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बेवफाई

पढ़ने का समय : 6 मिनट

बेवफाई

Part 1

 

“कुछ रिश्ते टूटते नहीं हैं… बस उनमें से भरोसा मर जाता है।

और जब भरोसा मर जाए, तो प्यार कितना भी जिंदा हो… रिश्ता सांस नहीं ले पाता।”

 

शाम के करीब सात बज रहे थे।

 

मुंबई की सड़कों पर बारिश अपना पूरा जोर दिखा रही थी। आसमान काले बादलों से घिरा था और सड़क पर दौड़ती गाड़ियों की रोशनी पानी की बूंदों में घुलकर किसी धुंधली तस्वीर जैसी लग रही थी।

 

रिया माथुर खिड़की के पास खड़ी लगातार घड़ी देख रही थी। उसने हल्के आसमानी रंग की बहुत सी सुंदर साड़ी पहनी हुई थी, चेहरे पर हल्का सा मेकअप, मांग में सिंदूर, गले में मंगलसूत्र। 

 

आज उसके चेहरे पर महीनों बाद थोड़ी सी खुशी दिखाई दे रही थी।

 

उसने कमरे को खुद सजाया था। टेबल पर मोमबत्तियां थीं। बीच में आरव का पसंदीदा चॉकलेट केक रखा था, जो उसने खुद अपने हाथों से बनाया था और उसके पास रखा था… एक छोटा-सा गिफ्ट बॉक्स।

 

रिया ने अपने हाथ में पकड़े फोन की स्क्रीन देखी।

 

“आरव ❤️” उसने फिर मैसेज किया।

 

“कितनी देर और? आज जल्दी आना… तुम्हारे लिए एक सरप्राइज है।”

 

मैसेज भेजने के बाद उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई। आज उनकी शादी की तीसरी सालगिरह थी।

 

तीन साल पहले इसी दिन आरव ने उसका हाथ पकड़कर सात फेरे लिए थे और कहा था, “रिया, जिंदगी चाहे जितनी मुश्किल हो जाए, मैं तुम्हारा हाथ कभी नहीं छोड़ूंगा।”

 

रिया ने उस दिन उस एक वादे पर अपनी पूरी जिंदगी रख दी थी। और आज…

वह उसी वादे का जश्न मनाने के लिए उसका इंतजार कर रही थी।

 

रात के करीब आठ बजे दरवाजे की घंटी बजी।

 

रिया की आंखें चमक उठीं। “आरव!” उसने धीरे से नाम लिया, और आंखों में चमक लिए, वह दौड़कर दरवाजे तक पहुंची।

 

लेकिन दरवाजे के बाहर आरव नहीं था। कूरियर वाला खड़ा था। उसे देखकर रिया के चेहरे की चमक पलभर में गायब हो गई। 

 

“मैडम, आपके नाम का पार्सल।” कुरियर वाले ने एक पैकेट रिया की तरफ बढ़ाते हुए कहा।

पहले तो रिया को थोड़ी हैरानी हुई, लेकिन फिर उसने पैकेट ले लिया। 

 

“थैंक यू।” कहकर उसने एक पर्चे में साइन किया और फिर दरवाजा बंद करके अंदर आ गई। 

वो पैकेट अभी भी उसके हाथ में था।

 

पहले उसने सोचा आरव को फोन करने के बाद वो पैकेट खोलेगी, लेकिन फिर जाने क्या सोचकर उसने फोन टेबल पर रखना और पैकेट खोलने लगी। 

 

अंदर एक फाइल थी। रिया ने हैरानी से फाइल खोली।

 

पहले पन्ने पर लिखा था, “तलाक का समझौता।”

 

जैसे ही उसने वो शब्द पढ़े, उसकी सांस जैसे वहीं रुक गई। “नहीं…” उसके हाथ कांपने लगे। “ये… ये क्या है?”

 

फाइल के अंदर आरव के हस्ताक्षर किए हुए कागजात रखे थे। तलाक के कागजात।

 

रिया ने तुरंत आरव को फोन किया।

 

एक बार… दो बार… पांच बार… लेकिन सामने से कोई जवाब नहीं।

 

फिर फोन बंद हो गया। रिया फर्श पर बैठ गई, उसकी दुनिया मानो पलभर में पूरी तरह से उजड़ गई। आंखों के सामने तीन साल की पूरी जिंदगी घूम गई।

 

पहली मुलाकात। पहली लड़ाई। पहली बारिश।

 

पहली सालगिरह। आरव का उसे देखकर मुस्कुराना।

 

और वह रात… जब आरव ने उसके माथे को चूमकर कहा था, “तुम मेरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत गलती नहीं, सबसे सही पसंद हो।”

 

रिया की आंखों से आंसू बह निकले। तभी उसके फोन पर एक नोटिफिकेशन आया।

 

एक फोटो। रिया की उंगलियां ठिठक गईं। फोटो में आरव था। और उसके साथ एक लड़की। दोनों एक-दूसरे के बेहद करीब खड़े थे। लड़की के चेहरे पर मुस्कान थी। और आरव… उसे उसी तरह देख रहा था, जैसे कभी वह रिया को देखा करता था।

 

फोटो के नीचे लिखा था, 

“Finally… together. ❤️”

 

रिया की आंखें फैल गईं। उसने फोटो को बार-बार देखा। फिर लड़की का चेहरा पहचानते ही उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।

 

मीरा। आरव की ऑफिस पार्टनर।

 

वही मीरा जिसे लेकर रिया ने कई बार मजाक में कहा था, “तुम दोनों साथ में बहुत अच्छे लगते हो।”

 

और आरव हर बार हंसकर कहता था, “रिया तुम पागल हो क्या? मेरे लिए सिर्फ तुम हो, मुझे किसी और की जरूरत नहीं है।”

 

रिया ने उस वक्त उस पर भरोसा किया था। जब कभी आरव उसके साथ बिजनेस ट्रिप पर जाता, लेकिन रिया ने कभी उसपर रत्ती भर शक नहीं किया। 

लेकिन, आज वही भरोसा उसके सामने टूटकर बिखर चुका था।

 

 

अगली सुबह रिया सीधे आरव के ऑफिस पहुंची।

 

रिसेप्शन पर पहुंचते ही उसने पूछा, “आरव कहां है?”

 

रिसेप्शनिस्ट ने उसे देखकर नजरें झुका लीं। “मैम… सर मीटिंग में हैं।”

 

“मीटिंग?” रिया हंस पड़ी। वह हंसी जिसमें दर्द था। “उन्हें बुलाइए, कहिए कि मैं मिलना चाहती हूँ।”

 

 

कुछ मिनट बाद आरव बाहर आया। काली शर्ट, चेहरे पर वही गंभीरता और आंखों में ऐसी ठंडक जैसे रिया उसके लिए कोई अजनबी हो।

 

रिया उसे देखकर कुछ पल तक बस खड़ी रही। फिर बोली, “तुमने मुझे तलाक के पेपर भेजे?”

 

आरव चुप रहा। 

 

“मुझसे एक बार पूछना भी जरूरी नहीं समझा?” रिया ने उसकी आंखों में देखते हुए पूछा। 

 

आरव ने कठोर शब्दों में कहा, “अब पूछने को बचा ही क्या है?”

 

रिया का दिल टूट गया। “मतलब?”

 

आरव ने नजरें फेर लीं। “मैं इस रिश्ते में नहीं रहना चाहता।”

 

रिया टूटी आवाज में, “क्यों?”

 

आरव, “बस नहीं रहना चाहता।”

 

“झूठ!” रिया चीख पड़ी। “तुम मुझसे प्यार करते थे!”

 

आरव ने उसकी तरफ देखा। “था।”

 

बस एक शब्द। था। रिया को लगा जैसे किसी ने उसके सीने के बीचोंबीच वार कर दिया हो।

 

“तो मीरा की वजह से?” आरव ने कोई जवाब नहीं दिया।

 

रिया की आंखों में आंसू भर आए। “तीन साल का रिश्ता… और तुमने इसे इतनी आसानी से खत्म कर दिया?”

 

“आसानी से?” आरव की आवाज पहली बार थोड़ी भारी हुई। “तुम्हें लगता है मेरे लिए आसान था?”

 

“तो फिर मुझे छोड़ क्यों रहे हो?” आरव कुछ कहने ही वाला था कि पीछे से मीरा की आवाज आई, “आरव…”

 

रिया ने मुड़कर देखा। मीरा वहां खड़ी थी। उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी। वह सीधे आरव के पास आकर खड़ी हो गई। रिया ने दोनों को देखा।

 

फिर अपनी आंखों से आंसू पोंछते हुए बोली, “शायद मेरी जगह अब यहां नहीं है।”

 

वह मुड़ी। लेकिन जाते-जाते उसने आरव की तरफ देखा। “एक बात याद रखना…”

 

आरव की

आंखें उससे मिलीं। “जिस इंसान ने तुम्हें सबसे ज्यादा प्यार किया था, उसे तुमने आज खुद से दूर कर दिया है।”

 

और वह चली गई।

 

To be continued..

क्या सच में बिखर कर रह जाएगा आरव और रिया का रिश्ता। या कहानी आगे कुछ नया मोड लेगी जानने के लिए अगला भाग जरूर पढ़े। 

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