रात के ग्यारह बज चुके थे। कॉलेज गेट के बाहर बारिश तेज़ हो गई थी। प्रिया और आरव दोनों भीग रहे थे, लेकिन कोई हिल नहीं रहा था। अभी-अभी एक काली एसयूवी उन्हें कुचलने की कोशिश करके भागी थी। आरव ने प्रिया को धक्का देकर बचाया था, लेकिन उसका हाथ छिल गया था। खून बह रहा था।
प्रिया ने आरव का हाथ पकड़ा। “आरव… तू ठीक तो है?”
आरव ने दर्द सहते हुए मुस्कुराया। “अब तू मेरे साथ है ना, तो सब ठीक है। चल, कहीं सूखी जगह चलते हैं।”
दोनों कॉलेज के पास वाली छोटी सी कॉफी शॉप में घुस गए। रात को खुली रहती थी। अंदर सिर्फ एक वेटर था। दोनों कोने की टेबल पर बैठ गए। आरव ने कॉफी ऑर्डर की। प्रिया की आंखें अभी भी डरी हुई थीं।
“आरव… वो विक्रम था ना? तेरा सौतेला भाई?”
आरव ने सिर हिलाया। “हां। पापा की दूसरी शादी से। वो हमेशा से जलता था मम्मी और हमसे। मम्मी की मौत के बाद उसने सब संभाल लिया। होटल्स, प्रॉपर्टी – सब उसके कंट्रोल में। अगर तू वापस आई तो कानूनी तौर पर आधी प्रॉपर्टी तेरी हो जाएगी। वो ये नहीं होने देगा।”
प्रिया की आंखें सख्त हो गईं। “मैं डरने वाली नहीं हूं। मैंने बीस साल स्ट्रगल किया है। अब हक के लिए लड़ूंगी।”
आरव ने उसका हाथ थामा। “अब तू अकेली नहीं है। मैं तेरे साथ हूं। लेकिन सावधानी से चलना होगा। पहले सबूत इकट्ठा करें। कमला दाई की गवाही, पुराने पेपर्स, डीएनए टेस्ट।”
प्रिया ने कहा, “कल सुबह हम कमला दाई को हवेली से ले आएंगे। उसे सुरक्षित जगह रखेंगे।”
आरव ने हां कहा। “और रिया को भी साथ रख। वो तेरी अच्छी दोस्त है।”
कॉफी पीते हुए दोनों ने प्लान बनाया। रात को आरव ने प्रिया को हॉस्टल छोड़ा। गेट पर खड़े होकर बोला, “प्रिया… मुझे अफसोस है कि मैं छोटा था तब। कुछ कर नहीं सका। लेकिन अब मैं तेरी ढाल बनूंगा।”
प्रिया की आंखें नम हो गईं। “आरव… तू मेरा भाई है। पहली बार मुझे फैमिली का फील हो रहा है।”
दोनों गले मिले। भाई-बहन का पहला गले मिलना।
अगली सुबह प्रिया और रिया जल्दी उठे। आरव कार लेकर आया। तीनों पुरानी हवेली की ओर चले। रास्ते में आरव ने बताया, “पापा को अभी कुछ नहीं पता कि मैं तुझे मिला हूं। विक्रम ने शायद उसे भी नहीं बताया।”
हवेली पहुंचते ही कमला दाई बाहर खड़ी थी। जैसे इंतजार कर रही हो। उसने सामान का छोटा बैग तैयार रखा था। “बेटी… मैं तैयार हूं। अब डर नहीं लगता। सच बाहर आना चाहिए।”
चारों एक छोटे से गेस्ट हाउस में रुके – आरव ने पहले से बुक करवाया था। शहर से बाहर, सुरक्षित। वहां कमला दाई ने और डिटेल्स बताईं।
“रानी बहू बहुत बहादुर थीं। वो जानती थीं कि घर में साजिश हो रही है। इसलिए वो तुझे लेकर भागने वाली थीं। लेकिन कार में कुछ गड़बड़ की गई। मैंने सुना था विक्रम के ड्राइवर से – ब्रेक काटे गए थे।”
प्रिया ने पूछा, “क्या कोई प्रूफ है?”
कमला दाई ने अपना पुराना बॉक्स खोला। अंदर एक पुराना लेटर था – रानी ठाकुर का लिखा हुआ। “अगर मुझे कुछ हुआ तो प्रिया को बचा लेना। ये लोग प्रॉपर्टी के लिए कुछ भी कर सकते हैं।”
आरव ने लेटर पढ़ा। उसकी आंखें लाल हो गईं। “मम्मी… मैं कुछ नहीं कर सका।”
रिया ने कहा, “अब हम करेंगे। पहले डीएनए टेस्ट। आरव और प्रिया का। फिर पुलिस।”
लेकिन आरव ने मना किया। “पुलिस में विक्रम के लोग हैं। पहले मीडिया। कोई बड़ा न्यूज चैनल। सच सबके सामने आएगा।”
दोपहर को चारों शहर लौटे। आरव ने अपने एक पुराने दोस्त को फोन किया – जो पत्रकार था। शाम को मीटिंग फिक्स हुई।
लेकिन इससे पहले अवनी का रोल आया। हॉस्टल में अवनी ने प्रिया को देखा और तंज कसा, “क्या बात है? आरव के साथ घूम रही है? स्कॉलरशिप वाली अब अमीरों की दोस्त बन गई?”
रिया ने जवाब दिया, “अवनी, अपनी औकात देख। प्रिया जल्दी सबको दिखाएगी अपनी असली औकात।”
अवनी हंसकर चली गई, लेकिन उसकी आंखों में शक था। बाद में पता चला कि अवनी विक्रम की गर्लफ्रेंड है। उसने विक्रम को बता दिया कि प्रिया और आरव साथ घूम रहे हैं।
शाम को पत्रकार से मीटिंग हुई। नाम था राहुल शर्मा। आरव का कॉलेज फ्रेंड। राहुल ने सारी स्टोरी सुनी। कमला दाई की गवाही रिकॉर्ड की। लेटर देखा। “ये बहुत बड़ी स्टोरी है। ठाकुर फैमिली का काला सच। लेकिन डेंजर है। विक्रम बदला ले सकता है।”
प्रिया ने कहा, “मैं तैयार हूं।”
राहुल ने कहा, “कल सुबह डीएनए टेस्ट करवाते हैं। प्राइवेट लैब में। फिर स्टोरी पब्लिश।”
रात को गेस्ट हाउस में सब सोए। लेकिन आधी रात को दरवाजा पीटा गया। बाहर पुलिस थी। “प्रिया शर्मा? आप चोरी के आरोप में गिरफ्तार हैं।”
सब चौंक गए। आरव ने पूछा, “किस चोरी?”
पुलिस वाले ने कहा, “ठाकुर हवेली से सामान चोरी का केस। विक्रम ठाकुर की शिकायत।”
प्रिया समझ गई – ये झूठा केस है। उसे डराने के लिए। पुलिस उसे ले जाने लगी। आरव ने रोका, लेकिन पुलिस वाले नहीं माने।
रिया ने चीखकर कहा, “ये झूठ है! हम सब गवाह हैं!”
लेकिन पुलिस प्रिया को ले गई। थाने में विक्रम पहले से बैठा था। मुस्कुराते हुए बोला, “प्रिया जी, स्वागत है। अब खेल शुरू होगा।”
प्रिया को लॉकअप में डाल दिया गया। अकेली, ठंडी कोठरी। वो रोने लगी। लेकिन अंदर से आवाज आई – “डर मत बेटी।”
वो कमला दाई थी? नहीं। पास की सेल में एक औरत थी। लेकिन प्रिया को हिम्मत मिली।
सुबह आरव और रिया वकील लेकर आए। आरव ने पापा को फोन किया। पहली बार। “पापा, प्रिया जिंदा है। वो मेरी बहन है। और विक्रम ने उसे फंसाया है।”
पापा की आवाज कांपी। “क्या? प्रिया… जिंदा है?”
आरव ने सब बताया। पापा चुप रहे। फिर बोले, “मैं आ रहा हूं।”
दोपहर को ठाकुर हाउस में मीटिंग हुई। पापा, विक्रम, चाची, आरव, और प्रिया (बेल पर छूटकर)। कमला दाई भी आई।
विक्रम ने ड्रामा किया। “पापा, ये लड़की झूठी है। पैसे के लिए आ गई है।”
लेकिन पापा ने प्रिया को देखा। आंखें नम। “प्रिया… तेरी आंखें… रानी जैसी।”
प्रिया ने लेटर दिखाया। कमला दाई ने गवाही दी। डीएनए रिपोर्ट आ गई – 99.9% मैच। प्रिया और आरव सगे भाई-बहन।
पापा रो पड़े। “मैंने कुछ नहीं किया था। मुझे लगा एक्सीडेंट था।”
लेकिन विक्रम चीखा, “ये सब झूठ है!”
तभी पुलिस आई – असली वाली। राहुल ने स्टोरी लीक कर दी थी। न्यूज चैनल्स बाहर खड़े थे। “ठाकुर फैमिली का काला सच – बेटी को मारने की साजिश।”
विक्रम भागने की कोशिश की, लेकिन पकड़ा गया। चाची भी।
प्रिया ने पापा को गले लगाया। “पापा… मैं वापस आ गई।”
आरव मुस्कुराया। “अब हम तीनों साथ हैं। मम्मी की आत्मा को शांति मिलेगी।”
शाम को ठाकुर हाउस में प्रिया पहली बार अपने कमरे में गई। वही पुराना कमरा। गुड़ियां अभी भी थीं। वो खिड़की से बाहर देखी – शिमला की पहाड़ियां।
रिया ने कहा, “यार, अब तू अमीर हो गई। लेकिन मेरी दोस्त वही रहेगी ना?”
प्रिया हंसी। “हमेशा।”
रात को आरव और प्रिया छत पर बैठे। स्टार्स देख रहे थे।
आरव ने कहा, “प्रिया… सॉरी कि मैंने तुझे पहचाना नहीं शुरू में।”
प्रिया ने कहा, “तूने तो मुझे बचाया। अब हमारा नया सफर शुरू। कॉलेज, पढ़ाई, और फैमिली।”
लेकिन दूर कहीं विक्रम पुलिस कस्टडी में था। उसकी आंखें जल रही थीं। “ये खत्म नहीं हुआ। प्रिया… मैं वापस आऊंगा।”
बारिश रुक चुकी थी। नई सुबह होने वाली थी। प्रिया की जिंदगी अब अनाथ से राजकुमारी बन चुकी थी। लेकिन संघर्ष अभी बाकी था।
क्या विक्रम बदला लेगा? या प्रिया नई जिंदगी जी पाएगी?

NSW अनुभवी लेखक -🥇

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