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Bound by fate

पढ़ने का समय : 7 मिनट

भाग 2

राधे राधे दोस्तों ❤️

 

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करीब एक घंटे बाद…

 

गाड़ी एक बड़े और आलीशान विला के सामने आकर रुकी।

 

गाड़ी की हेडलाइट पड़ते ही सामने खड़ा गार्ड तुरंत चौकन्ना हो गया और उसने विला का बड़ा-सा गेट खोल दिया।

 

गाड़ी अंदर दाखिल हुई और कुछ ही सेकंड बाद पोर्च में जाकर रुक गई। बारिश अब भी तेज थी। ड्राइवर तुरंत बाहर निकला और उसने पिछली सीट का दरवाजा खोला।

 

रूद्रांश गाड़ी से बाहर आया। उसकी नजर लड़की पर गई। वह अब भी बेहोश थी। चेहरा हल्का पीला पड़ चुका था। होंठ सूख गए थे और भीगे हुए कपड़े उसके शरीर से चिपके हुए थे।

 

रूद्रांश ने बिना कुछ सोचे उसे अपनी बाहों में उठा लिया।

 

तभी पास खड़े एक नौकर ने हैरानी से पूछा, “सर… ये कौन हैं?” क्योंकि आजतक कभी किसी ने रुद्रांश के साथ किसी लड़की को नहीं देखा था। 

 

रूद्रांश ने उसकी तरफ घूरकर देखा। “फालतू सवाल मत पूछो। जल्दी जाकर दरवाजा खोलो।”

 

नौकर तुरंत दरवाजा खोलकर एक तरफ हट गया। रूद्रांश लड़की को लेकर अंदर चला गया। विला अंदर से बेहद शानदार था।

 

ऊंची छतों से लटकते खूबसूरत झूमर, सफेद संगमरमर की चमचमाती फर्श, दीवारों पर लगी महंगी पेंटिंग्स और सलीके से सजाया गया विशाल हॉल…

 

हर चीज रूद्रांश की हैसियत की कहानी बयां कर रही थी। 

लेकिन इस वक्त उसे इनमें से किसी चीज की परवाह नहीं थी।

 

वह सीधे सीढ़ियों से ऊपर गया और एक कमरे का दरवाजा खोलकर लड़की को बेड पर लिटा दिया। पीछे आया नौकर दरवाजे पर ही रुक गया। “साहब… डॉक्टर को बुला दूं?”

 

रूद्रांश ने लड़की की तरफ देखते हुए कहा, “हां। और जल्दी।”

 

“जी, साहब।” नौकर तुरंत वहां से चला गया।

 

कमरे में अब सिर्फ रूद्रांश और वो अनजान लड़की थे। रूद्रांश कुछ पल तक उसे देखता रहा।

 

उसने अपने गीले बालों पर हाथ फेरा और फिर अपना जैकेट उतारकर पास रखी कुर्सी पर डाल दिया।

 

उसकी नजर लड़की के चेहरे पर टिक गई। “तुम आखिर हो कौन?”

 

उसने धीमे से कहा। लेकिन सामने लेटी उस लड़की के पास उसके सवाल का कोई जवाब नहीं था।

 

या शायद… उस जवाब तक पहुंचने के लिए रूद्रांश को उसकी जिंदगी के कई बंद दरवाजे खोलने पड़ने वाले थे।

 

और उसे अभी ये अंदाजा भी नहीं था कि जिस लड़की को वह आज रात सिर्फ इंसानियत के नाते अपने घर लेकर आया है… वही लड़की बहुत जल्द उसकी पूरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत…

 

और सबसे दर्दनाक हिस्सा बनने वाली है। 

 

फिर उसने कॉरिडोर में रेलिंग के पास खड़े होकर अपने विला में काम कर रही एक फीमेल हाउस हेल्प को आवाज लगाई। “जेनिफ़र!”

 

आवाज पूरे हॉल में गूंजी। कुछ ही सेकंड में एक अधेड़ उम्र की महिला तेजी से वहां पहुंची।

 

वो जेनिफ़र थी। पिछले कई सालों से वो रूद्रांश के विला में काम कर रही थी और उसे अच्छी तरह जानती थी।

“जी, सर?”

 

रूद्रांश ने कहा, ” जल्दी से मेरे रूम में आओ और उस लड़की के कापड़े चेंज कर दो। “

जेनिफर तुरंत ऊपर आ गई।

फिर वह कुछ पल के लिए रुका और क्लोसेट की तरफ बढ़ गया।

 

उसने वहां से अपना एक ढीला-सा कुर्ता निकाला और जेनिफ़र की तरफ बढ़ा दिया। “ये पहना देना।”

 

जेनिफ़र ने तुरंत कुर्ता ले लिया। उसकी नजर अब लड़की पर थी। उसके कपड़े पूरी तरह भीगे हुए थे और ठंड की वजह से उसका शरीर हल्का-हल्का कांप रहा था।

जेनिफ़र ने ध्यान से देखा तो उसकी कलाई पर चोट के गहरे निशान नजर आए।

 

गर्दन के पास भी खरोंचें थीं। चेहरे पर चोट के हल्के निशान अब पहले से ज्यादा साफ दिखाई दे रहे थे।

जेनिफ़र के चेहरे पर चिंता उभर आई।

उसे देखकर साफ लग रहा था कि इस लड़की ने सिर्फ बारिश में रात नहीं बिताई थी…

बल्कि वो किसी बहुत बुरे दौर से गुजरकर यहां तक पहुंची थी।

 

जेनिफ़र ने बिना कोई सवाल किए जल्दी से उसके कपड़े बदल दिए और बाहर चली गई।

 

तब तक रूद्रांश भी अपने कपड़े बदल चुका था। कुछ देर बाद… रूद्रांश कमरे में वापस आया।

वह बेड के सिरहाने जाकर बैठ गया और सामने लेटी लड़की को गौर से देखने लगा।

 

अब वह पहले से ज्यादा साफ दिखाई दे रही थी। गोरा रंग… बड़ी-बड़ी आंखें, जिन पर घनी और लंबी पलकें थीं… गुलाबी होंठ… और निचले होंठ के ठीक नीचे एक छोटा-सा तिल।

 

छोटी-सी नाक, जिसमें एक नन्ही-सी नोज पिन चमक रही थी। वो लड़की किसी मासूम-सी तस्वीर की तरह लग रही थी।

 

रूद्रांश की नजर कुछ पल उसके चेहरे पर ठहर गई।

उसे खुद समझ नहीं आया कि वह इस अनजान लड़की को इतनी गौर से क्यों देख रहा था। बाहर बारिश अब धीमी पड़ चुकी थी।

 

खिड़की के शीशों पर गिरती बूंदों की आवाज कमरे में एक अजीब-सी खामोशी पैदा कर रही थी। कमरे में जल रही हल्की पीली रोशनी उसके चेहरे पर पड़ रही थी।

चेहरा बेहद मासूम था…

 

लेकिन उन बंद आंखों के पीछे जैसे कोई बहुत गहरा राज छिपा हुआ था। कुछ ही देर बाद डॉक्टर भी वहां पहुंच गए।

 

रूद्रांश तुरंत उठकर एक तरफ हो गया। डॉक्टर ने अपना बैग खोला और लड़की की जांच शुरू कर दी।

उन्होंने उसकी नब्ज चेक की। फिर उसकी कलाई, गर्दन और चेहरे पर मौजूद चोटों को ध्यान से देखा।

 

रूद्रांश की गहरी नजरें लगातार डॉक्टर पर टिकी हुई थीं।

जैसे वह डॉक्टर की हर बात से इस लड़की के बारे में कुछ समझ लेना चाहता हो।

 

कुछ देर जांच करने के बाद डॉक्टर ने गहरी सांस ली।

“मिस्टर शेखावत…”

 

रूद्रांश की नजरें डॉक्टर पर टिक गईं। “क्या हुआ है इसे?”

 

डॉक्टर ने गंभीर आवाज में कहा, “ऐसा लग रहा है कि इस लड़की के साथ काफी ज्यादती हुई है। इसके शरीर पर कई जगह चोटों के निशान हैं। कुछ चोटें पुरानी हैं और कुछ बिल्कुल ताजा।”

 

रूद्रांश की आंखों में अचानक गुस्सा उतर आया।

उसकी उंगलियां धीरे-धीरे मुट्ठी में बदल गईं।

लेकिन उसने कुछ नहीं कहा।

 

डॉक्टर ने आगे कहा, “मुझे लगता है कि ये लड़की किसी बहुत बड़े सदमे से गुजरी है। इसी वजह से इसकी हालत ऐसी है।”

 

रूद्रांश की नजर एक बार फिर लड़की पर चली गई।

उसका मासूम चेहरा देखकर उसके जबड़े कस गए।

डॉक्टर कुछ पल रुके और फिर बोले, “और एक बात…”

रूद्रांश ने उनकी तरफ देखा। “इसे शायद कई घंटों से कुछ भी खाने को नहीं मिला है। शरीर में काफी कमजोरी है। इसी वजह से ये बेहोश हुई होगी।”

 

डॉक्टर ने अपने बैग से एक इंजेक्शन निकाला। “मैंने इसे इंजेक्शन दे दिया है। उम्मीद है कि सुबह तक इसे होश आ जाएगा।” फिर उन्होंने कुछ दवाइयां निकालकर रूद्रांश की तरफ बढ़ा दीं। “होश में आने के बाद इसे कुछ हल्का और पौष्टिक खाना दीजिएगा। और ये दवाइयां समय पर देनी होंगी।”

 

रूद्रांश ने बिना कुछ कहे सारी दवाइयां ले लीं।

डॉक्टर अपना सामान समेटकर कमरे से बाहर चले गए।

दरवाजा बंद होते ही कमरे में फिर से खामोशी छा गई।

रूद्रांश धीरे से बेड पर बैठ गया।

लड़की की सांसें अब पहले से थोड़ी सामान्य थीं।

उसका चेहरा अभी भी पीला था और माथे पर हल्की शिकन थी।

 

जैसे नींद में भी कोई बुरा सपना उसका पीछा कर रहा हो।

रूद्रांश कुछ देर उसे देखता रहा।

फिर धीमी आवाज में बोला, “आखिर हो कौन तुम?”

 

कोई जवाब नहीं आया। उसने उसकी तरफ देखते हुए दोबारा कहा, “और किसने तुम्हें इस हालत में पहुंचाया?”

खामोशी…

 

बाहर बारिश लगभग थम चुकी थी। रात और गहरी हो गई थी। रूद्रांश ने अपनी जेब से सिगरेट निकाली।

उसने सिगरेट होंठों के बीच रखी और लाइटर निकालने ही वाला था कि एक पल के लिए उसकी नजर सामने सो रही लड़की पर गई।

 

कुछ सेकंड तक वह उसे देखता रहा। फिर उसने सिगरेट वापस अपनी जेब में रख ली।

शायद उसे खुद भी नहीं पता था कि उसने ऐसा क्यों किया।

 

रूद्रांश उठकर सोफे पर जाकर

  • लेट गया।

वह इस अनजान लड़की के बारे में सोचता रहा।

लेकिन कब उसकी आंखें लग गईं…

उसे खुद पता नहीं चला।

 

कहानी आगे जारी रहेगी…🙏🏻

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