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मेरी दादी मां की सीख

पढ़ने का समय : 6 मिनट

मेरी दादी माँ की सीख

 

शहर से दूर एक छोटे से गाँव में अयान अपनी दादी माँ के साथ रहता था। अयान के माता-पिता शहर में नौकरी करते थे और महीने में एक-दो बार ही गाँव आ पाते थे। इसलिए अयान की दुनिया उसकी दादी माँ के आसपास ही थी।

 

दादी माँ बहुत साधारण जीवन जीती थीं। सुबह जल्दी उठतीं, आँगन में झाड़ू लगातीं, तुलसी को पानी देतीं और फिर अयान के लिए नाश्ता बनातीं।

 

अयान अक्सर उनसे कहता, “दादी माँ, आप इतना काम क्यों करती हैं? अब जमाना बदल गया है।”

 

दादी हँसकर कहतीं, “जमाना बदल गया है बेटा, लेकिन अच्छी आदतों की कीमत कभी नहीं बदलती।”

 

अयान उनकी बात सुनता जरूर था, लेकिन कई बार उसे लगता कि दादी माँ की बातें पुराने जमाने की हैं।

 

एक दिन अयान के स्कूल में परीक्षा का परिणाम आने वाला था। उसे पूरा विश्वास था कि वह कक्षा में सबसे अच्छे अंक लाएगा। उसने बहुत मेहनत की थी, लेकिन जब परिणाम आया तो उसके अंक उम्मीद से कम थे।

 

वह घर लौटकर गुस्से में बैग पटककर बैठ गया।

 

दादी ने पूछा, “क्या हुआ?”

 

अयान बोला, “सब बेकार है। मैंने इतनी मेहनत की और फिर भी मेरे अंक कम आए।”

 

दादी ने प्यार से कहा, “अंक कम आए हैं, मेहनत नहीं।”

 

अयान चुप हो गया।

 

दादी बोलीं, “हार के बाद बैठ जाना आसान है। हार के बाद फिर से कोशिश करना असली सीख है।”

 

अयान ने उनकी बात ध्यान से सुनी।

 

अगले दिन से उसने अपनी गलतियाँ देखनी शुरू कीं। कुछ ही महीनों में उसके अंक बेहतर होने लगे।

 

एक दिन दादी ने उसे बाजार से सामान लाने के लिए पैसे दिए।

 

अयान रास्ते में गया तो उसे सड़क के किनारे एक बटुआ मिला। उसमें काफी पैसे थे।

 

उसके मन में आया कि वह पैसे रख ले।

 

“दादी को क्या पता चलेगा?” उसने सोचा।

 

लेकिन तुरंत उसे दादी की बात याद आई—

 

“ईमानदारी तब असली होती है, जब कोई तुम्हें गलत काम करते हुए देख न रहा हो।”

 

अयान बटुआ लेकर पास की दुकान पर गया और आसपास पूछताछ करने लगा।

 

कुछ देर बाद एक बुजुर्ग आदमी घबराते हुए वहाँ पहुँचे।

 

“मेरा बटुआ कहीं गिर गया है। उसमें मेरी दवाई के पैसे थे।”

 

अयान ने बटुआ उन्हें दे दिया।

 

बुजुर्ग की आँखों में खुशी आ गई।

 

उन्होंने कहा, “बेटा, तुमने आज मेरा बहुत बड़ा काम कर दिया।”

 

अयान घर लौटकर दादी को सारी बात बताने लगा।

 

दादी ने उसके सिर पर हाथ रखा।

 

“आज तुमने मेरी नहीं, अपनी अंतरात्मा की बात मानी है।”

 

अयान मुस्कुराया।

 

कुछ दिन बाद गाँव में तेज बारिश हुई। गाँव की सड़क पर पानी भर गया। कई लोगों के घरों में पानी घुसने लगा।

 

अयान अपने घर में सुरक्षित बैठा था। तभी दादी ने कहा, “चल बेटा, पड़ोस वाली अम्मा के घर चलते हैं।”

 

अयान बोला, “दादी, इतनी बारिश में?”

 

दादी ने कहा, “मुसीबत में किसी का साथ देना मौसम देखकर नहीं होता।”

 

दोनों पड़ोस की बुजुर्ग अम्मा के घर पहुँचे। उनका घर पानी से भरने लगा था।

 

अयान ने सामान बाहर निकाला और उन्हें सुरक्षित जगह पहुँचाने में मदद की।

 

उस दिन उसने महसूस किया कि दादी की सीख सिर्फ बातें नहीं थीं।

 

वे जिंदगी जीने का तरीका थीं।

 

समय बीतता गया।

 

एक दिन अयान के पिता ने शहर से फोन किया।

 

उन्होंने कहा, “बेटा, हम चाहते हैं कि तुम शहर आकर हमारे साथ रहो। वहाँ तुम्हारे लिए अच्छे स्कूल और ज्यादा सुविधाएँ हैं।”

 

अयान खुश भी हुआ और उदास भी।

 

उसने दादी से पूछा, “मैं शहर चला जाऊँ तो आपका क्या होगा?”

 

दादी मुस्कुराईं।

 

“तू आगे बढ़ेगा तो मुझे खुशी होगी।”

 

अयान ने पूछा, “लेकिन आपकी सीख?”

 

दादी ने कहा, “उसे अपने साथ ले जाना।”

 

अयान शहर चला गया।

 

शहर की जिंदगी गाँव से बिल्कुल अलग थी। यहाँ हर कोई जल्दी में रहता था। लोग एक-दूसरे को जानते तक नहीं थे।

 

एक दिन स्कूल में अयान का एक नया दोस्त बना। उसका नाम कुणाल था।

 

कुणाल पढ़ाई में कमजोर था। दूसरे बच्चे उसका मजाक उड़ाते थे।

 

अयान को दादी की एक और बात याद आई—

 

“जिसे सहारे की जरूरत हो, उसे धक्का मत देना।”

 

अयान ने कुणाल की पढ़ाई में मदद करनी शुरू कर दी।

 

कुछ महीनों बाद कुणाल के अंक बहुत अच्छे हो गए।

 

उसने अयान से कहा, “तुमने मेरा मजाक उड़ाने के बजाय मेरी मदद की। क्यों?”

 

अयान ने कहा, “मेरी दादी कहती हैं कि किसी को नीचे गिराकर कोई बड़ा नहीं बनता।”

 

कुणाल मुस्कुरा दिया।

 

समय बीतता गया और अयान बड़ा होने लगा।

 

एक दिन उसे एक बड़ी कंपनी में काम करने का मौका मिला। वहाँ उससे कहा गया कि अगर वह कुछ गलत आँकड़े दिखा दे तो उसे जल्दी पदोन्नति मिल सकती है।

 

अयान कुछ पल सोच में पड़ गया।

 

उसके सामने बड़ा फायदा था।

 

लेकिन फिर उसे दादी की आवाज याद आई—

 

“ईमानदारी का रास्ता लंबा हो सकता है, लेकिन मंजिल पर पहुँचकर सिर झुकाना नहीं पड़ता।”

 

अयान ने गलत काम करने से मना कर दिया।

 

कुछ लोगों ने उसका मजाक उड़ाया।

 

“इतना अच्छा मौका छोड़ दिया!”

 

अयान चुप रहा।

 

कुछ महीनों बाद कंपनी में उस गलत काम की जाँच हुई और कई लोगों पर कार्रवाई हुई।

 

अयान की ईमानदारी सबके सामने आ गई।

 

उसे उसी काम के लिए बड़ी जिम्मेदारी दी गई जिसे उसने ईमानदारी से करने से इनकार किया था।

 

उस शाम उसने दादी को फोन किया।

 

“दादी माँ, आपकी सीख काम आ गई।”

 

दादी हँसकर बोलीं, “कौन-सी?”

 

“दादी, आपने सिखाया था कि सही रास्ता मुश्किल हो सकता है, लेकिन गलत रास्ते पर चलकर मिली सफलता ज्यादा देर नहीं टिकती।”

 

दादी कुछ पल चुप रहीं।

 

फिर बोलीं, “अब तू मेरी सीख दूसरों को देना।”

 

कई साल बाद अयान अपने गाँव वापस आया।

 

दादी अब काफी बूढ़ी हो चुकी थीं।

 

अयान उनके पास बैठ गया और बोला, “दादी माँ, आपने मुझे इतना कुछ सिखाया, लेकिन मैंने कभी आपको धन्यवाद नहीं कहा।”

 

दादी ने उसके सिर पर हाथ रखा।

 

“मुझे धन्यवाद नहीं चाहिए। बस इतना वादा कर कि जब जिंदगी में तू किसी कमजोर इंसान को देखे, तो उसका हाथ थामेगा।”

 

अयान की आँखें भर आईं।

 

उसने दादी का हाथ पकड़कर कहा, “वादा।”

 

कुछ समय बाद दादी इस दुनिया से चली गईं।

 

घर वही था, आँगन वही था, तुलसी का पौधा वही था, लेकिन उनकी आवाज अब नहीं थी।

 

अयान आँगन में बैठा उनकी पुरानी चारपाई को देख रहा था।

 

उसे लगा जैसे दादी अभी कहेंगी—

 

“बेटा, खाना खा लिया?”

 

उसकी आँखों से आँसू निकल आए।

 

लेकिन उसी पल उसे समझ आया कि दादी माँ सच में कहीं नहीं गईं।

 

उनकी सीख उसके व्यवहार में जीवित थी।

 

उसने उसी दिन फैसला किया कि वह गाँव के बच्चों के लिए एक छोटी-सी पुस्तकालय खोलेगा, जहाँ वे पढ़ सकें और अच्छी बातें सीख सकें।

 

पुस्तकालय के दरवाजे पर उसने एक पंक्ति लिखवाई—

 

“अच्छा इंसान बनना सबसे बड़ी सफलता है।”

 

नीचे उसने लिखा—

 

“मेरी दादी माँ की सीख।”

 

जब भी कोई बच्चा उससे पूछता, “ये बात किसने सिखाई?”

 

अयान मुस्कुराकर कहता—

 

“मेरी दादी माँ ने। उन्होंने मुझे बताया था कि जिंदगी में पैसा, पद और सफलता सब जरूरी हैं, लेकिन अगर इंसानियत खो गई तो सब बेकार है।”

 

और इस तरह दादी माँ की सीख सिर्फ अयान तक सीमित नहीं रही।

 

वह गाँव के कई बच्चों की जिंदगी का हिस्सा बन गई।

 

क्योंकि कुछ लोग हमारे साथ हमेशा नहीं रहते, लेकिन उनकी दी हुई सीख हमारे साथ पूरी जिंदगी चलती है।

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