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Dil sabhal ja jara part 4

पढ़ने का समय : 12 मिनट

एपिसोड -bsach ka samna 

 

सुबह की धुंद शिमला की पहाड़ियों पर छाई हुई थी। हॉस्टल का रूम 204 अब प्रिया के लिए सुरक्षित नहीं लग रहा था। रात का वो फोन कॉल – “ठाकुर फैमिली ने तुझे मरने के लिए छोड़ा था” – उसके कानों में गूंज रहा था। प्रिया बिस्तर पर बैठी थी, घुटने मुंह से लगाए, आंखें लाल। रिया उसके पास बैठी चाय का कप थमा रही थी।

“प्रिया, अब और चुप नहीं रह सकतीं। हमें कुछ करना होगा। या तो पुलिस, या फिर… हम खुद सच ढूंढें।” रिया की आवाज में दृढ़ता थी।

प्रिया ने गहरी सांस ली। “रिया, अगर मैं आरव की बहन हूं, तो वो मुझे क्यों नहीं पहचानता? और अगर फैमिली ने मुझे मरने के लिए छोड़ा, तो क्यों? मैं सिर्फ पांच साल की थी।”

रिया ने कहा, “शायद प्रॉपर्टी का मामला। ठाकुर होटल्स बहुत बड़ा बिजनेस है। तू अगर असली वारिस हुई तो… कोई और नहीं चाहता होगा कि तू वापस आए।”

प्रिया ने पेंडेंट को छुआ। “आज हम उस पुरानी हवेली के पास जाएंगे जहां एक्सीडेंट हुआ था। शायद कुछ क्लू मिले। लेकिन आरव को कुछ नहीं बताएंगे।”

दोनों कॉलेज गईं, लेकिन प्रिया का मन क्लास में नहीं लगा। आरव ने कई बार मैसेज किया – “क्या हुआ? कल शाम से बात क्यों नहीं कर रही?” प्रिया ने सिर्फ “बिजी हूं” लिखकर टाल दिया। उसका दिल टूट रहा था। जिस लड़के से उसे लगाव हो रहा था, अगर वो उसका भाई है… या इससे भी बुरा, अगर उसकी फैमिली ने उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश की…

लंच के बाद दोनों चुपके से कॉलेज से निकल गईं। शिमला की पुरानी सड़क पर बस पकड़ी। एक्सीडेंट वाली जगह माल रोड से थोड़ा ऊपर, जाखू हिल के पास थी। पुराना न्यूज आर्टिकल में एड्रेस था – “ठाकुर हवेली के पास घाटी रोड”।

बस से उतरकर दोनों पैदल चलने लगीं। रास्ता सुनसान था। पुराने पेड़, टूटे-फूटे साइनबोर्ड। आखिरकार एक पुराना बोर्ड दिखा – “ठाकुर हवेली – Private Property. No Trespassing”।

हवेली दूर से दिख रही थी – बड़ी, पुरानी, लेकिन अब खंडहर जैसी। दीवारें टूट रही थीं, बगीचा उजड़ा हुआ। गेट पर ताला लगा था। प्रिया ने गेट के पास वाली दीवार से झांका। अंदर वो बगीचा था – फोटो वाला। वही झूला, वही फूलों की क्यारियां, लेकिन अब सब सूखे। प्रिया की आंखें भर आईं। “रिया… ये वही जगह है। मैं यहां खेली थी।”

रिया ने उसका हाथ थामा। “चल, अंदर चलते हैं।”

दोनों दीवार फांदकर अंदर घुस गईं। हवेली का मुख्य दरवाजा बंद था, लेकिन साइड से एक छोटा गेट खुला था। अंदर धूल की मोटी परत, पुराने फर्नीचर पर चादरें। प्रिया हर कमरे में गई। एक कमरे में बच्चों का सामान बिखरा था – पुरानी गुड़ियां, किताबें। प्रिया ने एक गुड़िया उठाई। उस पर लिखा था – “प्रिया की गुड़िया”।

उसका दिल जोरों से धड़का। “रिया… मैं यहीं की हूं।”

तभी ऊपर से आवाज आई – खांसने की। दोनों चौंक गईं। सीढ़ियां चढ़ीं। ऊपर एक छोटे कमरे में एक बूढ़ी औरत बैठी थी – सफेद साड़ी, कमजोर शरीर। वो उन्हें देखकर बोली, “कौन हो तुम लोग? यहां कोई नहीं आता।”

प्रिया ने कांपती आवाज में पूछा, “आंटी… आप यहां रहती हैं?”

बूढ़ी औरत ने प्रिया को गौर से देखा। अचानक उसकी आंखें चौड़ी हो गईं। “तू… तू प्रिया है? रानी बहू की बेटी?”

प्रिया की सांस रुक गई। “आप मुझे जानती हैं?”

बूढ़ी औरत – नाम था कमला दाई – रोने लगी। “हाय राम… तू जिंदा है? सबने तो कहा था तू मर गई। मैं ही तो तुझे कार से निकालकर भागी थी उस रात।”

रिया और प्रिया हैरान। प्रिया ने पूछा, “क्या हुआ था उस रात?”

कमला दाई ने गहरी सांस ली और बताना शुरू किया।

“बीस साल पहले की बात है। रानी बहू बहुत अच्छी थीं। बड़े साहब (आरव के पापा) से लव मैरिज की थी। लेकिन घर में सब नाराज थे क्योंकि रानी गरीब घर की थी। फिर तू पैदा हुई। सब खुश थे, लेकिन बड़े साहब की दूसरी पत्नी – मतलब तेरी सौतेली मां – वो नहीं चाहती थी कि तू वारिस बने। प्रॉपर्टी सब उसकी संतान को जाना था।

एक रात रानी बहू तुझे लेकर कहीं जा रही थीं। किसी को शक था कि वो सब छोड़कर भागना चाहती थीं। कार को एक्सीडेंट दिखाया गया – ब्रेक फेल। मैं नौकरानी थी, पीछे-पीछे जा रही थी। एक्सीडेंट के बाद मैं दौड़ी। रानी बहू जा चुकी थीं, लेकिन तू कार में रो रही थी। मैंने तुझे निकाला और भाग गई। डर था कि अगर घर वाले पता चले तो तुझे भी मार देंगे। मैंने तुझे दूर हिमाचल के अनाथ आश्रम में छोड़ा। साथ में फोटो और पेंडेंट रखा, ताकि एक दिन तू सच जान सके।”

प्रिया रो रही थी। “तो आरव मेरा सगा भाई है?”

“हां बेटी। आरव तेरा बड़ा भाई है। वो तब दस साल का था। उसे कुछ नहीं पता। बड़े साहब ने सबको कहा कि तू मर गई।”

रिया ने पूछा, “लेकिन अब वो कॉल और चिट्स?”

कमला दाई ने डरते हुए कहा, “शायद तेरी सौतेली मां या उसका बेटा – विक्रम। वो नहीं चाहते कि तू वापस आए। प्रॉपर्टी का केस चल रहा है। अगर तू जिंदा निकली तो सब उनसे छिन जाएगा।”

प्रिया का गुस्सा और दुख एक साथ फूट पड़ा। “मैंने बीस साल अनाथ रहकर गुजारे। और वो आराम से जी रहे हैं?”

कमला दाई ने कहा, “बेटी, अब मत लड़ना। भाग जा यहां से। वो लोग ताकतवर हैं।”

लेकिन प्रिया ने सिर हिलाया। “नहीं दाई। अब मैं चुप नहीं रहूंगी। मुझे अपना हक चाहिए। और आरव को सच बताना होगा।”

दोनों हवेली से बाहर निकले। शाम हो चुकी थी। रास्ते में प्रिया चुप थी। रिया ने कहा, “अब क्या प्लान?”

“कल आरव से मिलूंगी। उसे सब बताऊंगी।”

रात को हॉस्टल में प्रिया ने डायरी में लिखा – “आज मुझे अपनी मां का नाम पता चला। अपना घर पता चला। लेकिन अब घर वापसी इतनी आसान नहीं।”

तभी दरवाजा खटका। बाहर अवनी खड़ी थी। मुस्कुराते हुए बोली, “प्रिया, आरव तुझे ढूंढ रहा है। बाहर गेट पर इंतजार कर रहा है। कुछ इम्पॉर्टेंट बात है।”

प्रिया चौंकी। इतनी रात को? लेकिन वो गई। गेट पर आरव खड़ा था, चिंतित चेहरा। “प्रिया, मुझे तुझसे बात करनी है। कल तू अचानक भागी क्यों?”

प्रिया ने हिम्मत की। “आरव… मुझे कुछ बताना है। बहुत बड़ा सच।”

आरव ने कहा, “पहले तू मेरी सुन। मुझे पता चला है कि तू हवेली गई थी आज। कमला दाई से मिली?”

प्रिया का खून जम गया। “तुझे कैसे पता?”

आरव की आंखें ठंडी हो गईं। “क्योंकि मैंने ही तुझे फॉलो करवाया था। प्रिया… तू मेरी बहन है। मुझे शक था शुरू से – तेरी आंखें, पेंडेंट। मैंने पापा से कन्फर्म किया।”

प्रिया रो पड़ी। “तो तुझे पता था? फिर क्यों नहीं बताया?”

आरव ने उसे गले लगा लिया। “क्योंकि डर था। पापा और चाची (सौतेली मां) नहीं चाहते कि तू वापस आए। वो लोग खतरनाक हैं। मैं तुझे बचाना चाहता हूं। आज रात ही यहां से भाग चल। मैं साथ हूं।”

प्रिया पीछे हटी। “नहीं आरव। मैं भागूंगी नहीं। मुझे अपना हक चाहिए। मां की मौत का बदला चाहिए।”

आरव ने कहा, “ठीक है। तो मैं तेरे साथ हूं। लेकिन पहले सबूत इकट्ठा करें। कमला दाई को साथ लाएं।”

तभी अंधेरे से एक कार आई। तेज स्पीड में। सीधा प्रिया और आरव की ओर। आरव ने प्रिया को धक्का देकर बचाया। कार निकल गई। नंबर प्लेट पर लिखा था – ठाकुर हाउस।

आरव चीखा, “विक्रम! वो मेरा सौतेला भाई है। अब जंग शुरू हो गई है।”

प्रिया का चेहरा सख्त हो गया। “अब मैं लड़ूंगी। अपने भाई के साथ।”

रात गहरा गई। बारिश फिर शुरू हो गई। प्रिया की जिंदगी में अब प्यार नहीं, सिर्फ संघर्ष था। लेकिन अब वो अकेली नहीं थी – उसके साथ उसका सगा भाई था।

क्या प्रिया और आरव फैमिली के खिलाफ जीत पाएंगे? या खतरा और बड़ा हो जाएगा?

 

 

सुबह की धुंद शिमला की पहाड़ियों पर छाई हुई थी। हॉस्टल का रूम 204 अब प्रिया के लिए सुरक्षित नहीं लग रहा था। रात का वो फोन कॉल – “ठाकुर फैमिली ने तुझे मरने के लिए छोड़ा था” – उसके कानों में गूंज रहा था। प्रिया बिस्तर पर बैठी थी, घुटने मुंह से लगाए, आंखें लाल। रिया उसके पास बैठी चाय का कप थमा रही थी।

“प्रिया, अब और चुप नहीं रह सकतीं। हमें कुछ करना होगा। या तो पुलिस, या फिर… हम खुद सच ढूंढें।” रिया की आवाज में दृढ़ता थी।

प्रिया ने गहरी सांस ली। “रिया, अगर मैं आरव की बहन हूं, तो वो मुझे क्यों नहीं पहचानता? और अगर फैमिली ने मुझे मरने के लिए छोड़ा, तो क्यों? मैं सिर्फ पांच साल की थी।”

रिया ने कहा, “शायद प्रॉपर्टी का मामला। ठाकुर होटल्स बहुत बड़ा बिजनेस है। तू अगर असली वारिस हुई तो… कोई और नहीं चाहता होगा कि तू वापस आए।”

प्रिया ने पेंडेंट को छुआ। “आज हम उस पुरानी हवेली के पास जाएंगे जहां एक्सीडेंट हुआ था। शायद कुछ क्लू मिले। लेकिन आरव को कुछ नहीं बताएंगे।”

दोनों कॉलेज गईं, लेकिन प्रिया का मन क्लास में नहीं लगा। आरव ने कई बार मैसेज किया – “क्या हुआ? कल शाम से बात क्यों नहीं कर रही?” प्रिया ने सिर्फ “बिजी हूं” लिखकर टाल दिया। उसका दिल टूट रहा था। जिस लड़के से उसे लगाव हो रहा था, अगर वो उसका भाई है… या इससे भी बुरा, अगर उसकी फैमिली ने उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश की…

लंच के बाद दोनों चुपके से कॉलेज से निकल गईं। शिमला की पुरानी सड़क पर बस पकड़ी। एक्सीडेंट वाली जगह माल रोड से थोड़ा ऊपर, जाखू हिल के पास थी। पुराना न्यूज आर्टिकल में एड्रेस था – “ठाकुर हवेली के पास घाटी रोड”।

बस से उतरकर दोनों पैदल चलने लगीं। रास्ता सुनसान था। पुराने पेड़, टूटे-फूटे साइनबोर्ड। आखिरकार एक पुराना बोर्ड दिखा – “ठाकुर हवेली – Private Property. No Trespassing”।

हवेली दूर से दिख रही थी – बड़ी, पुरानी, लेकिन अब खंडहर जैसी। दीवारें टूट रही थीं, बगीचा उजड़ा हुआ। गेट पर ताला लगा था। प्रिया ने गेट के पास वाली दीवार से झांका। अंदर वो बगीचा था – फोटो वाला। वही झूला, वही फूलों की क्यारियां, लेकिन अब सब सूखे। प्रिया की आंखें भर आईं। “रिया… ये वही जगह है। मैं यहां खेली थी।”

रिया ने उसका हाथ थामा। “चल, अंदर चलते हैं।”

दोनों दीवार फांदकर अंदर घुस गईं। हवेली का मुख्य दरवाजा बंद था, लेकिन साइड से एक छोटा गेट खुला था। अंदर धूल की मोटी परत, पुराने फर्नीचर पर चादरें। प्रिया हर कमरे में गई। एक कमरे में बच्चों का सामान बिखरा था – पुरानी गुड़ियां, किताबें। प्रिया ने एक गुड़िया उठाई। उस पर लिखा था – “प्रिया की गुड़िया”।

उसका दिल जोरों से धड़का। “रिया… मैं यहीं की हूं।”

तभी ऊपर से आवाज आई – खांसने की। दोनों चौंक गईं। सीढ़ियां चढ़ीं। ऊपर एक छोटे कमरे में एक बूढ़ी औरत बैठी थी – सफेद साड़ी, कमजोर शरीर। वो उन्हें देखकर बोली, “कौन हो तुम लोग? यहां कोई नहीं आता।”

प्रिया ने कांपती आवाज में पूछा, “आंटी… आप यहां रहती हैं?”

बूढ़ी औरत ने प्रिया को गौर से देखा। अचानक उसकी आंखें चौड़ी हो गईं। “तू… तू प्रिया है? रानी बहू की बेटी?”

प्रिया की सांस रुक गई। “आप मुझे जानती हैं?”

बूढ़ी औरत – नाम था कमला दाई – रोने लगी। “हाय राम… तू जिंदा है? सबने तो कहा था तू मर गई। मैं ही तो तुझे कार से निकालकर भागी थी उस रात।”

रिया और प्रिया हैरान। प्रिया ने पूछा, “क्या हुआ था उस रात?”

कमला दाई ने गहरी सांस ली और बताना शुरू किया।

“बीस साल पहले की बात है। रानी बहू बहुत अच्छी थीं। बड़े साहब (आरव के पापा) से लव मैरिज की थी। लेकिन घर में सब नाराज थे क्योंकि रानी गरीब घर की थी। फिर तू पैदा हुई। सब खुश थे, लेकिन बड़े साहब की दूसरी पत्नी – मतलब तेरी सौतेली मां – वो नहीं चाहती थी कि तू वारिस बने। प्रॉपर्टी सब उसकी संतान को जाना था।

एक रात रानी बहू तुझे लेकर कहीं जा रही थीं। किसी को शक था कि वो सब छोड़कर भागना चाहती थीं। कार को एक्सीडेंट दिखाया गया – ब्रेक फेल। मैं नौकरानी थी, पीछे-पीछे जा रही थी। एक्सीडेंट के बाद मैं दौड़ी। रानी बहू जा चुकी थीं, लेकिन तू कार में रो रही थी। मैंने तुझे निकाला और भाग गई। डर था कि अगर घर वाले पता चले तो तुझे भी मार देंगे। मैंने तुझे दूर हिमाचल के अनाथ आश्रम में छोड़ा। साथ में फोटो और पेंडेंट रखा, ताकि एक दिन तू सच जान सके।”

प्रिया रो रही थी। “तो आरव मेरा सगा भाई है?”

“हां बेटी। आरव तेरा बड़ा भाई है। वो तब दस साल का था। उसे कुछ नहीं पता। बड़े साहब ने सबको कहा कि तू मर गई।”

रिया ने पूछा, “लेकिन अब वो कॉल और चिट्स?”

कमला दाई ने डरते हुए कहा, “शायद तेरी सौतेली मां या उसका बेटा – विक्रम। वो नहीं चाहते कि तू वापस आए। प्रॉपर्टी का केस चल रहा है। अगर तू जिंदा निकली तो सब उनसे छिन जाएगा।”

प्रिया का गुस्सा और दुख एक साथ फूट पड़ा। “मैंने बीस साल अनाथ रहकर गुजारे। और वो आराम से जी रहे हैं?”

कमला दाई ने कहा, “बेटी, अब मत लड़ना। भाग जा यहां से। वो लोग ताकतवर हैं।”

लेकिन प्रिया ने सिर हिलाया। “नहीं दाई। अब मैं चुप नहीं रहूंगी। मुझे अपना हक चाहिए। और आरव को सच बताना होगा।”

दोनों हवेली से बाहर निकले। शाम हो चुकी थी। रास्ते में प्रिया चुप थी। रिया ने कहा, “अब क्या प्लान?”

“कल आरव से मिलूंगी। उसे सब बताऊंगी।”

रात को हॉस्टल में प्रिया ने डायरी में लिखा – “आज मुझे अपनी मां का नाम पता चला। अपना घर पता चला। लेकिन अब घर वापसी इतनी आसान नहीं।”

तभी दरवाजा खटका। बाहर अवनी खड़ी थी। मुस्कुराते हुए बोली, “प्रिया, आरव तुझे ढूंढ रहा है। बाहर गेट पर इंतजार कर रहा है। कुछ इम्पॉर्टेंट बात है।”

प्रिया चौंकी। इतनी रात को? लेकिन वो गई। गेट पर आरव खड़ा था, चिंतित चेहरा। “प्रिया, मुझे तुझसे बात करनी है। कल तू अचानक भागी क्यों?”

प्रिया ने हिम्मत की। “आरव… मुझे कुछ बताना है। बहुत बड़ा सच।”

आरव ने कहा, “पहले तू मेरी सुन। मुझे पता चला है कि तू हवेली गई थी आज। कमला दाई से मिली?”

प्रिया का खून जम गया। “तुझे कैसे पता?”

आरव की आंखें ठंडी हो गईं। “क्योंकि मैंने ही तुझे फॉलो करवाया था। प्रिया… तू मेरी बहन है। मुझे शक था शुरू से – तेरी आंखें, पेंडेंट। मैंने पापा से कन्फर्म किया।”

प्रिया रो पड़ी। “तो तुझे पता था? फिर क्यों नहीं बताया?”

आरव ने उसे गले लगा लिया। “क्योंकि डर था। पापा और चाची (सौतेली मां) नहीं चाहते कि तू वापस आए। वो लोग खतरनाक हैं। मैं तुझे बचाना चाहता हूं। आज रात ही यहां से भाग चल। मैं साथ हूं।”

प्रिया पीछे हटी। “नहीं आरव। मैं भागूंगी नहीं। मुझे अपना हक चाहिए। मां की मौत का बदला चाहिए।”

आरव ने कहा, “ठीक है। तो मैं तेरे साथ हूं। लेकिन पहले सबूत इकट्ठा करें। कमला दाई को साथ लाएं।”

तभी अंधेरे से एक कार आई। तेज स्पीड में। सीधा प्रिया और आरव की ओर। आरव ने प्रिया को धक्का देकर बचाया। कार निकल गई। नंबर प्लेट पर लिखा था – ठाकुर हाउस।

आरव चीखा, “विक्रम! वो मेरा सौतेला भाई है। अब जंग शुरू हो गई है।”

प्रिया का चेहरा सख्त हो गया। “अब मैं लड़ूंगी। अपने भाई के साथ।”

रात गहरा गई। बारिश फिर शुरू हो गई। प्रिया की जिंदगी में अब प्यार नहीं, सिर्फ संघर्ष था। लेकिन अब वो अकेली नहीं थी – उसके साथ उसका सगा भाई था।

क्या प्रिया और आरव फैमिली के खिलाफ जीत पाएंगे? या खतरा और बड़ा हो जाएगा?

 

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