शहर के एक किनारे पर एक बहुत बड़ी पुरानी हवेली थी, जिसे लोग राठौर हवेली कहते थे। उसी शहर के दूसरे छोर पर एक छोटा-सा घर था, जहां आलिया अपने परिवार के साथ रहती थी।
दोनों परिवार एक-दूसरे से बिल्कुल अलग थे।
राठौर परिवार अपने खानदान, अपनी परंपराओं और अपनी ऊंची सोच के लिए जाना जाता था। उनके लिए परिवार की इज्जत सबसे ऊपर थी।
वहीं आलिया का परिवार अपने अलग विचारों और संस्कारों को सबसे ज्यादा मानता था।
दोनों परिवारों के बीच कोई बड़ी दुश्मनी नहीं थी, लेकिन उनके बीच एक ऐसी दूरी थी, जिसे पार करना किसी के लिए भी आसान नहीं था।
और फिर एक दिन…
आलिया की मुलाकात तपिश से हुई।
पहली मुलाकात बिल्कुल आम थी।
आलिया कॉलेज के बाहर बारिश में खड़ी थी। उसके पास छाता नहीं था और बारिश लगातार तेज होती जा रही थी।
तभी एक लड़का उसके सामने छाता लेकर आकर खड़ा हो गया।
“आप भीग जाएंगी,” उसने कहा।
आलिया ने उसकी तरफ देखा।
“और आप?”
तपिश हल्का-सा मुस्कुराया।
“मैं तो पहले से भीग चुका हूं।”
आलिया हंस पड़ी।
उसे क्या पता था कि बारिश में मिला यह अजनबी उसकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत और सबसे दर्दनाक हिस्सा बनने वाला था।
धीरे-धीरे दोनों की मुलाकातें बढ़ने लगीं।
कभी कॉलेज के बाहर…
कभी सड़क किनारे चाय की दुकान पर…
कभी किसी बहाने से फोन पर घंटों बातें।
तपिश को आलिया की बातें अच्छी लगती थीं और आलिया को तपिश का खामोश रहकर भी उसकी हर बात समझ जाना।
एक दिन आलिया ने उससे पूछा,
“तुम्हें पता है ना… हम दोनों का साथ होना आसान नहीं है?”
तपिश कुछ देर चुप रहा।
फिर बोला,
“हां।”
“बहुत मुश्किल है।”
“हां।”
“शायद नामुमकिन भी।”
तपिश ने उसकी आंखों में देखा।
“लेकिन तुमसे मोहब्बत करना तो मेरे हाथ में भी नहीं था।”
आलिया की आंखें भर आईं।
“तुम जानते हो ना कि हमारे परिवार कभी हमें स्वीकार नहीं करेंगे?”
“जानता हूं।”
“फिर भी?”
तपिश ने धीरे से कहा,
“फिर भी।”
उस दिन दोनों ने पहली बार एक-दूसरे का हाथ पकड़ा था।
दोनों जानते थे कि उनका मिलना शायद इस जन्म में संभव नहीं था।
फिर भी दोनों ने मोहब्बत कर ली।
क्योंकि कुछ मोहब्बतें सोच-समझकर नहीं होतीं।
वो बस हो जाती हैं।
और फिर इंसान चाहे पूरी दुनिया से लड़ ले… अपने दिल से नहीं लड़ पाता।
कुछ महीनों बाद उनके रिश्ते की खबर दोनों परिवारों तक पहुंच गई।
आलिया के घर में तूफान आ गया।
उसके पिता ने गुस्से में कहा,
“तुम उस लड़के से दोबारा नहीं मिलोगी।”
आलिया चुप रही।
“मैं तुमसे बात कर रहा हूं!”
आलिया की आंखों से आंसू गिरने लगे।
“पापा… मैं उससे प्यार करती हूं।”
कमरे में कुछ पल के लिए खामोशी छा गई।
फिर उसके पिता ने कहा,
“प्यार? ये प्यार नहीं है। ये हमारे परिवार की इज्जत मिट्टी में मिलाने की जिद है।”
उधर तपिश के घर में भी वही हाल था।
उसके पिता ने उसे साफ शब्दों में कह दिया,
“उस लड़की को भूल जाओ।”
तपिश ने पहली बार अपने पिता के सामने सिर उठाकर कहा,
“मैं उसे भूल नहीं सकता।”
“तो फिर इस घर में तुम्हारे लिए कोई जगह नहीं।”
तपिश कुछ देर तक अपने पिता को देखता रहा।
फिर उसने सिर्फ इतना कहा,
“अगर मेरी मोहब्बत इतनी बड़ी गलती है… तो मैं ये गलती जिंदगी भर करूंगा।”
उस रात दोनों ने फोन पर बात की।
आलिया बहुत रो रही थी।
“तपिश… शायद हमें अलग होना पड़ेगा।”
तपिश चुप था।
“कुछ बोलो ना…”
तपिश ने कांपती आवाज में कहा,
“मैं तुम्हें खोना नहीं चाहता।”
“मैं भी नहीं।”
“तो फिर मुझे छोड़कर मत जाना।”
आलिया रोते हुए बोली,
“मैं जाना नहीं चाहती तपिश… लेकिन शायद हमारी किस्मत हमें साथ नहीं देखना चाहती।”
तपिश ने अपनी आंखें बंद कर लीं।
“अगर इस जन्म में हम नहीं मिल सके…”
आलिया ने रोते हुए पूछा,
“तो?”
तपिश ने कहा,
“तो अगले जन्म में मैं तुम्हें पहले ढूंढूंगा।”
आलिया ने धीमे से पूछा,
“और अगर मैं तुम्हें पहचान न पाई तो?”
तपिश मुस्कुराया, लेकिन उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे।
“तो मैं फिर से तुमसे प्यार कर लूंगा।”
दोनों ने तय किया कि वे आखिरी बार मिलेंगे।
उस रात आलिया अपने घर से चुपचाप निकली और शहर के बाहर उसी सुनसान सड़क पर पहुंची, जहां तपिश उसका इंतजार कर रहा था।
दोनों आमने-सामने खड़े थे।
काफी देर तक कोई कुछ नहीं बोला।
फिर आलिया ने कहा,
“तपिश… क्या हम सच में इतने गलत थे?”
तपिश ने सिर हिलाया।
“नहीं।”
“फिर हमें सजा क्यों मिल रही है?”
तपिश के पास इसका कोई जवाब नहीं था।
आलिया उसके पास आकर खड़ी हो गई।
“काश हम किसी ऐसी दुनिया में मिले होते जहां हमारे नाम से पहले हमारा परिवार न पूछा जाता।”
तपिश की आंखें भर आईं।
“काश…”
“काश हम बस आलिया और तपिश होते।”
दोनों कुछ देर तक एक-दूसरे का हाथ पकड़े खड़े रहे।
फिर अचानक दूर से तेज रोशनी उनकी ओर बढ़ी।
एक तेज रफ्तार गाड़ी सड़क पर बेकाबू होकर उनकी तरफ आ रही थी।
तपिश ने आलिया को धक्का देकर सड़क से दूर कर दिया।
आलिया गिर गई।
और अगले ही पल…
तपिश उस गाड़ी की चपेट में आ गया।
“तपिश!”
आलिया चीखते हुए उसके पास भागी।
तपिश सड़क पर पड़ा था।
आलिया ने उसका सिर अपनी गोद में रख लिया।
“तपिश… आंखें खोलो… प्लीज आंखें खोलो…”
तपिश ने मुश्किल से आंखें खोलीं।
उसने आलिया की तरफ देखा।
“तुम… ठीक हो?”
आलिया जोर-जोर से रोने लगी।
“तुम मुझे बचाकर खुद क्यों चले गए?”
तपिश ने बहुत मुश्किल से मुस्कुराने की कोशिश की।
“क्योंकि… तुमसे ज्यादा जरूरी… मेरे लिए कुछ नहीं था।”
आलिया उसके हाथ को कसकर पकड़कर बोली,
“मुझे छोड़कर मत जाओ… मैंने तुम्हें अगले जन्म में ढूंढना है।”
तपिश की आंखों से आंसू निकल आए।
“मैं… इंतजार करूंगा।”
“तपिश…”
“आलिया…”
“हां?”
“अगर… अगले जन्म में भी हमारे परिवार अलग हुए…”
आलिया रोते हुए बोली,
“तो?”
तपिश ने बहुत धीमी आवाज में कहा,
“तो इस बार… तुम मेरा हाथ मत छोड़ना।”
आलिया ने उसका हाथ और कसकर पकड़ लिया।
“नहीं छोड़ूंगी।”
तपिश की आंखें धीरे-धीरे बंद हो गईं।
आलिया चीखती रही।
“तपिश… उठो ना…”
लेकिन तपिश नहीं उठा।
उस रात दो परिवारों की नफरत ने अपने बच्चों से उनकी मोहब्बत छीन ली थी।
तपिश चला गया।
और आलिया…
वो जिंदा तो रही, लेकिन उसके अंदर कुछ हमेशा के लिए मर गया।
कई साल बाद भी आलिया उसी सड़क के किनारे हर साल उसी दिन जाकर बैठती थी।
उसके हाथ में वही पुराना छाता होता था, जो तपिश ने उसे पहली बारिश में दिया था।
लोग पूछते,
“तुम अब तक उसका इंतजार क्यों करती हो?”
आलिया मुस्कुराकर कहती,
“क्योंकि उसने कहा था… वो इंतजार करेगा।”
और फिर वो आसमान की तरफ देखकर धीरे से कहती,
“तपिश… अगर सच में कोई अगला जन्म होता है ना…”
उसकी आंखों से आंसू बहने लगते।
“तो इस बार मुझे ढूंढने में देर मत करना।”
कहते हैं, कुछ प्रेम कहानियां शादी तक पहुंचकर पूरी नहीं होतीं।
कुछ प्रेम कहानियां साथ जीकर पूरी नहीं होतीं।
कुछ मोहब्बतें तो मौत के बाद भी अधूरी रह जाती हैं…
क्योंकि दो लोग एक-दूसरे से बेइंतहा प्यार करते हैं,
लेकिन उनकी किस्मत…
उन्हें एक-दूसरे का होकर भी…
एक-दूसरे के साथ जीने नहीं देती।

मैं हर बार कुछ बेहतर की कोशिश करती हूं
अपनी कलम से जज़्बात लिखा करती हूं
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