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लेखक: Mysterious Chaand

  • परी मां (जलपरी की कहानी)

    परी मां (जलपरी की कहानी)

    पढ़ने का समय : 12 मिनट

     एक गाँव में सुहानी नाम की एक लड़की अपने पिता उदय और सौतेली माँ  मधु के साथ रहती थी , सुहानी की एक सौतेली बहन भी  निशा भी थी , सुहानी की माँ अपनी बेटी को बहुत प्यार करती थी , लेकिन वह सुहानी से नफरत करती थी और दिन भर घर के काम में लगा कर रखती थी , और उसे ठीक से खाना भी नहीं देती थी। 

     

    एक दिन मधु सुहानी को लेकर जंगल जाती है , और लकड़ी काटने लगती है ,  मधु के दिमाग में सुहानी को लेकर कुछ षडयंत्र चल रहा था।

     

    मधु सुहानी से बोली ,” मुझे बहुत प्यास लगी है , जरा पानी ले आओ “!

     

    सुहानी पानी लेने के लिए नदी के पास जाती है ,तो मधु भी दबे पाव सुहानी के पीछे चली जाती है।

     

    सुहानी बहुत ही मासूम थी , उसे पानी से डर लगता था , पर क्योंकि उसकी मां को प्यास लगी थी , इसलिए  वह डर डर के नदी के पास चली गई।

     

    अभी सुहानी पानी भरने के लिए झुकी ही थी कि मधु ने उसे नदी में धक्का दे दिया।

     

    सुहानी जैसे ही पानी में गिरी खुद को बचाने की कोशिश करने लगी पर क्योंकि उसे तैरना नहीं आता था इसलिए वह नदी के किनारे नहीं आ पाई।

     

    सुहानी चीखते हुए बोली ,” मां प्लीज मुझे बचा लो “! 

     

    पर मधु पर कोई असर नहीं पड़ा और वह नफरत से हंसते हुए बोली , ” तुझे बचा लूं , ताकि  मेरी बेटी के हिस्से की खुशी तू खा जाए ,तेरे रहते मेरी बेटी का रिश्ता नहीं हो पाएगा , भगवान ने अक्ल तुझे भला ही कम दी है पर शक्ल बहुत अच्छी दी है , इसलिए जब तक तू जिंदा मेरी बेटी को दुनिया की सबसे अच्छी चीज नहीं मिलेगी “!

     

    सुहानी रोते हुए बोली ,” प्लीज मां बचा लो , मैं बेटी हूं आपकी “!

     

    मधु वह से जाते हुए बोली ,” तू बेटी नहीं है मेरी , सौतेली बेटी है “!

    सुहानी पानी में डूबती रही पर मधु वहां से जा चुकी थी।

     

     कुछ देर बाद जब सुहानी को होश आता है तो वह एक अलग ही दुनिया में होती है, जो बहुत खूबसूरत थी।

     

    सुहानी धीरे से अपनी आंखे खोलती है और इधर उधर देखती है तो उसे ही  तरफ सुंदर  पद पौधे फूल दिख रहे थे,  ये सब देखकर  एक पल के लिए वह बहुत खुश होती है ,और इधर उधर घूमते-घूमते थक जाती है तो पेड़ के नीचे बैठ जाती है।

     

    सुहानी घबराते हुए बोली ,” यह मैं कहां आ गई ,यह कौन सा गांव है “? तभी उसकी नजर एक हवेली पर पड़ती है , सुहानी वह  से उठकर  उस हवेली का दरवाजा खोलती है ,तो उसकी आँखें फटी की फटी रह जाती है।

     

    सुहानी को वहाँ एक खूबसूरत सी औरत दिखती है जो बड़ी सी कुर्सी में बैठी हुई थी।

     

    वह औरत मुस्कराकर बोली ,” तुम कौन हो ? और यहां कैसे आई “?

     

    सुहानी घबराते हुए बोली ,” मैं सुहानी हूं , और रामपुर गांव में रहती हूं ,और मैं नदी में गिर गई और यहां आ गई “!

     

    सुहानी की बात सुनकर वह औरत सोच में पड़ जाती है ,कि आखिर एक इंसान उनके  जललोक में कैसे आई ?

     

    वह औरत अपनी आंखे बंद करती है और उसे  सब सच पता चल जाता है।

     

     सुहानी बोली ,” आप कौन है और मैं कौन से गांव में हूं “?

     

    वह औरत मुस्कराकर उसके पास जाकर उसका सिर सहलाकर बोली ,” मैं   उर्वशी हूं इस जल लोक की रानी पारी और तुम नदी में गिर गई इसलिए हमारे लोक आ गई हो “!

     

    उर्वशी की बात सुनकर सुहानी घबरा गई , और डरते हुए पीछे होने लगी ।

     

    उर्वशी सुहानी का हाथ पकड़कर बोली ,” घबराओ मत बेटा ,मैं तुम्हे कुछ नुकसान नहीं पहुंचाऊंगी  ,मुझे मालूम है तुम्हारी मां ने तुम्हे मारने की कोशिश की “!

     

    उर्वशी की बात सुनकर सुहानी की आंखे भर आई और वह रोने लगी और उर्वशी को गले लगा लिया।

     

    सुहानी के उर्वशी को गले लगाते ही उर्वशी को  एक अलग सा एहसास हुआ जो वो समझ नहीं पा रही थी।

    उर्वशी  ने सुहानी को खाना खिलाया और फिर अपने साथ सुला दिया।

     

    सुहानी को सोता देख उर्वशी सोचने लगी , कि आखिर एक साधारण लड़की उनके लोक में कैसे आई ? और आखिर क्यों यह अपनी सी लग रही है ।

     

    अब ऐसे ही कुछ दिन निकल गए और सुहानी जल लोक में ही रहने लगी ,और उर्वशी और सुहानी के बीच एक अलग ही रिश्ता बन गया , सुहानी उर्वशी को परी मां कहने लगी।

     

    एक दिन पारियों की बैठक में उर्वशी की दुश्मन शकीरा परी ने भरी सभा में शिकायत की कि उर्वशी ने इंसानों के साथ हाथ मिला लिया है ,जिससे उनके लोक को खतरा है तभी तो इंसानों के जासूस को अपनी बेटी बनाकर रखा है।

     

    शकीरा की बात सुनकर उर्वशी गुस्से से बोली ,” शकीरा सब तुम्हारी तरह स्वार्थी नहीं होते, और यह मासूम सी बच्ची तो खुद अपनो की ठुकराई हुई है किसी को क्या धोखा देगी “!

     

    शकीरा मुस्कराकर बोली ,” रानी परी आप भी तो सब छोड़कर इंसानी दुनिया चली गई थी , तो फिर है आप पर कैसे भरोसा करे “!

     

    शकीरा की बार सुनकर उर्वशी चुप हो गई ,उर्वशी को चुप होता देखकर शकीरा का हौसला बढ़ गया।

     

    शकीरा बोली ,” देखिए रानी परी या तो आप इस लड़की को मार दीजिए या इसकी दुनिया वापिस भेज दीजिए “!

     

    रात के समय  सुहानी खिड़की में बैठी कुछ सोच रही थी , और उसकी आँखें नम थी।

     

    सुहानी को उदास देख उर्वशी उसके पास जाकर बोली ,” क्या हुआ सुहानी इतनी उदास क्यों हो ? घर की याद आ रही है “?

     

    सुहानी नम आंखों से उर्वशी को गले लगा लेती है। और रोते हुए बोली ,” आखिर क्यों मेरी मां मुझे छोड़कर चली गई ? छोटी मां सही कहती थी मैं मनहूस हूं तभी उन्होंने मुझे नदी में फेंक दिया फिर भी मैं बच गई ,और यहां आकर आपके लिए भी मुसीबत बन गई “!

     

    उर्वशी सुहानी का सिर सहलाते हुए बोली ,” परेशान मत हो , मैं अब संभाल लूंगी , और  शकीरा तो हमेशा मेरे खिलाफ षडयंत्र रचती रहती है , चिंता मत करो मैं अब देख लूंगी “!

     

    सुहानी बोली ,” मैं अपनी दुनिया में वापिस जाना चाहती हूं “!

     

    उर्वशी बोली ,” यह क्या बोल रही हो ? उस दुनिया में तुम्हारी मां तुम्हारी जान की दुश्मन है , और तुम्हारे पिता भी हमेशा काम से बाहर रहते है , तो ऐसे में हमेशा तुम्हारी जान को खतरा रहेगा “!

     

    सुहानी बोली ,” परी मां आप चिंता मत करो , मां को अपनी गलती का एहसास हो गया होगा और वो भी मुझे याद करती होगी , इसलिए मैं अपने गांव जाना चाहती हूं”!

     

     उर्वशी परेशान होते हुए बोली ,”  सुहानी जल लोक में है किसी को भी उसकी मर्जी के खिलाफ नहीं रख सकते , अगर तुम जाना चाहती हो तो जाओ ,पर यह अंगूठी  हमेशा अपने पास रखना “!

     

    सुहानी अंगूठी देखते हुए बोली ,”  परी मां यह क्या है “?

     

    उर्वशी सुहानी की उंगली में अंगूठी पहनाते हुए बोली ,” यह जादुई अंगूठी है ,  अगर तुम किसी मुसीबत में हो और  जैसे ही इसे अपने होंठों से चूमकर मुझे याद करोगी , मैं आ जाऊंगी “!

     

     

    सुहानी उर्वशी को गले लगाकर अपने मन में सोचने लगी ,” मैं आपको किसी मुसीबत में नहीं डालना चाहती इसलिए यहां से जा रही हूं ,पर आपसे मुझे मां का प्यार मिला है , मैं ईश्वर से प्रार्थना करूंगी कि अगले जन्म में आप मेरी मां बने “!

     

     सुहानी यह सब मन में बोल रही थी, पर उर्वशी सुहानी के मन की बात सुन पा रही थी , उर्वशी की आंखे भी नम हो जाती है।

     

    कुछ देर बाद सुहानी नदी के किनारे खड़ी थी, सुहानी एक नजर नदी की ओर देखती है और फिर अपने घर चली जाती है।

     

    सुहानी जैसे ही अपने घर जाती है ,तो उसकी मां की नजर उस पर पड़ती है ,और वह बोली ,” यह क्या मैं सपना देख रही हूं , यह तो मर गई थी ,तो फिर यहां कैसे आई “?

     

     

    मधु गुस्से से सुहानी का हाथ पकड़कर बोली ,” यहां क्या कर रही है “?

     

    सुहानी रोते हुए बोली ,” मां मै घर लौट आई”!

     

    मधु बोली ,” निकल जा यहां से ,अब क्या लेने आई है कुलटा “!

     

    सुहानी रोते हुए बोली ,”मां  आप यह क्या कह रही है “?

     

    अभी सुहानी रो ही रही थी तभी उदय आ गया , उदय को देख कर मधु रोते हुए बोली ,” देखिए जी आपकी यह बेटी हमारी नाक कटा के चली गई थी , जैसे तैसे हमने निशा की शादी की और अब यह लौट आई ताकि हमारी पूरे गांव में थू थू हो “!

     

     

    सुहानी अपने पिता के पास जाकर बोली ,” नहीं पिता जी , ऐसा कुछ नहीं है ,मैने कुछ भी किया “!

     

    सुहानी के पिता गुस्से से उसके गाल में एक थप्पड़ मारकर बोले ,” झूठ मत बोलो , तुम भी अपनी मां की तरह धोखेबाज निकली ,मेरी इज्जत उछाल कर भाग गई “!

     

    सुहानी बोली ,” नहीं पिता जी, मैं कहीं नहीं भागी , मां ने मुझे नदी में फेंक दिया था”!

     

    सुहानी की बात सुनकर  मधु सुहानी के बाल पकड़कर खींचते हुए घर के बाहर फेंक देती है और बोली ,” झूठ मत बोल , तू ही अपने किसी यार के साथ भाग गई ,जैसे तेरी मां तुझे पैदा करते ही अपने यार के साथ भाग गई ,तुझे इतनी शर्म नहीं की मैने अपनी बेटी की तरह थे पाला और तू यह इल्जाम लगा रही है मुझपर “!

     

     सुहानी रोते हुए बोली ,” छोटी मां झूठ मत बोलो ,जब जम जंगल लकड़ी लेने गए थे ,आपने ही मुझसे पानी मंगाया और जब मैं नदी में पानी लेने गई तो आपने धक्का दे दिया “!

     

    मधु सुहानी की बात सुनकर घबरा गई, और अपना झूठ छुपाने के लिए रोते हुए उदय के पास गई और बोली ,” यह झूठ बोल रही है ,आप तो जानते है इसी तैरना नहीं आता ,और अगर मैने इसे नदी में फेंका, तो यह बच कैसे गई “!

     

    सुहानी रोते हुए बोली ,” मुझे भी पता पर मैं बच गई ,और जल लोक में चली गई, और वहां परी मां के साथ रहने लगी “!

     

    सुहानी की बात सुनकर मधु उदय की ओर देखकर बोली ,” देखा यह खुद को बचाने के लिए कैसे झूठी कहानी बना रही है “!

     

    उदय मधु की बात में यकीन कर लेता है , और गुस्से से बोला ,” सुहानी झूठ मत बोलो “!

     

    पिता जी मैं झूठ नहीं बोल रही हूं। सुहानी ने रोते हुए कहा।

     

    मधु बोली ,” अच्छा झूठ नहीं बोल रही हो ,तो सबूत दो की तुम पानी में पारियों की दुनिया में चली गई थी ,और परी के साथ रह रही थी ,अरे तुम एक काम करो उस परी को ही क्यों। नहीं बुला लेती “! यह शब्द मधु ने हंसते हुए बोले।

     

    मधु की बात से सुहानी को उर्वशी का ख्याल आया ,और उसने अपने हाथ में पहनी अंगूठी को चूमकर उर्वशी को याद किया।

     

    कुछ ही पल में एक तेज रोशनी उत्पन्न हुई जिससे सभी की आंखे बंद हो गई, जब सुहानी ने आंखे खोली , तो उसके सामने उर्वशी थी।

     

    मधु और उदय ने जैसे ही आंखे खोली , उनकी आंखे उर्वशी को देखकर फटी की फटी रह गई।

     

    सुहानी उर्वशी को गले लगाते हुए बोली ,” परी मां आप आ गई “!

     

    उर्वशी की नजरे मधु और उदय में टिकी हुई थी, और वह सुहानी का सिर सहला रही थी।

     

    सुहानी रोते हुए बोली ,” परी मां , छोटी मां कह रही है कि मैं भाग गई थी किसी के साथ , आप बताइए ना मैं आपके साथ थी, इन्हें लग रहा है मैं अपनी मां की तरह भाग गई थी “!

     

    उर्वशी हैरानी से बोली ,” मां , क्या तुम्हारी मां जिंदा है “?

     

    उदय बोला ,” हां जिंदा है इसकी मां , और  इसके सामने खड़ी है “!

     

    उदय की बात सुनकर उर्वशी और सुहानी एक दूसरे को देखने लगे “!

     

    उदय बोला ,” हां सुहानी यही है तुम्हारी मां उर्वशी, जो तुम्हे जन्म देते ही कहीं चली गई ,और सालों ढूंढा मैने इसे पर यह कहीं नहीं मिली, और आज मुझे पता चल रहा है यह एक परी है “!

     

    उर्वशी नम आंखों से बोली ,” मुझे माफ कर दो उदय , मैं क्या  करती , मैं जल लोक से बाहर की दुनिया देखने आई , और मेरी मुलाकात तुमसे हुई , और मुझे तुमसे प्यार हो गया , पर जब मैने तुमसे शादी की और मेरी बेटी का जन्म हुआ , तो मेरे पिता जी की हमारे दुश्मनों ने हत्या कर दी , और मुझे जल लोक को बचाने के लिए अपनी दुनिया में लौटना पड़ा , अगर मेरे दुश्मनों को मेरी बेटी का पता चलता तो उसकी जान को खतरा था इसलिए मैं वापिस लौट गई “!

     

    सच जानकर उदय और सुहानी की आंखे नम हो गई।

     

    सुहानी उर्वशी को गले लगाते हुए बोली ,” परी मां आप मेरी मां है”!

    उर्वशी सुहानी का माथा चूमती है और फिर उसके गालों को एक एक कर चूमकर अपनी ममता लुटाते हुए बोली ,” हां मैं हूं तुम्हारी मां , जिस दिन तुम जल लोक में आई , मैं उसी दिन सोच में पड़ गई थी कि आखिर एक साधारण इंसान जल लोक में कैसे आ सकता है ,काश मैने पहले सच जानने की कोशिश की होती “!

    उदय ने मधु को एक झन्नाटेदार थप्पड़ मारकर कहा ,” तुमने मेरी बेटी की जान लेने की कोशिश की निकल जाओ यहां से “!

    मधु ने बहुत मन्नते की पर उदय ने उसकी एक ना सुनी और मधु को घर से बाहर निकाल दिया।

     उदय ने अपने अविश्वास के लिए उर्वशी और सुहानी से माफी मांगी। 

    उर्वशी ने भी उदय से माफी मांगी , और उदय से इजाजत लेकर  उर्वशी सुहानी को लेकर अपने जल लोक लौट गई ,और उसे परी की सारी शक्तियां दे दी, और जल लोक की राजकुमारी बना दिया। 

    इस तरह एक मासूम सी लड़की इतनी तकलीफें झेलने के बाद अपनी मां से मिल गई , और राजकुमारी बनकर जल लोक की परी बन गई ।

     

     

    Mysterious Chand 

     

     

     

     

     

  • एक अनोखा रिश्ता

    एक अनोखा रिश्ता

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    राहुल अपने मम्मी पापा  के साथ मुंबई में एक फ्लैट में रहता था ,वह अपने दोस्तों के साथ सामने के खाली पड़े फ्लैट के सामने हमेशा अपने दोस्तों के साथ खेलता था , एक दिन उस फ्लैट में अचानक ही फर्नीचर का काम चालू हो गया ,और पता चला कि उस फ्लैट में अब कोई रहने आने वाला है। इससे राहुल और उसके दोस्त बहुत उदास हो गये। पर फिर भी उन्होंने फ्लैट में खेलना नहीं छोड़ा। 

    राहुल और उसके दोस्तों को शैतानी करते देखकर फर्नीचर वाले अंकल उन्हें हमेशा डांट कर भगाते थे पर वह नहीं सुनते थे।

    एक दिन राहुल अपने  दोस्तो के साथ फ्लैट में खेल रहा था और सामने फर्नीचर का काम भी चल रहा था , तभी वहां एक औरत एक छोटी सी  लड़की को लेकर आई।

     उसकी छोटी-छोटी आंखें और दबी हुई सी नाक थी। वो लड़की हमें डरी हुई नज़रों से देख रही थी, हमने उन्हें देखकर खेलना बंद कर दिया था।

    “शायद ये लोग ही यहां रहने आए है।” अजय ने धीरे से राहुल के कान में कहा। 

    उसकी बात सुनकर राहुल के चेहरे में मुस्कान आ गई, उसे बड़ी खुशी हुई कि अब उनकी गैंग में एक और सदस्य जुड़ जाएगा। 

    उस लड़की की नज़रें जैसे ही राहुल की नजरो से टकराई तो राहुल के चेहरे पर मुस्कान आ गई।

    जब उस लड़की ने देखा कि मैं उसे देख कर मुस्करा रहा हूं, तो उस लड़की ने राहुल से मुंह फेर लिया। 

    उस लड़की के ऐसे मुंह फेरने से राहुल का चेहरा उतर गया , उसे बड़ा अजीब सा लगा और वह जल्दी से अजय के साथ वहां से चला गया।

    अब राहुल और अजय ने वहां पर खेलना बन्द कर दिया क्योंकि वो लोग फ्लैट में रहने लगे थे ।

    एक दिन राहुल की मम्मी सीमा उसके पापा से बात के रही थी ।

     ” सुनो जी मैंने सुना वो सामने वाले घर में जो लोग आए है ,वह  हिमाचल से आए हैं। बस मां बेटी रहती है ,सुना है बच्ची  के मम्मी-पापा का तलाक हो चुका था “।

    अक्षय सीमा से बोला ,” छोड़ो ,हमे क्या करना है , वह उनका निजी मामला है “!

    राहुल अपनी मम्मी पापा की बात सुनकर वहां से चला गया।

    अब राहुल और अजय अपने और दोस्तों के साथ बिल्डिंग के नीचे वाले गार्डन में खेलते थे।

    राहुल एक दिन खेल था , तभी उसकी नजर बालकनी में खड़ी उस लड़की में पड़ी , जो  कभी अपने घर से बाहर नहीं निकलती थी ,पर कभी कहीं गलती से बालकनी में खड़ी दिख भी जाती, तब भी उसे देखकर अंदर चली जाती थी। आज भी वही हुआ जैसे ही राहुल और उस लड़की की नजरे टकराई ,वो लड़की अन्दर भाग गई।

    कुछ दिनों बाद दीवाली आई और  शाम को घर  में पूजा हुई और पूजा खत्म होने के बाद सीमा ने राहुल को प्रसाद देते हुए कहा ,” जाओ राहुल ये प्रसाद लेकर सामने वाले फ्लैट की आंटी को दे दो। 

    राहुल प्रसाद लेकर जैसे ही सामने वाले घर में गया तो दरवाज़ा उस लड़की ने ही खोला, पर राहुल ने उसे इग्नोर किया और उसकी मम्मी के पास गया।

    “ आंटी मम्मी ने प्रसाद दिया है और कहा है कि आप लोग हमारे साथ दिवाली मनाएं।” राहुल ने उसकी मम्मी को प्रसाद पकड़ाते हुए कहा।

    “बेटा…हम दिवाली नहीं मनाते… बैठो मैं अभी आती हूं” आंटी ने राहुल को बैठने का इशारा करते हुए कहा और किचन से राहुल के लिए कुछ खाने के लिए लेने चली गईं। 

    “तुम्हारा नाम क्या है “? राहुल ने पूछा।

    वो लड़की बहुत देर चुप रहने के बाद बोली ,” आकांक्षा “!

    “तुम्हें पटाखे जलाना अच्छा नहीं लगता?” राहुल ने उस लड़की से पूछा।

    “हां” बहुत देर तक चुप रहने के बाद आखिर कर वो लड़की बोली।

     “तुम चलो बाहर हम साथ में पटाखे जलाएंगे” राहुल ने कहा।

    “नहीं मम्मी बाहर जाने से मना करती हैं।” लड़की कहने लगी।

    “अच्छा। हमसे बात करने के लिए भी?” राहुल ने  चौंक कर पूछ लिया।

    “नहीं।…उन्हें डर लगता है, लोग हमारा मज़ाक बनाते हैं।” लड़की ने धीरे से कहा।

    “क्यों?” राहुल ने पूछा।

    “क्योंकि हमारी छोटी आंखें हैं ना… हम यहां पहले रहते थे, वहां सब बच्चे मुझे चाइनीज.. चाइनीज…बोलकर चिढ़ाते थे। एक दिन मुझे गुस्सा आ गया। मैंने एक लड़के को घूंसा मार दिया। फिर उसकी मम्मी ने मेरी मम्मी से बहुत झगड़ा किया। मेरे पापा-मम्मी के बारे में गंदी-गंदी बातें की। फिर हमने वो घर छोड़ दिया। इसलिए ही मम्मी यहां किसी से बात करने के लिए मना करती हैं।” अभी  वो बता ही रही थी कि उसकी मम्मी आ गई।

    “आंटी आप नहीं आ रही तो मैं इसे ले जाऊं? हम साथ में पटाखे जलाएंगे, प्लीज़ आंटी।” राहुल ने रिक्वेस्ट करते हुए कहा तो कुछ देर बाद उसकी मम्मी मान गईं।

    राहुल ने उसका हाथ पकड़ा और कहा, “डरो मत यहां कोई तुम्हारा मज़ाक नहीं बनाएगा।”  और वो दोनों बाहर जाकर पटाखे जलाने लगे ।

    तभी कुछ बच्चे आए और आकांक्षा का मजाक बनाने लगे।

    आकांक्षा सबको अपना मजाक बनाता देख रोते हुए भागने लगी।

    जब बालकनी में खड़ी उसकी मां ने आकांक्षा का मजाक बच्चों को उड़ाते देखा तो वह भागकर नीचे चली गई।

     इधर आकांशा भागकर जा ही रही थी कि वह सीमा और अक्षय से टकरा गई।

    सीमा ने आकांक्षा को गले लगाते हुए कहा,” क्या हुआ बेटा तुम ऐसे रो क्यों रही हो “?

    राहुल भी वहां आ गया और उसे सब बात बता दी।

    जब सीमा ने अब बाते जानी तो वह आकांक्षा के आंसु पोछते हुए बोली ,” बेटा रोते नहीं लोग तो बाते बनाते रहते है ,उनकी बातो को दिल में नहीं लेते ,तुम भागेगी तो वह तुम्हे कमजोर समझेंगे ,और बार बार वही करेंगे ,तुम इन सबका डटकर सामना करो “!

    आकांक्षा की मां राधा जैसे ही वहां आई  ,तो  उन बच्चों की मां बाते बनाने लगी ,” इस औरत का पता नहीं यहां कैसे आई ? पति से तलाक क्यों लिया और कोई पति है भी या नहीं ? कौन जानता है  सच “!

    सबको बात बनाता देखकर राधा की आंखे भर आई , सीमा सबको डांटते हुए बोली ,” चुप हो जाओ तुम अब ,शर्म नहीं आती एक औरत होकर दूसरी औरत के बारे में ऐसी बात। करते हुए “?

    सीमा की डांट सुनकर अब चुप हो गए।

    अक्षय गुस्से से बोला ,” आप सब ऐसे बाते मत बनाइए राधा बहन के बारे में ,किसकी क्या मजबूरी है कोई भी जानता, यह एक ईजेदार महिला है इन्हें ऐसे परेशान मत कीजिए ,अब जमाना बदल गया है ,एक औरत कमजोर नहीं ,वह अकेले भी खुद का और अपने बच्चों का अच्छा पालन पोषण कर सकती है”।

    अब सब लोगों ने नजरे झुका ली।

    अक्षय ने आकांक्षा को गोद में लिया और बोला ,” यह देखिए इस मासूम सी बच्ची को ,आप जैसे समाज के ठेकदारों की वजह से इसकी आंखों में आंसु है ,सब कहते है बच्चे भगवान का रूप होते है ,तो क्या आपको शोभा देता है ऐसे किसी बच्चे को परेशान करता देखकर “!

    सभी को अपने किए पर शर्मिंदगी हुई और उन्होंने राधा और आकांशा से माफी मांगी।

    उसके बाद सभी ने साथ मिलकर दिवाली मनाई ,और राहुल और उसके दोस्तों के साथ आकांशा ने खूब पटाखे जलाए।

    इस तरह राहुल और आकांशा दोस्त बन  गए ,और उनके बीच दोस्ती का एक अनमोल रिश्ता बन गया।

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