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विडियो सबूत

पढ़ने का समय : 6 मिनट

एक फैसला जिसमें सबकी सहमति होती है। जानेंगे इस भाग में उस फैसले की रहस्य चलिए चलें कहानी की ओर…
” अब इसके साथ बहस करने का कोई फायदा नहीं है दीदी, अब इसको प्रिंसिपल मैम के पास हीं लेकर चलना चाहिए।”
राधा सख्त होते हुए कठोर आवाज में बोली थी।
” हां इसे अब प्रिंसिपल मैम के पास हीं लेकर चलते हैं। अब वही इसके साथ जो भी करना होगा करेंगे।”
शीला भी राधा के बात से सहमत होते हुए बोली थी। चार सहेलियों में दो के स्वभाव कड़क, तो दो के सरल व सॉफ्ट जैसा की हम लोगों ने देखा की कैसे रूपा और चांदनी बात बात पे हमेशा एक्शन व अटैक मोड में रहती थी। तो वहीं शीला और राधा का सॉफ्ट व नॉर्मल बिहेवियर रही है। रूपा और चांदनी को अगर फ्री छोड़ दिया जाए, तो वो दोनो कमल के हलक से जान निकाल ले।
” इसे ऐसे हीं नहीं छोड़ सकते हैं दीदी, इसने हमलोगों को बहुत हर्ट किया है दीदी।”
रूपा के पैर रह रह कर फड़फड़ा जाती थी। जिसको रूपा कमल के पीठ और उसके कंधे पर अपनी लात मार कर शांत कर लेती थी।रूपा कमल के रीढ़ के हड्डियों पर अपनी लात की चोट जमाते हुए बोली थी।
” हां दीदी, रूपा ठिक कह रही है। इसे हम ऐसे हीं नहीं छोड़ सकते हैं। इसको एक ऐसी सजा दे देते हैं। कि जिसे ये ज़िन्दगी भर याद रखेगा, हमेशा दिमाग में रहेगा की किसी लड़की से पाला पड़ा था। और ये अपने जिवन में कभी भी किसी भी लड़की के तरफ अपनी आंख उठा कर नही देखेगा। और अपनी गंदी नजर किसी लड़की पर डालने से पहले हजार बार सोचेगा।”
चांदनी अपनी लहजा सख्त रखते हुए सभी को देखकर बोली थी।
” मैं तो कहती हूं। इसके हांथ पैर तोड़ देते हैं।”
रूपा गुस्से में आकर जोर से बोली थी। और कमल को लात मारकर गिरा दी थी। कमल जब हांथ पैर टूटने का बात सुना, तो उसका रूह कांप गया। वो अपने मन में बिना हांथ और बिना पैर के उसके जीवन कैसा होगा इमेजिन करने लगा था। की वो बिना पैर के चल फीर कैसे सकेगा, और बिना हांथ के खाना कैसे खा सकेगा या फीर कोई भी काम कैसे कर सकेगा। यही सब सोच कर उसका मन विचलीत हो रहा था। वो चाह रहा था की जल्द से जल्द यह मेटर उसके जिंदगी से खत्म हो जाए। सबने अपने तरफ से अपनी अपनी बात रख दी थी। अब सबकी नजर शीला पर हीं जा कर रूक गयी थी। क्योंकी फैसला उसे हीं करनी थी। सभी दोस्तों में सबसे बड़ी भी वही थी, और राधा चांदनी रूपा तीनो भी शीला के कोई भी बात या उसके लिए कोई भी फैसले को ना हीं कोई भी मना कर ती थी। और ना हीं कोई भी चुनौती देती थी।शीला जो भी स्टेन्ड लेगी उसे सभी को माननी पड़ेगी। ऐसा नही है की शीला की बात मानना इन सब की मजबूरी थी। बल्की ये सभी के दिल में शीला के लिये इज्जत और सम्मान थे। और विस्वास थे, की हमारी दीदी हमारे लिए कभी कुछ गलत नहीं करेंगे,या कुछ गलत होने देंगे। कोई भी रिश्ता एक दुसरे के इज्जत सम्मान देने विस्वास करने और एक दुसरे के फैसले में साथ देने से हीं रिश्ता सही और सुचारू रूप से चलती है।
” अब क्या किया जाए।”
चांदनी अपनी बात पुरी भी नहीं की थी। की बीच में हीं चांदनी की बात काटते हुए कमल बोला
” मुझे माफ करदो।”
और बोलते हुए चांदनी के पैर पर गीर कर नाक रगड़ने लगा था। जोर जोर से रोने लगा था। कमल के आंखों से आंसू के धार भी बहने लगा था।
” ठीक है तो, इसे लेकर प्रिंसिपल मैम के पास चलते हैं।
शीला सभी के तरफ देखकर बोली थी।
” ठीक है दीदी, चलते हैं।”
एक साथ तीनो सहेली बोलती है। और रूपा कमल को बाल पकर कर घसीटते हुए ले जाने की कोशिश करती है। बल्कि कुछ दूर घसीट भी देती है।
पर चांदनी और शीला उसे ऐसा नहीं करने के लिए इशारे से रोकती है। और दोनो कमल के एक एक बांह पकर कर खड़ा होने में कमल का मदद करती है। और दोनो साइड से दोनो लड़की उसके दोनो बांह पकड़े हुए आगे बढ़ जाती है। उसके पिछे पिछे राधा और रूपा भी चल पड़ती है। शीला की पलटन मीटिंग हॉल के तरफ चल पड़ी थी। शीला को फैसला लेनी थी वह फैसला वो ले चुकी थी। उसके फैसले में उसके तीनो सहेलियों का भी समर्थन मिल चुकी थी।क्लास रूम से सभी बाहर जा चुके थे।
मीटिंग हॉल
मीटिंग हॉल में चहल पहल तेज हो गए थे ! सभी स्टूडेंट्स और सभी टीचर्स भी अपने अपने जगह लेकर बैठ चुके थे। प्रिंसिपल मैम भी स्टेज पर आ चुकी थी। मीटिंग की कार्यवाही भी सुरू हो गयी थी।
उस में से एक टीचर मंच संचालन कर रहे थे। जिनका नाम था। प्रोफेसर दया नन्द। वे बारी बारी से प्रोफेसरों को माइक से आमंत्रीत कर रहे थे। और जिस प्रोफेसर के नाम वो माइक से अनाउंस करते थे। वो आकर अपना वक्तव्य देते थे।
” तो बच्चों, जैसा की आपको बताया गया है। की इस   बार होने वाले भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव हमारे अपने कॉलेज में धूम धाम से मनाया जाएगा। जिसमे तैयारी हम सभी टीचर्स के साथ साथ आप सभी स्टूडेंट्स को भी करनी है।”
प्रोफेसर दयानन्द मंच से माइक पर बोल रहे थे। यह बात सुनकर नीचे स्टूडेंट के बीच भी काना फूसी स्टार्ट हो गयी थी।
” ये क्या बात हुई, इतनी सी बात बताने के लिए इतना बड़ा अरेंजमेंट किया गया है। ये बात तो सभी के क्लास रूम में भी तो बता सकते थे।”
नीचे बैठे स्टूडेंट में से एक स्टूडेंट बोला था।
” हां, इसमें नई बात कौनसी है। कृष्ण जी का तो जन्मोत्सव तो हर साल मनाया जाता है। हमारे कॉलेज में नया क्या बोल दिया इन्होने।”
एक दुसरे स्टूडेंट ने पहले स्टूडेंट के तरफ देखकर जवाब देते हुए बोला था।
” नया बस यही है की, कॉलेज में ईस बार मनाया जायेगा। सुना नही तुमने।”
पहले स्टूडेंट बोलकर दूसरे स्टूडेंट को देख कर हंसने लगा था। साथ में और भी स्टूडेंट्स भी हंसने लगे थे।
” इस बार क्या, हर बार तो मनाया गया है। हमारे कॉलेज में कृष्ण जन्मोत्सव।”
एक लड़की सभी के तरफ देखते हुए बोली थी।
” लेकिन दयानन्द सर ने इस बार बोले हैं। इसका क्या मतलब हो सकता है?”
एक और लड़की बोल पड़ी थी। सभी लोग तरह तरह के बाते कर रहे थे। इसी बीच मंच से माइक पर अनाउंस होता है।
” अब मैं प्रोफेसर भाटी से आग्रह करूंगा। की वो माइक पर आयेंगे और भगवान श्री कृष्ण के जिवन लीला के बारे में हम लोगों को बतायेंगे और मानव जिवन में श्री कृष्ण के उपदेश की क्या भुमिका है।आयेंगे और हमें समझायेंगे। मिस्टर भाटी कॉम ऑन ऑफ द स्टेज। बच्चो जोरदार तालियों से सर का स्वागत करेंगे।”
प्रोफेसर दयानन्द माइक हांथ मे लिए बोल रहे होते हैं।
आगे की कहानी पढ़िए अगले भाग में….प्यार एक अहसास

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Manoj Divana Namaste Story World

नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड के लेखक। पाठकों के लिए मनोरंजक और दिल को छू लेने वाली हिंदी कहानियाँ लिखना पसंद करता हूँ।आपका स्वागत है नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड में धन्यवाद 💐💐🌹🌹

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