एपिसोड 4 जबरदस्ती की शादी
शादी की तैयारी शुरू करो आदर्श की बात सुनकर तृप्ति वहीं खड़ी रह गई उसके चेहरे पर गुस्सा और हैरानी दोनों साफ दिखाई दे रहे थे आदर्श के आदमी ने सिर झुकाकर कहा
जी सर वह तुरंत कमरे से बाहर चला गया तृप्ति कुछ पल तक दरवाजे की तरफ देखती रही
फिर अचानक आदर्श की तरफ मुड़ी आपने ये क्या कर दिया
आदर्श ने शांत आवाज में कहा जो जरूरी था जरूरी था
तृप्ति गुस्से में बोली किसने कहा आपको कि मेरी शादी करवाना जरूरी है आदर्श ने उसकी तरफ देखा मैंने कहा
तृप्ति को उसकी बात पर और गुस्सा आ गया आप कौन होते हैं मेरी जिंदगी का फैसला लेने वाले आदर्श उसके पास आया
अब तुम्हारी जिंदगी सिर्फ तुम्हारी नहीं है तृप्ति ने हैरानी से पूछा मतलब आदर्श ने बिना किसी भाव के कहा अब तुम मेरी पत्नी हो तृप्ति की आंखों में आंसू आ गए मैं आपकी पत्नी नहीं हूं
आदर्श ने कहा कुछ देर बाद होगी नहीं होगी तृप्ति ने गुस्से में कहा मैं आपसे शादी नहीं करूंगी आदर्श कुछ पल उसे देखता रहा फिर बोला तुम्हारे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है
तृप्ति ने अपने आंसू पोंछे आपने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी
आदर्श के चेहरे पर कोई बदलाव नहीं आया तृप्ति ने आगे कहा मैं अपने घर से इसलिए भागी थी क्योंकि मुझे शादी नहीं करनी थी मैं पढ़ना चाहती थी अपनी जिंदगी अपने हिसाब से जीना चाहती थी लेकिन यहां आकर भी मुझे वही करना पड़ रहा है जिससे मैं बचकर भागी थी आदर्श ने कहा
अगर तुम मेरे साथ शादी करोगी तो कोई तुम्हें परेशान नहीं करेगा तृप्ति ने गुस्से में कहा मुझे आपकी सुरक्षा नहीं चाहिए मुझे अपनी आजादी चाहिए
आदर्श ने कुछ नहीं कहा तृप्ति ने अपनी किताब उठाई और उसे अपने सीने से लगा लिया मुझे सिर्फ पढ़ाई करनी है क्या इतनी सी बात समझ नहीं आती आपको आदर्श ने पहली बार उसकी किताब की तरफ ध्यान से देखा तुम्हें पढ़ाई इतनी पसंद है तृप्ति ने तुरंत कहा हां बहुत ज्यादा मैं अपनी जिंदगी में कुछ बनना चाहती हूं
मैं किसी की पत्नी बनकर पूरी जिंदगी नहीं बिताना चाहती
आदर्श ने शांत आवाज में कहा शादी के बाद भी पढ़ सकती हो तृप्ति ने उसे घूरकर देखा आपको लगता है शादी के बाद सब कुछ इतना आसान होता है आदर्श ने कहा मेरे साथ होगा
तृप्ति कुछ पल उसे देखती रही फिर बोली आपको अपने ऊपर बहुत भरोसा है
आदर्श ने कहा है तभी बाहर से आवाज आई सर सब तैयारी हो गई है आदर्श ने दरवाजे की तरफ देखा ठीक है तृप्ति घबराकर बोली इतनी जल्दी आदर्श ने कहा विराज को एक घंटे का समय मिला है
उसके पास अब बहुत कम वक्त है तृप्ति ने कहा लेकिन मैं तैयार नहीं हूं आदर्श ने उसकी तरफ देखा तुम दुल्हन की पोशाक में पहले से हो तृप्ति ने अपने लाल जोड़े की तरफ देखा उसकी आंखों में फिर उदासी उतर आई यह जोड़ा मैंने अपनी शादी के लिए नहीं पहना था मैंने तो सोचा था इसे पहनकर अपनी शादी से भाग जाऊंगी
आदर्श ने कहा अब यही तुम्हारी शादी की पोशाक है तृप्ति ने गुस्से में कहा आप बहुत बुरे हैं आदर्श बिना कुछ बोले कमरे से बाहर चला गया
तृप्ति कुछ पल वहीं खड़ी रही फिर उसने अपने आंसू पोंछे
नहीं मैं हार नहीं मानूंगी वह अपने मन में बोली मैं किसी भी हालत में इस शादी को रोकूंगी तृप्ति कमरे से बाहर निकलने लगी लेकिन दरवाजे के बाहर दो आदमी खड़े थे उन्हें देखकर वह रुक गई मैं बाहर जाऊंगी एक आदमी ने सिर झुकाकर कहा
माफ कीजिए मैडम आपको बाहर जाने की इजाजत नहीं है
तृप्ति ने गुस्से में कहा मैं कोई कैदी हूं क्या आदमी चुप रहा
तृप्ति ने दूसरी तरफ जाने की कोशिश की लेकिन वहां भी आदर्श के आदमी खड़े थे तृप्ति समझ गई कि उसे चारों तरफ से घेर लिया गया है वह वापस कमरे में आ गई कुछ देर बाद दरवाजा खुला एक महिला अंदर आई उसके हाथ में कुछ सामान था उसने तृप्ति से कहा मैडम आपको तैयार करना है
तृप्ति ने कहा मुझे कुछ तैयार नहीं होना महिला ने कहा
सर का आदेश है तृप्ति ने गुस्से में कहा सबको बस उसी का आदेश सुनाई देता है मेरी बात किसी को नहीं सुनाई देती
महिला चुपचाप खड़ी रही तृप्ति ने कुछ पल उसे देखा
फिर वह कुर्सी पर जाकर बैठ गई महिला ने उसके बाल ठीक किए
उसके सिर पर दुपट्टा रखा और उसके हाथों में चूड़ियां पहनाने लगी तृप्ति की आंखों से लगातार आंसू निकल रहे थे
वह अपने हाथों को देख रही थी कुछ घंटे पहले इन्हीं हाथों में उसने किताब पकड़ी थी और अब इन्हीं हाथों में शादी की चूड़ियां थीं
उसे अपनी मां की याद आ गई पापा की याद आ गई
अपना घर याद आ गया लेकिन फिर उसे याद आया कि उसी घर में उसकी शादी उसकी मर्जी के खिलाफ कराई जा रही थी तभी बाहर से आदर्श की आवाज आई तैयार हो गई
महिला ने कहा जी सर आदर्श कमरे के अंदर आया
तृप्ति ने उसकी तरफ देखा उसकी आंखें लाल थीं आदर्श कुछ पल उसे देखता रहा लाल जोड़े में तृप्ति बहुत खूबसूरत लग रही थी लेकिन उसके चेहरे की उदासी साफ दिखाई दे रही थी
आदर्श ने कहा चलो तृप्ति ने कोई जवाब नहीं दिया आदर्श ने फिर कहा तृप्ति वह धीरे से उठी लेकिन आगे बढ़ने की बजाय वहीं खड़ी रही मैं आखिरी बार पूछ रही हूं क्या आप ये शादी रोक सकते हैं आदर्श ने कहा नहीं तृप्ति की आंखों से फिर आंसू निकल आए तो याद रखिएगा मैंने ये शादी अपनी मर्जी से नहीं की
आदर्श ने उसकी तरफ देखते हुए कहा मुझे पता है तृप्ति ने कहा और मैं आपको कभी माफ नहीं करूंगी आदर्श ने कुछ नहीं कहा दोनों कमरे से बाहर निकल गए घर का पूरा हॉल फूलों से सजाया गया था बीच में शादी का मंडप तैयार था
आदर्श के परिवार के कुछ लोग भी वहां मौजूद थे सभी की नजरें तृप्ति पर थीं
तृप्ति को ऐसा लग रहा था जैसे वह किसी सपने में चल रही हो लेकिन ये सपना नहीं था ये उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा फैसला था आदर्श मंडप के पास जाकर बैठ गया तृप्ति भी उसके सामने बैठ गई पंडित ने मंत्र पढ़ना शुरू किया तृप्ति बार बार आदर्श की तरफ देख रही थी
आदर्श का चेहरा बिल्कुल शांत था जैसे उसके लिए ये सिर्फ एक फैसला हो लेकिन तृप्ति के लिए उसकी पूरी जिंदगी बदल रही थी पंडित ने कहा वर वधू एक दूसरे को माला पहनाएं तृप्ति ने माला उठाई उसके हाथ कांप रहे थे
वह आदर्श की तरफ देखने लगी आदर्श ने उसकी तरफ देखा
तृप्ति ने धीरे से माला उसके गले में डाल दी फिर आदर्श ने माला उठाई तृप्ति पीछे हटना चाहती थी लेकिन आदर्श ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा अब पीछे मत हटो तृप्ति ने गुस्से से उसकी तरफ देखा
आदर्श ने उसके गले में माला डाल दी पंडित ने विवाह की रस्में आगे बढ़ाईं कुछ देर बाद आदर्श ने तृप्ति की मांग में सिंदूर भर दिया तृप्ति की आंखों से आंसू बहने लगे फिर आदर्श ने उसके गले में मंगलसूत्र पहना दिया पंडित ने कहा
अब से आप दोनों पति पत्नी हैं तृप्ति ने अपनी आंखें बंद कर लीं
उसके मन में सिर्फ एक बात चल रही थी उसकी जिंदगी बदल चुकी थी आदर्श ने उसकी तरफ देखा फिर शांत आवाज में कहा अब तुम मेरी पत्नी हो तृप्ति ने आंखें खोलकर उसे देखा और गुस्से में बोली हां लेकिन याद रखिएगा ये शादी मेरी मर्जी से नहीं हुई है आदर्श ने कहा
मुझे पता है
तृप्ति ने अपने आंसू पोंछे और कहा मैंने अपनी जिंदगी में बहुत कुछ खो दिया है लेकिन मैं अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ूंगी आदर्श ने उसकी तरफ देखा मैं तुम्हें पढ़ने से नहीं रोकूंगा तृप्ति कुछ पल चुप रही फिर बोली और मैं आपको अपना पति कभी नहीं मानूंगी आदर्श की आंखों में हल्की सी चमक आई समय के साथ सब बदल जाता है तृप्ति ने तुरंत कहा
मेरे मामले में नहीं बदलेगा आदर्श कुछ नहीं बोला तभी उसके फोन पर कॉल आया उसने फोन उठाया दूसरी तरफ से उसके आदमी ने कहा सर विराज राणा को शादी की खबर मिल गई है आदर्श ने पूछा उसने क्या कहा आदमी ने धीमी आवाज में कहा
उसने कहा है कि अब वह सिर्फ तृप्ति को नहीं बल्कि आपकी पूरी सल्तनत को खत्म करेगा आदर्श की आंखों में खतरनाक चमक आ गई उसने फोन काट दिया तृप्ति ने घबराकर पूछा
क्या हुआ आदर्श ने उसकी तरफ देखा अब असली खेल शुरू होगा तृप्ति कुछ समझ पाती उससे पहले बाहर अचानक गोलियों की आवाज गूंज उठी और पूरी हवेली में अफरा तफरी मच गई

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