नसीब न जाने क्या होता है,
कभी हँसाता, कभी रुलाता है।
जिसे चाहो वो दूर हो जाता,
जिसे न चाहो वो पास आता है।
कभी मेहनत भी हार जाती है,
कभी किस्मत राह बना जाती है।
इंसान बस कोशिश करता रह जाता है,
नसीब जाने कब क्या दिखाता है।

नसीब न जाने क्या होता है,
कभी हँसाता, कभी रुलाता है।
जिसे चाहो वो दूर हो जाता,
जिसे न चाहो वो पास आता है।
कभी मेहनत भी हार जाती है,
कभी किस्मत राह बना जाती है।
इंसान बस कोशिश करता रह जाता है,
नसीब जाने कब क्या दिखाता है।
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