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अधूरी मुहब्बत की डायन

पढ़ने का समय : 6 मिनट

अधूरी मोहब्बत की डायन

 

पहाड़ों के बीच बसे एक छोटे से गांव के किनारे एक पुरानी हवेली थी। गांव वाले कहते थे कि वहां एक शातिर डायन रहती है। उसका नाम मायरा था। लोग कहते थे कि जिसने भी उसकी आंखों में देख लिया, वह कभी वापस नहीं लौटा। बच्चे शाम ढलते ही घरों में बंद हो जाते और बड़े भी उस रास्ते से गुजरने की हिम्मत नहीं करते।

 

लेकिन कोई नहीं जानता था कि मायरा हमेशा से डायन नहीं थी।

 

सालों पहले वह एक बेहद खूबसूरत लड़की थी। उसके चेहरे पर ऐसी मुस्कान थी कि हर कोई उसे देखकर खुश हो जाता। वह जंगल से जड़ी-बूटियां लाकर गांव वालों का इलाज करती थी। मगर गांव के कुछ लालची लोगों को उसका हुनर पसंद नहीं था। उन्होंने उस पर काला जादू करने का झूठा इल्जाम लगा दिया।

 

उसी गांव में आरव नाम का एक युवक रहता था। वह मायरा से दिल ही दिल में प्यार करता था और मायरा भी उसे अपनी पूरी दुनिया मानती थी।

 

एक शाम आरव ने कहा, “मायरा, मैं जल्दी ही तुम्हें अपने घर की बहू बनाऊंगा। चाहे पूरी दुनिया हमारे खिलाफ हो जाए।”

 

मायरा मुस्कुरा दी। “बस इतना वादा है कि कभी मेरा साथ मत छोड़ना।”

 

लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

 

गांव वालों ने मायरा को पकड़कर जंगल के बीच बने पुराने मंदिर में जिंदा जलाने का फैसला कर लिया। आरव ने उसे बचाने की बहुत कोशिश की, लेकिन कुछ लोगों ने उसे बांध दिया।

 

आग की लपटों में घिरी मायरा की आखिरी चीख पूरे जंगल में गूंज उठी।

 

“अगर मेरा प्यार अधूरा रहा… तो मेरी आत्मा कभी शांति नहीं पाएगी…”

 

उस रात तेज तूफान आया। बिजली कड़की और मंदिर के पास खड़ा बरगद का पेड़ दो हिस्सों में टूट गया।

 

अगली सुबह मायरा की राख तो मिली, लेकिन उसका शरीर नहीं।

 

उस दिन के बाद गांव में अजीब घटनाएं होने लगीं।

 

रात होते ही लोगों को सफेद साड़ी पहने एक औरत दिखाई देती। जो भी उसका पीछा करता, वह हमेशा के लिए गायब हो जाता।

 

धीरे-धीरे लोगों ने उसे शातिर डायन कहना शुरू कर दिया।

 

मायरा अब इंसानों से नफरत करती थी। उसने कसम खा ली थी कि कोई भी प्रेम कहानी पूरी नहीं होने देगी।

 

जिस गांव में शादी होती, वहां कोई न कोई अनहोनी हो जाती।

 

कभी दूल्हा गायब हो जाता, कभी दुल्हन।

 

लोग डर के मारे रात में शादी करना छोड़ चुके थे।

 

लेकिन सच यह था कि मायरा हर प्रेमी जोड़े में खुद और आरव को ढूंढती थी।

 

जब भी वह किसी को खुश देखती, उसका अपना टूटा हुआ दिल फिर से रो पड़ता।

 

एक दिन गांव में विवान नाम का युवक अपनी मां के साथ रहने आया।

 

वह पढ़ा-लिखा और निडर था।

 

गांव वालों ने उसे चेतावनी दी, “हवेली के पास मत जाना। वहां मौत रहती है।”

 

विवान हंसकर बोला, “अगर वहां कोई है, तो उसकी भी कोई कहानी होगी।”

 

एक रात वह सच जानने के लिए हवेली पहुंच गया।

 

अंदर चारों तरफ धूल जमी थी।

 

अचानक ठंडी हवा चली।

 

दरवाजा अपने आप बंद हो गया।

 

पीछे से एक आवाज आई, “यहां आने की हिम्मत कैसे हुई?”

 

विवान ने पलटकर देखा।

 

सामने लाल आंखों वाली एक औरत खड़ी थी।

 

लंबे खुले बाल, सफेद साड़ी और चेहरे पर दर्द से भरी मुस्कान।

 

वह मायरा थी।

 

उसने अपने लंबे नाखून विवान की गर्दन पर रख दिए।

 

“डर नहीं लगता?”

 

विवान बोला, “डर उस इंसान से लगता है जिसके अंदर बुराई हो। तुम्हारी आंखों में तो सिर्फ दर्द दिखाई दे रहा है।”

 

यह सुनकर मायरा कुछ पल के लिए चुप हो गई।

 

सदियों बाद किसी ने उसे राक्षस नहीं, इंसान समझा था।

 

मगर अगले ही पल वह फिर कठोर बन गई।

 

“मेरे पास दया मांगने मत आना।”

 

विवान बोला, “मैं दया नहीं… तुम्हारी कहानी सुनने आया हूं।”

 

मायरा ने पहली बार किसी इंसान को जिंदा छोड़ दिया।

 

उस रात दोनों घंटों तक बात करते रहे।

 

मायरा ने अपनी अधूरी मोहब्बत का हर दर्द उसे बताया।

 

विवान सब सुनता रहा।

 

अगले कई दिनों तक वह रोज हवेली जाने लगा।

 

गांव वालों ने उसे बहुत रोका।

 

लेकिन वह नहीं माना।

 

धीरे-धीरे मायरा के चेहरे पर फिर मुस्कान लौटने लगी।

 

उसे लगने लगा कि शायद इस बार किस्मत उस पर मेहरबान हो जाएगी।

 

लेकिन उसके दिल में एक डर भी था।

 

वह जानती थी कि वह अब इंसान नहीं रही।

 

एक रात उसने विवान से पूछा, “अगर मैं पहले जैसी होती… तो क्या तुम मुझे अपनाते?”

 

विवान ने बिना सोचे कहा, “दिल से चाहने वालों का चेहरा नहीं देखा जाता।”

 

मायरा की आंखों से आंसू बह निकले।

 

सैकड़ों साल बाद उसने फिर किसी पर भरोसा किया।

 

लेकिन किस्मत ने एक बार फिर उसके साथ खेल खेला।

 

गांव वालों को पता चल गया कि विवान रोज हवेली जाता है।

 

उन्होंने फैसला किया कि इस बार डायन का हमेशा के लिए अंत कर देंगे।

 

हथियारों और मशालों के साथ पूरा गांव हवेली पहुंच गया।

 

विवान उनके सामने खड़ा हो गया।

 

“कोई इसे हाथ नहीं लगाएगा।”

 

लोग चिल्लाए, “यह डायन है। इसने हमारे लोगों की जान ली है।”

 

मायरा धीरे-धीरे बाहर आई।

 

उसने गांव वालों को देखा।

 

फिर विवान की तरफ मुस्कुराकर बोली, “आज फिर इतिहास खुद को दोहरा रहा है।”

 

विवान उसका हाथ पकड़ना चाहता था।

 

लेकिन मायरा पीछे हट गई।

 

“नहीं… इस बार मैं तुम्हें खोना नहीं चाहती।”

 

उसने अपनी सारी जादुई शक्ति इकट्ठी की।

 

पूरा आसमान काले बादलों से भर गया।

 

हवा इतनी तेज चलने लगी कि लोगों के हाथों की मशालें बुझ गईं।

 

मगर मायरा ने किसी पर हमला नहीं किया।

 

उसने सिर्फ विवान की तरफ देखा।

 

“मैंने एक बार किसी इंसान से दिल से प्यार किया था… लेकिन उसे कभी पा नहीं सकी। आज फिर वही मोड़ सामने है। अगर इस बार भी तुम्हें अपने पास रखूंगी, तो पूरी दुनिया तुम्हारी दुश्मन बन जाएगी।”

 

विवान की आंखें भर आईं।

 

“मैं तुम्हें छोड़कर नहीं जाऊंगा।”

 

मायरा हल्का-सा मुस्कुराई।

 

“कुछ प्यार साथ रहने के लिए नहीं… याद बन जाने के लिए होते हैं।”

 

इतना कहकर उसने अपना सारा जादू खुद पर ही चला दिया।

 

तेज रोशनी हुई।

 

जब रोशनी खत्म हुई, तो हवेली, काला जादू और मायरा… सब गायब हो चुके थे।

 

वह हमेशा के लिए इस दुनिया से चली गई।

 

विवान वहीं घुटनों के बल बैठकर रोता रहा।

 

उसके हाथ में केवल मायरा की चांदी की एक पुरानी पायल बची थी।

 

उस दिन के बाद उस गांव में फिर कभी किसी ने डायन नहीं देखी।

 

लेकिन हर साल उसी रात हवेली वाली जगह पर रातरानी के फूल अपने आप खिल जाते।

 

लोग कहते हैं कि वह मायरा की

आखिरी निशानी है।

 

वह शातिर जरूर थी, उसने कई लोगों से बदला भी लिया था, लेकिन जब उसने पहली और आखिरी बार किसी इंसान को सच्चे दिल से चाहा, तब भी किस्मत ने उसे उसका प्यार नहीं दिया।

 

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