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श्रेणी: रोमांटिक कहानी

  • Epi – 4 king ki जुनून इश्क

    Epi – 4 king ki जुनून इश्क

    पढ़ने का समय : 7 मिनट

    एपिसोड 4 जबरदस्ती की शादी

     

    शादी की तैयारी शुरू करो आदर्श की बात सुनकर तृप्ति वहीं खड़ी रह गई उसके चेहरे पर गुस्सा और हैरानी दोनों साफ दिखाई दे रहे थे आदर्श के आदमी ने सिर झुकाकर कहा

    जी सर वह तुरंत कमरे से बाहर चला गया तृप्ति कुछ पल तक दरवाजे की तरफ देखती रही

     

    फिर अचानक आदर्श की तरफ मुड़ी आपने ये क्या कर दिया

    आदर्श ने शांत आवाज में कहा जो जरूरी था जरूरी था

    तृप्ति गुस्से में बोली किसने कहा आपको कि मेरी शादी करवाना जरूरी है आदर्श ने उसकी तरफ देखा मैंने कहा

     

    तृप्ति को उसकी बात पर और गुस्सा आ गया आप कौन होते हैं मेरी जिंदगी का फैसला लेने वाले आदर्श उसके पास आया

    अब तुम्हारी जिंदगी सिर्फ तुम्हारी नहीं है तृप्ति ने हैरानी से पूछा मतलब आदर्श ने बिना किसी भाव के कहा अब तुम मेरी पत्नी हो तृप्ति की आंखों में आंसू आ गए मैं आपकी पत्नी नहीं हूं

     

    आदर्श ने कहा कुछ देर बाद होगी नहीं होगी तृप्ति ने गुस्से में कहा मैं आपसे शादी नहीं करूंगी आदर्श कुछ पल उसे देखता रहा फिर बोला तुम्हारे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है

    तृप्ति ने अपने आंसू पोंछे आपने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी

     

    आदर्श के चेहरे पर कोई बदलाव नहीं आया तृप्ति ने आगे कहा मैं अपने घर से इसलिए भागी थी क्योंकि मुझे शादी नहीं करनी थी मैं पढ़ना चाहती थी अपनी जिंदगी अपने हिसाब से जीना चाहती थी लेकिन यहां आकर भी मुझे वही करना पड़ रहा है जिससे मैं बचकर भागी थी आदर्श ने कहा

    अगर तुम मेरे साथ शादी करोगी तो कोई तुम्हें परेशान नहीं करेगा तृप्ति ने गुस्से में कहा मुझे आपकी सुरक्षा नहीं चाहिए मुझे अपनी आजादी चाहिए

     

    आदर्श ने कुछ नहीं कहा तृप्ति ने अपनी किताब उठाई और उसे अपने सीने से लगा लिया मुझे सिर्फ पढ़ाई करनी है क्या इतनी सी बात समझ नहीं आती आपको आदर्श ने पहली बार उसकी किताब की तरफ ध्यान से देखा तुम्हें पढ़ाई इतनी पसंद है तृप्ति ने तुरंत कहा हां बहुत ज्यादा मैं अपनी जिंदगी में कुछ बनना चाहती हूं

     

    मैं किसी की पत्नी बनकर पूरी जिंदगी नहीं बिताना चाहती

    आदर्श ने शांत आवाज में कहा शादी के बाद भी पढ़ सकती हो तृप्ति ने उसे घूरकर देखा आपको लगता है शादी के बाद सब कुछ इतना आसान होता है आदर्श ने कहा मेरे साथ होगा

    तृप्ति कुछ पल उसे देखती रही फिर बोली आपको अपने ऊपर बहुत भरोसा है

     

    आदर्श ने कहा है तभी बाहर से आवाज आई सर सब तैयारी हो गई है आदर्श ने दरवाजे की तरफ देखा ठीक है तृप्ति घबराकर बोली इतनी जल्दी आदर्श ने कहा विराज को एक घंटे का समय मिला है

     

    उसके पास अब बहुत कम वक्त है तृप्ति ने कहा लेकिन मैं तैयार नहीं हूं आदर्श ने उसकी तरफ देखा तुम दुल्हन की पोशाक में पहले से हो तृप्ति ने अपने लाल जोड़े की तरफ देखा उसकी आंखों में फिर उदासी उतर आई यह जोड़ा मैंने अपनी शादी के लिए नहीं पहना था मैंने तो सोचा था इसे पहनकर अपनी शादी से भाग जाऊंगी

     

    आदर्श ने कहा अब यही तुम्हारी शादी की पोशाक है तृप्ति ने गुस्से में कहा आप बहुत बुरे हैं आदर्श बिना कुछ बोले कमरे से बाहर चला गया

     

    तृप्ति कुछ पल वहीं खड़ी रही फिर उसने अपने आंसू पोंछे

    नहीं मैं हार नहीं मानूंगी वह अपने मन में बोली मैं किसी भी हालत में इस शादी को रोकूंगी तृप्ति कमरे से बाहर निकलने लगी लेकिन दरवाजे के बाहर दो आदमी खड़े थे उन्हें देखकर वह रुक गई मैं बाहर जाऊंगी एक आदमी ने सिर झुकाकर कहा

     

    माफ कीजिए मैडम आपको बाहर जाने की इजाजत नहीं है

    तृप्ति ने गुस्से में कहा मैं कोई कैदी हूं क्या आदमी चुप रहा

    तृप्ति ने दूसरी तरफ जाने की कोशिश की लेकिन वहां भी आदर्श के आदमी खड़े थे तृप्ति समझ गई कि उसे चारों तरफ से घेर लिया गया है वह वापस कमरे में आ गई कुछ देर बाद दरवाजा खुला एक महिला अंदर आई उसके हाथ में कुछ सामान था उसने तृप्ति से कहा मैडम आपको तैयार करना है

     

    तृप्ति ने कहा मुझे कुछ तैयार नहीं होना महिला ने कहा

    सर का आदेश है तृप्ति ने गुस्से में कहा सबको बस उसी का आदेश सुनाई देता है मेरी बात किसी को नहीं सुनाई देती

    महिला चुपचाप खड़ी रही तृप्ति ने कुछ पल उसे देखा

    फिर वह कुर्सी पर जाकर बैठ गई महिला ने उसके बाल ठीक किए

     

    उसके सिर पर दुपट्टा रखा और उसके हाथों में चूड़ियां पहनाने लगी तृप्ति की आंखों से लगातार आंसू निकल रहे थे

    वह अपने हाथों को देख रही थी कुछ घंटे पहले इन्हीं हाथों में उसने किताब पकड़ी थी और अब इन्हीं हाथों में शादी की चूड़ियां थीं

     

    उसे अपनी मां की याद आ गई पापा की याद आ गई

    अपना घर याद आ गया लेकिन फिर उसे याद आया कि उसी घर में उसकी शादी उसकी मर्जी के खिलाफ कराई जा रही थी तभी बाहर से आदर्श की आवाज आई तैयार हो गई

    महिला ने कहा जी सर आदर्श कमरे के अंदर आया

     

    तृप्ति ने उसकी तरफ देखा उसकी आंखें लाल थीं आदर्श कुछ पल उसे देखता रहा लाल जोड़े में तृप्ति बहुत खूबसूरत लग रही थी लेकिन उसके चेहरे की उदासी साफ दिखाई दे रही थी

     

    आदर्श ने कहा चलो तृप्ति ने कोई जवाब नहीं दिया आदर्श ने फिर कहा तृप्ति वह धीरे से उठी लेकिन आगे बढ़ने की बजाय वहीं खड़ी रही मैं आखिरी बार पूछ रही हूं क्या आप ये शादी रोक सकते हैं आदर्श ने कहा नहीं तृप्ति की आंखों से फिर आंसू निकल आए तो याद रखिएगा मैंने ये शादी अपनी मर्जी से नहीं की

     

    आदर्श ने उसकी तरफ देखते हुए कहा मुझे पता है तृप्ति ने कहा और मैं आपको कभी माफ नहीं करूंगी आदर्श ने कुछ नहीं कहा दोनों कमरे से बाहर निकल गए घर का पूरा हॉल फूलों से सजाया गया था बीच में शादी का मंडप तैयार था

    आदर्श के परिवार के कुछ लोग भी वहां मौजूद थे सभी की नजरें तृप्ति पर थीं

     

    तृप्ति को ऐसा लग रहा था जैसे वह किसी सपने में चल रही हो लेकिन ये सपना नहीं था ये उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा फैसला था आदर्श मंडप के पास जाकर बैठ गया तृप्ति भी उसके सामने बैठ गई पंडित ने मंत्र पढ़ना शुरू किया तृप्ति बार बार आदर्श की तरफ देख रही थी

     

    आदर्श का चेहरा बिल्कुल शांत था जैसे उसके लिए ये सिर्फ एक फैसला हो लेकिन तृप्ति के लिए उसकी पूरी जिंदगी बदल रही थी पंडित ने कहा वर वधू एक दूसरे को माला पहनाएं तृप्ति ने माला उठाई उसके हाथ कांप रहे थे

     

    वह आदर्श की तरफ देखने लगी आदर्श ने उसकी तरफ देखा

    तृप्ति ने धीरे से माला उसके गले में डाल दी फिर आदर्श ने माला उठाई तृप्ति पीछे हटना चाहती थी लेकिन आदर्श ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा अब पीछे मत हटो तृप्ति ने गुस्से से उसकी तरफ देखा

     

    आदर्श ने उसके गले में माला डाल दी पंडित ने विवाह की रस्में आगे बढ़ाईं कुछ देर बाद आदर्श ने तृप्ति की मांग में सिंदूर भर दिया तृप्ति की आंखों से आंसू बहने लगे फिर आदर्श ने उसके गले में मंगलसूत्र पहना दिया पंडित ने कहा

    अब से आप दोनों पति पत्नी हैं तृप्ति ने अपनी आंखें बंद कर लीं

     

    उसके मन में सिर्फ एक बात चल रही थी उसकी जिंदगी बदल चुकी थी आदर्श ने उसकी तरफ देखा फिर शांत आवाज में कहा अब तुम मेरी पत्नी हो तृप्ति ने आंखें खोलकर उसे देखा और गुस्से में बोली हां लेकिन याद रखिएगा ये शादी मेरी मर्जी से नहीं हुई है आदर्श ने कहा

    मुझे पता है

     

    तृप्ति ने अपने आंसू पोंछे और कहा मैंने अपनी जिंदगी में बहुत कुछ खो दिया है लेकिन मैं अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ूंगी आदर्श ने उसकी तरफ देखा मैं तुम्हें पढ़ने से नहीं रोकूंगा तृप्ति कुछ पल चुप रही फिर बोली और मैं आपको अपना पति कभी नहीं मानूंगी आदर्श की आंखों में हल्की सी चमक आई समय के साथ सब बदल जाता है तृप्ति ने तुरंत कहा

    मेरे मामले में नहीं बदलेगा आदर्श कुछ नहीं बोला तभी उसके फोन पर कॉल आया उसने फोन उठाया दूसरी तरफ से उसके आदमी ने कहा सर विराज राणा को शादी की खबर मिल गई है आदर्श ने पूछा उसने क्या कहा आदमी ने धीमी आवाज में कहा

     

    उसने कहा है कि अब वह सिर्फ तृप्ति को नहीं बल्कि आपकी पूरी सल्तनत को खत्म करेगा आदर्श की आंखों में खतरनाक चमक आ गई उसने फोन काट दिया तृप्ति ने घबराकर पूछा

    क्या हुआ आदर्श ने उसकी तरफ देखा अब असली खेल शुरू होगा तृप्ति कुछ समझ पाती उससे पहले बाहर अचानक गोलियों की आवाज गूंज उठी और पूरी हवेली में अफरा तफरी मच गई

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

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    Lakshmi Kumari

    NSW  अनुभवी लेखक -🥇

  • Epi – 3 King ka जुनून इश्क

    Epi – 3 King ka जुनून इश्क

    पढ़ने का समय : 8 मिनट

     

    एपिसोड 3 मैं शादी नहीं करूँगी

     

    हे भगवान शादी से भागी थी और अब पता नहीं किस नई मुसीबत में फंस गई तृप्ति आदर्श को जाते हुए देखते हुए बड़बड़ाई आदर्श कुछ कदम आगे जाकर रुक गया उसने पीछे मुड़कर तृप्ति को देखा

     

    कुछ कहा तुमने तृप्ति तुरंत सीधी खड़ी हो गई नहीं तो

    आदर्श आंखे छोटी कर के बोला अभी तुम कुछ बोल रही थीं

     

    तृप्ति हस्ते हुए कहती है “मैं भगवान से बात कर रही थी”

     

    आदर्श ने उसकी तरफ देखा “भगवान से सच में” “हां” तृप्ति उसके पास आते हुए कहा आदर्श ने अपनी आंखें बंद करके एक लंबी सांस ली, “मेरे साथ चलो” तृप्ति उसके पीछे चलने लगी कुछ ही देर बाद दोनों आदर्श के कमरे में पहुंच गए

     

    कमरा बहुत बड़ा था कमरे में जरूरत से ज्यादा सामान नहीं था एक तरफ बड़ी सी खिड़की थी जिसके बाहर पूरा शहर दिखाई दे रहा था सामने एक बड़ा बेड था और उसके पास सोफे रखे हुए थे

     

    तृप्ति कमरे में आते ही चारों तरफ देखने लगी “वाह कितना सुंदर है” आदर्श ने उसकी तरफ देख कर पूछा “क्या” तृप्ति मुस्कुराते हुए बोली “आपका कमरा तो बहुत बड़ा है”

     

    आदर्श उसकी तरफ देख कर बोला “तुम्हें क्या करना है” तृप्ति बेड के पास जाकर खड़ी हो गई “कुछ नहीं बस देख रही थ”ी

     

    फिर वह अचानक आदर्श की तरफ देखकर बोली “वैसे एक बात पूछूं” आदर्श स्पॉट लहजे में जहां “पूछो”

     

    आप हमेशा ऐसे ही गुस्से में रहते हैं आदर्श की भौंहें सिकुड़ गईं मैं गुस्से में नहीं हूं

     

    तृप्ति मुस्कुरा कर बोली “अच्छा तो आपका चेहरा ऐसा क्यों लग रहा है जैसे किसी ने आपका पसंदीदा खाना चुरा लिया हो

     

    आदर्श उसे घूरने लगा तृप्ति तुरंत चुप हो गई “ठीक है नहीं बोलती” आदर्श सोफे पर बैठ गया “अब मुझे पूरी बात बताओ”

     

    तृप्ति उसके सामने वाली कुर्सी पर बैठ गई “कौन सी बात’

    आदर्श ने सीधे पूछा “तुम्हारी शादी”तृप्ति का चेहरा थोड़ा उदास हो गया वह कुछ पल चुप रही फिर धीरे से बोलना शुरू किया “मेरे पापा ने मेरी शादी विराज राणा से तय की थी आदर्श की आंखों में फिर वही कठोरता आ गई तुम्हें उसके बारे में कुछ पता नहीं था “नहीं” तृप्ति ने सिर हिलाया

     

    मुझे बस इतना बताया गया कि वह बहुत बड़ा बिजनेसमैन है

    बहुत अमीर है लेकिन आज शादी के दिन मुझे पता चला कि वह बिजनेसमैन कम और वह बोलते बोलते रुक गई

     

    आदर्श ने पूछा “गुंडा ज्यादा है” तृप्ति ने उसकी तरफ देखा

     

    “हां” फिर धीरे से बोली “मैंने कुछ लोगों को उसके बारे में बात करते हुए सुना था वो लोग उससे डरते हैं मुझे समझ नहीं आया कि पापा मेरी शादी ऐसे इंसान से क्यों कर रहे हैं”

     

    आदर्श ने सोफे पर सीधा बैठते हुए पूछा “तुमने अपने पिता से पूछा” “बहुत पूछा” तृप्ति की आवाज में नाराजगी आ गई

    “लेकिन पापा ने मेरी एक नहीं सुनी” आदर्श उसके चेहरा देखते हुए पूछा “और तुम भाग गई” है “हा” तृप्ति ने बिना किसी झिझक के कहा मैं शादी नहीं करना चाहती थी

     

    आदर्श कुछ नहीं बोला तृप्ति आगे कहती है ‘मुझे पढ़ाई करनी है मैं अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहती हूं मुझे आगे कॉलेज जाना है मैं अपनी जिंदगी में कुछ करना चाहती हूं और तुम्हारे पिता उन्हें लगता है लड़की की जिंदगी का सबसे जरूरी काम शादी करना है” तृप्ति ने मुंह बनाते हुए कहा “जैसे मैं पढ़ाई करके कोई अपराध करने वाली हूं”

     

    आदर्श उसे देखता रहा अगर तुम शादी नहीं करना चाहती थी “तो पहले क्यों नहीं बताया” तृप्ति तुरंत बोली “बताया था

    किसी ने नहीं सुना

     

    कुछ पल दोनों के बीच खामोशी रही तभी आदर्श के फोन पर कॉल आया उसने फोन उठाया बोलो कॉल रिसीव करते ही बोला

     

    दूसरी तरफ से उसके आदमी की आवाज आई “सर बाहर कुछ गाड़ियां आकर रुकी हैं आदर्श का चेहरा सख्त हो गया

    “किसकी” कॉल के दूसरी तरफ से बोला विराज राणा के आदमी लग रहे हैं आदर्श ने तृप्ति की तरफ देखा “कितने लोग हैं”

     

    कम से कम दस गाड़ियां हैं कॉल के दूसरी तरफ से आवाज आई आदर्श कुछ सेकंड चुप रहा फिर बोला गेट बंद कर दो

    “जी सर” कॉल कट गया

     

    तृप्ति ने घबराकर पूछा “क्या हुआ” आदर्श ने कोई जवाब नहीं दिया तभी बाहर से गाड़ियों के रुकने की आवाज आने लगी तृप्ति धीरे धीरे खिड़की की तरफ बढ़ी उसने पर्दा थोड़ा हटाकर बाहर देखा बाहर कई काली गाड़ियां खड़ी थीं उनसे हथियार लिए आदमी उतर रहे थे

     

    तृप्ति का चेहरा सफेद पड़ गया “ये लोग यहां कैसे पहुंच गए

    आदर्श उसके पास आया “तुम्हें ढूंढते हुए आता है”

     

    तृप्ति डरते हुए बोली “अब क्या होगा आदर्श ने उसकी तरफ देखा “कुछ नहीं” आदर्श की आवाज में इतना विश्वास था कि तृप्ति कुछ पल उसे देखती रही

     

    तभी नीचे से गार्ड की आवाज सुनाई दी सर वो लोग गेट तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं आदर्श तुरंत कमरे से बाहर निकलने लगा तृप्ति उसके पीछे भागी “आप कहां जा रहे हैं”

    आदर्श सीढ़ियाँ उतरते हुए बोला “नीचे”

     

    तृप्ति उसके पीछे चलते हुए बोली “मैं भी चलूंगी” आदर्श ने पलटकर उसे देखा “नहीं तुम यहीं रहोगी तृप्ति ने मुंह बनाया “मैं कोई बच्ची नहीं हूं। आदर्श चलते हुए बोला “मेरे लिए इस समय तुम सबसे बड़ी परेशानी हो” तृप्ति ने गुस्से में कहा “तो मुझे वापस भेज दीजिए” आदर्श उसके बिल्कुल सामने आकर रुक गया “वापस जाना चाहती हो” तृप्ति चुप हो गई धीरे से सिर हिलाया “नहीं” आदर्श ने कहा “तो फिर मेरी बात मानो”

     

    तृप्ति ने धीरे से सिर हिला दिया आदर्श नीचे चला गया

    कुछ ही देर में बाहर गोलियों की आवाज गूंजने लगी तृप्ति डरकर अपने कानों पर हाथ रख लेती है “हे भगवान ये लोग सच में गोली चला रहे है” वह कमरे में इधर उधर घूमने लगी

    कुछ देर बाद बाहर की आवाजें शांत हो गईं

     

    तभी कमरे का दरवाजा खुला आदर्श अंदर आया उसके चेहरे पर कोई डर नहीं था तृप्ति तुरंत उसके पास गई आप ठीक हैं

    आदर्श ने उसे देखा “हां” तृप्ति ने राहत की सांस ली

    “मुझे लगा आपको कुछ हो गया”

     

    आदर्श कुछ पल उसे देखता रहा फिर बोला “विराज के आदमी वापस चले गए हैं” क्यों सच में उसे विश्वाश नहीं हो रहा था आदर्श बोला क्योंकि उन्हें पता चल गया है “कि तुम मेरे घर में हो”आदर्श खिड़की के पास जाकर खड़ा हो गया

     

    “अब वो दोबारा आएंगे तो मैं यहां से चली जाती हूं” आदर्श उसकी बात सुन कर उसे देख “कहां जाओगी” तृप्ति चुप हो गई आदर्श पूछा “अपने घर” तृप्ति ने धीरे से सिर हिलाया

    “नहीं” किसी दोस्त के घर आदर्श फिर पूछा मेरी कोई ऐसी दोस्त नहीं है

     

    आदर्श उसके चेहरे को ध्यान से देखते हुए बोला ‘फिर” तृप्ति के पास कोई जवाब नहीं था आदर्श उसकी तरफ मुड़ा “विराज राणा तुम्हें नहीं छोड़ेगा’

     

    तो मैं क्या करूं आदर्श कुछ पल उसे देखता रहा फिर उसने बहुत शांत आवाज में कहा “तुम्हें बचाने का एक ही तरीका है

     

    तृप्ति ने उसकी तरफ देखा “क्या” आदर्श साइड बोला “तुम मेरी पत्नी बन जाओ’

     

    तृप्ति कुछ सेकंड तक बिल्कुल स्थिर खड़ी रही फिर उसकी आंखें बड़ी हो गईं “क्या”

     

    आदर्श ने दोबारा कहा “मेरी पत्नी’ तृप्ति तुरंत पीछे हट गई

    “नहीं” आदर्श ने उसे देखा तुमने कहा था तुम शादी नहीं करना चाहती” तृप्ति ने गुस्से में कहा

    “हां तो मैं शादी नहीं करना चाहती”

     

    आदर्श की आवाज शांत थी “विराज से नहीं करना चाहती पर मुझ से तो कर सकती हो ना” तृप्ति ने तुरंत जवाब दिया “मैं किसी से शादी नहीं करना चाहती आदर्श कुछ पल चुप रहा

    फिर बोला “ठीक है” तृप्ति को लगा बात खत्म हो गई लेकिन आदर्श की अगली बात सुनकर उसकी आंखें फिर फैल गईं

     

    लेकिन अब तुम्हारे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है मतलब

    आदर्श उसके करीब आया अगर तुम मेरी पत्नी होगी तो विराज तुम्हें हाथ लगाने से पहले सौ बार सोचेगा

     

    तृप्ति उसे घूरती रही आप मुझे बचाने के लिए मुझसे शादी करेंगे “हां” आदर्श उसकी आंखों में देखते हुए कहा

     

    तृप्ति बिना डरे जवाब दिया और अगर मैंने मना कर दिया

    आदर्श की आंखों में हल्की सी कठोरता आ गई तो तुम अपने तरीके से अपनी जिंदगी बचा सकती हो तृप्ति कुछ पल चुप रही उसने खिड़की से बाहर देखा फिर अपने हाथ में पकड़ी किताब को कसकर पकड़ लिया

     

    उसे अपनी आजादी चाहिए थी उसे शादी नहीं करनी थी

    लेकिन उसके पास वापस जाने की कोई जगह भी नहीं थी

    तभी आदर्श ने कहा सोच लो तृप्ति ने उसकी तरफ देखा

    “मैं आपको पसंद भी नहीं करती” आदर्श ने बिना भाव बदले कहा “मुझे भी तुम पसंद नहीं हो”

     

    तृप्ति को गुस्सा आ गया तो फिर शादी क्यों कर रहे हैं आदर्श ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा “क्योंकि इस समय तुम्हें बचाने के लिए मुझे यही करना होगा तृप्ति कुछ बोल नहीं पाई कमरे में खामोशी छा गई लेकिन तभी बाहर से आदर्श के आदमी की आवाज आई “सर”

     

    आदर्श ने दरवाजे की तरफ देखा क्या हुआ दरवाजा खुला

    आदमी ने घबराते हुए कहा विराज राणा ने खुद फोन किया है

    आदर्श का चेहरा बिल्कुल शांत हो गया क्या कहा उसने

     

    उसने कहा है अगर तृप्ति शर्मा अगले एक घंटे में उसके हवाले नहीं की गई तो वह सिंघानिया साम्राज्य के खिलाफ जंग शुरू कर देगा तृप्ति डरकर आदर्श की तरफ देखने लगी

     

    आदर्श ने कुछ पल उसे देखा फिर उसके चेहरे पर एक बेहद ठंडी मुस्कान आई “उसे कह दो’ वह तृप्ति की तरफ देखकर बोला “अब तृप्ति शर्मा उसकी नहीं मेरी पत्नी बनने वाली है

     

    तृप्ति की आंखें फैल गईं “क्या” आदर्श ने बिना उसकी बात का जवाब दिए अपने आदमी से कहा शादी की तैयारी शुरू करो

     

    तृप्ति वहीं खड़ी रह गई जिस शादी से भागने के लिए उसने अपना घर छोड़ा था आज वही शादी उसके सामने फिर खड़ी थी बस फर्क इतना था इस बार दूल्हा विराज राणा नहीं किंग ऑफ एशिया आदर्श सिंघानिया था

     

     

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    Lakshmi Kumari

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  • Epi – 2 king ka junoon इश्क

    Epi – 2 king ka junoon इश्क

    पढ़ने का समय : 7 मिनट

    एपिसोड – 2 किंग के घर में घुसपैठ

     

    दोनों की नजरें एक-दूसरे से टकरा रही थीं नीचे खड़ी तृप्ति की सांसें तेज चल रही थीं। उसके बाल बिखर चुके थे और भारी लहंगा संभालते-संभालते उसकी हालत खराब हो चुकी थी।

     

    वहीं ऊपर बालकनी में खड़ा आदर्श बिल्कुल शांत था काले रंग की शर्ट की आस्तीन उसकी कोहनी तक मुड़ी हुई थी। चेहरे पर किसी तरह का भाव नहीं था। उसकी आंखें बस सामने खड़ी उस लड़की को देख रही थीं तृप्ति कुछ सेकंड तक उसे देखती रही फिर धीरे से खुद से बोली ये कौन है?”

     

    आदर्श ने नीचे खड़े अपने गार्ड की तरफ देखा ये लड़की यहां कैसे आई उसकी आवाज बहुत शांत थी, लेकिन उसमें ऐसा रौब था कि गार्ड तुरंत सीधा खड़ा हो गया।

     

    “सर हमें नहीं पता। ये अचानक गेट के अंदर भागती हुई आई तभी बाहर से उन आदमियों की आवाज सुनाई दी जो तृप्ति का पीछा कर रहे थे लड़की अंदर गई है तृप्ति की आंखें डर से बड़ी हो गईं उसने पीछे देखा दो आदमी गेट के बाहर खड़े थे तृप्ति तुरंत पलटकर ऊपर आदर्श की तरफ देखने लगी आदर्श अब भी उसे ही देख रहा था।

     

    तृप्ति ने बिना सोचे अपने दोनों हाथ जोड़ दिए प्लीज मुझे बचा लीजिए आदर्श की भौंहें हल्की सी ऊपर उठीं क्यों तृप्ति ने घबराकर कहा क्योंकि वो लोग मुझे पकड़ने आए हैं आदर्श कुछ नहीं बोला।

     

    तृप्ति ने जल्दी से अपनी बात आगे बढ़ाई। देखिए, मैं आपको परेशान नहीं करूंगी। बस थोड़ी देर के लिए छुपा लीजिए। उसके बाद मैं चली जाऊंगी आदर्श की नजर उसके शादी के जोड़े पर गई तुम दुल्हन हो तृप्ति ने अपने लहंगे की तरफ देखा।

     

    हां फिर कुछ सोचकर बोली मतलब थी आदर्श की आंखें सिकुड़ गईं मतलब तृप्ति ने परेशान होकर कहा शादी होने वाली थी मेरी। और और मैं भाग गई।”

     

    आदर्श पहली बार कुछ सेकंड के लिए चुप हो गया उसे समझ नहीं आया कि उसके घर के अंदर घुस आई यह लड़की आखिर चाहती क्या है।

     

    तृप्ति ने उसे चुप देखकर कहा आप ऐसे मुझे देख क्यों रहे हैं? मैंने चोरी नहीं की है आदर्श ने ठंडी आवाज में पूछा तो मेरे घर में घुसा क्या है तृप्ति के पास इसका कोई जवाब नहीं था वह कुछ पल चुप रही।

     

    फिर धीरे से बोली वो गलती हो गई आदर्श ने नीचे अपने गार्ड की तरफ देखा इसे बाहर निकालो तृप्ति की आंखें फैल गईं क्या गार्ड उसकी तरफ बढ़ने लगे।

     

    तृप्ति तुरंत पीछे हट गई नहीं नहीं प्लीज वह जल्दी से आदर्श की तरफ देखने लगी आप मुझे बाहर निकाल देंगे तो वो लोग मुझे पकड़ लेंगे आदर्श की आवाज पहले जैसी ही ठंडी थी वो तुम्हारी समस्या है।”

     

    तृप्ति हाथ जोर कर बोली “लेकिन अभी मैं आपके घर में हूं आदर्श शांत लेकिन सख्त आवाज में कहा यही तुम्हारी सबसे बड़ी गलती है तृप्ति कुछ पल उसे देखती रही। फिर बुदबुदाइ इतना बड़ा घर है, एक लड़की को थोड़ी देर छुपाने से क्या हो जाएगा आदर्श ने उसकी बात सुन ली।

     

    “क्या कहा तृप्ति तुरंत मुस्कुरा दी मैंने कहा आपका घर बहुत अच्छा है आदर्श उसे घूरने लगा तृप्ति ने नजरें झुका लीं उसी समय बाहर खड़े दोनों आदमी गेट पर पहुंच गए।

     

    “लड़की अंदर आई है। हमें उसे लेकर जाना है गार्ड ने उन्हें रोक दिया यह प्राइवेट प्रॉपर्टी है। बिना अनुमति अंदर नहीं आ सकते वह आदमी अकड़कर बोला तुम जानते नहीं हो हम किसके आदमी हैं।”

     

    तभी ऊपर से आदर्श की आवाज आई उन्हें अंदर आने दो गार्ड तुरंत पीछे हट गए दोनों आदमी अंदर आए और पूरे घर में नजर दौड़ाने लगे।

     

    तृप्ति घबरा गई वह इधर-उधर देखने लगी उसे कहीं छुपने की जगह नहीं मिल रही थी तभी आदर्श सीढ़ियों से नीचे आने लगा उसके हर कदम के साथ घर का माहौल और शांत होता जा रहा था।

     

    दोनों आदमी जैसे ही आदर्श के सामने पहुंचे, उनकी आंखों में अचानक डर दिखाई देने लगा उन्होंने आदर्श को पहचान लिया था उनमें से एक ने तुरंत अपना सिर झुका लिया सर हमें पता नहीं था कि ये आपका घर है

     

    आदर्श ने बिना कोई भाव दिखाए पूछा किसे ढूंढ रहे हो, गुंडे डरते हुए कहा एक लड़की को आदर्श संत आवाज में पूछा कौन सी लड़की वह आदमी कुछ बोलने ही वाला था कि उसकी नजर पीछे खड़ी तृप्ति पर चली गई उसका चेहरा खिल उठा यही है वह तृप्ति की तरफ बढ़ने लगा लेकिन अगले ही पल आदर्श ने उसका हाथ पकड़ लिया।

     

    घर में सन्नाटा छा गया आदर्श ने उसकी कलाई इतनी मजबूती से पकड़ी कि वह आदमी दर्द से कराह उठा मेरे घर में घुसकर… मेरी इजाजत के बिना किसी को हाथ लगाने की हिम्मत कैसे हुई?”

     

    वह आदमी डरते हुए बोला सर, हम बस अपना काम “बाहर” आदर्श ने सिर्फ एक शब्द कहा गार्ड तुरंत आगे आए और दोनों आदमियों को बाहर ले जाने लगे तृप्ति वहीं खड़ी आदर्श को देख रही थी।

     

    उसकी आंखों में अब डर के साथ-साथ हैरानी भी थी आपने मुझे बचा लिया आदर्श ने उसकी तरफ देखा मैंने तुम्हें नहीं बचाया तृप्ति का चेहरा उतर गया फिर?”

     

    “मैंने उन्हें अपने घर में तमाशा करने से रोका है। तृप्ति कुछ सेकंड उसे देखती रही फिर धीरे से मुस्कुराई मतलब बचाया तो है आदर्श ने कोई जवाब नहीं दिया।

     

    वह ऊपर जाने लगा तृप्ति उसके पीछे चल पड़ी सुनिए आदर्श रुक गया क्या मुझे थोड़ी देर यहां रहने देंगे नहीं थोड़ी देर मतलब बस आज की रात नहीं कुछ घंटे नहीं एक घंटा आदर्श ने पलटकर उसे देखा तृप्ति चुप हो गई फिर धीरे से बोली आधा घंटा आदर्श ने माथे पर हाथ रख लिया।

     

    उसे पहली बार लगा कि इस लड़की को चुप करवाना शायद उसके किसी दुश्मन को हराने से भी ज्यादा मुश्किल होगा।

    तुम्हारा नाम क्या है तृप्ति पूरा नाम तृप्ति शर्मा आदर्श कुछ पल उसे देखता रहा और तुम मेरे घर तक पहुंची कैसे?”

     

    तृप्ति ने पूरी कहानी बतानी शुरू कर दी आज मेरी शादी थी। मुझे शादी नहीं करनी थी। मैं पढ़ना चाहती हूं। लेकिन मेरे पापा ने मेरी बात नहीं मानी। इसलिए मैं घर से भाग गई आदर्श चुपचाप सुनता रहा।

     

    तृप्ति ने आगे कहा फिर कुछ लोग मेरे पीछे पड़ गए। मुझे लगा वो मेरे घरवालों के लोग हैं, लेकिन वो किसी विराज राणा का नाम ले रहे थे। आदर्श का चेहरा अचानक बदल गया उसकी आंखों में एक पल के लिए कठोरता आ गई विराज राणा तृप्ति ने सिर हिलाया हां। वही शायद जिससे मेरी शादी होनी थी आदर्श कुछ सेकंड तक शांत रहा फिर उसने पूछा तुम्हें पता है विराज राणा कौन है

     

    तृप्ति ने मासूमियत से सिर हिलाया नहीं आदर्श ने उसे गौर से देखा तुम्हें अंदाजा भी नहीं कि तुम किस मुसीबत से भागकर यहां आई हो तृप्ति ने धीरे से कहा तो अब क्या करूं आदर्श कुछ बोलता, उससे पहले बाहर से उसका एक आदमी तेजी से अंदर आया। सर

     

    आदर्श ने उसकी तरफ देखा क्या हुआ बाहर विराज राणा के आदमी अभी भी मौजूद हैं तृप्ति की सांस रुक गई आदर्श का चेहरा बिल्कुल शांत था

     

    वह कुछ पल सोचता रहा फिर उसने तृप्ति की तरफ देखा आज रात तुम कहीं नहीं जाओगी। तृप्ति ने राहत की सांस ली लेकिन अगले ही पल आदर्श की अगली बात सुनकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई तुम मेरे कमरे में रहोगी तृप्ति की आंखें पूरी तरह फैल गईं क्या आदर्श बिना कोई जवाब दिए अपने कमरे की तरफ बढ़ गया।

     

    तृप्ति उसके पीछे खड़ी उसे देखती रही। फिर खुद से बोली हे भगवान शादी से भागी थी और अब पता नहीं किस मुसीबत में फंस गई लेकिन तृप्ति को अभी यह नहीं पता था कि जिस आदमी के कमरे में वह आज मजबूरी में जाने वाली थी वही आदमी अगले कुछ घंटों में उसकी पूरी जिंदगी बदलने वाला था।

     

    क्या करेगा आदर्श तृप्ति के साथ, क्या वो तृप्ति की मदद के नाम पर कुछ और करना चाहता है। चलिए आगे जानते हैं। 

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    Lakshmi Kumari

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  • Epi – 1 King ka junoon इश्क

    Epi – 1 King ka junoon इश्क

    पढ़ने का समय : 9 मिनट

     

     

     

    एपिसोड – 1 शादी से फरार

     

    शर्मा हवेली आज दुल्हन की तरह सजी हुई थी। पूरे घर में रोशनी लगी हुई थी। आंगन में फूलों से सजावट की गई थी और घर के बाहर मेहमानों की गाड़ियां लगातार आ-जा रही थीं। घर के अंदर हर तरफ शादी की तैयारियां चल रही थीं।

    लेकिन उसी घर के एक कमरे में बैठी तृप्ति शर्मा का चेहरा बिल्कुल उतरा हुआ था।

     

    तृप्ति लाल रंग के भारी लहंगे में दुल्हन बनी हुई शीशे के सामने बैठी थी। उसके बालों में गजरा लगा हुआ था, माथे पर बड़ी सी बिंदी और मांग में सिंदूर की जगह अभी सिर्फ लाल रंग की मांग थी।

     

    उसने अपने चेहरे को शीशे में देखा और फिर धीरे से अपना सिर पकड़ लिया। तृप्ति बड़बड़ाते हुए कहती है, “हे भगवान! ये क्या हो रहा है मेरे साथ? अभी मेरी जिंदगी शुरू भी नहीं हुई और मेरे पापा ने उसे खत्म करने का पूरा इंतजाम कर दिया।”

     

    वह कुछ पल चुप रहती है फिर शीशे में खुद को देखते हुए कहती है, “तृप्ति शर्मा, तू आज से पढ़ाई करेगी या किसी ऐसे आदमी की पत्नी बनेगी जिसका नाम सुनकर लोग डरते हैं?”

     

    तभी कमरे का दरवाजा खुलता है। तृप्ति की मां अंदर आती हैं। वह तृप्ति को देखकर हल्की सी मुस्कुराती हैं और उसके पास आकर बैठ जाती हैं। “बहुत खूबसूरत लग रही है मेरी बेटी।” तृप्ति तुरंत अपनी मां की तरफ देखती है। “मां, आपको सच में लगता है कि मैं खूबसूरत लग रही हूं?”

     

    मा ने कहा “हां बेटा तू खूबसूरत है तभी तो बोल रही हूं”

    तृप्ति उदास हो गई वो धीरे से कहती है “मुझे तो लग रहा है मैं ऐसी लग रही हूं जैसे किसी ने मुझे लाल रंग के पर्दे में लपेट दिया हो।”

     

    उसकी मां उसकी बात सुनकर हंस देती हैं। लेकिन अगले ही पल तृप्ति का चेहरा फिर गंभीर हो जाता है। “मां, आखिरी बार पूछ रही हूं… क्या आप पापा को रोक नहीं सकतीं?”

     

    उसकी मां चुप हो जाती हैं। तृप्ति की आंखों में बेचैनी साफ दिखाई दे रही थी। “मैं शादी नहीं करना चाहती मां। मुझे पढ़ना है। मुझे अपनी पढ़ाई पूरी करनी है। मैं अपनी जिंदगी में कुछ बनना चाहती हूं।”

     

    उसकी मां धीरे से उसका हाथ पकड़ती हैं। “बेटा, तेरे पापा ने सब सोच-समझकर फैसला किया है।” तृप्ति हाथ छुड़ाते हुए कहा “लेकिन मेरी जिंदगी के बारे में फैसला करने से पहले मुझसे तो पूछ लेते।”

     

    तृप्ति की आवाज थोड़ी ऊंची हो जाती है। “मुझे उस आदमी के बारे में कुछ नहीं पता। मैंने उसे ठीक से देखा तक नहीं है। सिर्फ इसलिए शादी कर लूं क्योंकि पापा ने रिश्ता तय कर दिया?”

     

    उसकी मां कुछ बोलतीं, उससे पहले बाहर से किसी के आने की आवाज आती है। तृप्ति तुरंत चुप हो जाती है। दरवाजा खुलता है और उसके पिता नीरज जी अंदर आते हैं। तृप्ति उन्हें देखते ही मुंह दूसरी तरफ कर लेती है। उसके पिता उसके पास आकर कहते हैं, “तृप्ति, मेहमान आने शुरू हो गए हैं। कुछ देर में बारात भी पहुंचने वाली है। अब कोई तमाशा मत करना।”

     

    तृप्ति तुरंत उनकी तरफ मुड़ती है। “पापा, मैं तमाशा नहीं कर रही हूं। मैं सिर्फ अपनी जिंदगी के बारे में बोल रही हूं।”

     

    नीरज जी उसकी बात सुनकर कहते हैं “और मैं तुम्हारा पिता हूं। मुझे पता है तुम्हारे लिए क्या सही है।”

     

    तृप्ति की आंखों में आंसू आ जाते हैं। “नहीं पापा आपको पता है कि आपके लिए क्या सही है। मेरे लिए क्या सही है, मेरी जिंदगी का फैसला मुझे करने दीजिए।”

     

    उसके नीरज जी गुस्से में उसकी तरफ देखते हैं। “बहुत हो गया। आज तुम्हारी शादी है और आज के बाद तुम्हें अपने पति के घर जाना है।” तृप्ति कुछ पल उन्हें देखती रहती है।

    फिर धीरे से पूछती है, “अगर मैं शादी नहीं करना चाहूं तो?”

     

    कमरे में अचानक खामोशी छा जाती है। नीरज जी सख्त आवाज में कहते हैं, “तुम्हें शादी करनी ही होगी।” इतना कहकर वह कमरे से बाहर चले जाते हैं। दरवाजा बंद होते ही तृप्ति की आंखों से आंसू निकलने लगते हैं।

     

    उसकी मां उसे समझाने की कोशिश करती हैं, लेकिन तृप्ति कुछ नहीं बोलती। कुछ देर बाद उसकी मां भी बाहर चली जाती हैं। कमरे में अब सिर्फ तृप्ति थी। तृप्ति कुछ देर तक दरवाजे को देखती रहती है। फिर अचानक उसकी नजर खिड़की पर जाती है।

     

    उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आती है। “शादी नहीं करनी मुझे ?” वह धीरे से कहती है। “लेकिन आप मेरी शादी करवाना चाहते हैं ना पापा तो ठीक है पापा… देखते हैं किसकी शादी करवाते हैं आप।

     

    तृप्ति जल्दी से अपनी अलमारी खोलती है। वह अपना छोटा सा बैग निकालती है और उसमें कुछ कपड़े, पैसे और अपनी जरूरी किताबें रखने लगती है। फिर वह अपनी सबसे पसंदीदा किताब हाथ में लेकर उसे बैग में रखने लगती है।

     

    कुछ देर बाद तृप्ति अपनी शादी का भारी लहंगा थोड़ा संभालती है और खिड़की से नीचे देखती है। नीचे कोई नहीं था। वह धीरे-धीरे खिड़की से बाहर निकलती है और एक पाइप के सहारे नीचे उतरने लगती है। कुछ ही देर में वह घर के पीछे पहुंच जाती है।

     

    तृप्ति अपने लहंगे को संभालते हुए दौड़ने लगती है। कुछ दूर जाकर वह रुकती है और पीछे मुड़कर अपने घर को देखती है। उसकी आंखों में आंसू थे। “माफ करना मां।” वह धीरे से कहती है। “लेकिन मैं अपनी जिंदगी किसी ऐसे इंसान के साथ नहीं बिताना चाहती जिसे मैंने देखा तक नहीं है।”

     

    फिर वह तेजी से वहां से निकल जाती है। उसे नहीं पता था कि उसकी यह छोटी सी भागने की कोशिश उसे ऐसी जगह पहुंचाने वाली थी जहां उसकी जिंदगी हमेशा के लिए बदलने वाली थी। दूसरी तरफ शर्मा हवेली में कुछ देर बाद तृप्ति की मां उसे बुलाने के लिए कमरे में आती हैं। कमरा खाली देखकर उनके होश उड़ जाते हैं। “तृप्ति?” वह पूरे कमरे में देखती हैं। “तृप्ति!” तभी उनकी नजर खुली हुई खिड़की पर जाती है।

     

    वह घबराकर बाहर देखती हैं। कुछ ही मिनटों में पूरे घर में हड़कंप मच जाता है। तृप्ति के पिता को जैसे ही पता चलता है कि तृप्ति घर से भाग गई है, उनका चेहरा गुस्से से लाल हो जाता है। वह तुरंत फोन निकालते हैं।

     

    लेकिन उसी समय एक और फोन बजता है। फोन के दूसरी तरफ से एक आदमी की आवाज आती है। “तृप्ति घर से भाग गई है।” कुछ सेकंड की खामोशी के बाद दूसरी तरफ से भारी आवाज आती है। “क्या कहा?”

     

    ” फोन पर बात करने वाला आदमी आदिल विराज राणा का खास आदमी था “तृप्ति शादी से पहले ही घर से भाग गई।

     

     

    विराज राणा। एशिया की अंधेरी दुनिया का जाना-पहचाना नाम। जिसके नाम से बड़े-बड़े लोग डरते थे। विराज ने तृप्ति से शादी करने का फैसला किया था और आज उसी से शादी थी। लेकिन तृप्ति उसके घर पहुंचने से पहले ही गायब हो चुकी थी।

     

    विराज कुर्सी पर बैठा हुआ था। उसके सामने शराब का गिलास रखा था, लेकिन इस समय उसका पूरा ध्यान फोन पर था। वह धीमी आवाज में पूछता है, “कहां गई है?”

     

    आदिल कहता है “पता नहीं सर। उसके घरवालों को भी नहीं पता।” विराज की आंखों में गुस्सा उतर आता है। “मुझे लड़की चाहिए।”

     

    आदिल कॉल पर कहता है “जी सर।”

     

    “और याद रखना… वो जितनी जल्दी मिल जाए, उतना अच्छा है।” विराज बोल कर कॉल कट कर देता है।

     

    विराज अपने सामने बैठे आदमी की तरफ देखता है।

    “मेरे आदमी पूरे शहर में भेजो।”

     

    उसका असिस्टेंट विक्रम कहता है “सर, अगर वो शहर से बाहर चली गई तो?” विराज हल्का सा मुस्कुराता है। “वो ज्यादा दूर नहीं जा सकती।”

     

    फिर उसकी आवाज सख्त हो जाती है। “लेकिन अगर किसी ने उसे मुझसे पहले ढूंढ लिया… तो उसे जिंदा मत छोड़ना।”

    उधर तृप्ति को कुछ भी पता नहीं था कि उसके पीछे कितने लोग लग चुके हैं।

     

    वह अपनी भारी शादी की ड्रेस संभालते हुए सड़क पर भाग रही थी। कुछ दूर जाकर उसे एक सुनसान सड़क दिखाई दी।

    वह थककर वहां खड़ी हो गई। “हे भगवान… शादी से भागना इतना मुश्किल होता है, ये आज पता चला।”

     

    वह हांफते हुए कहती है। तभी दूर से एक काली गाड़ी तेजी से उसकी तरफ आती दिखाई देती है। तृप्ति पहले तो सामान्य समझकर खड़ी रहती है। लेकिन जैसे ही गाड़ी उसके पास आकर रुकती है, उसके अंदर डर की लहर दौड़ जाती है।

     

    गाड़ी से दो आदमी नीचे उतरते हैं। एक आदमी तृप्ति की तरफ देखकर कहता है, “यही है।” तृप्ति का चेहरा सफेद पड़ जाता है।ब“कौन…?”

     

    वह पीछे हटती है। दूसरा आदमी आगे बढ़ता है। “चलो हमारे साथ।” तृप्ति तुरंत समझ जाती है कि ये लोग उसके घर से नहीं आए हैं। वह पीछे मुड़कर दौड़ पड़ती है। “अरे पकड़ो इसे!”

     

    दोनों आदमी उसके पीछे भागते हैं। तृप्ति अपनी पूरी ताकत से दौड़ रही थी। भारी लहंगा उसके पैरों में बार-बार फंस रहा था। वह पीछे मुड़कर देखती है।

     

    दोनों आदमी उसके बिल्कुल पीछे थे। “हे भगवान! आज तो शादी से बचने के चक्कर में जान से ही जाऊंगी!” वह दौड़ते हुए चिल्लाती है।

     

    सामने सड़क दो हिस्सों में बंट रही थी। तृप्ति बिना सोचे दाईं तरफ मुड़ जाती है। कुछ दूर जाने के बाद उसे सामने एक बहुत बड़ा काला गेट दिखाई देता है। गेट के दोनों तरफ हथियार लिए सिक्योरिटी गार्ड खड़े थे।

     

    तृप्ति एक पल के लिए रुकती है। फिर पीछे देखती है। वे आदमी अब भी उसका पीछा कर रहे थे। तृप्ति बिना कुछ सोचे उस बड़े गेट की तरफ भागती है। “बचाओ!” वह चिल्लाती हुई गेट के अंदर घुस जाती है।

     

    गार्ड उसे रोकने के लिए आगे बढ़ते हैं। तृप्ति हाथ जोड़कर कहती है, “प्लीज मुझे मत रोकिए! मेरे पीछे बहुत बुरे लोग पड़े हैं।” गार्ड एक-दूसरे का चेहरा देखने लगते हैं।

     

    तभी ऊपर खड़ी बालकनी में एक आदमी आकर रुकता है।

     

    काले कपड़े, गंभीर चेहरा और आंखों में ऐसी खामोशी कि सामने वाला खुद डर जाए। वह नीचे खड़ी दुल्हन को देखता है। उसकी नजर तृप्ति पर टिक जाती है। और उसी पल तृप्ति की नजर भी ऊपर उठती है। दोनों की पहली नजर एक-दूसरे से मिलती है।

    तृप्ति को नहीं पता था कि वह किसके घर में घुस चुकी है।

    लेकिन जिस आदमी के सामने पूरी दुनिया सिर झुकाती थी…

    उसकी जिंदगी में आज पहली बार कोई लड़की खुद भागकर उसके घर आई थी। और वो लड़की थी तृप्ति शर्मा।

     

    दोस्तो आपको क्या लगता है तृप्ति किसके घर घुस गई है क्या वो विराज के घर घुस गई है जिसे शादी करने से बचने के लिए भागी थी या कोई और है चलिए जानते हैं आगे।

     

     

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    Lakshmi Kumari

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  • तेरे इश्क़ में….!!

    पढ़ने का समय : 10 मिनट

     

    महानगर के सबसे प्रतिष्ठित महाविद्यालय में उस दिन नए विद्यार्थियों के स्वागत का समारोह था। पूरा परिसर रंग-बिरंगे फूलों और रोशनी से सजा हुआ था। चारों ओर हँसी, संगीत और युवाओं की चहल-पहल थी।

     

    उसी भीड़ में एक युवक अपने मित्र के साथ प्रवेश कर रहा था।

     

    नाम था—आरव सिंह।

     

    लंबा कद, तेजस्वी व्यक्तित्व और आँखों में आत्मविश्वास। वह महाविद्यालय में अपनी पढ़ाई के साथ-साथ मार्शल आर्ट्स का भी अभ्यास करता था। लेकिन उसके स्वभाव में एक अजीब-सी शांति थी। वह बिना कारण किसी से उलझता नहीं था।

     

    दूसरी ओर, पुस्तकालय की सीढ़ियों से एक युवती नीचे उतर रही थी।

     

    नंदिनी शर्मा।

     

    लंबे काले बाल, शांत चेहरा और आँखों में ऐसी मासूमियत, जिसे देखकर कोई भी कुछ पल के लिए ठहर जाए।

     

    नंदिनी के हाथ में पुस्तकों का ढेर था।

     

    अचानक पीछे से किसी ने उसे धक्का दे दिया।

     

    पुस्तकें हवा में उछलकर फर्श पर बिखर गईं।

     

    नंदिनी घबरा गई।

     

    तभी एक हाथ आगे बढ़ा और सबसे पहले उसकी पुस्तक उठा ली।

     

    “आपकी पुस्तक।”

     

    नंदिनी ने ऊपर देखा।

     

    सामने आरव खड़ा था।

     

    “धन्यवाद।”

     

    आरव मुस्कराया।

     

    “केवल धन्यवाद से काम नहीं चलेगा।”

     

    नंदिनी ने भौंहें सिकोड़ लीं।

     

    “और क्या चाहिए?”

     

    “परिचय।”

     

    नंदिनी हँस पड़ी।

     

    “आप बहुत अजीब हैं।”

     

    “और आप बहुत जल्दी हँसती हैं।”

     

    “तो?”

     

    “तो अच्छा है।”

     

    दोनों कुछ क्षण एक-दूसरे को देखते रहे।

     

    उन्हें तब नहीं पता था कि यह कुछ सेकंड उनके पूरे जीवन को बदलने वाले थे।

     

    —

     

    अगले कुछ सप्ताहों में दोनों की मित्रता गहरी होती चली गई।

     

    कभी पुस्तकालय में मुलाकात होती, कभी कैंटीन में।

     

    कभी दोनों घंटों महाविद्यालय के पुराने बरगद के नीचे बैठकर बातें करते।

     

    नंदिनी को बारिश पसंद थी।

     

    आरव को बारिश में भीगना।

     

    एक दिन अचानक तेज वर्षा शुरू हो गई।

     

    नंदिनी बरामदे में खड़ी होकर वर्षा को देखने लगी।

     

    आरव ने पूछा,

     

    “भीगना है?”

     

    नंदिनी ने सिर हिलाया।

     

    “लेकिन कपड़े खराब हो जाएँगे।”

     

    आरव मुस्कराया।

     

    “कभी-कभी जीवन में कपड़ों की चिंता छोड़कर बारिश में भीग लेना चाहिए।”

     

    नंदिनी ने उसकी ओर देखा।

     

    “और कभी-कभी?”

     

    “कभी-कभी किसी का हाथ पकड़कर भीगना चाहिए।”

     

    नंदिनी मुस्करा दी।

     

    दोनों बारिश में उतर गए।

     

    उस दिन पहली बार आरव ने उसका हाथ थामा था।

     

    और नंदिनी ने अपना हाथ वापस नहीं खींचा।

     

    —

     

    समय बीतता गया।

     

    दोनों के बीच मित्रता कब प्रेम में बदल गई, उन्हें स्वयं पता नहीं चला।

     

    एक शाम महाविद्यालय की छत पर सूर्य अस्त हो रहा था।

     

    नंदिनी रेलिंग के पास खड़ी थी।

     

    आरव उसके पास पहुँचा।

     

    “नंदिनी।”

     

    “हूँ?”

     

    “अगर मैं तुमसे एक बात कहूँ तो क्या तुम नाराज़ होगी?”

     

    “कहकर देखो।”

     

    आरव ने गहरी साँस ली।

     

    “मैं तुम्हें पसंद करता हूँ।”

     

    नंदिनी चुप रही।

     

    आरव घबरा गया।

     

    “कुछ कहोगी?”

     

    नंदिनी ने उसकी ओर देखकर धीरे से कहा,

     

    “मैं तो सोच रही थी कि तुम यह बात कहने में इतनी देर क्यों कर रहे हो।”

     

    आरव की आँखों में चमक आ गई।

     

    “तो इसका अर्थ…?”

     

    नंदिनी ने मुस्कराते हुए कहा,

     

    “हाँ, आरव। मुझे भी तुमसे प्रेम है।”

     

    उस क्षण दोनों के बीच कोई वादा नहीं हुआ।

     

    लेकिन दोनों ने मन ही मन जीवन भर साथ रहने का निर्णय कर लिया।

     

    —

     

    लेकिन उनकी प्रेम कहानी में एक ऐसा रहस्य छिपा था, जिसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं थी।

     

    नंदिनी के पिता शहर के बड़े उद्योगपति थे।

     

    उनके व्यवसाय पर कई लोगों की निगाह थी।

     

    उनके पुराने साझेदार का बेटा विक्रम नंदिनी से विवाह करना चाहता था। लेकिन नंदिनी ने उसे स्पष्ट रूप से मना कर दिया था।

     

    विक्रम को यह बात स्वीकार नहीं थी।

     

    जब उसे पता चला कि नंदिनी आरव से प्रेम करती है, तो उसके भीतर क्रोध भड़क उठा।

     

    एक रात उसने अपने साथियों से कहा,

     

    “अगर आरव रास्ते से हट गया तो नंदिनी स्वयं मेरे पास लौट आएगी।”

     

    उसके साथियों ने पूछा,

     

    “और अगर नहीं लौटी?”

     

    विक्रम ने ठंडी मुस्कान के साथ कहा,

     

    “तो उसे भी समझा देंगे कि मेरे विरुद्ध जाने की कीमत क्या होती है।”

     

    —

     

    कुछ ही दिनों बाद आरव और नंदिनी की तस्वीरें नंदिनी के घर पहुँच गईं।

     

    घर में तूफान आ गया।

     

    नंदिनी के पिता ने क्रोध में पूछा,

     

    “यह लड़का कौन है?”

     

    नंदिनी ने साहस करके उत्तर दिया,

     

    “जिससे मैं प्रेम करती हूँ।”

     

    एक पल के लिए पूरे कमरे में सन्नाटा छा गया।

     

    “तुम्हें पता भी है तुम क्या कह रही हो?”

     

    “हाँ, पिताजी।”

     

    “आज से महाविद्यालय बंद। उस लड़के से कोई संबंध नहीं रहेगा।”

     

    नंदिनी की आँखों में आँसू आ गए।

     

    “आप मुझे उससे दूर कर सकते हैं, लेकिन मेरे मन से उसका प्रेम नहीं निकाल सकते।”

     

    यह सुनकर पिता और अधिक क्रोधित हो गए।

     

    उधर आरव के घर में भी उसे कड़ी डाँट पड़ी।

     

    “तुम्हें अपने भविष्य की चिंता है या नहीं?”

     

    आरव ने शांत स्वर में कहा,

     

    “मुझे अपने भविष्य की चिंता है। और मैं चाहता हूँ कि उस भविष्य में नंदिनी मेरे साथ हो।”

     

    उसके पिता ने कहा,

     

    “यदि वह लड़की तुम्हारे जीवन में आई तो हमसे संबंध तोड़ने पड़ेंगे।”

     

    आरव की आँखें नम हो गईं।

     

    “मैं नंदिनी को पाने के लिए अपने माता-पिता को नहीं खोना चाहता। मैं चाहता हूँ कि एक दिन आप दोनों स्वयं हमारा हाथ मिलाएँ।”

     

    —

     

    दोनों को अलग कर दिया गया।

     

    फोन छीन लिए गए।

     

    मुलाकात बंद कर दी गई।

     

    लेकिन प्रेम की सबसे बड़ी शक्ति यही है कि दूरी उसे समाप्त नहीं करती—कई बार और गहरा कर देती है।

     

    एक रात नंदिनी की सहेली ने चुपके से आरव तक संदेश पहुँचाया।

     

    “मैं तुम्हारा इंतज़ार करूँगी।”

     

    आरव ने उत्तर दिया—

     

    “मैं तुम्हें लेने नहीं, तुम्हारे साथ अपना जीवन माँगने आऊँगा।”

     

    —

     

    इसी बीच विक्रम ने अपनी योजना का अगला चरण शुरू कर दिया।

     

    एक शाम नंदिनी के पिता को एक आवश्यक बैठक के बहाने शहर से बाहर बुलाया गया।

     

    वहाँ उन्हें धमकी दी गई कि यदि उन्होंने नंदिनी का विवाह विक्रम से नहीं किया तो उनका व्यवसाय बर्बाद कर दिया जाएगा।

     

    नंदिनी को जब यह पता चला तो उसने घर से निकलने का निर्णय लिया।

     

    लेकिन रास्ते में उसकी गाड़ी रोक ली गई।

     

    कुछ लोग उसे जबरन दूसरी गाड़ी में बैठाने लगे।

     

    नंदिनी ने संघर्ष किया।

     

    “मुझे छोड़ दो!”

     

    एक व्यक्ति ने उसका हाथ पकड़ लिया।

     

    तभी पीछे से एक आवाज़ आई—

     

    “उसका हाथ छोड़।”

     

    सबने पलटकर देखा।

     

    आरव खड़ा था।

     

    उसके चेहरे पर क्रोध था।

     

    एक युवक ने उसकी ओर दौड़कर हमला किया।

     

    आरव ने उसका वार रोककर उसे जमीन पर गिरा दिया।

     

    दूसरा युवक पीछे से आया।

     

    आरव ने घूमकर उसका हाथ पकड़ा और उसे दूर धकेल दिया।

     

    लेकिन संख्या अधिक थी।

     

    चारों ओर से लोग आरव पर टूट पड़े।

     

    नंदिनी चीख उठी—

     

    “आरव!”

     

    आरव लड़ता रहा।

     

    उसे चोटें लगीं, लेकिन उसने हार नहीं मानी।

     

    अंततः उसने नंदिनी को अपने पीछे किया और कहा,

     

    “जब तक मैं खड़ा हूँ, कोई तुम्हें छू भी नहीं सकता।”

     

    तभी दूर से पुलिस के सायरन की आवाज़ सुनाई दी।

     

    हमलावर भागने लगे।

     

    लेकिन विक्रम वहाँ नहीं था।

     

    पुलिस ने कुछ लोगों को पकड़ लिया।

     

    पूछताछ में विक्रम का नाम सामने आया।

     

    —

     

    अब दोनों परिवारों को समझ आ गया कि मामला केवल प्रेम का नहीं था।

     

    नंदिनी के पिता ने पहली बार आरव से कहा,

     

    “तुम्हें चोट लगी है।”

     

    आरव ने कहा,

     

    “चोट की चिंता मत कीजिए। नंदिनी सुरक्षित है, मेरे लिए यही पर्याप्त है।”

     

    नंदिनी के पिता ने उसकी ओर लंबे समय तक देखा।

     

    उनकी कठोरता धीरे-धीरे पिघल रही थी।

     

    उन्होंने पूछा,

     

    “तुम मेरी बेटी से इतना प्रेम क्यों करते हो?”

     

    आरव ने उत्तर दिया,

     

    “क्योंकि वह मेरे जीवन को सुंदर बनाती है। लेकिन मैं उससे केवल इसलिए प्रेम नहीं करता कि वह मुझे खुश करती है। मैं इसलिए प्रेम करता हूँ क्योंकि मैं उसकी खुशी को अपनी खुशी से पहले रखना चाहता हूँ।”

     

    नंदिनी की माँ की आँखों से आँसू बह निकले।

     

    —

     

    लेकिन कहानी अभी समाप्त नहीं हुई थी।

     

    विक्रम ने अंतिम चाल चली।

     

    उसने नंदिनी के पिता के कार्यालय से महत्वपूर्ण दस्तावेज चुरा लिए और उन पर ऐसा आरोप लगाने की तैयारी की, जिससे पूरा व्यवसाय संकट में पड़ सकता था।

     

    आरव को इसकी भनक लग गई।

     

    वह अकेला उन दस्तावेजों को वापस लेने पहुँचा।

     

    एक पुराने गोदाम में विक्रम उसका इंतज़ार कर रहा था।

     

    “तुम्हें क्या लगता है, नायक बन जाओगे?”

     

    आरव ने कहा,

     

    “मैं नायक बनने नहीं आया। केवल यह बताने आया हूँ कि नंदिनी तुम्हारी कभी नहीं होगी।”

     

    विक्रम ने क्रोध में हमला कर दिया।

     

    दोनों के बीच भयंकर संघर्ष हुआ।

     

    गोदाम की खिड़कियाँ टूट गईं।

     

    टेबल उलट गए।

     

    लेकिन आरव पीछे नहीं हटा।

     

    अंततः उसने दस्तावेज़ अपने हाथ में ले लिए।

     

    तभी पुलिस वहाँ पहुँच गई।

     

    विक्रम गिरफ्तार कर लिया गया।

     

    नंदिनी के पिता के विरुद्ध रचा गया पूरा षड्यंत्र सामने आ गया।

     

    —

     

    उस रात दोनों परिवार एक ही घर में बैठे थे।

     

    नंदिनी के पिता ने आरव के पिता की ओर देखा।

     

    “हम दोनों ने अपने बच्चों को अलग करने की कोशिश की।”

     

    आरव के पिता ने गहरी साँस ली।

     

    “हाँ। शायद हम दोनों डर गए थे।”

     

    नंदिनी के पिता ने कहा,

     

    “लेकिन इन दोनों ने हमें दिखा दिया कि प्रेम केवल भावुकता नहीं होता। यदि उसमें विश्वास और जिम्मेदारी हो, तो वह कठिन से कठिन परिस्थिति का सामना कर सकता है।”

     

    आरव की माँ ने नंदिनी को अपने पास बुलाया।

     

    “बेटी, क्या तुम सचमुच हमारे बेटे के साथ जीवन बिताना चाहती हो?”

     

    नंदिनी की आँखों में आँसू थे।

     

    उसने सिर झुका लिया।

     

    “जी।”

     

    आरव के पिता ने मुस्कराकर कहा,

     

    “तो फिर हमें अब कोई आपत्ति नहीं।”

     

    आरव ने आश्चर्य से अपने पिता की ओर देखा।

     

    “सच?”

     

    पिता ने उसके कंधे पर हाथ रखा।

     

    “हाँ। लेकिन एक शर्त है।”

     

    आरव मुस्कराया।

     

    “क्या?”

     

    “नंदिनी को हमेशा खुश रखना।”

     

    आरव ने कहा,

     

    “यह शर्त मैं जीवन भर निभाऊँगा।”

     

    —

     

    कुछ महीनों बाद उसी महाविद्यालय में विवाह का भव्य आयोजन हुआ जहाँ दोनों पहली बार मिले थे।

     

    उसी बरगद के पेड़ के नीचे फूलों की सजावट की गई थी।

     

    नंदिनी लाल जोड़े में अत्यंत सुंदर लग रही थी।

     

    आरव ने उसे देखा तो कुछ पल के लिए उसकी आँखें वहीं ठहर गईं।

     

    नंदिनी ने मुस्कराकर पूछा,

     

    “क्या हुआ?”

     

    आरव ने धीरे से कहा,

     

    “सोच रहा हूँ, जिस दिन तुम्हारी किताबें जमीन पर गिरी थीं, उसी दिन मेरा पूरा जीवन तुम्हारे कदमों में आ गया था।”

     

    नंदिनी की आँखों में आँसू आ गए।

     

    “और आज?”

     

    आरव ने उसका हाथ थाम लिया।

     

    “आज मेरा पूरा जीवन तुम्हारे साथ खड़ा है।”

     

    मंडप में दोनों ने सात फेरे लिए।

     

    हर फेरे के साथ दोनों परिवारों की आँखों में खुशी थी।

     

    विवाह के बाद नंदिनी ने आरव से कहा,

     

    “हमारी कहानी कितनी कठिन थी।”

     

    आरव मुस्कराया।

     

    “हाँ।”

     

    “फिर भी हम जीत गए।”

     

    आरव ने उसका हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा,

     

    “हम किसी के विरुद्ध नहीं जीते, नंदिनी। हमने बस अपने प्रेम को हारने नहीं दिया।”

     

    नंदिनी ने अपना सिर उसके कंधे पर रख दिया।

     

    आकाश में आतिशबाज़ी चमक रही थी।

     

    नीचे दोनों परिवार एक साथ खड़े थे।

     

    और उसी रात आरव ने नंदिनी से कहा—

     

    “आज से तुम्हारा घर मेरा घर है और मेरा घर तुम्हारा।”

     

    नंदिनी मुस्कराई।

     

    “और हमारा प्रेम?”

     

    आरव ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा—

     

    “वह हमारी सबसे बड़ी दौलत है।”

     

    दूर कहीं मंदिर की घंटियाँ बज रही थीं।

     

    जिस प्रेम की शुरुआत एक महाविद्यालय की सीढ़ियों पर बिखरी हुई पुस्तकों से हुई थी, वह आज सात जन्मों के वचन में बदल चुका था।

     

    क्योंकि सच्चा प्रेम वह नहीं जो कठिनाइयों से बचकर निकल जाए।

    सच्चा प्रेम वह है जो हर तूफ़ान के सामने खड़ा होकर कहे—

     

    “तुम मेरे साथ हो, तो मुझे किसी तूफ़ान से डर नहीं।”

     

    और आरव तथा नंदिनी की कहानी इस बात की गवाही बन गई कि जब प्रेम में विश्वास हो, तो सबसे बड़ी दूरी भी छोटी पड़ जाती है और सबसे कठिन रास्ता भी मंज़िल तक पहुँचा देता है।

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    Alka Singh

    NSW. – अनुभवी लेखक -🥇 चाहतों का ऊंचा मुकाम रखती हूं शब्दो के जरिए अनेकों एहसास लिखती हूँ।

  • कसम से…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    एक प्यारी सी बिंदी…! 

    बिखरी सी….सँवरी सी…ज़ुल्फें…!

     

    एक झुमका बहका हुआ… और ! 

    हल्की सी मुस्कान तुम्हारे होंठों पर…!! 

     

    *तुम समझ नहीं आती लेकिन…!*

    *कसम से.. मुझे, पसंद बहुत आती हो…!!!❤️💞*

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    Rani Thakur

    NSW अनुभवी लेखक -🥇 जो हमसे दूर हुए.. हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏

  • प्रेम का दूसरा नाम ही त्याग है…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    “सच्चा प्रेम शब्दों से नहीं,

    समर्पण और एहसास से दिखाई देता है।

    जिस रिश्ते में सम्मान, विश्वास और अपनापन हो,

    वहीं प्रेम जीवन को खूबसूरत बना देता है।” ❤️

     

    प्यार केवल पाने का नाम नहीं,

    बल्कि किसी की खुशी में खुद को भूल जाने का एहसास है।

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    Rani Thakur

    NSW अनुभवी लेखक -🥇 जो हमसे दूर हुए.. हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏

  • 💞💞 प्यार का नशा..पार्ट 9💞💞

    💞💞 प्यार का नशा..पार्ट 9💞💞

    पढ़ने का समय : 2 मिनट

    कहानी अब आगे,

     

    अमानत को यह सुनकर गुस्सा आता है, लेकिन वह डरी हुई भी है। वह रिशाल से कहती है, “मैं तुम्हारी गुलाम नहीं हूँ। मैं अपने फैसले खुद लेती हूँ और आगे भी लुंगी ।”

     

     

    रिशाल हँसता है और कहता है, “तुम्हारे फैसले अब मैं लूँगा। तुम्हारी जिंदगी मेरे हाथ में है। तुम्हारा भाई मेरे पास है मेरी हर बात माननी ही होंगी अगर भाई से इतना प्यार है तो, ताकि मे तुम्हारे भाई को सही सलामत छोड़ दू अब उसकी आजादी तुम्हारे हाथो मे है तो तुम सोच लो क्या करना है क्या नहीं मे तब तक यहाँ बैठता हु ये कहते हुए रिशाल अग्निहोत्री अमानत का हाथ छोड़ देता है और खुद सोफे पर बैठ पैर पर पैर राख कर डेविल स्माइल के साथ अमानत के तरफ देखने लगता है !!!!!

     

     

    अमानत को लगता है कि वह फँस गई है। वह सोचती है कि कैसे रिशाल से खुद को और अपने भाई को बचा सकती है। “

     

    वह रिशाल से कहती है, “मैं तुम्हारी हर बात मानूंगी , लेकिन तुम्हें मुझे प्रोमिस करना होगा की तुम मेरे भाई को कुछ भी नहीं करोगे और वो सुरक्षित होगा जहा भी होगा मेरी उससे बात करवाओगे ताकि मे उसे कह पाऊ की कोई बात नहीं है सब ठीक है और वो डरे नहीं वो मेरे छोटा भाई है मुझे उसकी फ़िक्र है और मे उसे अच्छे से जनता हु अभी वो डर रहा होगा की आखिर हूआ क्या जो उसे और मुझे यु अलग कर दिया गया है ।”

     

     

    रिशाल मुस्कराता है और कहता है, “मैं तुम्हे ये प्रॉमिस तो करना नहीं चाहता क्युकी में रिशाल अग्निहोत्री हु और रिशाल अग्निहोत्री का जब मन जो करने का वही करता है, पर मे इतना भी बुरा नहीं हु इसीलिए चलो मे प्रॉमिस करता हु की मे तुम्हारे भाई को कुछ भी नहीं करूँगा पर wait wait wait…., 

     

    अमानत,”अब क्या हूआ तुम वादा करो मेरे भाई को कुछ भी नहि करोगे और उसे सही सलामत रखोगे बोलो?”

     

    रिशाल अग्निहोत्री, ” हाँ बिलकुल पर तब तक ही जब तक तुम मेरी गुलामी करोगी और मेरी कहीं हर बात को मानोगी उसके बाद ही मे तुम्हे ये वादा कर सकता हु तो बोलो मंजूर है???? “

     

    क्या अमानत रिशाल को वादा कर पाएगी कि वह उसकी गुलाम बन कर ही रहेगी ? क्या वह अपने भाई को बचाने के लिए बन जाएगी गुलाम ?

     

     

     

    आज के लिए बस इतना ही, कल फिर मिलेंगे कहानी के एक नए भाग के साथ, तब तक अपना ख्याल रखिये | 

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    Rani Thakur

    NSW अनुभवी लेखक -🥇 जो हमसे दूर हुए.. हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏

  • 💞💞प्यार का नशा.. पार्ट 8💞💞

    💞💞प्यार का नशा.. पार्ट 8💞💞

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

    कहानी अब आगे, 

     

    अमानत फार्महाउस के अंदर कैद तो हो जाती है, पर उसके मन में कई सवाल हैं। वह सोचती है कि रिशाल अग्निहोत्री की दुश्मनी क्या है उससे और क्यों वह उसके भाई व्योम को खतरे में डाल रहा है, और उसके साथ ये सब आखिर क्यों कर रहा है?” 

     

    अमानत सोच लेती है की अबकी रिशाल आएगा तो वो रिशाल से पूछेगी , “की मुझे बताये , उसे मुझसे क्या चाहता है ? मेरे भाई को मुझे वापस कर दे उसे कुछ भी नहीं होना चाहिए अगर उसे कुछ हूआ तो वो भी नहीं जी पायेगी ।”

     

     अमानत को लगता है कि उसका भाई खतरे में है। वह सोचती है कि कैसे अपने भाई को बचा सकती है और रिशाल से उसे आजाद करवा सकती है।

     

     

    क्या अमानत अपने भाई को बचा पाएगी? क्या वह रिशाल के खतरनाक इरादों से खुद को बचा पाएगी?

     

     

    तभी दरवाजे पर कुछ हलचल होती है और फिर अमानत पीछे मुड़कर देखती है जहा रिशाल को अपनी तरफ आते हुए देखती है जिससे अमानत का मन डर जाता है वो सोचती है की पता नहीं अब ये क्या ही करेगा रिशाल अग्निहोत्री अंदर आकर दरवाजा बंद कर देता है और अमानत को घेर लेता है। अमानत को डर लगता है और वह पीछे हटने लगती है।

     

     

    रिशाल का चेहरा लाल हो जाता है और उसकी आँखें भी बहुत ही दरवानी सी लगती हैं। वह अमानत को कहता है, “तुम कहीं नहीं जा सकती। तुम मेरे साथ यही रहोगी।”

     

     

    अमानत की साँसें तेज हो जाती हैं और वह डर से कांपने लगती है। वह रिशाल से दूर रहने की कोशिश करती है, लेकिन रिशाल उसे पकड़ लेता है।

     

     

    अमानत छूटने की कोशिश करती है, लेकिन रिशाल की पकड़ मजबूत होती है । वह अमानत को दीवार से सटा देता है और उसकी आँखों में देखता है।

     

     

    रिशाल की आवाज में खतरा है, “तुम्हे मुझे समझने में समय लगेगा। लेकिन तुम्हें मुझे समझाना ही पड़ेगा मेरी डार्लिंग आखिर अब तुम्हे यहाँ ही रहना है तो ये सब की आदत डालनी होंगी तुम्हे my sweetheart….💞💞

     

     

    अमानत की आँखों में डर आ जाता हैं और वह रिशाल से कहती है, “मुझे छोड़ दो। मैं तुम्हारे साथ नहीं रहना चाहती आखिर मेने बिगड़ा ही क्या है तुम्हारा मे तो तुम्हे जानती तक नहीं फिर मेरे मेरे भाई के पीछे क्यों परे हो तुम?? है ऐसे ही बहुत सी मुश्किलो से घिरे है ज़िंदगी मे पहले ही अब तुम और मत बढ़ाओ प्लीज मुझे जाने दो और मेरे भाई को भी छोड़ दो प्लीज!!!

     

     

    रिशाल का चेहरा और भी लाल हो जाता है और वह अमानत को हस्ते हुए से कहता है, “तुम मुझे नहीं छोड़ सकती। तुम मेरी हो अब और मे तुम्हे कभी छोडरने नहीं दूंगा अब तुम्हारी यही जिंदगी है ये कैद और जब तक तुम यहाँ मेरी गुलामी करोगी तब तक ही तुम अपने भाई को बचा पाओगी उसके बाद तुम जानो और तुम्हरा वो भाई ।”

     

     

     

    अब अमानत को लगता है कि वह सच मे कैद मे आ चुकी है। 

     

    रिशाल अमानत की तरफ मुस्कुराकर देखता है और उसकी आँखों में एक डेविल सी चमक आ जाती है। वह अमानत को कहता है, “चलो शुरू हो जाओ, अमानत। आज से तुम्हारी जिंदगी मेरे हिसाब से चलेगी। आज से तुम मेरी गुलाम हो।”

     

     

     

    … to be continue…

     

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    Rani Thakur

    NSW अनुभवी लेखक -🥇 जो हमसे दूर हुए.. हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏

  • 💞💞प्यार का नशा… पार्ट 7💞💞

    💞💞प्यार का नशा… पार्ट 7💞💞

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

    कहानी अब आगे,

    लोकेशन, ” रिशाल अग्निहोत्री फॉर्मेहाउस,”

    रिशाल अपनी कार में, ” चलो अंदर!!

    अमानत, ” ये क्या बतमीजी है आपकी, ” आप अमीर है तो क्या कुछ भी करेंगे मेने कहा न मे कहीं नहीं जाने वाली और मेरे भाई को आपने कहा छोड़ा है बताये कहा है मेरा व्योम? “

    रिशाल अग्निहोत्री, ” वही बोल रहा हु, ” चुपचाप जो बोल रहा हु वो करोगी तो तुम्हारा भाई ठीक रहेगा वरना तुम सोच भी नहीं सकती मे उसकी साथ क्या कर सकता हु वो अब मेरे आदमी के अंदर मे है मे जब चहु उसे ऊपर पंहुचा सकता हु?? और तुम अच्छे से जानती हो मे ऐसा जरूर कर सकता हु? “

    अमानत के आँखों मे आंसू आ जाते है ये सब सुन कर आखिर रिशाल ऐसा कर क्यों रहा है क्या दुश्मनी थी उसकी अमानत से ये अमानत को समझ ही नहीं आ रहा था? “

    रिशाल अग्निहोत्री, ” लगता है तुम ऐसे नहीं मानोगी मुझे तुम्हे सबूत दिखाना ही होगा या फिर कुछ कर के बताना ही होगा की मे कुछ भी कर सकता हु? “

    रिशाल न अपने शर्ट के पॉकेट से फोन निकला और अपने आदमी को कॉल कर कहा व्योम का वीडियो उतर कर भेजो ओर हाँ मेरे ऑडर का इंतजार karna तभी उसे कुछ करना तब तक के लिए उसे कुछ सांस और ले लेने दो!!

    कुछ ही देर मे रिशाल के फ़ोन पर एक वीडियो आता है जो रिशाल अमानत को दिखा कहता है, ये देखो ये रहा तुम्हारा भाई जो अभी स्विंप्लू के आगे बैठा है मेरे आदमी बस मेरे ऑडर का इंतजार कर रहे है मेरे हाँ कहते है ही ये तुम्हारे भाई को धक्का दे देंगे और फिर वो पानी के अंदर…. और जहा तक मुझे पता है सायद तिम्हारे भाई को स्विंग करना नहीं आता है क्यों सही कहा न मेने??

    अमानत आपमें भाई को देख डर जाती है क्युकी ये बात सच थी की उसे स्विंग नहीं आता था,

    अमानत, ” व्योम…. व्योम् हट जा वहा से क्या कर रहा है वहा पर हट जा… देखो तुम ऐसा कुछ भी नहीं करोगे मेरे भाई को छोड़ दो उसने क्या ही बिगड़ा है तुम्हरा मेरे भाई को बक्श दो तुम जो बोलोगे वो करुँगी मे पर मेरे भाई को छोड़ दो pls..!!!

    रिशाल अग्निहोत्री, ” तो ये हुई न बात अब बानी हो तुम असली बहन.. चलो अभी के लिए तो तुमने अपने भाई की जान बचा ली अब बस देखना है की और कितने देर बचा पाती हो.. मेरी जान अब चलो अंदर जाओ मे अभी आता है कार पार्क कर के फिर मे तुम्हे बताता हु की आगे करना क्या है….!!!!

    अमानत को तो कुछ भी समझ नहीं आ रहा था की ये उसकी साथ हो क्या रहा है आखिर ये सब क्यों.. ये है कौन जो उसकी साथ ऐसा सब कर रहा है इसकी तो कोई दुश्मनी भी नहीं है अचानक कहीं से आकर मेरे साथ ये बर्ताव क्यों कर रहा है मेरा व्योम सही तो होगा न मेरी जान है वो उसकी बिना तो मे जीने का सोच भी नहीं सकती क्या करू कैसे बचाऊ खुद के भाई को… माँ पापा आप ही कुछ रास्ता दिखाई??? “”!!!!

    .. to be continue…

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    Rani Thakur

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