“तुम जैसी बेवफा लड़की मैंने आज तक नहीं देखी!”
रोहन की आवाज़ पूरे मोहल्ले में गूंज रही थी। उसके हाथ में एक शादी का कार्ड था और सामने खड़ी थी नंदिनी, जिसकी आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे।
“आज के बाद कभी अपनी शक्ल मत दिखाना मुझे। तुमने सिर्फ मेरा दिल नहीं तोड़ा, मेरे भरोसे को भी मार दिया।”
इतना कहकर रोहन वहां से चला गया।
नंदिनी चाहकर भी उसे रोक नहीं पाई। उसके होंठ कांप रहे थे, लेकिन शब्द जैसे गले में ही अटक गए थे।
उस दिन उसने सिर्फ एक बात धीरे से कही थी…
“हकीकत क्या थी, ये कभी तुमने जाना ही नहीं… और मुझे दे दिया एक नया नाम—बेवफा।”
लेकिन उस आवाज़ को सुनने वाला वहां कोई नहीं था।
रोहन और नंदिनी एक ही कॉलेज में पढ़ते थे। दोस्ती हुई, फिर दोस्ती कब प्यार में बदल गई, दोनों को खुद भी पता नहीं चला।
चार साल तक दोनों ने हर सपना साथ देखा था।
रोहन हमेशा कहता था, “अगर मेरी जिंदगी में कोई सबसे जरूरी है, तो वो सिर्फ तुम हो।”
नंदिनी मुस्कुराकर जवाब देती, “और मेरी दुनिया भी तुमसे ही शुरू होकर तुम पर ही खत्म होती है।”
दोनों ने शादी करने का फैसला भी कर लिया था।
लेकिन जिंदगी हमेशा इंसान की सोच के हिसाब से नहीं चलती।
एक दिन नंदिनी के पिता को अचानक हार्ट अटैक आ गया।
घर में पहले से ही बहुत कर्ज था। इलाज के लिए पैसे नहीं थे।
उसी समय एक अमीर परिवार ने रिश्ता भेजा।
लड़के का नाम आदित्य था। उसने साफ कहा था, “अगर नंदिनी शादी के लिए हां कह दे, तो मैं उसके पिता का पूरा इलाज करवाऊंगा और उनका सारा कर्ज भी चुका दूंगा।”
नंदिनी के सामने एक तरफ उसका प्यार था…
और दूसरी तरफ उसके पिता की सांसें।
उसने पूरी रात रो-रोकर बिताई।
सुबह जब अस्पताल में डॉक्टर ने कहा, “अगर जल्दी ऑपरेशन नहीं हुआ तो मरीज को बचाना मुश्किल होगा।”
तब उसने अपने दिल को मार दिया।
उसने आदित्य से शादी के लिए हां कह दी।
लेकिन रोहन को कुछ भी नहीं बताया।क्योंकि उसे पता था…
अगर वह सच बताएगी, तो रोहन अपनी जान तक लगा देगा।
वह कर्ज लेगा…
घर बेच देगा…
अपना भविष्य खत्म कर देगा और नंदिनी कभी नहीं चाहती थी कि उसकी वजह से रोहन बर्बाद हो।
इसलिए उसने खुद को ही गलत बना लिया।
जब रोहन को नंदिनी की शादी की खबर मिली, तो उसकी पूरी दुनिया उजड़ गई।
उसने नंदिनी को फोन किया। लेकिन नंदिनी ने फोन नहीं उठाया।
उसने मैसेज किया।
“बस एक बार मिल लो। लेकिन कोई जवाब नहीं आया।
असल में नंदिनी हर मैसेज पढ़ती थी…और रोते-रोते फोन बंद कर देती थी।
उसे डर था कि अगर उसने एक बार भी रोहन की आवाज़ सुन ली, तो वह अपने फैसले से पीछे हट जाएगी।
शादी हो गई। रोहन टूट गया।
उसने अपने दोस्तों से सिर्फ एक बात कही—
“जिस लड़की के लिए मैं सब कुछ छोड़ सकता था… उसने मुझे पैसों के लिए छोड़ दिया।”
धीरे-धीरे यही बात सबकी जुबान पर आ गई।
हर कोई नंदिनी को एक ही नाम से बुलाने लगा…
“बेवफा।”
शादी के बाद नंदिनी की जिंदगी बिल्कुल वैसी नहीं थी जैसी लोगों ने सोची थी।
आदित्य बुरा इंसान नहीं था।
उसे शादी से पहले ही सब सच पता चल गया था।
उसने एक दिन नंदिनी से कहा,
“मैं जानता हूं कि तुम्हारे दिल में किसी और का नाम है। मैंने सिर्फ एक इंसान की जान बचाने के लिए तुमसे शादी की है। मैं कभी तुम पर किसी रिश्ते का दबाव नहीं डालूंगा।”
ये सुनकर नंदिनी और भी ज्यादा रो पड़ी।
वह हर रात अपने कमरे में बैठकर रोहन की पुरानी तस्वीरें देखती।
लेकिन कभी उसे फोन नहीं करती।
क्योंकि अब उसके पास कोई हक नहीं बचा था।
उधर रोहन ने खुद को काम में डुबो दिया।
उसने कभी शादी नहीं की।
जब भी कोई उससे शादी की बात करता, वह सिर्फ मुस्कुरा देता।
लेकिन उसकी मुस्कान में दर्द साफ दिखाई देता था।
पांच साल बीत गए।
एक दिन रोहन की मां की तबीयत अचानक खराब हो गई।
उन्हें उसी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां कभी नंदिनी के पिता का इलाज हुआ था।
वहीं अस्पताल में रोहन की मुलाकात पुराने डॉक्टर से हुई।
डॉक्टर ने उसे पहचान लिया।
बातों-बातों में उन्होंने कहा,
“तुम वही रोहन हो ना? नंदिनी वाला लड़का?”
रोहन चुप रहा।
डॉक्टर बोले,बहुत बड़ी लड़की थी वो। अपने पिता को बचाने के लिए उसने अपना प्यार कुर्बान कर दिया।
रोहन ने चौंककर पूछा,”क्या मतलब?”
फिर डॉक्टर ने उसे पूरी कहानी बता दी।कर्ज…
ऑपरेशन…
समझौता…और नंदिनी की खामोश कुर्बानी।
रोहन के पैरों तले जमीन खिसक गई।
उसकी आंखों से आंसू अपने आप बहने लगे।
उसे पहली बार एहसास हुआ…
जिसे वह पांच साल से बेवफा कहता रहा…
असल में वह सबसे ज्यादा वफादार थी।
रोहन उसी शाम नंदिनी के घर पहुंच गया।
दरवाजा आदित्य ने खोला।
रोहन ने कांपती आवाज़ में पूछा,”क्या मैं नंदिनी से मिल सकता हूं?”
आदित्य ने कुछ पल उसे देखा…
फिर बिना कुछ कहे अंदर जाने का इशारा कर दिया।
नंदिनी बरामदे में बैठी थी।
वह पहले से बहुत कमजोर लग रही थी।
रोहन को देखकर उसकी आंखें भर आईं।
कुछ देर दोनों सिर्फ एक-दूसरे को देखते रहे।
फिर रोहन उसके सामने घुटनों पर बैठ गया।
“मुझे माफ कर दो…”
नंदिनी ने धीरे से पूछा,
“किस बात के लिए?”
रोहन रो पड़ा।
“मैंने तुम्हें समझने की कोशिश ही नहीं की। तुम्हारी आंखों के पीछे छिपे दर्द को पढ़ा ही नहीं। बस लोगों की बातों पर यकीन कर लिया और तुम्हें बेवफा कह दिया।”
नंदिनी की आंखों से भी आंसू बह निकले।
वह बोली,
“मैं चाहती तो सच बता सकती थी… लेकिन फिर तुम्हारी जिंदगी बिखर जाती। मैं नहीं चाहती थी कि मेरे प्यार की कीमत तुम अपनी पूरी जिंदगी देकर चुकाओ।”
दोनों बहुत देर तक रोते रहे।
लेकिन अब वक्त उनके हाथ से निकल चुका था।
कुछ महीनों बाद नंदिनी गंभीर रूप से बीमार पड़ गई।
लगातार तनाव और दुख ने उसके शरीर को कमजोर कर दिया था।
अस्पताल के कमरे में उसकी आखिरी सांसें चल रही थीं।
रोहन उसके पास बैठा था।
नंदिनी ने कांपते हुए उसका हाथ पकड़ा और मुस्कुराकर बोली,
“देखो… इस बार रोना मत। मैं जा रही हूं, लेकिन एक बात याद रखना… किसी भी रिश्ते का फैसला सिर्फ सुनी-सुनाई बातों से मत करना। कभी-कभी जो इंसान सबसे ज्यादा गलत दिखाई देता है, वही सबसे ज्यादा टूटकर प्यार करता है।”
रोहन की आंखों से आंसू रुक नहीं रहे थे।
नंदिनी ने आखिरी बार उसकी तरफ देखा और बहुत धीमी आवाज़ में कहा,
“हकीकत क्या थी… ये तुमने आखिर जान ही लिया… बस अफसोस इतना है कि थोड़ा देर से।”
इतना कहकर उसकी आंखें हमेशा के लिए बंद हो गईं।
नंदिनी के जाने के बाद रोहन अक्सर उसकी कब्र पर बैठा करता था।
एक दिन उसने वहां एक छोटा-सा पत्थर लगवाया, जिस पर सिर्फ एक पंक्ति लिखी थी
“जिसे दुनिया ने बेवफा कहा… वह अपने प्यार की सबसे सच्ची मिसाल थी।”
उस दिन रोहन ने आसमान की ओर देखते हुए कहा,
“काश… मैंने लोगों की बातें सुनने से पहले तुम्हारी खामोशी सुन ली होती। शायद आज मेरी जिंदगी इतनी खाली न होती।”
हवा का एक हल्का झोंका आया, जैसे किसी ने उसके आंसू चुपचाप पोंछ दिए हों।
और उस दिन रोहन को समझ आया कि हर अधूरी प्रेम कहानी में कोई बेवफा नहीं होता…
कभी-कभी सिर्फ हालात ही इतने बेरहम होते हैं कि सच्चे प्यार को भी दुनिया बेवफाई का नाम दे देती है।

मैं हर बार कुछ बेहतर की कोशिश करती हूं
अपनी कलम से जज़्बात लिखा करती हूं


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