प्यार करते हो तो तड़पाते क्यों हो,
दिल में बसाकर यूँ रुलाते क्यों हो।
कहते हो जान हो मेरी हर घड़ी,
फिर दूर रहकर ये सताते क्यों हो।
वादा किया था साथ निभाने का,
हर मोड़ पे हाथ थाम जाने का,
फिर खामोशी की चादर ओढ़कर,
मुझसे ही नज़रें चुराते क्यों हो।
मेरे ख्वाबों में तुम ही तुम रहते हो,
फिर हकीकत में बदल जाते क्यों हो।
प्यार करते हो अगर सच्चे दिल से,
तो हर बात पे यूँ आज़माते क्यों हो।
दिल की हर धड़कन तेरे नाम कर दी,
हर खुशी तेरे अरमान कर दी,
फिर मेरी मोहब्बत को यूँ सवाल बना कर,
मुझको ही गलत ठहराते क्यों हो।

NSW. उभरते लेखक 🥈
चाहतों का ऊंचा मुकाम रखती हूं
शब्दो के जरिए अनेकों एहसास लिखती हूँ।