Bound by Fate
भाग 3
राधे राधे दोस्तों ❤️
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अगली सुबह
सुबह के आठ बजे
खिड़की से आती सूरज की हल्की किरणें धीरे-धीरे कमरे में फैल रही थीं। कमरे में रात की खामोशी अब भी मौजूद थी।
तभी बेड पर लेटी लड़की के हाथों में हल्की-सी हरकत हुई। उसकी पलकों में कंपन हुआ। कुछ ही सेकंड बाद उसने धीरे-धीरे अपनी आंखें खोल दीं। कमरे में अभी भी हल्का अंधेरा था, बस कमरे के पर्दों से छनकर आती सूरज की किरणें कमरे को हल्की रोशनी से भर रही थीं।
आंखें खुलते ही उसने छत की तरफ देखा। कुछ पल तक वह यूं ही देखती रही। फिर उसकी नजरें कमरे में घूमने लगीं। लेकिन उसे कुछ भी पहचान में नहीं आया।
वह कहां थी?
उसने उठकर बैठने की कोशिश की। लेकिन शरीर में इतनी कमजोरी थी कि वह ठीक से बैठ भी नहीं पाई।
उसने दोबारा कोशिश की। इस बार किसी तरह उठकर बैठ गई।
उसका सिर भारी था। शरीर में दर्द था और गला बिल्कुल सूख रहा था। उसने अपने कपड़ों की तरफ देखा।
उसने जो लाल सूट पहना था…
वो अब वहां नहीं था।
उसकी जगह उसने एक मुलायम-सा ढीला कुर्ता पहन रखा था।
वो घबरा गई।
तभी…
दरवाजा खुला।
लड़की ने तुरंत नजरें उठाईं।
सामने दरवाजे पर एक आदमी खड़ा था।
वही आदमी…
जिसने पिछली रात उसे सड़क से उठाया था।
रूद्रांश शेखावत।
गेहुआं रंग… लगभग छह फुट दो इंच लंबा कद… गहरी नीली आंखें… शार्प जॉलाइन… हल्की बियर्ड… सख्त चेहरे की बनावट…
और चेहरे पर एक ऐसा अजीब-सा आकर्षण, जिससे नजरें हटाना आसान नहीं था।
उसका शरीर बेहद फिट था और उसकी पूरी personality में एक अलग ही रौब था।
वह जितना हैंडसम था…
उतना ही रहस्यमयी भी।
रूद्रांश की नजर जैसे ही लड़की पर पड़ी, उसने शांत स्वर में कहा,
“आखिर तुम होश में आ ही गईं।”
उसकी आवाज सुनकर लड़की का ध्यान टूटा। उसने घबराकर उसे देखा और अनजाने में ब्लैंकेट को अपनी मुट्ठियों में कस लिया।
रूद्रांश ने तुरंत ही उसकी घबराहट नोटिस कर ली। वह कुछ कदम आगे बढ़ा, लेकिन उससे उचित दूरी बनाकर रुक गया।
“हे, डरो मत।”
उसकी आवाज इस बार थोड़ी नरम थी।
“तुम यहां बिल्कुल सेफ हो।”
लड़की की आंखों में अब भी डर और उलझन थी।
उसने मुश्किल से अपनी आवाज निकाली।
“आ… आप कौन हैं?”
कुछ पल रुककर उसने पूछा,
“और मैं यहां कैसे आई?”
रूद्रांश के होंठों पर हल्की-सी मुस्कान आई।
“ये सवाल तो मुझे तुमसे पूछना चाहिए।”
फिर वह बेड के पास रखी कुर्सी पर बैठ गया और बोला,
“लेकिन चलो… पहले मैं ही बता देता हूं।”
उसने लड़की की तरफ देखते हुए कहा,
“मेरा नाम रूद्रांश शेखावत है। शायद तुमने मेरा नाम सुना होगा।”
लड़की चुप रही।
रूद्रांश ने आगे पूछा,
“अब तुम बताओ… तुम कौन हो?”
वह कुछ पल चुप रही।
जैसे अपने ही नाम को याद करने की कोशिश कर रही हो।
उसके होंठ हिले।
“म… मेरा नाम…”
वह रुक गई।
उसने अपनी आंखें बंद कीं।
कुछ सोचने के बाद बहुत धीमी आवाज में बोली,
“ई… ईशानी…”
रूद्रांश के चेहरे के भाव सामान्य रहे।
“ओके…”
उसने सिर थोड़ा झुकाया।
“तो मिस ईशानी… कल रात तुम उस सुनसान सड़क पर अकेली क्या कर रही थीं?”
लेकिन उसकी तेज निगाहें ईशानी के चेहरे के भावों को परख रही थीं।
ईशानी का चेहरा अचानक बदल गया।
उसकी आंखों में बेचैनी फैल गई।
वह कुछ याद करने की कोशिश करने लगी।
लेकिन…
कुछ भी साफ याद नहीं आया।
सिर्फ धुंधली-सी तस्वीरें।
उसने अपना सिर पकड़ लिया।
अचानक सिर में तेज दर्द उठा।
“आह…”
उसके मुंह से दर्द भरी आवाज निकली।
रूद्रांश तुरंत उठ खड़ा हुआ।
“रिलैक्स!”
उसने गंभीर लेकिन शांत आवाज में कहा,
“फिलहाल, कुछ याद करने की जरूरत नहीं है।”
ईशानी ने उसकी तरफ देखा।
रूद्रांश कुछ पल उसे देखता रहा।
उसे समझ आ गया कि मामला उसकी सोच से कहीं ज्यादा उलझा हुआ था।
वह अपनी जेब की तरफ हाथ ले गया।
सिगरेट निकालने वाला था…
लेकिन फिर रुक गया।
उसने सिगरेट वापस जेब में रख दी।
वो हमेशा ऐसा ही करता था।
जब कोई चीज उसे परेशान करती या कोई मामला उसकी समझ से बाहर होता, तो वह सिगरेट जला लेता था।
लेकिन आज…
पता नहीं क्यों, उसके सामने बैठी ये लड़की उसकी उस आदत को भी रोक रही थी।
रूद्रांश ने आखिरकार कहा,
“शायद तुमने काफी समय से ठीक से कुछ खाया नहीं, इसलिए मैं तुम्हारे खाने के लिए कुछ भिजवा रहा हूँ। उसके बाद तुम्हें दवाई भी लेनी है।”
कहकर वह कमरे से बाहर निकला और उसने दरवाजा भी बंद कर दिया।
ईशानी कुछ पल तक उसी दरवाजे को देखती रही।
फिर उसने धीरे से अपनी आंखें बंद कर लीं।
वह याद करने की कोशिश करने लगी।
कुछ…
बहुत धुंधली तस्वीरें उसके दिमाग में उभरने लगीं।
एक मंडप…
चारों तरफ लोग…
कोई उसका हाथ जबरदस्ती पकड़कर उसे खींच रहा था…
उसकी चीख…
किसी की तेज आवाज…
फिर अंधेरा…
और उसके बाद…
बारिश में भागती हुई वो खुद।
अचानक उसे किसी पुरुष की गुस्से से भरी आवाज सुनाई दी।
“तुम कहीं नहीं जा सकतीं!”
ईशानी का पूरा शरीर कांप उठा।
उसने अपनी आंखें कसकर बंद कर लीं।
एक पल के लिए उसे किसी के हाथ में चमकती हुई अंगूठी दिखाई दी…
फिर लाल रंग…
बहुत सारा लाल रंग…
और उसके कानों में किसी लड़की के रोने की आवाज गूंजने लगी।
लेकिन इससे पहले कि वह उस आवाज को पहचान पाती, सब कुछ फिर से धुंधला हो गया।
ईशानी ने अचानक आंखें खोल दीं।
उसकी सांसें तेज हो चुकी थीं।
उसने अपने सीने पर हाथ रखा।
दिल बहुत तेजी से धड़क रहा था।
उसकी आंखों से आंसू निकल आए।
“मैं…”
उसकी आवाज कांप रही थी।
“मैं किसी से भाग रही थी…”
वह कुछ पल के लिए चुप हुई।
फिर उसकी आंखों में डर उतर आया।
“लेकिन किससे?”
उसने अपना सिर पकड़ लिया।
“और… क्यों?”
कमरे में उसकी कांपती आवाज गूंजकर रह गई।
उसे नहीं पता था कि उसकी यादों में छिपा सच उसकी जिंदगी को दोबारा तोड़ने वाला था…
या फिर उसी सच की वजह से उसे एक ऐसा
रिश्ता मिलने वाला था, जिसकी उसने कभी कल्पना तक नहीं की थी।
लेकिन एक बात तय थी…
उसकी याददाश्त में छिपा हर राज उसे धीरे-धीरे उसी रात की तरफ ले जाने वाला था।
और उस रात से जुड़ा एक नाम…
शायद उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा सच बनने वाला था।
रूद्रांश शेखावत।
क्या रूद्रांश और ईशानी की ये मुलाकात महज एक इत्तेफाक थी…
या तकदीर ने दोनों को एक-दूसरे से मिलाने के लिए ये खेल रचा था?
जानने के लिए पढ़िए Bound by Fate ❤️
आपके कीमती Likes, Reviews और Comments का इंतजार रहेगा। ❤️

मेरा नाम नेहा गोयल है।
और पिछले दो वर्ष से मैं प्रतिलिपि पर कहानियां लिखती आ रही हूँ।
मुझे लेखन करते हुए बहुत ही अच्छा लगता है।
वैसे मुझे लिखने से पढ़ना ज्यादा पसंद है।


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