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अधूरी इबादत भाग~18

पढ़ने का समय : 6 मिनट

भाग~18 इमोशन्स का बीमा

पंजीकरण कार्यालय की उस सफ़ेद, ठंडी दीवारों वाली बिल्डिंग में ~भी उस वक़्त एक अजीब सी गर्माहट फैल गई थी, जब रुहानी के हाथों में काग़ज़ का वो पुलिंदा रखा गया – अद्वैत द्वारा तैयार किया गया विवाह अनुबंध। 

बाहर हल्की धूप थी, अंदर ट्यूब लाइट की सफेद रौशनी और दोनों के बीच कुछ ऐसा था जो रौशनी से ज़्यादा कुछ कहता था…. एक मौन संवाद। 

रुहानी के हाथ काँपते नहीं रहे थे, पर उसकी आँखें एक-एक शब्द पर रुकती चली जा रही थीं, जैसे कोई मन के अंदर झाँकने का हक़ मांग रहा हो।

उसके सामने अद्वैत खड़ा था, एकदम शांत, जैसे उसने अपने भीतर की हर हलचल को ताले में बंद कर रखा हो। वो कुछ नहीं बोल रहा था, बस रुहानी के चेहरे को पढ़ रहा था…. उसकी हर मरोड़, हर रुकावट, हर सांस की गहराई को। 

उधर रुहानी, एक-एक शब्द पढ़ती जा रही थी…..

विवाह अनुबंध-पत्र (Contract Marriage Agreement)

(स्वतंत्रता, सीमाओं और गोपनीयता के स्पष्ट निर्देशों सहित)

पक्ष 1:

नाम: अद्वैत अवस्थी

उम्र: 28 वर्ष

पेशा: लेखक एवं सामाजिक वक्ता

निवास: विमान नगर, पुणे

 

पक्ष 2:

नाम: रुहानी चौहान

उम्र: 24 वर्ष

पेशा: स्वतंत्र वस्त्र डिज़ाइनर

निवास: हडपसर, पुणे८

स्पष्ट और पारदर्शी शर्तें: (Clear and Transparent Terms)

1. यह विवाह केवल एक सामाजिक औपचारिकता है, जो एक वर्ष तक सीमित रहेगा।

2. यह विवाह दिखावे का है, लेकिन इ⁹सके बावजूद किसी भी प्रकार के अतिरिक्त विवाहिक संबंध (extra-marital affair) की अनुमति नहीं होगी।

3. दोनों के कमरे अलग-अलग होंगे। कोई भी पक्ष बिना पूर्व अनुमति के दूसरे के निजी स्थान में प्रवेश नहीं करेगा।

4. शारीरिक संपर्क केवल सार्वजनिक मौकों पर “विवाहित जोड़े” की छवि बनाए रखने के लिए सीमित होगा, और वह भी केवल सामाजिक मर्यादाओं के भीतर।

5. अनुबंध की अवधि में किसी भी प्रकार की शारीरिक निकटता की कोई अनिवार्यता नहीं होगी। न कोई अपेक्षा, न कोई ज़ोर।

6. यह स्पष्ट रूप से समझा जाता है कि “दिल लगाना मना है” (falling in love is not allowed)…… किसी भी भावनात्मक जुड़ाव की कोई ज़रूरत या बाध्यता नहीं है।

7. कोई भी inappropriate या असहज करने वाला स्पर्श, शब्द या व्यवहार इस अनुबंध का उल्लंघन माना जाएगा।

8. दोनों अपने-अपने पेशेवर जीवन में पूर्ण स्वतंत्र रहेंगे। कोई भी एक-दूसरे के काम में हस्तक्षेप नहीं करेगा, न आलोचना, न सलाह बिना माँगे।

9. दोनों को अपने सामाजिक, व्यक्तिगत और मानसिक क्षेत्र में स्वतंत्रता का पूरा अधिकार है।

10. इस अनुबंध की जानकारी एक सीमित दायरे तक ही रखी जाएगी: सिर्फ अद्वैत, रुहानी, उनके वकील और मैनेजर तक।

11. यदि इस अनुबंध की कोई भी शर्त का उल्लंघन होता है, तो यह समझा जाएगा कि अनुबंध समाप्त हो चुका है। फिर दोनों पक्ष एक-दूसरे से पूर्णतः अजनबी हो जाएंगे, और इस शर्त के उल्लंघन करने वाले को किसी भी तरह की कोई बात करने का अधिकार नहीं होगा।

 

हस्ताक्षर:

पक्ष 1 (अद्वैत अवस्थी): _______________

पक्ष 2 (रुहानी चौहान): _______________

विधिक सलाहकार: _______________

तिथि: _______________

 

रुहानी ने अनुबंध के पहले कुछ खंडों को पढ़ते हुए महसूस किया कि यह किसी और दुनिया का समझौता था। यह अनुबंध उससे दूर था, फिर भी जैसे वह खुद को इसमें बांधने जा रही हो।

“दोनों के कमरे अलग-अलग होंगे… दिल लगाना मना है… कोई भी शारीरिक निकटता अनुबंध का हिस्सा नहीं होगी…” जैसे हर शब्द उसकी सोच में एक छोटी सी सुई चुभो रहा हो, मगर दर्द की जगह एक अजीब किस्म की ठंडक भर रही थी।

“कमाल है…” उसने हल्की सी हँसी में फुसफुसाया, बिना अद्वैत की तरफ़ देखे, “तुमने तो हर इमोशन का बीमा करवा लिया है इस कॉन्ट्रैक्ट में।”

अद्वैत ने पहली बार पलकें झपकाईं, फिर बहुत धीरे से कहा, “इमोशन्स ही तो सबसे ज़्यादा नुकसान करते हैं और मुझे अब कोई भी नुकसान नहीं चाहिए।”

रुहानी आगे पढ़ी। अगली शर्त थी….‘पब्लिक प्लेस में साथ दिखना होगा, पर कोई भी स्पर्श मर्यादित रहेगा। सिर्फ़ दिखावे के लिए।’

“मतलब… हमें भीड़ में हाथ पकड़ना होगा, पर एक छत के ही नीचे होने पर कोई स्पर्श नहीं होगा?” उसकी आवाज़ में एक टुकड़ा था…न गुस्से का, न दुःख का… बस एक उलझा हुआ विस्मय।

अद्वैत ने सिर झुकाया, जैसे मान लेना चाहता हो कि हाँ, ये सब शायद असहज है, पर है ज़रूरी।

“ये सब ज़रूरी है, रुहानी,” उसने नज़रों को दूर खिड़की की दिशा में टिकाते हुए कहा, “मेरे करियर की एक धारणा है, जो टूटी तो सब बिखर जाएगा। मुझे अपने शब्दों को बचाना है… और अब… अपना चेहरा भी।”

रुहानी की आँखें कुछ पल के लिए अद्वैत की आंखों पर टिक गईं, जैसे उसकी पुतली में कोई अनकहा डर देख रही हों। फिर वो बोली, धीरे, लेकिन बिलकुल साफ़…. “मेरे लिए भी तो ज़रूरी है अब ये सब। पापा के मेरी मर्ज़ी के खिलाफ, जबरदस्ती उनकी पसंद के दकियानूसी सोच वाले इंसान से शादी करने से तो ये झूठी शादी ही सही… कम से कम यहाँ मेरी रज़ामंदी तो है और वैसे भी मुझे भी तो अपने प्रोफेशन में सेटल होने के लिए वक्त चाहिए।”

उसके शब्दों में आंसू नहीं थे, लेकिन आवाज़ जैसे किसी जले हुए पत्ते पर चल रही थी… खुरदरी, सूखी, फिर भी सच्ची। अद्वैत ने उसे गौर से देखा, पहली बार जैसे उसकी मजबूरी की असल शक्ल को पहचाना हो। कमरा कुछ देर के लिए सांस लेना भूल गया था।

रुहानी ने आख़िरी पन्ने पर दस्तख़त करने से पहले काग़ज़ को हल्के से मोड़ा, जैसे कोई किताब के किसी अधूरे अध्याय को दबा कर रख देता है… ताकि कोई और उस अधूरेपन को महसूस न कर पाए।

रजिस्टार ने दोनों से कहा, “अब आप दोनों एक दूसरे को वरमाला पहनाएं ताकि यह पूरी प्रक्रिया असली शादी जैसा लगे।” कमरे में खामोशी छा गई। अद्वैत और रुहानी एक दूसरे को देखते रहे, जैसे दोनों एक अजीब सी स्थिति में फंसे हों। उनकी आँखों में सवाल था, न जाने कितना कुछ कहना चाहते थे, पर शब्द नहीं मिल रहे थे।

अद्वैत की आँखों में कुछ छिपा हुआ था, जैसे वह खुद को इस पल से बाहर निकालने का रास्ता ढूँढ़ रहा हो। रुहानी ने धीमे से कहा, “हम दोनों खुद ही माला पहन लेते हैं,” और अद्वैत ने भी हामी भरी, मानो वह इस छोटी सी समझौते में अपने कर्तव्यों से बाहर आना चाहता हो।८

वकील ने कहा, “जैसा आप दोनों चाहें, वैसा ही सही,”

फिर दोनों ने बिना किसी और शब्दों के खुद के गले में माला डाल दी. वकील की मंजूरी के बाद, जब वे कमरे से बाहर निकले, तो रुहानी का छोटा भाई यश वहाँ खड़ा था। 

जैसे ही उसने रुहानी को देखा, खुशी से दौड़ते हुए उसके गले लग गया और बोला, “अब पापा की जबरदस्ती किसी और जगह शादी नहीं कर पाएंगे, मैं बहुत खुश हूं आपके लिए।” उसका चेहरा जैसे किसी छोटे बच्चे की खुशी से भर गया हो, और रुहानी के मन में एक हल्की सी राहत महसूस हुई। 

अद्वैत ने चुपचाप देखा, मानो वह इस नये रिश्ते में खुद को थोड़ा और खोता जा रहा हो, पर उसकी आँखों में कोई अजीब सी गहराई थी, जैसे वह इस रिश्ते के बारे में बहुत कुछ सोच रहा हो।

यश खुशी से अद्वैत के पास आकर बोला, “जीजाजी तो बोल सकता हूं न अब आपको, चलिए मेरे साथ मेरे पापा के घर, अब पापा भी जान जाएंगे कि रूहानी दीदी की शादी हो गई है तो अब सब ठीक हो जाएगा।” यश की आवाज में उम्मीद और राहत थी, जैसे उसने किसी बड़े संकट से निकलने का रास्ता पा लिया हो।

लेकिन अद्वैत और रूहानी एक दूसरे को प्रश्नवाचक नजरों से देखकर उस बात पर चुप रहे। उनके दिलों में अनकहे सवाल थे…..क्या सच में सब ठीक हो जाएगा? 

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क्या ये अनुबंध दोनों के लिए यह एक ऐसा चक्रव्यूह बन जाएगा, जिसमें वे खुद ही फंसते चले जाएंगे? 

अद्वैत और रुहानी के बीच एक अदृश्य दीवार खड़ी थी, जो टूटेगी या फिर और मजबूत होगी?

क्या वे सच में अपनी इच्छाओं और डर से बच पाएंगे, या यह शादी उन्हें उन भावनाओं के सबसे करीब ले आएगी, जिनसे बचने के लिए उन्होंने ये अनुबंध किया था?

 

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