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श्रेणी: अधूरी मोहब्बत

चलते चलते बीच सफ़र में,रह गई कुछ रिश्ते, मोहब्बत, आशा विश्वास, सपने उम्मीद, भरोसा, जो पूरे न हो सके। कहीं चालबाजी, तो कहीं किस्मत ने अलग कर दिए।धोखा फरेबियों की एक अलग दुनियां।

  • अबकी बार मौसम देख कर मिलेंगे…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    अबकी बार तुझसे अच्छा मौसम देख के मिलेंगे.. 

    वक़्त जल्दी बीतता है घड़ियां फेक के मिलेंगे।।

     

    पिछली बार तो हम दोनों हुए बहुत बदनाम।। 

    अबकी बार दांए-बांए देख के गले मिलेंगे..

     

    वो जिस रास्ते से गुजरी है वहां जाकर देख… 

    मुरझाए हुए फूल भी तुमको खिले मिलेंगे।।

     

    मुहब्बत बड़ी गहरी हो गई है तुमसे ।। 

    इसका मतलब जख्म भी बड़े गहरे मिलेंगे..

  • कुछ बातें तुम भी कह जाओ न…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    अगर बात मोहब्बत की हैं तो बताओ ना

    या फिर कोई गीत हैं तो गुनगुनाओ ना

     

    कब से सब मैं ही कहे जा रहा हूँ

    तुम भी कुछ दिल की बात सुनाओ ना

     

    वहां से कहोगी तो अच्छा नहीं लगेगा 

    दूर क्यों बैठी हो , पास ही आ जाओ ना

     

    मैं कब से बेचैन हूँ जानने को

    दिल में क्या छुपाया हैं , जरा दिखाओ ना

     

    इजहार का सोच कर आई हो , तो कहो

    एक बार मुझे भी अपने सीने से लगाओ ना…

     

     

    कुछ तो कहो यु चुप ना रहो.. मेरी बातो को तो समझ पाओ न…

  • दर्द ऐ दिल…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    मुझे तुम्हारे साथ पूरी कहानी लिखनी थी

     

    और एक तुम मेरे साथ एक ही पन्ने में सिमट कर रह 

    गए…!!🥹🥹

  • वो आखरी मेसेज

    वो आखरी मेसेज

    पढ़ने का समय : 2 मिनट

    तकरीबन सवा साल बीत गया था उसे गए हुए,

    कल अचानक उसका एक मैसेज आया

    सिर्फ एक शब्द लिखा था, 

     

    “सुनो…”

     

    मैंने फोन हाथ में लिया, पर उंगलियाँ कांप रही थीं,

    दिल ने कहा सब कह डालो जो इन महीनों में सहा है,

    दिमाग ने कहा खामोश रहो, उसने तुम्हें कब का भुला दिया है।

    ​मैंने टाइप करना शुरू किया

    “पता है? तुम्हारे जाने के बाद मैंने हंसना छोड़ दिया है,” (फिर मिटा दिया…) फिर लिखा

    “आज भी रात को जब नींद खुलती है, तो फोन में तुम्हारा नाम ढूंढते है,” (फिर मिटा दिया…) 

     

    आखिर में मैंने सिर्फ इतना लिखा “कहो, कैसे हो?” उसका जवाब आया

    “बस यूं ही याद आ गई थी, लगा तुम बदल गए होगे।” मैंने मन ही मन मुस्कुराया,

    अंदर एक टीस उठी और आंखों के कोर भीग गए।

    बदल तो वो लोग जाते हैं जिनके पास कोई और होता है,

    हम जैसे लोग तो बस एक ही याद के सहारे पूरी उम्र गुज़ार देते हैं।

     

    ​तभी स्क्रीन पर ‘Typing…’ दिखा और फिर गायब हो गया,

    शायद उसे भी एहसास हो गया था…

    कि कुछ सवाल पूछने के लिए अब बहुत देर हो चुकी है।

    ​उस दिन फिर समझ आया

    कुछ लोग हाल पूछने नहीं,

    सिर्फ ये तसल्ली करने आते हैं,

    कि तुम आज भी उनकी यादों की कैद में हो या रिहा हो गए!💔💔💔

     

     

  • तुझ बिन मैं कहाँ 💘💘

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    जैसे खुशबू बिना कोई फूल अधूरा हो,

    जैसे चाँद भी हो मगर उसकी चाँदनी कहीं खोया हो।

     

    तेरी बाहों में ही मेरी हर शाम सिमटती है,

    तेरे नाम से ही मेरी हर सुबह सँवरती है।

    तू पास हो तो धड़कनों को सुकून सा मिलता है,

    तेरी हँसी से ही मेरी दुनिया निखरती है।

     

    तेरे लबों की मिठास में मेरा हर ख्वाब घुल जाए,

    तेरी आँखों की गहराई में मेरा जहाँ डूब जाए।

    तू छू ले जो हल्के से, तो रूह तक महक उठे,

    तेरे इश्क में ये दिल हर हद से गुजर जाए।

     

    मैं तुझमें खो जाऊँ, तू मुझमें कहीं ठहर जाए,

    जैसे दो धड़कनें मिलकर एक कहानी कह जाएँ।

    ना कोई फासला रहे, ना कोई खामोशी दरमियां,

    बस तेरे मेरे प्यार का सिलसिला यूँ ही बह जाए।

     

    तुझ बिन मैं कहाँ — अब ये कहना भी जरूरी नहीं,

    तू ही मेरा सुकून है, तू ही मेरी हर खुशी।

    अगर तू साथ है, तो हर लम्हा जन्नत सा लगे,

    • वरना ये दिल तेरे बिना कहीं भी लगे नहीं।
  • अधूरा इश्क

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

    अधूरा इश्क

     

    EPISODE 1 — पहली दस्तक

     

    रागिनी को हमेशा से अंधेरे कमरों से अजीब-सी खींच महसूस होती थी।

    उसके नए किराए के घर में एक कमरा था जिसका दरवाज़ा ताला लगा था। मालिक ने कहा था “कभी मत खोलना।”

     

    एक रात बिजली चली और वही कमरे से हल्की दस्तक आई। रागिनी डरते हुए बोली “क…कौन?”

     

    अंदर से एक धीमी, टूटी आवाज़ आई “डरो मत… मैं भी कैद हूँ…”

     

    अगली बार बिजली जाने पर आवाज़ फिर आई।

    इस बार कमरे का ताला अपने आप गिरा।

    और अंदर था… सिर्फ़ अंधेरा।

     

    पर उसी अंधेरे में एक परछाई उभर रही थी एक लड़का… बेहद खूबसूरत, पर धुंध जैसा।

     

    उसने कहा “मेरा नाम आरव है… मैं इंसान नहीं हूँ, पर तुम्हें कोई नुक़सान नहीं पहुँचाऊँगा।”

     

    रागिनी चाहकर भी उस कमरे से दूर नहीं रह पाती।

    आरव उसे हर रात मिलता कभी बातों में, कभी बस खामोशी में।

     

    रागिनी ने महसूस किया कि वह आरव की तरफ़ खिंच रही है… डर और प्यार के बीच फँसकर।

     

    आरव हमेशा कहता “मेरी दुनिया में मत आना रागिनी… वो अंधेरा तुम्हें वापस नहीं लौटने देगा।”

     

    एक दिन रागिनी ने पूछ ही लिया “तुम कौन हो? क्या हो?”

     

    आरव की आँखों में अजीब-सा दर्द चमका“एक गलती ने मुझे इस दुनिया के बीच कहीं अटका दिया है… ना मैं ज़िंदा हूँ, ना मरा हुआ।”

     

    रागिनी उससे और गहराई से जुड़ने लगी, वह डर खत्म हो चुका था। बस एक अजीब-सी मोहब्बत जन्म ले चुकी थी।

     

    अब रागिनी हर दिन सूरज ढलने का इंतज़ार करती।

    रात होते ही आरव उसके पास आ जाता उसे कहानियाँ सुनाता, कभी हवा बनकर उसके बालों को छूता, कभी उसके आँसू पोंछता।

     

    दोनों जानते थे ये रिश्ता नामुमकिन है। पर इश्क़ कभी इजाज़त थोड़े ही पूछता है।

     

    एक रात कमरे में सिर्फ आरव नहीं आया… उसके पीछे कुछ और भी था।

     

    काली, गुर्राती परछाइयाँ जो रागिनी पर झपट पड़ीं।

     

    आरव चिल्लाया “भागो! ये मेरी दुनिया के भूखे साए हैं—तुम्हें ले जाएँगे!”

     

    आरव ने उन्हें रोक लिया… पर उसके शरीर का आधा हिस्सा अंधेरे में गायब हो गया।

     

    रागिनी रो पड़ी “मैं तुम्हें खो दूँगी क्या?”

     

    आरव बोला “मैं पहले ही खो चुका हूँ…”

     

    आरव कमज़ोर पड़ने लगा। वह कहने लगा “रागिनी… जब तक मैं हूँ, तुम सुरक्षित हो। पर मेरा समय ख़त्म हो रहा है। इस कमरे को छोड़कर किसी और शहर चली जाओ।”

     

    पर रागिनी ने साफ़ कह दिया “इश्क़ भागता नहीं, लड़ता है।”

     

    उस रात हवा में अजीब सरसराहट थी। कमरा खुद-ब-खुद खुल गया। अंधेरा गाढ़ा और डरावना।

     

    आरव ने रागिनी का हाथ पकड़ लिया पहली और आखिरी बार… उसका स्पर्श ठंडा, पर गहरा था।

     

    “मेरे साथ मत आना…”

     

    पर रागिनी ने कहा “मैं अकेली रह ही नहीं सकती तुम्हारे बिना।”

     

    अंधेरा दोनों के चारों तरफ घूमने लगा।

     

    अगली सुबह घर का दरवाज़ा खुला मिला। कमरा बिल्कुल शांत। आरव की परछाई गायब थी। रागिनी भी गायब थी।

     

    बस दीवार पर उभरी एक धुँधली लाइन “अंधेरों में किया इश्क़… दोनों को उजाला कभी नहीं मिला।”

     

    कई साल बाद, उसी घर में नए किरायेदार आते हैं।

    पहली ही रात, बिजली जाती है… और बंद कमरे से आवाज़ आती है “डरो मत… मैं भी कैद हूँ…”

     

    इस बार कमरे में दो परछाइयाँ दिखाई देती हैं एक धुँधला लड़का… और उसके कंधे पर सिर रखे एक लड़की।

     

    दोनों की आँखों में एक ही बात उनकी कहानी कभी पूरी नहीं हुई… और शायद कभी होगी भी नहीं।

     

    “अंधेरों का इश्क़… अधूरा ही सही, पर अमर रहा।”