🔐 लॉग-इन या रजिस्टर करें  

Epi – 1 King ka junoon इश्क

पढ़ने का समय : 9 मिनट

 

 

 

एपिसोड – 1 शादी से फरार

 

शर्मा हवेली आज दुल्हन की तरह सजी हुई थी। पूरे घर में रोशनी लगी हुई थी। आंगन में फूलों से सजावट की गई थी और घर के बाहर मेहमानों की गाड़ियां लगातार आ-जा रही थीं। घर के अंदर हर तरफ शादी की तैयारियां चल रही थीं।

लेकिन उसी घर के एक कमरे में बैठी तृप्ति शर्मा का चेहरा बिल्कुल उतरा हुआ था।

 

तृप्ति लाल रंग के भारी लहंगे में दुल्हन बनी हुई शीशे के सामने बैठी थी। उसके बालों में गजरा लगा हुआ था, माथे पर बड़ी सी बिंदी और मांग में सिंदूर की जगह अभी सिर्फ लाल रंग की मांग थी।

 

उसने अपने चेहरे को शीशे में देखा और फिर धीरे से अपना सिर पकड़ लिया। तृप्ति बड़बड़ाते हुए कहती है, “हे भगवान! ये क्या हो रहा है मेरे साथ? अभी मेरी जिंदगी शुरू भी नहीं हुई और मेरे पापा ने उसे खत्म करने का पूरा इंतजाम कर दिया।”

 

वह कुछ पल चुप रहती है फिर शीशे में खुद को देखते हुए कहती है, “तृप्ति शर्मा, तू आज से पढ़ाई करेगी या किसी ऐसे आदमी की पत्नी बनेगी जिसका नाम सुनकर लोग डरते हैं?”

 

तभी कमरे का दरवाजा खुलता है। तृप्ति की मां अंदर आती हैं। वह तृप्ति को देखकर हल्की सी मुस्कुराती हैं और उसके पास आकर बैठ जाती हैं। “बहुत खूबसूरत लग रही है मेरी बेटी।” तृप्ति तुरंत अपनी मां की तरफ देखती है। “मां, आपको सच में लगता है कि मैं खूबसूरत लग रही हूं?”

 

मा ने कहा “हां बेटा तू खूबसूरत है तभी तो बोल रही हूं”

तृप्ति उदास हो गई वो धीरे से कहती है “मुझे तो लग रहा है मैं ऐसी लग रही हूं जैसे किसी ने मुझे लाल रंग के पर्दे में लपेट दिया हो।”

 

उसकी मां उसकी बात सुनकर हंस देती हैं। लेकिन अगले ही पल तृप्ति का चेहरा फिर गंभीर हो जाता है। “मां, आखिरी बार पूछ रही हूं… क्या आप पापा को रोक नहीं सकतीं?”

 

उसकी मां चुप हो जाती हैं। तृप्ति की आंखों में बेचैनी साफ दिखाई दे रही थी। “मैं शादी नहीं करना चाहती मां। मुझे पढ़ना है। मुझे अपनी पढ़ाई पूरी करनी है। मैं अपनी जिंदगी में कुछ बनना चाहती हूं।”

 

उसकी मां धीरे से उसका हाथ पकड़ती हैं। “बेटा, तेरे पापा ने सब सोच-समझकर फैसला किया है।” तृप्ति हाथ छुड़ाते हुए कहा “लेकिन मेरी जिंदगी के बारे में फैसला करने से पहले मुझसे तो पूछ लेते।”

 

तृप्ति की आवाज थोड़ी ऊंची हो जाती है। “मुझे उस आदमी के बारे में कुछ नहीं पता। मैंने उसे ठीक से देखा तक नहीं है। सिर्फ इसलिए शादी कर लूं क्योंकि पापा ने रिश्ता तय कर दिया?”

 

उसकी मां कुछ बोलतीं, उससे पहले बाहर से किसी के आने की आवाज आती है। तृप्ति तुरंत चुप हो जाती है। दरवाजा खुलता है और उसके पिता नीरज जी अंदर आते हैं। तृप्ति उन्हें देखते ही मुंह दूसरी तरफ कर लेती है। उसके पिता उसके पास आकर कहते हैं, “तृप्ति, मेहमान आने शुरू हो गए हैं। कुछ देर में बारात भी पहुंचने वाली है। अब कोई तमाशा मत करना।”

 

तृप्ति तुरंत उनकी तरफ मुड़ती है। “पापा, मैं तमाशा नहीं कर रही हूं। मैं सिर्फ अपनी जिंदगी के बारे में बोल रही हूं।”

 

नीरज जी उसकी बात सुनकर कहते हैं “और मैं तुम्हारा पिता हूं। मुझे पता है तुम्हारे लिए क्या सही है।”

 

तृप्ति की आंखों में आंसू आ जाते हैं। “नहीं पापा आपको पता है कि आपके लिए क्या सही है। मेरे लिए क्या सही है, मेरी जिंदगी का फैसला मुझे करने दीजिए।”

 

उसके नीरज जी गुस्से में उसकी तरफ देखते हैं। “बहुत हो गया। आज तुम्हारी शादी है और आज के बाद तुम्हें अपने पति के घर जाना है।” तृप्ति कुछ पल उन्हें देखती रहती है।

फिर धीरे से पूछती है, “अगर मैं शादी नहीं करना चाहूं तो?”

 

कमरे में अचानक खामोशी छा जाती है। नीरज जी सख्त आवाज में कहते हैं, “तुम्हें शादी करनी ही होगी।” इतना कहकर वह कमरे से बाहर चले जाते हैं। दरवाजा बंद होते ही तृप्ति की आंखों से आंसू निकलने लगते हैं।

 

उसकी मां उसे समझाने की कोशिश करती हैं, लेकिन तृप्ति कुछ नहीं बोलती। कुछ देर बाद उसकी मां भी बाहर चली जाती हैं। कमरे में अब सिर्फ तृप्ति थी। तृप्ति कुछ देर तक दरवाजे को देखती रहती है। फिर अचानक उसकी नजर खिड़की पर जाती है।

 

उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आती है। “शादी नहीं करनी मुझे ?” वह धीरे से कहती है। “लेकिन आप मेरी शादी करवाना चाहते हैं ना पापा तो ठीक है पापा… देखते हैं किसकी शादी करवाते हैं आप।

 

तृप्ति जल्दी से अपनी अलमारी खोलती है। वह अपना छोटा सा बैग निकालती है और उसमें कुछ कपड़े, पैसे और अपनी जरूरी किताबें रखने लगती है। फिर वह अपनी सबसे पसंदीदा किताब हाथ में लेकर उसे बैग में रखने लगती है।

 

कुछ देर बाद तृप्ति अपनी शादी का भारी लहंगा थोड़ा संभालती है और खिड़की से नीचे देखती है। नीचे कोई नहीं था। वह धीरे-धीरे खिड़की से बाहर निकलती है और एक पाइप के सहारे नीचे उतरने लगती है। कुछ ही देर में वह घर के पीछे पहुंच जाती है।

 

तृप्ति अपने लहंगे को संभालते हुए दौड़ने लगती है। कुछ दूर जाकर वह रुकती है और पीछे मुड़कर अपने घर को देखती है। उसकी आंखों में आंसू थे। “माफ करना मां।” वह धीरे से कहती है। “लेकिन मैं अपनी जिंदगी किसी ऐसे इंसान के साथ नहीं बिताना चाहती जिसे मैंने देखा तक नहीं है।”

 

फिर वह तेजी से वहां से निकल जाती है। उसे नहीं पता था कि उसकी यह छोटी सी भागने की कोशिश उसे ऐसी जगह पहुंचाने वाली थी जहां उसकी जिंदगी हमेशा के लिए बदलने वाली थी। दूसरी तरफ शर्मा हवेली में कुछ देर बाद तृप्ति की मां उसे बुलाने के लिए कमरे में आती हैं। कमरा खाली देखकर उनके होश उड़ जाते हैं। “तृप्ति?” वह पूरे कमरे में देखती हैं। “तृप्ति!” तभी उनकी नजर खुली हुई खिड़की पर जाती है।

 

वह घबराकर बाहर देखती हैं। कुछ ही मिनटों में पूरे घर में हड़कंप मच जाता है। तृप्ति के पिता को जैसे ही पता चलता है कि तृप्ति घर से भाग गई है, उनका चेहरा गुस्से से लाल हो जाता है। वह तुरंत फोन निकालते हैं।

 

लेकिन उसी समय एक और फोन बजता है। फोन के दूसरी तरफ से एक आदमी की आवाज आती है। “तृप्ति घर से भाग गई है।” कुछ सेकंड की खामोशी के बाद दूसरी तरफ से भारी आवाज आती है। “क्या कहा?”

 

” फोन पर बात करने वाला आदमी आदिल विराज राणा का खास आदमी था “तृप्ति शादी से पहले ही घर से भाग गई।

 

 

विराज राणा। एशिया की अंधेरी दुनिया का जाना-पहचाना नाम। जिसके नाम से बड़े-बड़े लोग डरते थे। विराज ने तृप्ति से शादी करने का फैसला किया था और आज उसी से शादी थी। लेकिन तृप्ति उसके घर पहुंचने से पहले ही गायब हो चुकी थी।

 

विराज कुर्सी पर बैठा हुआ था। उसके सामने शराब का गिलास रखा था, लेकिन इस समय उसका पूरा ध्यान फोन पर था। वह धीमी आवाज में पूछता है, “कहां गई है?”

 

आदिल कहता है “पता नहीं सर। उसके घरवालों को भी नहीं पता।” विराज की आंखों में गुस्सा उतर आता है। “मुझे लड़की चाहिए।”

 

आदिल कॉल पर कहता है “जी सर।”

 

“और याद रखना… वो जितनी जल्दी मिल जाए, उतना अच्छा है।” विराज बोल कर कॉल कट कर देता है।

 

विराज अपने सामने बैठे आदमी की तरफ देखता है।

“मेरे आदमी पूरे शहर में भेजो।”

 

उसका असिस्टेंट विक्रम कहता है “सर, अगर वो शहर से बाहर चली गई तो?” विराज हल्का सा मुस्कुराता है। “वो ज्यादा दूर नहीं जा सकती।”

 

फिर उसकी आवाज सख्त हो जाती है। “लेकिन अगर किसी ने उसे मुझसे पहले ढूंढ लिया… तो उसे जिंदा मत छोड़ना।”

उधर तृप्ति को कुछ भी पता नहीं था कि उसके पीछे कितने लोग लग चुके हैं।

 

वह अपनी भारी शादी की ड्रेस संभालते हुए सड़क पर भाग रही थी। कुछ दूर जाकर उसे एक सुनसान सड़क दिखाई दी।

वह थककर वहां खड़ी हो गई। “हे भगवान… शादी से भागना इतना मुश्किल होता है, ये आज पता चला।”

 

वह हांफते हुए कहती है। तभी दूर से एक काली गाड़ी तेजी से उसकी तरफ आती दिखाई देती है। तृप्ति पहले तो सामान्य समझकर खड़ी रहती है। लेकिन जैसे ही गाड़ी उसके पास आकर रुकती है, उसके अंदर डर की लहर दौड़ जाती है।

 

गाड़ी से दो आदमी नीचे उतरते हैं। एक आदमी तृप्ति की तरफ देखकर कहता है, “यही है।” तृप्ति का चेहरा सफेद पड़ जाता है।ब“कौन…?”

 

वह पीछे हटती है। दूसरा आदमी आगे बढ़ता है। “चलो हमारे साथ।” तृप्ति तुरंत समझ जाती है कि ये लोग उसके घर से नहीं आए हैं। वह पीछे मुड़कर दौड़ पड़ती है। “अरे पकड़ो इसे!”

 

दोनों आदमी उसके पीछे भागते हैं। तृप्ति अपनी पूरी ताकत से दौड़ रही थी। भारी लहंगा उसके पैरों में बार-बार फंस रहा था। वह पीछे मुड़कर देखती है।

 

दोनों आदमी उसके बिल्कुल पीछे थे। “हे भगवान! आज तो शादी से बचने के चक्कर में जान से ही जाऊंगी!” वह दौड़ते हुए चिल्लाती है।

 

सामने सड़क दो हिस्सों में बंट रही थी। तृप्ति बिना सोचे दाईं तरफ मुड़ जाती है। कुछ दूर जाने के बाद उसे सामने एक बहुत बड़ा काला गेट दिखाई देता है। गेट के दोनों तरफ हथियार लिए सिक्योरिटी गार्ड खड़े थे।

 

तृप्ति एक पल के लिए रुकती है। फिर पीछे देखती है। वे आदमी अब भी उसका पीछा कर रहे थे। तृप्ति बिना कुछ सोचे उस बड़े गेट की तरफ भागती है। “बचाओ!” वह चिल्लाती हुई गेट के अंदर घुस जाती है।

 

गार्ड उसे रोकने के लिए आगे बढ़ते हैं। तृप्ति हाथ जोड़कर कहती है, “प्लीज मुझे मत रोकिए! मेरे पीछे बहुत बुरे लोग पड़े हैं।” गार्ड एक-दूसरे का चेहरा देखने लगते हैं।

 

तभी ऊपर खड़ी बालकनी में एक आदमी आकर रुकता है।

 

काले कपड़े, गंभीर चेहरा और आंखों में ऐसी खामोशी कि सामने वाला खुद डर जाए। वह नीचे खड़ी दुल्हन को देखता है। उसकी नजर तृप्ति पर टिक जाती है। और उसी पल तृप्ति की नजर भी ऊपर उठती है। दोनों की पहली नजर एक-दूसरे से मिलती है।

तृप्ति को नहीं पता था कि वह किसके घर में घुस चुकी है।

लेकिन जिस आदमी के सामने पूरी दुनिया सिर झुकाती थी…

उसकी जिंदगी में आज पहली बार कोई लड़की खुद भागकर उसके घर आई थी। और वो लड़की थी तृप्ति शर्मा।

 

दोस्तो आपको क्या लगता है तृप्ति किसके घर घुस गई है क्या वो विराज के घर घुस गई है जिसे शादी करने से बचने के लिए भागी थी या कोई और है चलिए जानते हैं आगे।

 

 

Avatar photo

Lakshmi Kumari

NSW  अनुभवी लेखक -🥇

Comments

“Epi – 1 King ka junoon इश्क” को एक उत्तर

  1. Neha Goyal अवतार
    Neha Goyal

    अच्छी कहानी है

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *