भाग~4 शब्दों का वार
रूहानी की नज़र अचानक अपने हाथों पर पड़ी। एक अनजाना अहसास उसके भीतर सिर उठा रहा था। उसे याद आया कि जब वह पुल से गिरने वाली थी, तब उसका मोबाइल उसकी सलवार की जेब में था।
लेकिन अब…
उसका हाथ अपने आप जेब में चला गया और अगले ही पल उसकी साँसें रुक-सी गईं। मोबाइल वहाँ नहीं था।
उसके अंदर एक अजीब-सी बेचैनी दौड़ गई। उसने जल्दी से अपने चारों ओर देखा, लेकिन कोई हलचल नहीं थी। कमरे में वही पुराना सन्नाटा पसरा था, जो पिछले कुछ घंटों से उसकी हमसफ़र बना हुआ था।
फिर अचानक, उसकी नज़र सोफे के बगल में रखी साइड टेबल पर गई। वहाँ, उसका मोबाइल रखा हुआ था।
एक पल के लिए उसे अपनी ही नज़रों पर यकीन नहीं हुआ। उसने धीमे-धीमे कदम बढ़ाए और मोबाइल की तरफ़ हाथ बढ़ाया। उसकी उंगलियाँ हल्के-हल्के काँप रही थीं।
रूहानी ने जैसे ही अपना मोबाइल उठाया, स्क्रीन पर ढेरों नोटिफिकेशन झिलमिला उठे।
पर रूहानी यह सोच रही थी कि उसका मोबाइल जेब से यहाँ आया कैसे?
शायद इस अद्वैत ने ………
उसने फिर अपना सिर झटकाया।
उसकी आंखें हल्की-सी सिकुड़ गईं, उसने देखा— उसका फोन अभी भी साइलेंट पर था। शायद इसीलिए उसे इतनी देर तक कोई आवाज़ सुनाई नहीं दी थी। लेकिन अब, उस चमकती हुई स्क्रीन के पीछे कुछ ऐसा था, जिसे देखकर उसके अंदर अजीब-सी बेचैनी उठने लगी।
उसकी उंगलियां धीमे-धीमे स्क्रीन पर सरक रही थीं। सबसे पहले उसने इंस्टाग्राम खोला और जैसे ही उसकी नज़र अपने नाम पर पड़े #चीटर #धोखेबाज #फेक जैसे शब्दों पर गई, उसके दिल में कुछ टूटने जैसा महसूस हुआ।
सैकड़ों, शायद हज़ारों कमेंट्स थे। हर पोस्ट, हर स्टोरी में वही बातें— नफरत, ताने, अपमान। किसी ने उसकी तस्वीरों के नीचे आग उगलते शब्द छोड़े थे, किसी ने उसके कैप्शन्स का मज़ाक उड़ाया था, तो किसी ने सीधे-सीधे उसे दोषी ठहराया था।
उसकी आँखें तेजी से स्क्रीन पर दौड़ने लगीं, हर कमेंट को पढ़ने लगीं, लेकिन हर शब्द एक नया ज़हर था, एक नई चोट।
“इसने किसी और के डिज़ाइन्स चुराए हैं!”
“यह लड़की झूठी है, इसके सारे काम चोरी के हैं!”
“छोटे शहरों की लड़कियाँ ऐसी ही होती हैं।”
“बड़ी आई थी डिज़ाइनर बनने।”
“इसे ब्लैकलिस्ट कर देना चाहिए!”
उसकी पूरी दुनिया, उसकी मेहनत, उसके सपने— सब एक झटके में धूल में मिल चुके थे।
उसे यकीन नहीं हो रहा था कि लोग उसके बारे में इतनी नफरत से लिख सकते हैं। जिन लोगों ने कभी उसके डिज़ाइन्स की तारीफ की थी, वही अब उसे घृणा से देख रहे थे।
रूहानी ने कंपकंपाते हाथों से मोबाइल को कसकर पकड़ लिया। उसकी आँखें स्क्रीन पर टिकी थीं, लेकिन शब्द धुंधले होते जा रहे थे। सांसें तेज़ हो गई थीं, उंगलियाँ काँप रही थीं, और दिल एक अजीब-सी बेचैनी के साथ धड़क रहा था।
उसने धीरे-से स्क्रीन ऊपर स्क्रॉल किया, जहां किसी ने उसकी एक पुरानी तस्वीर पोस्ट करके उसके नाम के आगे ‘फ्रॉड’ लिख दिया था।
यह सब जो हो रहा था? इससे उसकी आंखों के आगे अंधेरा सा छाने लगा। ऐसा लगा जैसे वह किसी बहुत ऊंचे पुल से नीचे गिर रही हो— वही पुल, जहां वह कल रात खड़ी थी।
रूहानी ने एक लंबी, कांपती हुई साँस ली। गला सूख गया था। उसने जल्दी से अपना इंस्टाग्राम इनबॉक्स खोला।
वह उस एक अकाउंट पर गई, जो उसके लिए सबसे ज़्यादा मायने रखता था।
उसने उंगलियों से स्क्रीन पर उस नाम को छुआ— वही नाम, जिसने कभी उसके ख्वाबों को पंख दिए थे।
लेकिन वहाँ… कुछ नहीं था।
आखिरी मैसेज दो दिन पुराना था।
कहीं कोई सन्देश नहीं, कोई समर्थन नहीं, कोई आवाज़ नहीं।
वही शख्स, जिससे उसने सबसे ज्यादा उम्मीद की थी, जिसने उसे इस इंडस्ट्री में आगे बढ़ने की हिम्मत दी थी, जिसने कहा था कि वह उसके टैलेंट पर भरोसा करता था – वही अब खामोश था।
उसने एक बार फिर उस शख्स के कमेंट्स ढूँढने की कोशिश की, शायद उसने कहीं कुछ कहा हो, शायद कहीं उसके पक्ष में कोई सफाई दी हो…
लेकिन नहीं।
कोई शब्द नहीं, कोई बचाव नहीं, कोई सफाई नहीं।
बस एक भारी खामोशी।
उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। उसने मोबाइल को कसकर पकड़ लिया, जैसे वह उसे और तकलीफ़ न दे सके, लेकिन उसका दिमाग इन सब बातो से पीछे नहीं हट पा रहा था।
उसे वह सभी बातें याद आने लगी, जब वह घंटों तक अपने डिज़ाइन्स पर मेहनत करती थी, जब वह खुद को पूरी तरह झोंक देती थी, जब वह बस यह सोचती थी कि एक दिन उसका नाम होगा, उसकी पहचान होगी।
और अब?
अब उसका नाम कीचड़ में घसीटा जा रहा था।
“लोग ऐसा कैसे कर सकते हैं?”
“कैसे इतनी आसानी से उसकी पूरी मेहनत को झूठ कह सकते हैं?”
“और वो…? उसने कुछ क्यों नहीं कहा?”
उसकी साँस भारी हो गई। आँसू उसकी आँखों के कोरों तक आ चुके थे, लेकिन वह उन्हें बहने नहीं देना चाहती थी। वह टूटने नहीं देना चाहती थी खुद को, लेकिन सच तो यह था कि वह पहले ही टूट चुकी थी।
उसने फोन को टेबल पर पटक दिया और अपने बालों में उंगलियाँ फिराने लगी।
उसे तरह-तरह की आवाज़ें सुनाई देने लगी। वो एक जानी-पहचानी आवाज़ थी, एक ऐसी आवाज़ जिसने बचपन से उसके दिल में घाव किए थे।
“मैंने समझाया था ना कि लड़कियों को सिर्फ़ घर के काम करने चाहिए?”
“बहुत उड़ने की कोशिश कर रही थी!”
“परायों के साथ कंधे से कंधा मिलाने चली थी, अब भुगत!”
“मुँह काला हो गया ना? यही अंजाम होता है लड़कियों का!”
रूहानी ने घबराकर अपनी हथेलियों से कानों को दबा लिया।
लेकिन आवाज़ें और तेज़ हो गईं।
एक पल वो आवाज़ें बाहर से आ रही थीं, अगले ही पल वो उसके अंदर गूंजने लगीं।
वह चाह रही थी कि इस कमरे से भाग जाए। कहीं दूर, जहां ये सब नहीं पहुंचे, जहां ये नाम, ये आवाज़ें, ये ताने उसका पीछा न करें।
जहाँ उसे कोई नाम से ना पुकारे।
जहाँ कोई उसे पहचानता ना हो।
लेकिन वह भागकर भी कहां जाती? अब कोई ठिकाना नहीं बचा था। अब उसका कोई अपना नहीं था।
वह अपने घुटनों को समेटकर बैठ गई, सिर झुका लिया और गहरी सांस लेने की कोशिश करने लगी, लेकिन अंदर कोई सुनामी उठ चुकी थी।
“मैंने इतना भरोसा किया… इतनी उम्मीदें रखीं… और बदले में यह मिला?”
कमरे की खामोशी अब बोझ बन चुकी थी। घड़ी की टिक-टिक, हवा की सरसराहट— सब कुछ उसके अंदर की बेचैनी को और बढ़ा रहे थे।
उसने उठकर पानी का गिलास उठाया, लेकिन हाथ इतने कांप रहे थे कि गिलास हाथ से छूटकर ज़मीन पर गिर गया।
छन्न ……
कांच के टुकड़े फर्श पर बिखर गए।
रूहानी ने नीचे देखा।
कांच के बिखरे हुए टुकड़े…
वैसे ही जैसे उसके सपने।
वैसे ही जैसे उसका भरोसा।
वैसे ही जैसे वह खुद।
इस पूरी दुनिया में, इस पूरे शहर में, इस पूरे घर में—
कोई नहीं था।
वह अचानक से उठी और उन कांच के टुकड़ों पर चलने लगी। उसकी नंगे पाँव एड़ी से लेकर उंगलियों तक काँच चुभने लगा, पर दर्द का अहसास मर चुका था। पैरों के नीचे हल्की-सी गर्माहट महसूस हुई— खून की।
वह एक कदम और बढ़ाने ही वाली थी कि किसी ने उसे पीछे खींच लिया।
एक झटके से।
इतनी तेज़ी से कि उसका संतुलन बिगड़ गया और वह किसी की बाहों में समा गई। उसकी सांसें थम गईं।
वह हाथ अब भी उसकी बाहों को जकड़े हुए थे, जैसे उसे गिरने से बचा रहे हों।
वह आँखें बंद किए हुए थी, लेकिन महसूस कर सकती थी— किसी की गर्म साँसें उसके करीब थीं।
लेकिन कौन?
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अगर कमरे में सिर्फ़ वही थी, तो फिर वो बाहें किसकी थीं, जो उसे थामे हुए थीं?
क्या यह वही था, जिससे उसने सबसे ज़्यादा उम्मीदें रखी थीं—या कोई और?
अगर कोई था, तो वह कौन था—कोई अपना, कोई अजनबी… या कोई ऐसा, जिसका यहाँ होना नामुमकिन था?

लिखकर रूह छूने की कोशिश…..
🥹🥹


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