठहरी हँसी की चमक,  

    मेरे दिल में जगाए मोहब्बत की ललक।  

    भीगी राहों पर चलें हम साथ‑साथ,  

    तेरे कदमों से सजें मेरी हर बात।  

     

    बूँदों की सरगम में गूँजे तेरा नाम,  

    तेरी बाहों में मिले मुझे आराम।  

    संग भींगना अब दुआ सा लगे,  

    तेरे संग हर मौसम जन्नत सा लगे।  

     

    ओ मेरी जान, ओ मेरी रूहानी गीत,  

    तेरे बिना अधूरी है मेरी हर प्रीत।  

    चलो आज वादा करें इस बरसात में,  

    संग भींगते रहेंगे हर मुलाक़ात में।

  • चिता की मिठास

    चिता की मिठास

    पढ़ने का समय : 2 मिनट

    नफ़रत करनी है तो इतनी करो,  

    कि मेरी साँसों की आख़िरी धड़कन भी तुम्हें चैन न दे।  

    मेरी चिता की लपटें जब आसमान छू लें,  

    तब तुम्हारे चूल्हे पर खीर मीठी उबलती रहे। 

     नफ़रत करनी है तो इतनी करो,  

    कि मेरी चिता की ज्वाला में भी तेरी आँखें न भरें।  

    जिस दिन धुआँ उठे मेरे अस्तित्व का,  

    तेरे आँगन में मिठास की खुशबू बिखरें।  

     

    मेरे जाने पर आँसू न बहाना,  

    बस अपने घर में मिठास का दीप जलाना।  

    मेरी राख़ हवा में उड़ जाए,  

    मेरे जाने का ग़म न हो तुझको,  

    बस तेरे चूल्हे पर खीर उबलती रहे।  

    मेरी राख़ हवा में घुल जाए,  

    और तेरी हँसी तेरे घर को सजाती रहे।  

    और तेरे आँगन में हँसी की गूँज समा जाए।  

     

    नफ़रत का रंग इतना गाढ़ा हो,  

    कि मेरी याद भी तेरे दिल को न छू पाए।  

    मैं जलकर राख़ हो जाऊँ,  

    पर तेरे घर में खुशियों की धुन बजती जाए।  

    मेरे नाम का ज़िक्र हो तो,  

    तेरे होंठों पर ताना और ठहाका ही आए।  

    मेरी मौत का दिन तेरे लिए उत्सव बने,  

    जहाँ मिठास का स्वाद हर कोने में समाए।  

     

    नफ़रत करनी है तो इतनी करो,  

    कि मेरी चिता की आग भी तेरे लिए रोशनी बने।  

    मैं बुझ जाऊँ इस दुनिया से, 

     नफ़रत का इज़हार इतना गहरा हो,  

    कि मेरी याद भी तेरे दिल को न छू पाए।  

    मैं बुझ जाऊँ आग में,

    पर तेरी ज़िंदगी में मिठास ही मिठास रहे।