भाग~48 luxury नफ़रत
स्टूडियो की चमकती लाइट्स अब धीमी पड़ने लगी थीं, जैसे उस शाम का जादू अब धीरे-धीरे स्याही में घुल रहा हो। बच्चे थक चुके थे, रंग फीके पड़ने लगे थे और भीड़ अब बिखरने को तैयार थी।
उसी पल, जब मीना के शब्दों ने एक हलचल पैदा की थी, अद्वैत ने एक पल को रूहानी की ओर देखा। उसके चेहरे पर चिंता थी, लेकिन उसकी आवाज़ शांत रही, एकदम स्थिर।
“मैं खुद छोड़कर आता हूँ मीना और बच्चों को। रात हो चुकी है, बस थोड़ी ही देर लगेगी,” अद्वैत ने धीमे मगर दृढ़ स्वर में कहा।
रूहानी ने उसकी आँखों में देखा, कुछ पल को ठहरी रही।
“ठीक है,” बस इतना ही कहा उसने।
अद्वैत बच्चों के साथ बाहर निकल गया और जैसे ही दरवाज़ा बंद हुआ, कमरे की हवा बदल गई।
माहौल में एक अजीब सी बेचैनी तैरने लगी, जो अब तक किसी कोने में दबे चुपचाप सांस ले रही थी।
काम्या ने ज़रा भी देर नहीं की, रूहानी को वो सब कहने की , जो वो कब से अपने अंदर दबायी हुयी थी।
उसका लहजा तेज़ था, आंखों में वही ताना मारने वाली चमक, “वाह रूहानी, वाह। एकांश नहीं मिला तो उसके बड़े भाई को ही फंसा लिया तुमने? अब समझ आया तुम्हारी comeback story का असली twist।”
रूहानी के भीतर काम्या के हर शब्द से एक तीखी जलन उठ रही थी…. जैसे किसी ने जानबूझकर उसके सबसे गहरे ज़ख्म को छू लिया हो। उसे समझ नहीं आ रहा था कि काम्या की दुश्मनी इतनी पुरानी और ज़हरीली क्यों थी, जबकि रूहानी ने कभी उसे कुछ बुरा कहा या किया नहीं था।
रूहानी को जितना याद था, वो कभी काम्या से नहीं उलझी। ऐसा लगता है जैसे कल की ही तो बात हो जब वो काम्या से पहली बार मिली थी……
flashback
रूहानी India Fashion Week के competition के semi-final में पहुँच चुकी थी।
वो hall white noise से भरा था….. हाथों में fabric के टुकड़े, मशीनों की गूंज और vision boards पर टिके सपनों की हलचल। Designers की दुनिया की वो खामोश चीख, जो हर sketch के पीछे होती है।
और उसी भीड़ में, पहली बार…
वो आई।
न कोई grand entry… न drama… लेकिन उसकी मौजूदगी वैसी थी जैसे किसी ने हल्के से नज़र फेरकर भी कमरे की gravity बदल दी हो।
पहले सिर्फ आवाज़ आई…. किसी volunteer से कुछ specific demand करती हुई। आवाज़ में एक किस्म की थकान भी थी और ताक़त भी।
“Excuse me, मैं चाहती हूं कि मेरी mannequin exact 5’8 की हो। Long torso. And please, no cheap satin.”
रूहानी ने अनजाने ही उस दिशा में देखा।
वहाँ एक लड़की खड़ी थी….. sleek black ponytail में हर बाल discipline में, उसके चेहरे पर minimal makeup, लेकिन dark eyeliner जैसे उसकी आँखों की नीयत पर spotlight डाल रहा हो।
उसके चेहरे पर दिख रही परिपक्वता की गहरी रेखाएँ और आँखों में एक अनुभवी चमक साफ़ बता रही थी कि वो रूहानी और एकांश से कहीं ज़्यादा दुनिया देख चुकी थी।
Branded sneakers, high-waisted pants और एक ivory crop blazer…. ऐसा लग रहा था मानो उसने ये साबित करने की कसम खाई हो कि elegance loud नहीं होता।
लेकिन सबसे पहले जो महसूस हुआ….. वो था उसकी परफ्यूम की खुशबू।
हल्का musky, मगर lingering…. जैसे कोई राज़ जो उसकी skin से लिपटा हो। ये किसी आम परफ्यूम की खुशबू नहीं थी, बल्कि किसी एक्सक्लूसिव फ्रेंच परफ्यूमरी से निकली वो खास महक थी जो सिर्फ समझदार और ऊँचे तबके के लोगों की पसंद होती है…. हल्की, लेकिन अपनी मौजूदगी का एहसास कराने वाली और देर तक ठहरने वाली।
एकांश उसी वक़्त, एक angle से shot लेने के लिए camera adjust कर रहा था और काम्या ने, शायद उसी moment में, पलटकर उसे देखा।
दोनों में से किसी ने अपनी नज़र एक दूसरे से नहीं हटाई क्यूंकि उसकी नज़र ने तो जैसे एकांश को ठहरने पर मजबूर कर दिया।
काम्या मुस्कुराई…… वैसी मुस्कान जो सामने वाले की confident back को थामे हुए spine में एक ठंडी लहर छोड़ जाए।
रूहानी ने उसकी नज़र को, उसकी मुस्कान को चुपचाप देखा। फिर एकांश को भी…..
किसी ने कुछ नहीं कहा था उस वक़्त। लेकिन हालात ने बहुत कुछ कह दिया था।
रूहानी के भीतर एक अजीब-सी बेचैनी उठने लगी थी, जैसे एक अनकही चुनौती उसके सामने आकर खड़ी हो गई हो।
flashback end
रूहानी ने एक सांस ली, ठंडी और धीमी, फिर पूरे होश में पलटी। उसकी आँखें अब नर्म नहीं थीं, वो अब किसी artist की नहीं, एक जले हुए मन की लग रही थीं।
“जिसे जो आता है, वो अगले के लिए भी वैसा ही सोचता है। तुम्हें छल करना आता है, तो तुम हर औरत में वही ढूँढ़ती हो। लेकिन अफ़सोस… मैं तुम्हारी दुनिया की नहीं हूँ।”
काम्या ने भी कहा, “रूहानी तुम हो क्या….. only an emotional fool loser”
“Enough, Kamyaa,” एकांश ने कड़वी आवाज़ में कहा, “ये सही वक्त नहीं है, इन सब बातो का”
“तो कब होगा सही वक्त?” काम्या अब सह नहीं पा रही थी। उसकी आँखों में एक ऐसा डर था जिसे वो गुस्से की आग में छिपा रही थी।
“जब तुम फिर से अपनी पुरानी मोहब्बत को दोबारा अपनी ज़िंदगी में वापस ले आओगे?…. तब”
एकांश कुछ कहने ही वाला था कि रूहानी उसकी ओर मुड़ी, आँखों में ज्वाला थी, पर आवाज़ एकदम ठंडी।
“Mr. and Mrs. Rathore… oh sorry, Mrs. Kamya Raina,” उसने हर शब्द को नफासत से काटा, “इस गलतफहमी में मत रहना कि रूहानी अब कभी किसी धोखेबाज़ के पास वापस लौट कर जाएगी।”
इतना कहकर वह मुड़ गई, उसकी चाल तेज़ थी, पर आँखों के किनारे गीले थे।
काम्या चुपचाप एकांश की तरफ मुड़ी। उसकी हँसी अब सच्ची नहीं थी, बस तेज़ थी।
“देख लिया ना तुमने?” वो बोली, “She moved on… and you still…”
वो वाक्य अधूरा रह गया। लेकिन उसकी गूंज देर तक स्टूडियो की दीवारों से टकराती रही… जैसे कोई पुरानी धुन, जो खत्म तो हो गई हो, मगर दिल से उतरने का नाम न ले।
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कमरे की हवा ठहर गई थी। रूहानी अपने नए स्टूडियो के एक रिहर्सल रूम में बैठी, अतीत के पन्ने पलट रही थी। चांदनी रात में अपनी ख़ामोशी में……
तभी, पीछे से एकांश आया, कुछ बात करने के लिए। एकांश की आँखों में कोई साया था…. गुज़रे वक़्त का, अधूरी बातों का और उस खामोश इल्ज़ाम का, जो अब भी रूहानी की नज़रों में झलकता था।
उसने धीरे से कहा, “क्या अब भी मुझसे नफरत करती हो?”
रूहानी ने गहरी साँस ली, पलकों को बंद किया जैसे कोई बहुत पुराना ज़ख्म फिर से धड़क उठा हो।
“नफरत एक luxury होती है” उसकी आवाज़ बिल्कुल सपाट थी, “जिसे वही अफ़ोर्ड कर सकता है जिसे मोहब्बत से फुर्सत हो। मैं उस level से निकल चुकी हूँ।”
एकांश की नज़रें जैसे नीचे गिर गईं…. जैसे वो खुद से ही शर्मिंदा हो। लेकिन उसने अँधेरे में एक तीर मारा, “तुम जानती हो न की तुम झूठ नहीं बोल पाती हो”
रूहानी की नज़रों में न कोई ग़ुस्सा था, न ही दर्द। बस एक अजीब-सी शांति थी, जैसे वो उस तकलीफ़ से ऊपर उठ चुकी हो।
“और तुम मुझे नहीं जानते सही से….. मैं बहुत आगे निकल आई हूँ,” उसने कहा, “अब वापसी का कोई रास्ता भी नहीं बचा।”
एकांश की आवाज़ में अब एक काँपती हुई जिज्ञासा थी, “तो फिर उस दिन… जब मैं भाई के घर आया और तुम मुझे देखकर बेहोश हो गई थी… वो क्या था, रूहानी?”
वो जवाब देने ही वाली थी कि तभी बाहर से एक आवाज़ आई. …. खटाक ….. क्योंकि रूम में हल्का अँधेरा था और गलती से किसी स्टाफ ने बाहर से दरवाज़ा बंद कर दिया था।
अब रूहानी और एकांश उस रूम में आमने-सामने रह गए थे….. एक बंद दरवाज़े के भीतर, जहाँ बाहर की कोई आवाज़ नहीं पहुँच सकती थी।
रूहानी की सांसे उलझने लगी, वो दौड़कर दरवाजे तक पहुंची लेकिन आसपास कोई नहीं था , उसने आवाज़ भी लगायी पर कोई नहीं सुना।
एकांश धीरे धीरे उसके पास आ रहा था …..
तभी बाहर थोड़ी दूर से काम्या की आवाज़ आई, “एकांश! कहाँ हो sweetheart?”
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क्या रूहानी की साँसों की ये उलझन, सिर्फ एक बंद कमरे की घुटन थी… या फिर अतीत की कोई अधूरी दस्तक?
क्या ये महज़ इत्तिफ़ाक था कि दरवाज़ा बंद हो गया… या कोई चाहता था कि ये दो छायाएँ फिर आमने-सामने आएँ… एक आख़िरी बार?
अब जब बाहर काम्या की आवाज़ गूँज रही थी… क्या रूहानी उस आवाज़ से भागेगी, या उस सवाल का सामना करेगी जिसे अब तक वो खुद से भी छुपा रही थी?

लिखकर रूह छूने की कोशिश…..
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