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नसीब

पढ़ने का समय : < 1 मिनट

नसीब न जाने क्या होता है,

कभी हँसाता, कभी रुलाता है।

जिसे चाहो वो दूर हो जाता,

जिसे न चाहो वो पास आता है।

कभी मेहनत भी हार जाती है,

कभी किस्मत राह बना जाती है।

इंसान बस कोशिश करता रह जाता है,

नसीब जाने कब क्या दिखाता है।

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Auther preeti Sharma

मैं हर बार कुछ बेहतर की कोशिश करती हूं अपनी कलम से जज़्बात लिखा करती हूं

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