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लेखक: Manoj Divana Namaste Story World

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Manoj Divana Namaste Story World

नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड के लेखक। पाठकों के लिए मनोरंजक और दिल को छू लेने वाली हिंदी कहानियाँ लिखना पसंद करता हूँ।आपका स्वागत है नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड में धन्यवाद 💐💐🌹🌹

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मार्च 2026
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  • कोई कुछ नहीं बोलेगा

    कोई कुछ नहीं बोलेगा

    पढ़ने का समय : 7 मिनट

    शीला प्रिंसिपल मैम के सवाल का जवाब देना चाहती थी। पर वो बोलकर नहीं। ये देखते हुए की कोई कुछ नहीं बोल रहा है ।तो प्रिंसिपल मैम दुबारा फिर से,एक सवाल और दुहराईं….

    ” कहीं तुम लोगों ने मिलकर कमल को, पिट पिट कर बेहोश तो नहीं कर दी हो? सच्चाई क्या है? साफ साफ हमें बताओ तुम सब.”

    प्रिंसिपल मैम ने अपनी ऊंगली चारों लड़कियों के तरफ करतीं हुई आंखों में आंखे डाल कर,आवाज ऊंची करतीं हुई बोली थी।

    जब राधा को लगा कि अब मामला बिगड़ने लगी है। तो उसने अपने आप को ज्यादा देर रोक नहीं पाई और बोल पड़ी…

    ”  ऐसा कुछ भी नहीं है मैम , जो कुछ भी आप सब के सामने है ना मैम।सच्चाई इससे कहीं बहुत अलग है । “

    राधा प्रिंसिपल मैम को देखते हुए बोली थी। और फिर एक बार सभी के नज़र राधा पर आ कर टिक गई थी।

    शीला अपने मन में कुछ सोच रही थी। वो वहां से निकल कर धीरे-धीरे बाहर के तरफ चल दी थी। वो अपने पैर में लगी चोट के कारण ठीक से चल भी नहीं पा रही थी। वो चलते हुए लंगड़ा कर चल रही थी। शीला पर कुछ लोगों को छोड़कर बाकी किसी की भी नजर नहीं थी। सभी लोगों का ध्यान कमल और उसके आसपास खड़ी लड़कीयों के उपर ही था। किसी ने भी शीला के उपर ज्यादा ध्यान नहीं दिया था। वो लंगड़ाते हुए मीटिंग हॉल से बाहर निकल गई थी। चांदनी प्रिंसिपल मैम के पास जाती है। और उनके आंखों में आंखें डाल कर धीरे से बोलतीं है ।

    ”  कमल बहुत ही घटिया लड़का है। इसके व्यवहार लड़कीयों के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है।”

     चांदनी बात आगे बढ़ाते हुए बोली।

    ” इस ने राधा और रूपा के साथ बहुत हीं घटिया सलूक किया है।”

    जब रूपा देखी की चांदनी बात खोल दी है। तो वो भी बीच में कुद पड़ी, एक जोरदार लात कमल के कमर के पास मारी। लात लगने से कमल का शरीर हिल कर रह जाता है। यह देखकर कि रूपा ने कमल को लात मारी है। तो कुछ लोग आगे आते हैं,और रूपा को पकड़ कर साइड में कर देते हैं। रूपा का शरीर गुस्से से उबल रही थी। वो सभी को खा जाने वाली नज़रों से देख रही थी। उसके माथे पसीने से भीग गई थी। जब चांदनी प्रिंसिपल मैम से ये बात बोलीं थी। तो प्रिंसिपल मैम भी यह बात सुनकर दंग रह गईं थीं।

    और वो चांदनी के तरफ आश्चर्य से देखती हुई बोली।

    ” क्या हुआ है राधा और रूपा के साथ?बेटा तुम मुझे पुरी बात सच सच बताओ। कोई भी व्यक्ति हमारे कालेज के रूल रेगुलेशन को तोड़े,ये सब मैं बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर सकती हूं।”

    प्रिंसिपल मैम कड़क अंदाज में चांदनी के तरफ देखते हुए बोली थी।

    चांदनी बोली।

    ” मैं सच कह रही हूं मैम,कमल ने राधा और रूपा पर बहुत अत्याचार किया है।उन दोनों को रस्सियों से बांध कर पिटा है। बहुत बदसलूकी की है। उसके साथ  रेप करने की कोशिश किया है।” बोलते बोलते चांदनी के आंखों से आंसू बहने लगती है।

    प्रिंसिपल मैम अपने चेयर से उठ कर चांदनी के बहते आंसुओं को पोंछती है। और चांदनी को अपने गले से लगा लेती है। और बोलतीं हैं।

    ” अगर तुम्हारी बातों में सच्चाई है। तो मैं इसे छोड़ूंगी नहीं, इसे  सजा दिलवा कर रहूंगी।”

    और मुड़ कर प्रोफेसर दयानंद को आदेश देते हुए बोलती हैं।

    ” प्रोफेसर दयानंद जी। आप डाक्टर को फोन लगाइए, वो आकर कमल का चेक अप करे मामला बेहद संवेदनशील है।”

     प्रोफेसर दयानंद हड़बड़ाकर जल्दी से उठते हुए बोलता है।

    ” जी मैडम जी,अभी काल करके बात कर रहा हूं। 

    प्रिंसिपल मैम बोली।

    ” हां थोड़ा जल्दी किजिए, बच्चों के जिंदगी का सवाल है।”

    प्रोफेसर दयानंद अपने जेब में से अपना मोबाइल निकाल कर एक नम्बर डायल करता है। रिंगटोन बजने के बाद काल रिसीव होता है। प्रोफेसर दयानंद फोन पर बात करते हुए बोलता है।

    ” हैलो,हां जी डाक्टर शर्मा जी। आप कृपया करके जल्दी से कालेज में आ जाइए। यहां पर एक बच्चे की हालत गंभीर है।”

    फोन पर दूसरी तरफ से आवाज आती है।

    हैलो, प्रोफेसर दयानंद जी। हाउ आर यू क्या हुआ है? अच्छा ठीक है। मैं अभी निकलता हूं कालेज के लिए ,बस मैं जल्दी पहुंच हीं रहा हूं। आप मेरा इंतजार किजिए।”

    बोलकर डाक्टर शर्मा ने फोन कट कर दिया था।

    वहां मौजूद कुछ स्टूडेंट्स जो कमल के दोस्त थे। वो बिल्कुल भी मानने के लिए तैयार नहीं था कि कमल कभी भी यह घटिया हरकत कर सकता है। उसे लग रहा था कि, जरूर यह सब लड़कियां मिलकर कमल के साथ कोई साजिश कर रही है। उसको झूठ मूठ के जाल में फंसा रही है। एक लड़का जिसका नाम गोविंद था। वो जोर से बोल पड़ता है।

    ” नहीं यह सब झूठ है। मैं नहीं मानता इस तरह के बातों को, कमल कभी भी ऐसा घटिया हरकत कर हीं नहीं सकता है। मैं कमल को अच्छी तरह जानता हूं।”

    यह देखकर एक लड़का और उसके सपोर्ट में खड़ा हुआ और बोला।

    ” ये इन लड़कियों की साज़िश है। ये कमल को फसाना चाहतीं हैं। क्यों की कमल पैसे वाला है।”

     वह लड़का पूरी ताकत से चिल्लाकर बोल रहा था। इसका नाम विशाल है।

    ” विशाल ये तुम कैसी बातें कर रहे हो। कमल एक नंबर का कुत्ता कमीना घटिया इंसान है। वो राधा दीदी को बालात्कार करने वाला था। मेरी आंखों के सामने,सही टाइम पर आकर शीला दीदी और चांदनी दीदी ने उस राक्षस से राधा दीदी को बचा लिया। नहीं तो ये रेपिस्ट ना जाने क्या क्या करता हम दोनों के साथ।”

    रुपा विशाल को नफ़रत भरी नजरों से देखते हुए जोर से बोली थी।

    ” झूठ, तुम झूठ बोल रही हो। बहाना बना रही हो। तुम सब ने मिलकर कमल को मार मारकर बेहोश कर दी हो। अब सजा से बचने केलिए बहाने बना रही हो ।”

     विशाल रूपा के तरफ देखते हुए,वह भी ज़ोर से चीखते हुए बोल रहा था।

    ” सट अप, शांत हो जाओ तुम सब। कोई कुछ नहीं बोलेगा।”

    प्रिंसिपल मैम सभी को डांटते हुए जोर से बोली थी। सुनकर सभी लोग चुप हो गए थे। प्रिंसिपल मैम के आवाज बिना माइक के हीं पुरे मीटिंग हाल में गुंज रही थी। 

    इधर शीला मीटिंग हॉल में से बाहर निकल कर कॉलेज के दो नंबर गेट वाले रास्ते में लंगड़ाती हुई चली जा रही थी। बाहर तेज धूप निकली हुई थी। हल्की हल्की ठंडी हवा बह रही थी। जिससे शीला थोड़ा राहत महसूस कर रही थी। रास्ते के साइडों में हरे भरे पेड़ पौधे लगाए गए थे। जिससे रास्ते में कहीं कहीं छाया भी हो रही थी। शीला चलती हुई कॉलेज के दो नंबर गेट से बाहर निकल कर मार्केट वाले रास्ते में चलने लगती है। चलते चलते एक शॉप से पानी की बोतल खरीद कर आगे बढ़ गई थी। थोड़ी देर आगे चलने के बाद शीला को एक मेडिकल स्टोर दिखाई पड़ती है। शीला उसमें चली जाती है। शीला मेडिकल स्टोर के अंदर आ गई थी। अंदर आकर वो काउंटर पर बैठे आदमी के तरफ देखते हुए बोलती है।

    ” नमस्ते अंकल “

    सुनकर शीला के जवाब में वो आदमी भी बोलते हैं।

    ” नमस्ते बेटा , बोलिए बेटा क्या चाहिए आपको?”

    शीला के तरफ देखते हुए दुकान दार मुस्कुराते हुए बोला था।

    शीला अपनी पानी की बोतल काउंटर पर रख देती है।

    ” अंकल जी, मेरे फ्रेंड को न चोट लग गई है। और वो बेहोश है।ऐसी कोई मेडिसिन है। जिससे वो जल्दी से होश में आ जाए और वह ठीक हो जाए।”

    शीला दुकानदार को उनके तरफ देखते हुए बोली थी।

    ” हां ठीक है, मैं आपको एक दवाई दे रहा हूं। जिसको पिलाने से वो होश में भी आ जायेगा। और उसके बॉडी के अंदर बूस्टर का भी काम करेगा।..”

    शीला को इतना बोलकर वो दुकानदार अंकल अपने जगह से उठ कर दूसरे साइड दवाई लेने चला जाता है। शीला वहीं खड़ी होती है।

    तभी अजय दुकान में दाखिल होता है। और वो भी काउंटर पर आकर खड़ा होता है।उसका ध्यान अभी शीला पर नहीं गया था। वो डोर ओपन करके अंदर आ गया था। लेकिन उसका नजर शीला के लिए दवाई लेने जा रहे दुकानदार अंकल पर हीं था।

    आगे की कहानी पढ़िए कहानी के अगले भाग में……….. प्यार एक एहसास, नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड पर……..

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    नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड के लेखक। पाठकों के लिए मनोरंजक और दिल को छू लेने वाली हिंदी कहानियाँ लिखना पसंद करता हूँ।आपका स्वागत है नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड में धन्यवाद 💐💐🌹🌹

  • बातों का विश्वास

    बातों का विश्वास

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    शीला कमल को मार मारकर उसे बेहोशी की दुनिया में पहुंचा दिया था। कमल के बेहोश होने के बाद भी शीला के लात रुक नहीं रही थी।‌‌ लगातार लातों की बारिश कर रही थी। गुस्से से शीला के चेहरे पसीने में भीग गया था। पिछे से शीला के कंधे पर दो हाथ पड़ने के आभास होता है। और शीला की तंद्रा भंग होती है। वो पिछे मुड़कर देखतीं हैं। रूपा और राधा उसकी कंधों को धिरे से सहला रही थी। दोनों के चेहरे पर एक खुशी झलक रही थी। और दोनों मुस्कुरा रही थी। वो दोनों अपने दीदी के कमल पर हुई जीत पर प्राउड फील कर रही थी।‌‌

     ” दीदी आप शांत हो जाइए,आप को चोट लगी है।”

    चांदनी धिरे धिरे शीला के तरफ बढ़ते हुए कैजुअली अंदाज में बोली थी।

    ” हां दीदी, अब तो आप हम लोगों पर छोड़ दिजिए। हम देख लेंगे की क्या करना है। इस कमिने के साथ।”

    राधा कमल के तरफ इशारा करते हुए बोली थी।

    ” अब हमें कमल को लेकर प्रिंसिपल मैम के पास चलना चाहिए।”

    रुपा अपने कमर पर हाथ रख कर मुस्कुराती हुई बोल रही थी।

    राधा चांदनी और शीला एक साथ बोलती है।

    ” हां ठीक है चलो चलते हैं।”

    कमल को होश तो था नहीं, जो वो चलकर जाता। तो अब उसे लेकर जाने की जिम्मेदारी,इन चारों सहेलियों के कंधे पर थी । चारों सहेलियों ने कमल के एक एक पैर और एक एक हाथ पकड़ कर उठाई और चल दी थी।

    इधर मीटिंग हाल में कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव पर कालेज में फंक्शन की तैयारी करने को लेकर प्रिंसिपल स्टूडेंट प्रोफेसर के बीच बाद संवाद चल रही थी। सभी प्रोफेसर अपने स्टूडेंट को भगवान श्री कृष्ण के जीवन के बारे में तो उनके द्वारा किए गए लीला के बारे में अपने स्टूडेंट के सामने ब्यख्यान कर रहे थे।

    जब प्रोफेसर शुक्ला अपनी बात स्टूडेंट के सामने रख रहे थे। तब एक स्टूडेंट अपने कुर्सी से उठ कर प्रोफेसर शुक्ला से एक सवाल किया।

    दरअसल इस शवाल का जवाब उस स्टूडेंट के साथ साथ आप हम और उस मीटिंग हाल में मौजूद सभी लोगों को चाहिए था। वो लड़का अपनी चेयर से उठा और वो प्रोफेसर शुक्ला को बीच में रोकते हुए बोला।

    ” माफ़ किजियेगा सर, मैं आपको बीच में रोक रहा हूं। सर मैं जानना चाहता हूं। कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव तो हम हमारे कालेज में हर साल मनाते आ रहे हैं। तो फिर हमें इस बार और पहली बार मनाया जाएगा, ऐसा क्यों बताया जा रहा है?”

    उस लड़के ने साफ शब्दों में अपनी बात प्रोफेसर शुक्ला के सामने रख दिया था। उस लड़के की आवाज जब वहां मौजूद सभी लोगों के कानों में जाते हैं। तो सभी के ध्यान उस लड़के पर टिक जाती है। जब ये सवाल उठ हीं गई है तो इसका जवाब जानने कि कोशिश में कुछ लोग और आगे आते हैं। एक लड़की अपनी चेयर से उठ कर बोलती है।

    ” हां सर, हम लोग तो श्री कृष्ण जन्मोत्सव हर साल मनाते हैं। और कॉलेज में अवार्ड फंक्शन का भी आयोजन किया जाता है। तो फिर ये क्यों?”

    उस लड़की ने भी अपने तरफ से एक सवाल पूछ लिया था।इन सवालों के जवाब स्टूडेंट को प्रोफेसर शुक्ला देने वाले हीं थे। कि सभी की नजर मीटिंग हाल के दरवाजे पर पहुंच जाती है।देख कर सभी शौक हो जातें हैं। मीटिंग हाल के माहौल अब बदलने वाला था। जहां तक बदल ही गया था। शीला कमल चांदनी राधा रुपा को देख कर सभी स्तब्ध रह गए थे। सन्नाटा पसर गया था। एक साथ सभी लोगों के जुवान बंद हो गया था। कोई कुछ भी नहीं बोल रहे थे। सभी सीर्फ एक टक उन पांचों को देख रहे थे। अब कोई आगे आकर वेलकम तो करने वाले थे नहीं, तो चारों सहेलियों ने खुद आगे बढ़कर अंदर आने लगी थी। शीला और चांदनी कमल के एक एक हाथ पकड़ कर टांगी हुई थी तो राधा और रूपा एक एक टांग सभी चलकर स्टेज के सामने आकर खड़ी हुई थी।

    खामोशी को भंग करते हुए एक छात्रा इन सभी को देख कर बोली थी।

    ” क्या हुआ है इसे, यह बेहोश क्यों है?”

     उस छात्रा ने अपनी उंगली से कमल को प्वाइंट आऊट करते हुए बोली थी। बीच में से एक और छात्र का आवाज गुंजा।

    ” तुम लोग कमल को ऐसे टांग कर क्यों लाई हो? क्या हुआ है इसके साथ, क्या ये एक्सीडेंट किया है?” 

    उस छात्र ने चारों सहेलियों से सवाल किया था।

    इस सवाल का जवाब आप हम, और ये चारों सहेलियां जानते हैं। लेकिन यहां मीटिंग हाल में मौजूद सभी लोग नहीं जानते थे। अब एक बात और है कि क्या यह सहेलियां जो भी बात बोलेगी क्या वहां मौजूद सभी लोग क्या इनके बात का विश्वास करेंगे? अगर नहीं, तो फिर उसके लिए क्या करना पड़ेगा। वही करने के लिए शीला अपने मन में कुछ सोच कर अपने कदम आगे बढ़ा चुकी थी। सभी कमल को फर्श पर लिटा कर वहीं एक तरफ खड़े हो जाते हैं। अगर कमल की सच्चाई सबके सामने उजागर करना है। तो उसे सबसे पहले होश में लाना होगा, शीला मन-ही-मन ये सोच रही थी। बिना उसको होश में लायें या बिना उसके मुंह से उसके बातों को कोई नहीं मानेगा क्यों मानेगा कैसे मानेगा कोई नहीं मानेगा। हम भी नहीं मानेंगे और आप तो मान हीं नहीं सकते हैं। क्यों की कमल अभी भी बेहोश पड़ा था। चोट उसको लगा था। अब अगर ये चारों सहेलियां बोलेगी की कमल ने उसे परेशान किया है तो इस बात को प्रमाणित भी करना होगा। जो कि कमल के बेहोश रहते संभव नहीं था। यह सीन देख कर प्रोफेसर और प्रिंसिपल मैम भी आश्चर्य चकित रह गए थे।

    प्रिंसिपल मैम इन चारों को देख कर बोलतीं हैं।

    ” शीला चांदनी राधा रूपा क्या है ये सब? तुम सब मिलकर कमल के साथ क्या की हो?”

     थोड़ा रुक कर प्रिंसिपल मैम फिर बोलना शुरू करतीं हैं।

    ” ये बेहोश क्यों हो गया है? सब कुछ सही सही बताओ तुम सब।”

    प्रिंसिपल मैम अपने चेयर पर बैठी हुई हीं इन चारों से सवाल की थीं। शीला प्रिंसिपल मैम को उनके सवाल का जवाब देना चाहती थी। डर इस बात का था कि उसके बात का कोई विश्वास नहीं करेगा।  यही कारण था कि वो कुछ बोलने से बच रही थी। अब प्रिंसिपल मैम उससे सीधा सवाल कर ली थी। तो अब वो चुप कैसे रह सकती थी। 

    क्या होगा जब कमल को होश आयेगा? ये चारों सहेलियां कब तक चुप रहेगी? क्या कमल को होश आयेगा? जब कमल की सच्चाई सभी के सामने आयेगा फिर क्या होगा? इन सभी सवालों के जानने के लिए पढ़ें कहानी का अगला भाग ….. प्यार एक अहसास , कहानी अजय शीला की नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड पर……

     

     

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  • ग्रुप कॉल

    ग्रुप कॉल

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    सभी अपने अपने दिशा में कमल को ढूंढने  चल पड़े हैं। चांदनी और राधा अलग अलग दिशा में और रूपा वापस शीला के तरफ चल देती है।उदेस्य तीनो चारों सहेलियों का वही एक कमल को पकड़ कर उसके किये की उसे सजा दिलवाना…

    इधर कमल जो छुप कर सभी पर नजर बनाये हुए था। जब उसे लगा सभी लोग उससे दुर जा चुके हैं। तब उसने राहत की सांस लिया और सोचते हुए बाहर निकल गया,की अब वो दुसरे रास्ते से कॉलेज से बाहर निकल जायेगा। और ये सभी लडकियां कॉलेज में उसे ढूंढती हीं रह जायेगी। कमल अपने मन में यही सब बातें सोचते हुए बाहर निकला और सड़क पर चलने लगा। चलते चलते उसने देखा की एक लड़की सड़क के किनारे बैठी, अपनी पैर पकड़े सर झुकाए अपने पैरों के साथ कुछ कर रही थी। वो लड़की शीला थी शीला को दुसरी साईड घूमी होने के कारण कमल उसे पहचान नहीं पाया था। शीला भी अपना सर नीचे कर के अपने पैर में लगी चोट को मालिश कर ठिक करने की कोशिश कर रही थी। उसकी नजर निचे की तरफ झुकी होने के वजह से उसने भी कमल को नहीं देख पायी थी। कमल भी कोई होगी सोचकर उसे आगे निकल गया था ।जैसे हीं कमल कुछ दूर गया था। कि उसके कानों में सर सराती हुई एक तेज तरार आवाज आकर पड़ी।

    ” वहीं रूक जाओ कमल भागने की बिल्कुल भी कोशिश मत कर ना”

    शीला अपने हांथ से घुटनो का सहारा से उठकर खड़ी होती हुई बोली थी।

    कमल एक दम से चौंका गया और उसके कदम रूक गया वो मुड़ कर आश्चर्य से पिछे देखा उसे शीला दिखी जो उसको अपनी बड़ी बड़ी आंखो से उसके तरफ गुस्से से देख रही थी। कमल शीला को नीचे से उपर तक गौड़ से देखता है। उसे ऐहसास हो जाता है की शीला को चोट लगी है। वो अकेली उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकती है।

    ” हां हां नही भाग रहा हूं मैं,आजा ..देखता हूं क्या कर लेती है मेरा “

    कमल जोर से बोला था।

    ” कमीने मैं तेरा खून पी जाऊंगी।”

    शीला चीख कर जोर से कमल के तरफ बढ़ते हुए बोली थी।

    शीला के पैर के चोट के दर्द बढ़ गयी थी। वो चलते हुए लंगरा भी रही थी। यह देखकर कमल का हौसला और बढ़ गया था।

    ” ख़ून पी जायेगी हा हा हा हा हा “

    बोल कर कमल जोर से हंसा

    ” कुत्ते भागकर तुने अपने लिये और ज्यादा प्रोबलम खड़ी कर लिया है।”

     कमल को देखते हुए शीला दांत पीसकर जोर से बोली थी। शीला चलते हुए लंगरा रही थी ।धिरे धिरे शीला लंगड़ाती हुई कमल के सामने पहुंच जाती है। दोनो के बीच में बहस जारी रहती है। दूर से रूपा शीला और कमल को देख लेती है। वो अपने जेब से मोबाईल निकाल ती है। और अपने फोन में कुछ  टाईप करने लगती है। और ग्रुप कॉल लगा देती है। रींग होने लगती है।

    इधर राधा चलते हुए रास्ते के दोनो साईड नजर घुमा घुमा के देखते हुए आगे के तरफ बढ़ती रहती है।तभी राधा के फोन बजने लगती है।राधा अपनी जेब से मोबाईल बाहर निकालती है। राधा फोन के स्क्रीन में देखती है। जिसमें ग्रुप कॉल आ रही होती है। राधा अंसर बटन पर क्लीक कर के मोबाईल कान में सटा लेती है।

    उधर चांदनी भी कॉल उठा लेती है।जब कॉल रिसीव हो जाती है। तब रूपा जल्दी से जोर से बोलती है।

    ” आप लोग सुन रही हो ना दीदी “

    दूसरी तरफ से आवाज आई जो चांदनी की थी।

    ” हां सुन रही हूं। रूपा बोलो…”

     फिर राधा की भी आवाज आई

    ” क्या हुआ रूपा तुम कहां पर हो बोलो..”

    जबाव देते हुए रूपा बोली

    ” शीला दीदी ने कमल को पकड़ लिया है।आप लोग जल्दी से पहुंचिए।”

    ” ठीक है तुम दीदी के पास पहुंचो मैं भी जल्दी हीं आ रही हूं।”

    चांदनी बोलकर फोन कट कर देती है।

    ” रूपा हम लोग दूर हैं। थोड़ी देर लग सकती है। तुम तेजी से दीदी के पास पहुंचो दीदी को चोट लगी है। ध्यान रखना कमल दीदी को कुछ नुकसान ना पहुंचाए।”

    राधा बोलते हुए घबरा रही थी। उसे शीला की चिन्ता हो रही थी।

    ” ठीक है दीदी मैं जा रही हूं। जल्दी से आईए आप लोग “

    रूपा भी बोलकर फोन काट दी थी।

    फोन काट कर रूपा शीला के तरफ बढ़ने लगती है।  शीला हिम्मत से आगे बढ़कर कमल के कॉलर पकर लेती है।

    ” तेरी इतनी हिम्मत की तुम मेरा कॉलर पकड़ेगी।”

    कमल शीला को जोर से झापड़ मारते हुए चीख कर बोला था ‌।

    शीला थप्पड़ खा कर हिल गयी थी। थप्पड़ लगने के कारण शीला का कमल के कॉलर से पकड़ कमजोर हो गई थी।

    कमल शीला के हांथ को अपने कॉलर से हटाया और हांथ को मरोड़ा जिससे शीला पिछे मुड़ गयी थी। हांथ मुड़ने से शीला को दर्द भी हुआ था। कमल शीला का हांथ मरोड़ कर उसके पीठ पर मुक्का से वार किया था। मुक्के की चोट से शीला को दर्द तो हुआ था। पर अगले हीं पल शीला कमल के हांथ से अपना हांथ झटके से छुड़ाई और सम्भल कर कमल के पेट में एक जोर दार मुक्के से अटैक किया,कमल दर्द के मारे पेट पकड़ लिया था। शीला यहीं नहीं रूकी उसने फुर्ती से कमल के टांग पर वार किया। वो लगातार पांच छह लात लगातार कमल के पैर पर मारी थी। कमल दर्द से छट पटा गया था। वह फिर से क्लास रूम वाला सिच्युशन में चला गया था। वो उम्मीद नही किया था कि, एक अकेली शीला उस पर भारी पड़ जायेगी। वो भी चोट खाई हुई। वो पेट पकड़ कर घुटने के बल बैठ गया था। जैसे हीं कमल बैठा था। की शीला की लात ने उसके गाल पर भार दिया। गाल पर लात पड़ने के वजह से कमल बगल के तरफ उलट गया था। अब जब कमल जमीन पर गीर हीं गया था। तो शीला भी कहां चुकने वाली थी। चल पड़ी अपनी लात दर लात की बरसात करने वो भुल गयी थी की, उसकी पैर में चोट भी लगी है । वो लगातार लात से वार करती रही  कमल पर कभी उसकी लात कमल के पेट तो कभी कमर कभी गर्दन पर लगती थी । शीला हर लात के साथ बस यही बोलती थी।

     ” ये ले कमीने,ये ले कुत्ते, ये ले हरामी।”

    शीला अपनी सारी दर्द भुल कर कमल को मारे जा रही थी।

    मार खा खा के कमल के शरीर से होश गायब हो गया था। मतलब वो बेहोश हो गया था। शीला ये जाने बीना कमल को बीना साबुन के ही धुलाई किये जा रही थी। बे खबर शीला कमल को मारे जा रही थी। पढिए अगले भाग में……प्यार एक अहसास कहानी अजय शीला की……..

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    Manoj Divana Namaste Story World

    नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड के लेखक। पाठकों के लिए मनोरंजक और दिल को छू लेने वाली हिंदी कहानियाँ लिखना पसंद करता हूँ।आपका स्वागत है नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड में धन्यवाद 💐💐🌹🌹

  • जुड़ शीतल की मधुर छांव

    जुड़ शीतल की मधुर छांव

    पढ़ने का समय : 2 मिनट

    जुड़ शीतल आई है लेकर,

    ठंडी हवाओं का संदेश,

    धूप की तपिश से थके मन को,

    देती है सुकून विशेष।

    सुबह-सुबह जब सूरज झांके,

    नव किरणों का हो आगमन,

    ठंडे जल की कोमल बूंदें,

    कर दें मन का हर स्पंदन।

    आम के पत्तों से टपके जल,

    हर आंगन को हरियाली दे,

    स्नेह भरे उस ठंडे छींटे से,

    रिश्तों में फिर खुशहाली दे।

    मां के हाथों का वो पानी,

    जब सिर पर हल्के से गिरता है,

    जैसे हर दुख, हर चिंता को,

    धीरे-धीरे वो हरता है।

    बाबा की ममता, दादी की सीख,

    सबमें बसती ठंडी छांव,

    हर बूंद में आशीष समाई,

    हर दिल में जगती नई चाह।

    छोटे-बड़े सब साथ मिलें,

    हंसी-खुशी का मेला हो,

    जुड़ शीतल के इस पर्व में,

    हर दिल में प्रेम का रेला हो।

    मिट्टी की खुशबू भी कहती,

    अब तो मौसम बदला है,

    शीतलता के इस उत्सव में,

    जीवन ने रंग नया भरा है।

    ना कोई गिला, ना कोई शिकवा,

    बस अपनापन का एहसास,

    जुड़ शीतल सिखा जाती है,

    ठंडक में छुपा है विश्वास।

    धरती भी जैसे मुस्काए,

    जब जल से उसका तन भीगे,

    हर बूंद में छुपा आशीष,

    जीवन को नव रंगों से सींचे।

    खेतों में हरियाली लहराए,

    नदियों में मधुर संगीत बहे,

    हर जन-मन में शांति बस जाए,

    जीवन के हर पल रंग सहे।

    सांझ ढले जब दीप जलें,

    मन में मधुर उजियारा हो,

    दिन भर की उस ठंडी छाया का,

    हर चेहरे पर नज़ारा हो।

    पुरखों की ये प्यारी परंपरा,

    आज भी दिलों में बसती है,

    हर साल ये आकर हमको,

    अपनों से फिर जोड़ती है।

    नव जीवन का संदेश लिए,

    हर दुख को पीछे छोड़ती है,

    जुड़ शीतल की हर एक बूँद,

    मन की थकान को तोड़ती है।

    जुड़ शीतल का ये त्यौहार,

    सिर्फ रिवाज नहीं, एक भावना है,

    प्यार, स्नेह और शांति का,

    हर दिल में बसता खजाना है।

    चलो मिलकर इसे मनाएं,

    मन में प्रेम का दीप जलाएं,

    ठंडे जल की हर एक बूँद से,

    जीवन को सुंदर बनाएं। 🌿💧

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    Manoj Divana Namaste Story World

    नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड के लेखक। पाठकों के लिए मनोरंजक और दिल को छू लेने वाली हिंदी कहानियाँ लिखना पसंद करता हूँ।आपका स्वागत है नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड में धन्यवाद 💐💐🌹🌹

  • तूं मेरी दुआओं का असर है।

    तूं मेरी दुआओं का असर है।

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    तेरे बिना ये दिल अधूरा सा लगता है,  

    तेरी मुस्कान में ही मेरा जहाँ बसता है।  

    तेरी आँखों में जो चमक है, वो मेरी रौशनी है,  

    तेरे नाम से ही मेरी हर धड़कन जीती है।  

     

    तू पास हो तो हर लम्हा ख़ास बन जाता है,  

    तेरी यादों से ही मेरा हर दिन सज जाता है।  

    इज़हार-ए-मोहब्बत लफ़्ज़ों में कैसे करूँ,  

    दिल की आवाज़ है तू… और तू ही मेरी दास्ताँ है।

     

    तेरे बिना ये रूह भी अधूरी लगती है,  

    तेरी यादों से ही मेरी साँसें पूरी लगती हैं।  

    तेरी आँखों में जो समंदर है, उसमें मैं खो जाना चाहता हूँ,  

    तेरे होंठों की खामोशी में अपना नाम सुनना चाहता हूँ।  

     

    मोहब्बत का इज़हार लफ़्ज़ों से नहीं होता,  

    ये तो दिल की धड़कनों से बयान होता है।  

    तू मेरी दुआओं का वो असर है,  

    जिसे पाने के बाद भी मैं हर रोज़ तुझे माँगता हूँ।

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  • टी प्वाइंट का चक्कर

    टी प्वाइंट का चक्कर

    पढ़ने का समय : 8 मिनट

    ” मिस्टर भाटी कॉम यू ऑन द स्टेज ”

    बोलकर प्रोफेसर दयानन्द, प्रोफेसर विश्वनाथ भाटी का स्वगत किए थे। पहले सभी प्रोफेसर्स को बारी बारी से बोलना था। लास्ट में सभी बच्चों को प्रिंसिपल मैम संबोधन करने वाली थीं।

    प्रोफेसर भाटी अपने जगह से उठकर माइक के पास आते हैं।और बोलते हैं।

    ” जय श्री कृष्ण बच्चो ”

    स्टूडेंटस के भीड़ भी एक साथ बोलते हैं।

    ” जय श्री कृष्ण”

    प्रोफेसर भाटी आगे बोलना स्टार्ट किए थे।

    ” तो मेरे बच्चों,जैसा की आपको बताया गया है।अभी अभी आप सब को प्रोफेसर दयानन्द सर बता रहे थे। की भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन मनाने के बारे में, हमारे कॉलेज ने फैसला लिया है। कि अपने कॉलेज में उस दिन पुजा पाठ भजन सांस्कृतिक कार्यक्रम  और श्री कृष्ण रचित लीलाओं का नाट्य  प्रदर्शन कर दिखाया जाना है। जिसमें आप सब लोग भी सहभागी बनेंगे। आप लोग वह लीला मंचन देख और सुन कर श्री कृष्ण के लीलाओं को आप अपने जिवन में उतारेंगे और उनके द्वारा दिए गए उपदेशों को अपने दोस्तों मित्रों के साथ शेयर करेंगे। इन्ही बातों के साथ हम अपनी  वानी को विराम देते हैं। धन्यवाद बच्चों।”

    इसी के साथ एक बार फिर तालियों के गर गड़गड़ाहट से पुरा मीटिंग हॉल गुंज उठता है। अब फिर से माइक प्रोफेसर दयानन्द जी के हांथ में थे। और वो फिर से बोलना स्टार्ट कर चुके थे।

    ” हां तो बच्चो, अभी आप लोग प्रोफेसर भाटी को सुन रहे थे। मुझे आशा नहीं उम्मीद है कि ,आप सभी उनके बताए बातों पर गौड़ करेंगे।”

    सभी स्टूडेंट्स के तरफ देखते हुए पुछते हैं।

    ” उनके बातों पर गौड़ करेंगे ना बच्चों?”

    सभी स्टूडेंट्स एक साथ बोलते हैं।

    “जी सर।”

    फिर प्रोफ़ेसर दयानन्द बोलते हैं।

    ” अब मैं आप लोगों के बीच, प्रोफेसर शास्त्री आयेंगे और अपनी बात को रखेंगे।”

    एक बार फिर सारा हॉल तालियों से गुंज उठता है। प्रोफेसर शास्त्री जी आते हैं। और अपने हांथ में  माइक लेकर बोलना स्टार्ट कर देते हैं।

    इधर शीला चांदनी राधा और रूपा कमल को लिए मीटिंग हॉल के रास्ते पर चल रहे होते हैं। सभी सहेलियों के चेहरे पर चिन्ता की लकीर साफ झलक रही थी। सभी के मन में खुशी भी थी की अब सब कुछ नोर्मल हो गयी थी। या प्रिंसिपल मैम से मिलने के बाद सब कुछ ठीक हो जाने वाली  थी। कमल के हाल की बात करें तो, उसका हाल बिल्कुल भी ठीक नहीं था। वो तो यही सोच सोच कर घबरा रहा था। की जब उसे प्रिंसिपल मैम के पास लेकर जाया जायेगा, तो फिर क्या होगा उसके साथ। उसको सारा कॉलेज के सामने बदनामी उसके दोस्तों के बीच में बेइज्जती उसके मम्मी पापा के बदनामी की बहुत चिंता होने लगी थी। भाई जब तुम्हे ये सब की चिन्ता थी। तो पहले ना सोचना था, की हम ये सब कर्म ना करें।जिससे हमारी इतनी बदनामी हो। उस टाइम तो बहुत बड़ा हिरो बन रहा था। की मेरे बढ़कर कोई हिरो है हीं नही इस दुनियां में,जब कर्म किया है तो फल भी तो मिलेगा। लेकिन उसके दिमाग में एक खुराफात आइडिया भी आता है। कि इन सब से अपने आप को छुड़ा कर भाग जायें। कहते हैं ना, जब काल सर पे नाचने लगता है।तो बुद्धी का विनाश हो जाता है। यही सब कमल के साथ अभी हो रहा था। शीला और चांदनी कमल को पकड़े हुए चल रहे हैं। की तभी एका एक जोरदार झटके के साथ,कमल दोनो से अपना हांथ झटक कर  छुड़ा लेता है। और जोर से दोनो को धक्का दे कर गिरा देता हैं। और भागने लगता है।

    ” पकड़ो राधा उसे ”

    चांदनी जो कमल के धक्के खा कर सड़क पर गिरी थी। जोर से बोली थी ।

    ” पकड़ो पकड़ो भागने ना पाये।”

    शीला भी नीचे पड़े पड़े हीं बोली थी। रूपा और राधा जो थोड़ा पिछे पिछे चल रही थी। कमल को भागते हुए देखी तो उसे दौड़कर पकड़ना चाहा पर उसे भी कमल झटक कर  भाग गया था। शीला उठकर खड़ी हो गई थी। चांदनी भी उठ गई थी।

    ” चलो दौड़कर पकड़ते हैं। कितना दूर भागेगा।”

    शीला बोली और दौड़ने लगी

    ” चोट लगा है उसे, ज्यादा तेज नहीं भाग सकता है। हम पकड़ लेंगे उसे।”

    चांदनी दौड़ते हुए बोली थी। राधा और रूपा भी कमल को पकड़ने के लिए सरपट दौड़ने लगी थी।

    ” इस बार पकड़ाया तो  छोडूंगी नहीं उसे, बीना हांथ पांव तोड़े।”

    रूपा गुस्से में दांत पीस कर जोर से बोली थी।

    ” यह सब मेरी वजह से हुआ है। हमने ध्यान नहीं दिया उसपर और वो भाग गया।”

    राधा अपने आप को ब्लेम करते हुए रूआंसी आवाज में बोली थी।

    ” तुम्हे खुदको कोसने की कोई जरूरत नही है राधा, इसमें हम सब की गलती है।”

    शीला राधा से बोली थी।

    ” हां दीदी ठीक कह रहीं है। आप अपने आप को दोशी नहीं मानिए।”

    बोल कर रूपा भी राधा को समझाने की कोशिश कर रही थी। बेचारा कमल ज्यादा दूर तक नहीं भाग पाया था। भागते भागते एक बिल्डिंग के पीछे दीवार से सटकर जोर जोर से सांस ले रहा था।कमल अपने पीछे चारो लड़कियों को दौड़ते हुए देख लिया था। यही सोचकर वो सभी लड़कियों के ध्यान डायवर्ट करने के लिए छुप गया था। ये सभी सहेलियां भी कमल का पीछा करते हुए उसके पीछे भाग रही थी। तभी शीला के पैर सड़क किनारे रखे एक पत्थर के टुकड़े से टकरा जाती है। वो गिर जाती है। ये देखकर सभी रूक जाती है। पर शीला उन लोगो को रूकने से मना करती है।

    ” तुम लोग मेरी फ़िक्र मत करो और उसे दौड़ कर पकड़ो, नहीं तो वो भाग जायेगा।”

    शीला अपना दर्द बर्दास्त करने के प्रयास करते हुए कराह कर बोली थी।

    ” नहीं दीदी तुम्हें चोट लगी है। और ऐसे मे…”

    चांदनी अभी अपनी  बात पूरी कर पाती इससे पहले हीं चांदनी के बात को बीच मे से हीं काटते हुए शीला बोली।

    ” नही मेरी छोड़ो तुम लोग और उसे पकड़ो तुम लोग नही तो वो भाग जायेगा।”

    ” दीदी आपको तो…”

    राधा भी अपनी बात पूरी नहीं कर पायी थी। कि शीला की चीखती हुई आवाज सभी के कानों में पड़ती है।

    ” उसे पकड़ना जरूरी है। मेरी चोट को नहीं।”

    तीनो सहेली समझ चुकी थी। की उसे क्या करना है। और वो सभी चल पड़े थे वे करने। समय भी देखिए ना कैसा खेल खेलता है ।शीला को चोट वहीं जाकर लगी थी। जिस बिल्डिंग के पीछे कमल छीपा था। वो बात अलग थी की वो अकेली थी। और चोटिल भी हो गयी थी। चांदनी राधा और रूपा दुबारा से दौड़ने लगी थी ! कमल इन लोगों को दौड़ते हुए आगे जाते हुए देख रहा था। वो सोच रहा था कि ये लोग दूर चले जायेंगे। तो हम निकल कर दुसरे रास्ते से कॉलेज से बाहर भाग जायेंगे। कहते हैं ना जो होता है अच्छे के लिए होता है। शीला वहीं थी जहां कमल छुपा हुआ था ।

    इधर चांदनी रूपा राधा भागते भागते दूर निकल गयी थी। और एक जगह पर जाकर तीनो सहेलियां रूक गयी थी। हुआ ये था की दौड़ते दौड़ते उन लोगों को एक टी प्वाइंट मिल गया था। वहां पर तीन रास्ता जा रहा था। एक रास्ते से तो वो तीनो आई हीं थी। और एक रास्ता इधर जा रहा था । तो दूसरा रास्ता उधर इसी लिए तीनो वही रूक गयी थी। की वो कौन रास्ते में जाये पता नहीं कमल कौन से रास्ते से भागा होगा और वो कौन रास्ता पकड़े यही कंफ्यूजन में तीनो सहेलियां वहीं रूक गयी थी।

    ” अब किधर जायें दीदी ?”

    राधा कंफ्यूज होते हुए चांदनी से पूछी थी।

    ” यहां पर कोई है भी नहीं, जिससे पूछ सकें की क्या कमल को देखा है।”

    रूपा भी चांदनी से बोली थी।

    ” कोई दिमाग लगाना पड़ेगा।”

    चांदनी दोनो के आंखों में झांकते हुए बोली थी।

    ” पर कैसे”

    थोड़ी देर सोचने के बाद चांदनी बोली थी कि।

    ”  हम कमल को अलग अलग ढूंढेंगे।  राधा तुम उस साइड जाओगी मैं इस तरफ जाती हूं। और रूपा तुम दीदी के पास जाओगी उन्हे चोट लगी हैं। तुम उनका ख्याल रखोगी।”

    ” पर दीदी आप लोग अकेले कैसे कमल को पकड़ोगी कही वो आप लोगों को?”

    रूपा बोलते बोलते रूक गयी थी।

    राधा बोली

    ” एक आइडिया है दीदी।”

    ” क्या आईडिया है। जल्दी बोलो।”

    राधा के तरफ देखते हुए चांदनी बोली थी। सही टाइम पर दिमाग भी सही चलता है सही लोगों का।

    ” हमलोग मोबाइल मे ग्रुप बना लेते है। सभी चारो सहेलियों को ग्रुप कॉल करना है। जिसे भी कमल दिखेगा वो कॉल करेगी और बतायेगी फिर हम लोग जल्दी से वहां पहुंच जायेंगे।”

    राधा अपनी पूरी प्लानिंग बताई थी।

    ” पर शीला दीदी को तो पता हीं नही है। ये बात तो वो कैसे कर पायेंगी कॉल।”

    रूपा बोली और दोनो को आशचर्य से देखने लगी थी।

    ” दीदी के पास तुम जा रही हो, तो तुम करोगी कॉल अगर तुन्हें कमल दिखा तो।”

    ” राधा तुम ग्रुप बनाओ जल्दी से टाइम नही है।”

    चांदनी दोनो को ऑर्डर देते हुए बोली थी। कुछ हीं देर में राधा मोबाइल में टाइप करके ग्रुप बना लेती है।

    ” बन गया दीदी ग्रुप।”

    .राधा चांदनी से बोली थी।

    ” ठीक है ओके तो तुम जाओ उधर।”

    चांदनी राधा को हांथ से एक तरफ इशारा करते हुए बोली थी। और बात आगे बढाते हुए फिर बोली

    ” मैं इधर जा रही हूं। और रूपा तुम दीदी के पास जाओ जल्दी से।”

    राधा और चांदनी एक साथ बोली थी।

    ” ठीक है दीदी मैं जा रही हूं।”

    रूपा बोलती है।और सभी अपने अपने रास्ते चल दिए थे।

    पढिए आगे कि कहानी अगले भाग में……प्यार एक अहसास…..

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  • विडियो सबूत

    विडियो सबूत

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    एक फैसला जिसमें सबकी सहमति होती है। जानेंगे इस भाग में उस फैसले की रहस्य चलिए चलें कहानी की ओर…
    ” अब इसके साथ बहस करने का कोई फायदा नहीं है दीदी, अब इसको प्रिंसिपल मैम के पास हीं लेकर चलना चाहिए।”
    राधा सख्त होते हुए कठोर आवाज में बोली थी।
    ” हां इसे अब प्रिंसिपल मैम के पास हीं लेकर चलते हैं। अब वही इसके साथ जो भी करना होगा करेंगे।”
    शीला भी राधा के बात से सहमत होते हुए बोली थी। चार सहेलियों में दो के स्वभाव कड़क, तो दो के सरल व सॉफ्ट जैसा की हम लोगों ने देखा की कैसे रूपा और चांदनी बात बात पे हमेशा एक्शन व अटैक मोड में रहती थी। तो वहीं शीला और राधा का सॉफ्ट व नॉर्मल बिहेवियर रही है। रूपा और चांदनी को अगर फ्री छोड़ दिया जाए, तो वो दोनो कमल के हलक से जान निकाल ले।
    ” इसे ऐसे हीं नहीं छोड़ सकते हैं दीदी, इसने हमलोगों को बहुत हर्ट किया है दीदी।”
    रूपा के पैर रह रह कर फड़फड़ा जाती थी। जिसको रूपा कमल के पीठ और उसके कंधे पर अपनी लात मार कर शांत कर लेती थी।रूपा कमल के रीढ़ के हड्डियों पर अपनी लात की चोट जमाते हुए बोली थी।
    ” हां दीदी, रूपा ठिक कह रही है। इसे हम ऐसे हीं नहीं छोड़ सकते हैं। इसको एक ऐसी सजा दे देते हैं। कि जिसे ये ज़िन्दगी भर याद रखेगा, हमेशा दिमाग में रहेगा की किसी लड़की से पाला पड़ा था। और ये अपने जिवन में कभी भी किसी भी लड़की के तरफ अपनी आंख उठा कर नही देखेगा। और अपनी गंदी नजर किसी लड़की पर डालने से पहले हजार बार सोचेगा।”
    चांदनी अपनी लहजा सख्त रखते हुए सभी को देखकर बोली थी।
    ” मैं तो कहती हूं। इसके हांथ पैर तोड़ देते हैं।”
    रूपा गुस्से में आकर जोर से बोली थी। और कमल को लात मारकर गिरा दी थी। कमल जब हांथ पैर टूटने का बात सुना, तो उसका रूह कांप गया। वो अपने मन में बिना हांथ और बिना पैर के उसके जीवन कैसा होगा इमेजिन करने लगा था। की वो बिना पैर के चल फीर कैसे सकेगा, और बिना हांथ के खाना कैसे खा सकेगा या फीर कोई भी काम कैसे कर सकेगा। यही सब सोच कर उसका मन विचलीत हो रहा था। वो चाह रहा था की जल्द से जल्द यह मेटर उसके जिंदगी से खत्म हो जाए। सबने अपने तरफ से अपनी अपनी बात रख दी थी। अब सबकी नजर शीला पर हीं जा कर रूक गयी थी। क्योंकी फैसला उसे हीं करनी थी। सभी दोस्तों में सबसे बड़ी भी वही थी, और राधा चांदनी रूपा तीनो भी शीला के कोई भी बात या उसके लिए कोई भी फैसले को ना हीं कोई भी मना कर ती थी। और ना हीं कोई भी चुनौती देती थी।शीला जो भी स्टेन्ड लेगी उसे सभी को माननी पड़ेगी। ऐसा नही है की शीला की बात मानना इन सब की मजबूरी थी। बल्की ये सभी के दिल में शीला के लिये इज्जत और सम्मान थे। और विस्वास थे, की हमारी दीदी हमारे लिए कभी कुछ गलत नहीं करेंगे,या कुछ गलत होने देंगे। कोई भी रिश्ता एक दुसरे के इज्जत सम्मान देने विस्वास करने और एक दुसरे के फैसले में साथ देने से हीं रिश्ता सही और सुचारू रूप से चलती है।
    ” अब क्या किया जाए।”
    चांदनी अपनी बात पुरी भी नहीं की थी। की बीच में हीं चांदनी की बात काटते हुए कमल बोला
    ” मुझे माफ करदो।”
    और बोलते हुए चांदनी के पैर पर गीर कर नाक रगड़ने लगा था। जोर जोर से रोने लगा था। कमल के आंखों से आंसू के धार भी बहने लगा था।
    ” ठीक है तो, इसे लेकर प्रिंसिपल मैम के पास चलते हैं।
    शीला सभी के तरफ देखकर बोली थी।
    ” ठीक है दीदी, चलते हैं।”
    एक साथ तीनो सहेली बोलती है। और रूपा कमल को बाल पकर कर घसीटते हुए ले जाने की कोशिश करती है। बल्कि कुछ दूर घसीट भी देती है।
    पर चांदनी और शीला उसे ऐसा नहीं करने के लिए इशारे से रोकती है। और दोनो कमल के एक एक बांह पकर कर खड़ा होने में कमल का मदद करती है। और दोनो साइड से दोनो लड़की उसके दोनो बांह पकड़े हुए आगे बढ़ जाती है। उसके पिछे पिछे राधा और रूपा भी चल पड़ती है। शीला की पलटन मीटिंग हॉल के तरफ चल पड़ी थी। शीला को फैसला लेनी थी वह फैसला वो ले चुकी थी। उसके फैसले में उसके तीनो सहेलियों का भी समर्थन मिल चुकी थी।क्लास रूम से सभी बाहर जा चुके थे।
    मीटिंग हॉल
    मीटिंग हॉल में चहल पहल तेज हो गए थे ! सभी स्टूडेंट्स और सभी टीचर्स भी अपने अपने जगह लेकर बैठ चुके थे। प्रिंसिपल मैम भी स्टेज पर आ चुकी थी। मीटिंग की कार्यवाही भी सुरू हो गयी थी।
    उस में से एक टीचर मंच संचालन कर रहे थे। जिनका नाम था। प्रोफेसर दया नन्द। वे बारी बारी से प्रोफेसरों को माइक से आमंत्रीत कर रहे थे। और जिस प्रोफेसर के नाम वो माइक से अनाउंस करते थे। वो आकर अपना वक्तव्य देते थे।
    ” तो बच्चों, जैसा की आपको बताया गया है। की इस   बार होने वाले भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव हमारे अपने कॉलेज में धूम धाम से मनाया जाएगा। जिसमे तैयारी हम सभी टीचर्स के साथ साथ आप सभी स्टूडेंट्स को भी करनी है।”
    प्रोफेसर दयानन्द मंच से माइक पर बोल रहे थे। यह बात सुनकर नीचे स्टूडेंट के बीच भी काना फूसी स्टार्ट हो गयी थी।
    ” ये क्या बात हुई, इतनी सी बात बताने के लिए इतना बड़ा अरेंजमेंट किया गया है। ये बात तो सभी के क्लास रूम में भी तो बता सकते थे।”
    नीचे बैठे स्टूडेंट में से एक स्टूडेंट बोला था।
    ” हां, इसमें नई बात कौनसी है। कृष्ण जी का तो जन्मोत्सव तो हर साल मनाया जाता है। हमारे कॉलेज में नया क्या बोल दिया इन्होने।”
    एक दुसरे स्टूडेंट ने पहले स्टूडेंट के तरफ देखकर जवाब देते हुए बोला था।
    ” नया बस यही है की, कॉलेज में ईस बार मनाया जायेगा। सुना नही तुमने।”
    पहले स्टूडेंट बोलकर दूसरे स्टूडेंट को देख कर हंसने लगा था। साथ में और भी स्टूडेंट्स भी हंसने लगे थे।
    ” इस बार क्या, हर बार तो मनाया गया है। हमारे कॉलेज में कृष्ण जन्मोत्सव।”
    एक लड़की सभी के तरफ देखते हुए बोली थी।
    ” लेकिन दयानन्द सर ने इस बार बोले हैं। इसका क्या मतलब हो सकता है?”
    एक और लड़की बोल पड़ी थी। सभी लोग तरह तरह के बाते कर रहे थे। इसी बीच मंच से माइक पर अनाउंस होता है।
    ” अब मैं प्रोफेसर भाटी से आग्रह करूंगा। की वो माइक पर आयेंगे और भगवान श्री कृष्ण के जिवन लीला के बारे में हम लोगों को बतायेंगे और मानव जिवन में श्री कृष्ण के उपदेश की क्या भुमिका है।आयेंगे और हमें समझायेंगे। मिस्टर भाटी कॉम ऑन ऑफ द स्टेज। बच्चो जोरदार तालियों से सर का स्वागत करेंगे।”
    प्रोफेसर दयानन्द माइक हांथ मे लिए बोल रहे होते हैं।
    आगे की कहानी पढ़िए अगले भाग में….प्यार एक अहसास

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    Manoj Divana Namaste Story World

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  • सवाल का जबाव जिसका इंतजार सभी को है।

    सवाल का जबाव जिसका इंतजार सभी को है।

    पढ़ने का समय : 7 मिनट

    कहानी के इस भाग में एक रहस्य से पर्दा उठता है। जिसका इंतजार लगभग सभी को रहता है। चलिए कहानी की ओर चलें…
    ” अब रोने की बारी उनकी है। जिसने तुम्हें रूलाने की कोशिश की है । अब तुम्हें रोने की कोई जरूरत नहीं है। “
    शीला बोलती हुई,राधा को ढांढस बंधा रही थी। शीला और चांदनी दोनो मिलकर  राधा और रूपा को रस्सी के बंधन से आजाद कर चुकी थी । चारो सहेलियां एक दुसरे से आपस में लिपट कर रोने लगी थी। अब इन सभी के जिन्दगी में जो दु:ख के बादल छाये थे वो अब छट चुके थे। इन सबके जिवन में तुफान लाने वाला सख्श धराशाई होकर बेसुध फर्श पर परा था।
    “अब जब सब कुछ ठीक हो गया है तो, हमें यहां से चलना चाहिए।”
    बोलकर चांदनी बारी बारी से तीनो के तरफ देखती है।
    ” हां हमें चलना चाहिए इससे पहले की कोई और प्रोबलम खड़ा हो हमें यहां से निकल जाना चाहिए।”
    शीला भी अपने आप को शांत करते हुए आंख से आंसू के बुंद को साफ करते हुए बोली थी ।
    ” हां दीदी जायेंगे पर इसे ऐसे छोड़कर नहीं इसको इसके किए की सजा देने के बाद।”
    रूपा कठोर होते हुए बोली थी। राधा को बहुत बरा सदमा लगा था। वो अभी भी बहुत डरी हुई थी। उसे अभी भी यकिन नही हो रहा था की सब कुछ नॉर्मल हो गया है। और वो मन ही मन अपने आप को कोस भी रही थी। की ये जो कुछ भी हुआ है, सब उसी के वजह से हुआ है। और वो उसी के वजह से आज रूपा और चांदनी शीला के जान का भी खतरा हो सकता था।
    ” क्या इसको ऐसे हीं छोड़ दोगे दीदी आप लोग?”
    शीला और चांदनी के तरफ देखकर कमल के तरफ अपनी उंगली से इशारा करते हुए राधा बोली थी। और एक बार फीर राधा के आंख से आंसू बहने लगे थे।
    ” नहीं दीदी, हम लोग इस कमीने को छोड़ेंगे नहीं। बल्कि पुलिस में देंगे।”
    रूपा राधा के आंख से आंसू पोंछते हुए बोली थी। रूपा की बात सुनकर सभी रूपा को आशचर्य से देखने लगे थे। तीनो के मन में एक साथ एक बात चली थी। की रूपा कितनी समझदार है, वो कितनी समझदारी की बात कर रही है। पर राधा रूपा को समझदार के साथ साथ बहुत हिम्मत वाली भी मानने लगी थी। आज जिस तरह से रूपा कमल के साथ डटकर मुकाबला की थी। उसको कमल से मार भी खानी परी थी। पर वो जिस तरह से अपना हिम्मत नहीं हारी थी। रूपा की यही सब गुण राधा के नजर में रूपा को महान बना रही थी।
    अभी उधर ये सब चारो सहेलियों में चल हीं रहा था। कि इधर धीरे धीरे  कमल के हांथ पैर हिलने लग गया था। उसको होस आने लगा था। कमल का आंख धीरे धीरे खुलता है। कमल का हालत बिल्कुल भी ठीक नहीं था। उसके बदन में अभी भी बहुत अ सहनीय दर्द हो रहा था। उसके मुंह से बहुत सारा खून भी बह गया था। ज्यादा खून बह जाने के कारण हीं कमल को होश नहीं आ पाया था। जब कमल का आंख खुलता है। तो वो नजर घुमाकर सभी लड़कियों के तरफ देखता है। वो कुछ बोलना चाहता है, पर वो कुछ भी बोल नहीं पाता हैं। उसके शरीर के अंदर इतनी भी शक्ती नहीं बच पाई थी। की वो कुछ बोल भी पाये। यही सब सोचकर कमल अपने आप को बहुत लाचार और कमजोर महसूस कर रहा था।
    ” इसको मीटिंग हॉल में लेकर चलते हैं। वहां ले जा कर प्रिंसिपल मैम के हवाले कर देते हैं। अब वही  इसके साथ जो करना होगा करेंगे।”
    शीला अपनी समझदारी से सभी के तरफ देखते हुए बोली थी।
    ” दीदी पुलिस को कॉल करके बुला लेते हैं ना, इसको पुलिस के हवाले कर देंगे।”
    बोल कर रूपा शीला को प्रश्नवाचक मुद्रा में देखने लगी थी।
    ” नही इसको प्रिंसिपल मैम के पास लेकर चलते हैं।”
    शीला रूपा को जबाव देते हुए बोली थी।
    ” नहीं दीदी इस भेड़िये को खुला छोड़ना ठीक नहीं होगा।”
    रूपा शीला से बोली थी। कमल को होश में आने के बाद उसके दिमाग में एक हीं बात राऊंड मारते हुए चल रहा था। की ये दोनो क्लास रूम में कैसे आया था। और आकर उसका बना बनाया सारा खेल बिगाड़ दिया था। कमल का बात सही भी था। अगर उस टाइम शीला और चांदनी आ कर, कमल पर अटैक नहीं किया होता तो अभी सारा सिचुएशन उसके अंडर में होता। और शीला और चांदनी से उसको इतना मार नहीं पड़ा होता तो वो,अभी फर्श पर नहीं पड़ा होता।
    ” तुम दोनो अंदर कैसे आए?”
    कमल दर्द से कराहते हुए हिम्मत करते हुए शीला और चांदनी से अपनी बात पुछ हीं लिया था। ये आवाज चारो सहेलियों के कान में जैसे ही गई सभी आशचर्य से उस आती हुई आवाज के तरफ मुड़कर देखी। सभी सहेलियों के चेहरे के हाव भाव एक दम से बदल गये थे। सभी एक्शन मोड में आ गयी थी। सभी एक साथ एक बार फिर से कमल पर अटैक करने चल पड़ी थी। यह सीन देखकर कमल के होश उड़ गये थे। डर के मारे उसके पसीने छुटने लगे थे। वो सोचने लगा अब उसके शरीर में और मार बर्दास्त करने की छमता नहीं है। अब अगर और मार पड़ा तो वो जिन्दा बच नहीं पायेगा। इसी लिए अब वो दिमाग से काम लेना चाहा। कमल हिम्मत करके उठकर बैठ गया था।
    ” तो तुम्हें जानना है। की हम क्लास रूम के अंदर कैसे आए?”
    चांदनी कमल पर चीखते हुए जोर से बोली थी।
    ” हां इसे बता हीं देते हैं। की हम दोनो क्लास रूम के अंदर कैसे आए।”
    शीला चांदनी के तरफ देखते हुए मुस्कुरा कर बोली थी। हालाकी राधा और रूपा भी कमल के इस सवाल का जबाव जानना चाहती थी। वो दोनो भी अपनी दीदी के तरफ देखने लगी थी। सभी चलकर कमल के पास पहूंच गये थे। रूपा का लात कमल के पीठ पर पड़ता है। जो कमल अभी अभी उठकर बैठा हीं था। एक भारी चीख कमल के मुंह से निकल जाता है।
    ” पहले इसको इसके सवाल का जबाव सुनने दो बहन, फिर उसके बाद तुम इस पर अपना बॉक्सिंग का प्रेक्टिस कर लेना।”
    शीला रूपा को रोकते हुए बोली थी। सुनकर रूपा रूक जाती है।
    “इसमें तुम्हारी हीं बेवकूफी है भेड़िए।”
    चांदनी गुस्से से दांत पीस कर कमल के तरफ मुड़कर बोली थी।
    ” मैं चाहती तो, तुम्हें वहीं सबक सीखा सकती थी। जब तुम्हें रस्सी और डंडा लिये क्लास रूम के तरफ आते हुए देखी थी। और छुपकर तुम्हारा पीछा करने लगी थी।”
    बीना रूके शीला बोलते रही।
    ” .मैं जानना चाहती थी। की आखिर बात क्या है। तुम रस्सी और डंडे लेकर क्या करने वाले हो। और सोने पे सुहागा तो तब हुआ, जब तुम्हारा दोनो हांथ खाली नहीं होने के वजह से तुमने दरवाजा लॉक नहीं किया। इसी बात का फायदा हमने उठायी और दोनो भीतर आके दरवाजे बंद कर ली थी। ताकी तुम्हें भी बचकर भागने नहीं दूं।”
    चांदनी ने कमल को पुरी बात बतायी थी ।
    ” दीदी जब आप पहले हीं आ गईं थी तो, आपने हमें पहले हीं क्यों नहीं बचाई थी। आप अपनी आंखों के सामने हमें रस्सी से बंधते और पिटते हुए देखी थी।”
    रूपा बोलकर शीला और चांदनी के तरफ सवालिया नजर से देखने लगी थी।
    ” इसका मतलब, दीदी मैं आपके आंखों के सामने बेहोश हुई थी।”
    राधा भी शीला और चांदनी से सवाल की थी। इस पर शीला और चांदनी कुछ भी नहीं बोलती है। बस दोनो अपना शर हां में हिला देती है।
    ये सुनकर कमल के पैर के नीचे से जमीन खिसक गयी थी। उसमे अब हिम्मत भी नहीं थी। की वो उन सब से फाइट कर सके तो उसने अपनी जान बचाने का एक तरीका निकाला जो एक हारा हुआ हर इंसान लगभग यही करता है। और कमल ने भी वही किया था। वो झुक कर शीला के पैर पकर लिया था।
    ” मुझे माफ कर दो,मुझसे बहुत बड़ी ग़लती हो गयी है। प्लीज मुझे माफ कर दो और मुझे जाने दो।”
    कमल शीला के पैरों में गिरकर नाक रगड़ते हुए बोला था।
    ” कमीने सुअर की औलाद, तुम्हें माफ कर दूं। निकल गयी सारी हेकड़ी, अब रेप नहीं करेगा मेरी दीदी का हां।”
    रूपा गुस्से में अपनी आंखे लाल करते हुए कमल से बोली थी । और धमा धम दो लात उसको रसीद करदी थी। कमल रूपा के पैर की चोट खा कर पुरी तरह से हिल गया था। अब उसको समझ आने लगा था। की उसकी ग़लती छोटी नहीं है।
    ” अब पछतावा आ रहा है। अपने किये पर पहले ये क्यों नहीं सोचा अपना अंजाम ये सब करने से पहले।”
    चांदनी जो राधा के कंधे में अपनी बांह डाली हुई थी। कमल से  बोली थी।
    “माफी तो तुम्हें मिलने से रही, पर तुम्हे जेल जरूर मिलेगी।”
    रूपा कमल को बाल से खींचते हुए बोली थी।
    ” अब इसके साथ बहस करने से, कोई फायदा नही है दीदी।”
    कहानी और भी मजेदार होने वाली है ! पढिए अगले भाग में….प्यार एक अहसास

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    नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड के लेखक। पाठकों के लिए मनोरंजक और दिल को छू लेने वाली हिंदी कहानियाँ लिखना पसंद करता हूँ।आपका स्वागत है नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड में धन्यवाद 💐💐🌹🌹

  • अटूट भक्ति का प्रकाश जय श्री हनुमान

    अटूट भक्ति का प्रकाश जय श्री हनुमान

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    🌺 “जय हनुमान: अटूट भक्ति का प्रकाश” 🌺
    संकट के हर अंधेरे में, तुम दीप बनकर आते हो,
    भटके हुए हर राही को, तुम राह सच्ची दिखाते हो।
    जय बजरंगबली, जय अंजनी के लाल,
    तुमसे ही जग में जगमग है हर एक उजियाल।
    राम नाम की ज्योति लिए, तुमने जग को राह दिखाई,
    भक्ति, शक्ति और सेवा की, सच्ची परिभाषा समझाई।
    तुमसे ही साहस मिलता है, तुमसे ही विश्वास,
    हर संकट में तुम बन जाते हो जीवन की आस।
    जब-जब मन घबराया है, तुमने ही थाम लिया,
    डगमगाते कदमों को तुमने, फिर से थाम लिया।
    तुम हो शक्ति के सागर, तुम हो दया के धाम,
    तुमसे ही जीवित रहता है हर दिल में श्रीराम।
    तुमने लंका जलाकर भी, अहंकार को हराया,
    सच्चे धर्म की खातिर तुमने, हर अत्याचार मिटाया।
    तुम हो वीरता की पहचान, तुम हो भक्ति की मिसाल,
    हर युग में गूंजेगा सदा— “जय हनुमान, जय बजरंगबली” का कमाल।
    इस पावन दिन पर हम सब, सिर झुकाकर ये कहते हैं,
    हे पवनसुत, तुमसे ही हम जीवन जीना सीखते हैं।
    हमारे हर दुख को हर लो, हर भय को दूर भगाओ,
    अपने चरणों में जगह देकर, जीवन सफल बनाओ।
    जय-जय हनुमान, संकट मोचन, कृपा की वर्षा करो,
    हम सबके जीवन में सदा, सुख-शांति का सागर भरो।
    तेरे नाम का दीप जले, हर दिल के हर कोने में,
    हनुमान जयंती की महिमा गूंजे, इस सारे जग के सोने में।
    जय श्री हनुमान 🌺🌺🙏🙏🌹🌹

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  • टूटा घमंड

    टूटा घमंड

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    कमल राधा को भी बांध दिया था। उसके बाद जो कुछ भी हुआ था।ये बात तो आप लोग जानते हीं हैं की कैसे तीनो के बीच की बहस और लड़ाई इतनी बढ़ गई थी। जो कमल राधा को रेप करने तक की बात भी बोल दिया था। रेप की बात सुनकर राधा और रूपा बहुत घबरा गई थी। दोनो लड़की पसीने से पानी पानी हो गयी थी।
    रेप एक ऐसा शब्द है। जो ये  शब्द  जीस कसी के नाम के साथ जुड़ जाती है। तो उसकी जिंदगी, जीते जी नरक बन जाती है। ये समाज बालात्कार को समाजिक और कानूनी एक बहुत हीं जघन्य अपराध के श्रेणी में रखा है। इस अपराध को करने वाले के खीलाफ बहुत सख्त कानून बनाया गया है। और इसमें सख्त से सख्त सजा देने का प्रवधान भी किया गया है। इसके अंदर सजा आजीवन जेल में रहने से लेकर फांसी की सजा तक भी दी जा सकती है।
    आइए हमलोग अपनी कहानी के ओर बढ़ते हैं।
    कमल का हौसला अब ज्यादा बढ़ गया था। वो दोनो लड़की पर कंट्रोल जो कर लिया था। राधा और रूपा अपने उपर से रस्सियों के बंधन से छुटने के लिये हांथ पैर तो नही मार सकती थी। क्योंकी बंधे हुए थे। बस अपनी ताकत लगाकर कसमसाने से ज्यादा कुछ नहीं कर पा रही थी।
    ” देख तेरी ना करने की जिद्द ने तुम्हें कहां लाकर खड़ी कर दी है।तुम्हे शायद मालुम नही, मुझे ना सुनने की बिल्कुल भी आदत नहीं है। जब मैं अपनी मम्मी पापा के ना कहे को बर्दाश्त नहीं कर सकता हूं। तो तुम्हारा कैसे करूंगा?”
    ” कमल राधा के तरफ देखते हुए बोला था। राधा सिर्फ लाचारी से कमल को देखती रहती है। कमल के बात में सच्चाई थी। वो एक अमीर बाप का बेटा था। उसके मॉम डैड उसे बहुत प्यार करते थे ! वे उसके हर जायज नजायज जिद्द को पुरा कर रहे थे। कोई भी चीज का मांग अगर कमल करता था। तो वो उसे लाकर हर हाल में देते थे । कमल के मॉम डैड कमल के पालन पोसन में किसी भी प्रकार के कोई कमी नहीं होने दिये थे। इसी लार प्यार का नतीजा है। की आज उनका बेटा एक रेपिस्ट बनने जा रहा था।
    ” तुम अपनी सोच कमीने, यहां से तुम बचकर नही जाएगा जिन्दा।”
    रूपा कमल पर चिल्ला कर जोर से बोली थी ।
    ” तू इसी तरह फरफराती रह, तुम लोग कुछ नहीं बिगाड़ सकती हो मेरा। कुछ भी नहीं करोगी तुम लोग। “
    कमल रूपा से बोला और राधा के तरफ बढ़ा और उसकी गले में बांह डालकर अपने दुसरे हांथ से उसके गाल गर्दन को टच करते हुए हांथ नीचे के तरफ बढ़ा दिया था। ये देखकर रूपा को बहुत गुस्सा आ रही थी। वो कमल को कच्चा चबा जाना चाहती थी।
    रूपा सोच रही थी। अगर अभी वो बंधी नहीं होती, और उसके हांथ पांव खुले होते तो वो कमल को अच्छा खासा सबक सीखा सकती थी। बंधे होने से वो अपने आपको बहुत हीं लाचार और मजबूर फील कर रही थी। वो यहां से निकलने का मन में तड़किव सोच रही थी। रूपा को आभास हो गयी थी। की रूपा राधा कमल के अलावा भी कोई क्लास रूम में मौजुद है। मगर कौन,वो सोची कही कमल और लोगों को तो नहीं बुला रखा है। हम दोनो से अपनी बेइज्जती का बदला लेने के लिए। वो क्लास रूम के चारो तरफ अपनी नजर घुमाके देखने लगी थी। रूपा फिर सोची अगर कमल किसी को बुलाया होता तो वो हम लोगों के सामने लाता हमसे बदला लेने के लिए। फीर मन हीं मन बोली, नही नही शायद यह हमारा वहम है।अगर कमल किसी को बुलाया हुआ होता तो वो उसे छुपने को थोड़ी बोलता।
    रूपा राधा के सामने थी। पर कुछ दूरी थी, और बीच में कमल था। अगर रूपा राधा को कुछ भी बताती की उसने क्या महसूस किया है।तो उस बात को कमल भी सुन सकता था। इस लिए रूपा कुछ नहीं बोली। और सोची कोई तो है पर कौन? रूपा अभी ये सब सोच हीं रही थी कि तभी कमल राधा को कस कर पकड़ कर अपने सीने से चिपका लेता है। और अपना चेहरा राधा के चेहरे के सामने ले जा कर राधा को चूमना चाहता है। कमल का मुंह राधा के मुंह से सटने हीं वाला था। की तभी एक साथ दो मुक्का कमल के दोनो जबड़े  पर आकर पड़ा। हमला अचानक हुआ था। मुक्के के थ्रो इतना जबरदस्त था। की कमल के बत्तीसी हिल गया था। उसके मुंह से खून बहने लगा था। वो समझ नहीं पा रहा था की उस पर हमला कौन किया था। जब की वो क्लास रूम के दरवाजे को लॉक कर के रखा था। तो बाहर से कोई कैसे आ सकता था। सवाल हीं नही पैदा हो सकता है की कोई बाहर से आ जाए, क्लास रूम के अन्दर।
    उसे अच्छे से याद था। कि जब वो दुबारा वापस क्लास रूम में आया था। तो दरवाजे को अच्छे से लॉक किया था। फीर ये कौन अंदर आगया था और कैसे? यही सवाल लिए कमल उपर की तरफ देखता है। देखकर कमल भौचक्का रह गया था। ये कैसे हो सकता है। ये दोनो अन्दर कैसे आ सकती हैं। दर्द तो बहुत हो रहा था कमल को पर इन सवालों के जबाव जानने के लिए। धीमी और रूआंसी आवाज में बोलता है।
    तुम, तुम यहां कैसे आई?”
    अब आप समझ हीं गये होंगे की वहां कौन आ गयी थी। कमल ये बोला हीं था की आठ दस लात सात आठ मुक्का कमल को और रसीद हो गया था। कमल दर्द से चीख उठा था। चांदनी और शीला कुछ भी बोल नही रही थी। बस उनके हांथ और पांव चल रहे थे।कमल को लग रहा था। कि जैसे अब उसके शरीर से जान नीकल हीं जायेगा। दोनो फाइटर बिल्कुल भी नहीं रूक रहे थे। ताबड़तोड़ लात और मुक्का बरसा रहे थे। मार मार के दोनो सहेली कमल का कचूमर बाहर कर दिया था। जब मार खा खा कर कमल बेहोशी से फर्श पर बेसुध हो गया था। तब दोनो दोस्त अपनी फाइट को विराम दी थी।
    ” तुम दोनो को डरने की कोई जरूरत नहीं है। हम आ गये हैं।
    चांदनी अपने दोनो हाथों को मोड़कर अपने सीने से चिपका कर बोली थी।
    ” हां तुम लोग डरो मत, तुम्हारी दीदी तुम लोगों को कुछ नही होने देगी।”
    शीला भी राधा और रूपा को देख कर बोली थी।
    थैंक्यू दीदी, जो आप लोग यहां आ गयी ।
    राधा को बोलते हुए आंसू बहने लगे थे।
    ” देखो, तुम्हे रोने की कोई जरूरत नही है। “
    चांदनी राधा के पास जाकर उसके आंख से आंसू पोछने लगती है।
    ” हां बहन, अब रोने की बारी उनकी है। जिन्होने तुम्हारे आंखों में आंसू दिए हैं। चुप हो जाओ राधा। “
    शीला बोलते हुए राधा के कंधे पर हाथ फेर रही थी। और शीला और चांदनी दोनो के बंधे रस्सी को खोलने लगती है।
    आगे कि कहानी पढिए अगले भाग में….

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