दुनिया से मेरा नाता
एक छोटे से शहर में विहान नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत शांत स्वभाव का था। उसे भीड़ पसंद नहीं थी और वह अक्सर शहर की भागदौड़ से दूर नदी के किनारे जाकर बैठता था।
लोग उसे देखकर कहते, “पता नहीं यह लड़का इतना चुप क्यों रहता है।”
विहान बस मुस्कुरा देता।
उसकी दादी अक्सर उससे पूछतीं, “बेटा, दुनिया से इतना दूर क्यों भागते हो?”
विहान कहता, “दादी, दुनिया बहुत शोर करती है। मुझे शांति पसंद है।”
दादी हँसकर कहतीं, “दुनिया से नाता तोड़कर शांति नहीं मिलती। दुनिया को समझकर जीना सीखो।”
विहान उनकी बात सुनता, लेकिन पूरी तरह समझ नहीं पाता।
एक दिन उसके पिता ने उसे शहर के बाजार में अपनी दुकान संभालने के लिए कहा।
विहान को यह बिल्कुल पसंद नहीं था।
“मैं दुकान पर बैठकर क्या करूँगा?”
पिता बोले, “लोगों से मिलोगे, उनकी बातें सुनोगे और समझोगे कि जिंदगी सिर्फ अपने बारे में सोचने का नाम नहीं है।”
अगले दिन से विहान दुकान पर बैठने लगा।
पहले दिन ही एक बूढ़ा आदमी आया।
उसने कुछ सामान खरीदा और पैसे देते समय उसके हाथ काँप रहे थे।
विहान ने पूछा, “बाबा, आप ठीक हैं?”
बूढ़े ने मुस्कुराकर कहा, “हाँ बेटा। उम्र हो गई है।”
विहान ने सामान उनके घर तक पहुँचाने की बात कही।
बूढ़े ने मना किया, लेकिन विहान उनके साथ चला गया।
घर पहुँचकर उसे पता चला कि बूढ़ा आदमी अकेला रहता था।
विहान ने पूछा, “आपके बच्चे?”
बूढ़े ने कहा, “सब अपने-अपने शहर में हैं।”
विहान को पहली बार महसूस हुआ कि किसी इंसान की मुस्कान के पीछे भी अकेलापन छिपा हो सकता है।
कुछ दिनों बाद एक छोटी लड़की दुकान पर आई।
उसके पास पैसे कम थे।
वह चुपचाप एक कॉपी उठाकर खड़ी हो गई।
विहान ने पूछा, “पैसे कम हैं?”
लड़की ने सिर झुका लिया।
“हाँ।”
विहान ने उसे कॉपी दे दी।
लड़की ने पूछा, “आप बाकी पैसे नहीं लेंगे?”
विहान मुस्कुराया।
“जब बड़े होकर कमाओ, तब किसी और की मदद कर देना।”
लड़की खुशी से चली गई।
उस दिन विहान देर तक सोचता रहा।
उसे समझ आने लगा कि दुनिया सिर्फ शोर, भीड़ और परेशानी का नाम नहीं है।
इस दुनिया में ऐसे लोग भी हैं जो बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की मदद करते हैं।
एक रात शहर में बहुत तेज बारिश हुई।
नदी का पानी बढ़ने लगा।
कई घरों में पानी घुस गया।
विहान अपने पिता के साथ लोगों की मदद करने निकल पड़ा।
जिस दुनिया से वह दूर रहना चाहता था, उसी दुनिया के लोग उस रात एक-दूसरे का सहारा बने हुए थे।
कोई खाना बाँट रहा था।
कोई बच्चों को सुरक्षित जगह ले जा रहा था।
कोई बुजुर्गों को घर से बाहर निकाल रहा था।
विहान ने देखा कि एक आदमी अपने पड़ोसी के घर से सामान निकालने में मदद कर रहा है, जबकि वह खुद भी मुश्किल में था।
विहान ने पूछा, “आप पहले अपना घर क्यों नहीं देखते?”
आदमी ने कहा, “अगर पड़ोसी का घर डूब गया तो मेरा घर भी सुरक्षित नहीं रहेगा।”
यह बात विहान के दिल में उतर गई।
अगली सुबह बारिश रुक गई।
शहर को बहुत नुकसान हुआ था, लेकिन लोग एक-दूसरे के साथ खड़े थे।
विहान नदी के किनारे गया।
वह काफी देर तक पानी को देखता रहा।
तभी दादी उसके पास आ गईं।
उन्होंने पूछा, “अब भी दुनिया से दूर रहना चाहते हो?”
विहान मुस्कुराया।
“नहीं दादी।”
“क्यों?”
“क्योंकि अब समझ आया है कि दुनिया सिर्फ बुरी चीजों से नहीं बनी। इसमें दुख है तो खुशी भी है, परेशानी है तो मदद करने वाले हाथ भी हैं।”
दादी ने कहा, “अब तुम दुनिया को समझने लगे हो।”
कुछ समय बाद विहान ने फैसला किया कि वह सिर्फ अपने परिवार के लिए नहीं, बल्कि अपने शहर के लिए भी कुछ करेगा।
उसने अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक छोटा-सा समूह बनाया। वे जरूरतमंद बच्चों को किताबें देते, बुजुर्गों की मदद करते और पेड़ लगाते।
शुरुआत में लोग उनका मजाक उड़ाते थे।
“तुम लोग दुनिया बदल दोगे क्या?”
विहान हँसकर कहता, “पूरी दुनिया नहीं, लेकिन किसी एक इंसान की परेशानी जरूर कम कर सकते हैं।”
धीरे-धीरे उनके साथ और लोग जुड़ते गए।
वही शहर, जो विहान को पहले शोर से भरा लगता था, अब उसे अपनेपन से भरा महसूस होने लगा।
एक दिन वही छोटी लड़की, जिसे उसने कॉपी दी थी, उसके पास आई।
अब वह स्कूल की वर्दी में थी।
उसने कहा, “भैया, मैंने आपकी बात याद रखी।”
विहान ने पूछा, “क्या?”
लड़की ने एक दूसरी गरीब बच्ची को कॉपी देते हुए कहा, “जब बड़े होकर कमाओ, तो किसी और की मदद करना।”
विहान की आँखें खुशी से भर आईं।
उसे लगा कि उसकी छोटी-सी मदद अब किसी और के जीवन में आगे बढ़ रही है।
समय बीतता गया।
विहान बड़ा हुआ और उसने शहर छोड़ने के बजाय वहीं रहने का फैसला किया।
लोगों ने पूछा, “तुम बड़े शहर में जाकर ज्यादा पैसे कमा सकते थे।”
विहान मुस्कुराया।
“पैसा जरूरी है, लेकिन अपनेपन की कीमत भी होती है।”
एक शाम वह उसी नदी के किनारे बैठा था, जहाँ वह बचपन में दुनिया से दूर भागकर आया करता था।
अब वही नदी उसे अलग दिखाई दे रही थी।
उसने धीरे से कहा—
“मैं सोचता था दुनिया से मेरा कोई नाता नहीं। लेकिन अब समझ आया कि मेरा नाता तो हर उस इंसान से है जिसे मेरी मदद की जरूरत है।”
उसके पीछे खड़े दादाजी मुस्कुरा रहे थे।
विहान ने आसमान की तरफ देखा।
उसे महसूस हुआ कि दुनिया कोई ऐसी जगह नहीं थी जिससे भागना जरूरी हो।
दुनिया रिश्तों से बनी थी।
किसी की मुस्कान में, किसी की परेशानी में, किसी की मदद में और किसी के भरोसे में।
उस दिन उसने खुद से एक वादा किया—
वह दुनिया की सारी परेशानियाँ ठीक नहीं कर सकता, लेकिन जहाँ तक उसके हाथ पहुँचेंगे, वहाँ तक किसी के लिए रोशनी जरूर बनेगा।
और तभी उसे दादी की पुरानी बात पूरी तरह समझ आई—
दुनिया से नाता तोड़कर इंसान अकेला हो जाता है, लेकिन दुनिया से जुड़कर वह किसी की जिंदगी का सहारा बन सकता है।
विहान मुस्कुराया।
अब उसे दुनिया से शिकायत नहीं थी।
अब वह कह सकता था—
“दुनिया से मेरा नाता है, क्योंकि इस दुनिया में मेरा अपना कोई एक नहीं… बल्कि हर अच्छा दिल मेरा अपना है।”

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