याद है मुझे आज भी…
याद है मुझे आज भी,
मेरी वो पहली कविता।
जब उसे लिखा था,
तो कभी सोचा भी नहीं था
कि मैं भी कुछ लिख सकती हूँ,
अपने एहसासों को शब्दों में पिरो सकती हूँ।
जब पहली बार उसे पढ़ा,
तो दिल खुशी से भर गया था।
ऐसा लगा जैसे मेरे मन की बातों को
एक नई पहचान मिल गई हो।
बड़ी उम्मीदों के साथ
मैंने अपनी पहली कविता सबको दिखाई।
सोचा था लोग उसके जज़्बात समझेंगे,
उसमें छिपी भावनाओं को महसूस करेंगे।
लेकिन तारीफ़ से ज़्यादा
लोगों ने मेरी गलतियाँ गिनवा दीं।
किसी ने शब्दों की कमी बताई,
किसी ने लिखने का तरीका गलत कहा,
और किसी ने ये तक कह दिया कि
“तुमसे कविता नहीं लिखी जाएगी।”
उन बातों ने दिल दुखाया,
कुछ पल के लिए ऐसा लगा
शायद सच में मैं लिख नहीं सकती।
लेकिन फिर अगले ही दिन
मैंने खुद से एक वादा किया।
मैंने आईने में देखकर कहा—
“नहीं… मैं हार नहीं मानूँगी।”
जिसने मेरी गलतियाँ देखीं,
मेरी भावनाएँ नहीं देखीं,
एक दिन मैं उसे अपनी कलम की ताकत दिखाऊँगी।
एक दिन ऐसा आएगा
जब मेरी गलतियों की नहीं,
मेरी कविताओं की बात होगी।
लोग शब्दों की कमी नहीं,
उनमें छिपे एहसासों को पढ़ेंगे।
और जिस दिन ऐसा होगा,
उन्हें मेरी पहली कविता भी याद आएगी।
तब वे उसकी गलतियाँ नहीं,
उसमें छिपे सपनों को याद करेंगे।
उस मासूम कोशिश को याद करेंगे,
जिसने एक लेखक को जन्म दिया था।
क्योंकि हर बड़ी कहानी,
हर बेहतरीन कविता,
एक छोटी सी शुरुआत से ही जन्म लेती है।
और मेरी शुरुआत…
मेरी वही पहली कविता थी। ✍️❤️🌸

NSW अनुभवी लेखक -🥇


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