part – 6 nai survat or purana raj
ठाकुर हाउस की बड़ी सी ड्राइंग रूम में सुबह की धूप पड़ रही थी। प्रिया पहली बार अपने असली घर में पूरी रात सोकर उठी थी। उसका कमरा – जो बीस साल से बंद था – अब साफ-सुथरा था। पुरानी गुड़ियां, किताबें, और दीवार पर मां रानी की तस्वीर। प्रिया ने तस्वीर को छुआ और मुस्कुराई। “मां… मैं घर आ गई।”
नीचे ब्रेकफास्ट टेबल पर पापा, आरव और प्रिया बैठे थे। विक्रम और चाची पुलिस कस्टडी में थे। न्यूज चैनल्स पर स्टोरी चल रही थी – “ठाकुर फैमिली की लापता बेटी 20 साल बाद लौटी”। पापा ने प्रिया को गले लगाया। “बेटी, आज से तू इस घर की मालकिन है। जो चाहे कर।”
आरव ने हंसकर कहा, “पापा, पहले कॉलेज तो कंपलीट करने दो। प्रिया अब भी स्कॉलरशिप वाली स्टूडेंट है।”
प्रिया हंसी। “हां भैया, मैं अपनी पढ़ाई खुद पूरी करूंगी। पैसे से नहीं, मेहनत से।”
तभी दरवाजा खटका और रिया अंदर घुसी – हाथ में बड़ा सा बैग। “हाय फैमिली! मैं तो अब यहां शिफ्ट हो रही हूं। प्रिया की बेस्ट फ्रेंड हूं ना!” वो आरव को देखकर आंख मारी। “और भैया को भी सताने का हक है।”
आरव ने सिर पकड़ लिया। “रिया, तू यहां आएगी तो घर में कभी शांति नहीं रहेगी।”
रिया ने टेबल पर रखा बैग खोला – अंदर ढेर सारी चॉकलेट्स, चिप्स और एक बड़ा सा बॉक्स। “ये प्रिया के लिए गिफ्ट्स! अमीर बन गई है तो अब डाइटिंग छोड़।”
पापा हंस पड़े। “रिया बेटी, तू भी इसी घर की है। जब मन करे आ जाना।”
प्रिया को पहली बार फैमिली का मजा आ रहा था। कॉमेडी, हंसी-मजाक। लेकिन अंदर कुछ खटक रहा था – क्या सब इतनी आसानी से नॉर्मल हो जाएगा?
कॉलेज में वापसी। प्रिया और रिया हॉस्टल से सामान पैक करके ठाकुर हाउस शिफ्ट हो गईं। लेकिन कॉलेज जाना जारी। क्लास में एंट्री करते ही सबकी नजरें। अवनी अब चुप थी – विक्रम के गिरफ्तार होने से उसका घमंड टूट गया था। लेकिन उसने प्रिया को घूरकर कहा, “अब अमीर बन गई ना? लेकिन याद रख, कुछ राज़ अभी बाकी हैं।”
प्रिया ने मुस्कुराकर जवाब दिया, “अवनी, अब मैं डरने वाली नहीं।”
क्लास में एक नया लड़का था – नाम था विक्रांत। लंबा, हैंडसम, देहरादून से ट्रांसफर। स्माइल मार्का। प्रोफेसर ने उसे प्रिया के पास बिठाया। “प्रिया, न्यू स्टूडेंट है। हेल्प करना।”
विक्रांत ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाय प्रिया। सुना है तू ठाकुर फैमिली की है। लेकिन न्यूज में जो स्टोरी चली, वो कमाल की है। तू रियल लाइफ हीरोइन है।”
प्रिया शर्मा गई। “थैंक्स… लेकिन बस नॉर्मल स्टूडेंट हूं।”
लंच में विक्रांत प्रिया और रिया के साथ बैठा। आरव भी आया। आरव ने विक्रांत को देखा और थोड़ा अजीब सा फील हुआ। “हाय ब्रो, विक्रांत यहां नया है।”
आरव ने ठंडे से कहा, “वेलकम। लेकिन प्रिया मेरी बहन है। ख्याल रखना।”
विक्रांत हंसा। “आरव भाई, चिल। मैं बस दोस्ती कर रहा हूं।”
रिया ने साइड में प्रिया को कोहनी मारी। “यार, नया क्रश? आरव तो जल रहा है।”
प्रिया हंसी। “पागल, आरव मेरा भाई है। वो बस प्रोटेक्टिव है।”
लेकिन अंदर प्रिया को विक्रांत अच्छा लग रहा था। उसकी बातें, हंसी, तरीका – सब नया था। पहले आरव से जो लगाव था, वो भाई वाला निकला। अब पहली बार किसी से सच्चा रोमांस का फील हो रहा था।
शाम को ठाकुर हाउस में पार्टी थी – प्रिया की वेलकम पार्टी। पापा ने सारे रिश्तेदारों को बुलाया। घर सजा हुआ था। प्रिया ने पहली बार साड़ी पहनी – मां की पुरानी रेड साड़ी। सबने तारीफ की।
पार्टी में रिया ने कॉमेडी शुरू की। वो डांस फ्लोर पर आरव को खींचकर लाई। “भैया, अब डांस करो। बहन आ गई है तो खुश हो ना!”
आरव शर्मा रहा था। “रिया, मैं डांस नहीं करता।”
रिया ने म्यूजिक तेज किया और आरव के साथ जबरदस्ती ठुमके लगाए। आरव बार-बार गिरते-गिरते बचा। सब हंस पड़े। प्रिया भी हंस-हंसकर लोटपोट हो गई। “भैया, तू तो प्रो डांसर निकला!”
तभी विक्रांत आया – आरव ने उसे भी इनवाइट किया था। वो प्रिया के पास आया। “वाह प्रिया, साड़ी में कातिल लग रही हो। डांस करेगी?”
प्रिया हिचकिचाई। लेकिन आरव ने पीठ थपथपाई। “जा प्रिया, एंजॉय कर।”
विक्रांत और प्रिया डांस करने लगे। स्लो रोमांटिक सॉन्ग। विक्रांत ने धीरे से कहा, “प्रिया, तेरी स्टोरी सुनकर मुझे लगा तू बहुत स्ट्रॉन्ग है। मुझे तेरे जैसी लड़की चाहिए।”
प्रिया का चेहरा लाल हो गया। “विक्रांत… अभी तो मिले हैं।”
विक्रांत ने मुस्कुराया। “धीरे-धीरे सब होगा।”
आरव दूर से देख रहा था। उसे अजीब लग रहा था। “ये लड़का ठीक तो है ना?”
रिया ने आरव को चिढ़ाया। “भाई साहब, जल रहे हो? प्रिया को कोई पसंद करने लगा है!”
आरव ने गुस्से से कहा, “चुप रिया! मैं बस प्रोटेक्ट कर रहा हूं।”
पार्टी के बाद प्रिया अपने कमरे में थी। विक्रांत का मैसेज आया – “गुड नाइट। आज बहुत अच्छा लगा।”
प्रिया मुस्कुराई। पहली बार दिल में हल्की सी गुदगुदी।
लेकिन तभी बड़ा ट्विस्ट।
रात को प्रिया की अलमारी में एक पुराना बॉक्स मिला। कमला दाई ने कहा था कि मां का सामान है। बॉक्स खोला तो अंदर एक डायरी थी – रानी मां की। आखिरी पेज पर लिखा था:
“अगर मुझे कुछ हुआ तो प्रिया को सच बताना। उसका असली पिता राजेश ठाकुर नहीं है। राजेश ने मुझे जबरदस्ती शादी की थी। प्रिया का असली पिता मेरा पहला प्यार था – डॉक्टर आदित्य शर्मा। वो दिल्ली में रहता है। प्रिया को उसके हक से वंचित मत करना।”
प्रिया का हाथ कांप गया। पापा… राजेश ठाकुर उसके असली पिता नहीं? आरव उसका सगा भाई नहीं?
वो रो पड़ी। डायरी लेकर आरव के पास गई। आरव ने पढ़ा। उसका चेहरा सफेद पड़ गया। “प्रिया… ये… अगर सच है तो मैं तेरा भाई नहीं हूं?”
दोनों चुप। बाहर चांदनी थी। प्रिया ने कहा, “आरव… कल आदित्य शर्मा को ढूंढेंगे। लेकिन तू हमेशा मेरा भाई रहेगा। खून से नहीं, दिल से।”
आरव ने उसे गले लगाया। “हां प्रिया। तू मेरी बहन है। हमेशा।”
लेकिन प्रिया के दिल में अब नया सवाल – अगर आरव भाई नहीं, तो पहले जो फीलिंग्स थे… वो क्या थे? और अब विक्रांत?
रिया कमरे में आई। सारी बात सुनी। कॉमेडी मोड ऑन। “अरे वाह! अब प्रिया फ्री है? आरव, अब तू प्रिया को डेट कर सकता है!”
आरव और प्रिया दोनों चिल्लाए, “रिया!”
रिया हंसकर भागी। “मजाक था यार! लेकिन रोमांस तो अब शुरू होगा!”
रात गहरा गई। प्रिया खिड़की पर खड़ी थी। विक्रांत का मैसेज फिर आया – “सपनों में मिलते हैं।”
प्रिया मुस्कुराई। लेकिन डायरी हाथ में थी। नया
राज़ खुल चुका था। क्या प्रिया का असली पिता जिंदा है? और आरव के साथ उसका रिश्ता अब क्या होगा?

NSW अनुभवी लेखक -🥇

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