उसने पूछा—
“तू मुझे देखती भी नहीं…
क्या तुझे मुझसे मोहब्बत है?”
मैं मुस्कुरा दी…
मोहब्बत नहीं होती तो यूँ नज़रें क्यों चुराती?
मुझमें बस हिम्मत नहीं है।
डर लगता है…
कहीं तुम्हें देखते-देखते
खुद को ही न भूल बैठूँ।
कहीं तुम्हारी आँखों में ऐसा खो जाऊँ
कि फिर इस दुनिया का कोई ख़याल ही न रहे।
इसलिए नज़रें झुका लेती हूँ…
क्योंकि एक बार जो तुम्हें देख लिया,
फिर नज़रें हटाना मेरे बस में
नहीं रहता।

NSW नया लेखक – 🥉

प्रातिक्रिया दे