एपिसोड – 43 : राजवीर की वापसी
हवेली की सारी लाइटें बंद थीं।
चारों तरफ घना अंधेरा था।
सिर्फ बाहर खड़ी गाड़ियों की हेडलाइट्स की रोशनी खिड़कियों से अंदर आ रही थी।
और उसी अंधेरे में एक आवाज गूंजी—
“शेखर… अपने बेटों को मेरे हवाले कर दो।”
आरव ने तुरंत अपने दोनों भाइयों की तरफ देखा।
अमन ने बंदूक कसकर पकड़ रखी थी।
विहान के चेहरे पर डर था, लेकिन इस बार वह अकेला नहीं था।
आरोही आरव के बिल्कुल पास खड़ी थी।
रुद्र ने धीरे से कहा—
“राजवीर ने पूरी हवेली को घेर लिया है।”
शेखर खिड़की के पास गया और बाहर देखा।
उसकी आंखों में पहली बार सचमुच डर दिखाई दिया।
आरव ने पूछा—
“क्या हुआ?”
शेखर ने धीमी आवाज में कहा—
“ये आदमी जितना मैं सोच रहा था, उससे कहीं ज्यादा ताकतवर हो चुका है।”
अमन ने कहा—
“आपने ही तो कहा था कि राजवीर आपका सबसे पुराना दोस्त था।”
शेखर ने कड़वी हंसी हंसी।
“था।”
“अब?”
शेखर ने बाहर देखते हुए कहा—
“अब वो मेरा सबसे बड़ा दुश्मन है।”
—
राजवीर की पहली चाल
अचानक हवेली के मुख्य दरवाजे पर जोरदार धमाका हुआ।
धड़ाम!
दरवाजा टूटकर जमीन पर गिर गया।
कई हथियारबंद लोग अंदर घुस आए।
रुद्र ने तुरंत गोली चलाई।
अमन भी उनके सामने आ गया।
आरव ने आरोही को पीछे किया।
“तुम यहां से नहीं हटोगी।”
आरोही ने कहा—
“मैंने कहा ना, जहां तुम हो वहीं मैं रहूंगी।”
आरव हल्का सा मुस्कुराया।
“तुम्हारी यही जिद मुझे डराती है।”
आरोही ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा—
“और तुम्हारा प्यार मुझे हिम्मत देता है।”
दोनों कुछ पल एक-दूसरे को देखते रहे।
तभी अमन ने पीछे से आवाज लगाई—
“भाई! रोमांस बाद में करना, पहले इन लोगों को संभालो!”
आरोही ने तुरंत नजरें हटा लीं।
आरव हंस पड़ा।
“तू कभी नहीं सुधरेगा।”
अमन ने कहा—
“और तुम दोनों कभी सुधरोगे नहीं।”
अचानक एक गोली उनकी तरफ आई।
रुद्र ने तुरंत आरव को नीचे खींच लिया।
गोली दीवार में जा लगी।
“सावधान!”
—
तीनों भाइयों की पहली लड़ाई
अमन आगे बढ़ा और दो आदमियों को रोक लिया।
विहान ने भी एक हमलावर को पीछे धकेला।
आरव ने पहली बार अपने दोनों भाइयों को एक साथ लड़ते देखा।
उसे अजीब-सा एहसास हुआ।
जैसे यह दृश्य उसने पहले भी देखा हो।
तीन छोटे बच्चे…
एक-दूसरे का हाथ पकड़े हुए…
और सामने खड़ा कोई दुश्मन।
आरव के सिर में तेज दर्द हुआ।
“आह!”
आरोही तुरंत उसके पास आई।
“आरव!”
“मैं ठीक हूं।”
“फिर सिर क्यों पकड़ रखा है?”
“मुझे कुछ याद आ रहा है।”
“क्या?”
आरव ने आंखें बंद कर लीं।
एक आवाज उसके कानों में गूंजी—
“जब तीनों भाई एक साथ खड़े होंगे, तभी तिजोरी खुलेगी।”
आरव ने अचानक आंखें खोल दीं।
“तिजोरी!”
आरोही ने पूछा—
“कौन-सी तिजोरी?”
आरव ने कहा—
“वही जिसका जिक्र मां की डायरी में था।”
—
राजवीर सामने आया
अचानक गोलीबारी रुक गई।
हथियारबंद लोग पीछे हट गए।
और दरवाजे से एक आदमी अंदर आया।
काले सूट में।
सफेद बाल।
हाथ में चांदी की छड़ी।
उसकी उंगली में वही काली अंगूठी थी, जिस पर सांप का निशान बना था।
आरव की नजर उसकी अंगूठी पर टिक गई।
“राजवीर।”
राजवीर मुस्कुराया।
“आखिरकार तुमने मुझे पहचान लिया।”
शेखर उसके सामने आ गया।
“तुम यहां से चले जाओ।”
राजवीर हंसा।
“इतने सालों बाद भी तुम मुझे आदेश दोगे?”
“मैं तुम्हारा मालिक था।”
“था।”
राजवीर ने वही शब्द दोहराया।
“अब नहीं।”
शेखर ने बंदूक तान दी।
“तुमने मेरे परिवार को बर्बाद किया।”
राजवीर ने कहा—
“तुम्हारा परिवार पहले ही टूट चुका था।”
“तुमने मेरी पत्नी को मारा।”
“कौन-सी पत्नी?”
शेखर की आंखों में गुस्सा भर गया।
“नैना।”
राजवीर मुस्कुराया।
“नैना की मौत के लिए मुझे दोष मत दो।”
विहान आगे आया।
“झूठ!”
राजवीर ने पहली बार उसे गौर से देखा।
उसकी आंखों में अजीब-सा भाव आया।
“तुम…”
विहान ने कहा—
“मैं नैना का बेटा हूं।”
राजवीर कुछ पल उसे देखता रहा।
फिर बोला—
“तो तुम जिंदा हो।”
विहान के चेहरे का रंग उड़ गया।
आरव तुरंत उसकी तरफ आ गया।
“तुम्हें पहले से पता था कि विहान जिंदा है?”
राजवीर चुप रहा।
अमन ने पूछा—
“तुमने उसे क्यों ढूंढा?”
राजवीर ने कहा—
“क्योंकि विहान के पास वो चीज है, जिसकी मुझे सबसे ज्यादा जरूरत है।”
विहान ने पूछा—
“क्या?”
राजवीर ने कहा—
“तुम्हारी मां की आखिरी याद।”
—
विहान की याद
विहान का चेहरा बदल गया।
“मेरी मां की आखिरी याद?”
“हां।”
“मुझे कुछ याद नहीं।”
राजवीर मुस्कुराया।
“तुम्हें याद नहीं… लेकिन तुम्हारे दिमाग में वो सब मौजूद है।”
डॉक्टर अचानक बेचैन हो गया।
“राजवीर, उसे छोड़ दो।”
राजवीर ने डॉक्टर की तरफ देखा।
“तुम अब भी इनके लिए मरने को तैयार हो?”
डॉक्टर ने कहा—
“हां।”
राजवीर हंसा।
“तुमने पच्चीस साल पहले भी यही कहा था।”
आरव ने डॉक्टर की तरफ देखा।
“आप दोनों एक-दूसरे को पहले से जानते थे।”
राजवीर ने कहा—
“बहुत अच्छी तरह।”
आरव ने पूछा—
“तो आपने हमसे क्या छुपाया?”
राजवीर ने कहा—
“तुम्हारे जन्म की पूरी कहानी।”
—
असली जन्म का रहस्य
राजवीर धीरे-धीरे आगे बढ़ा।
“तुम तीनों का जन्म एक ही रात हुआ था।”
आरव ने कहा—
“ये हम जानते हैं।”
“नहीं।”
राजवीर मुस्कुराया।
“तुम सिर्फ इतना जानते हो कि तुम तीनों एक ही रात पैदा हुए।”
“लेकिन तुम्हें ये नहीं पता कि तुम तीनों को एक ही अस्पताल में क्यों रखा गया था।”
अमन ने पूछा—
“क्यों?”
राजवीर ने कहा—
“क्योंकि तीनों बच्चों को एक ही मां ने जन्म दिया था।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
माधवी ने तुरंत कहा—
“झूठ!”
राजवीर ने उसकी तरफ देखा।
“तुम्हें लगता है सच छुपाने से वो बदल जाएगा?”
आरव ने माधवी की तरफ देखा।
“मां?”
माधवी की आंखों में डर था।
राजवीर ने कहा—
“आरव, अमन और विहान… तीनों की जन्मदात्री एक ही औरत थी।”
अमन ने कहा—
“कौन?”
राजवीर ने धीरे से कहा—
“नैना।”
विहान स्तब्ध रह गया।
“तो आरव और अमन भी…”
राजवीर ने कहा—
“हां।”
आरव पीछे हट गया।
“लेकिन मेरी मां माधवी है।”
राजवीर ने कहा—
“माधवी ने तुम्हें पाला।”
“लेकिन जन्म?”
“नैना।”
आरव की आंखें माधवी पर टिक गईं।
“मां… क्या ये सच है?”
माधवी रोने लगीं।
“आरव…”
आरव की आवाज टूट गई।
“आपने मुझसे झूठ बोला?”
माधवी ने कहा—
“मैंने तुम्हें बचाने के लिए झूठ बोला।”
आरव ने पूछा—
“मेरी असली मां नैना थी?”
माधवी ने धीरे से सिर झुका दिया।
“हां।”
—
सबसे बड़ा झटका
आरव के पैरों तले जमीन खिसक गई।
आरोही ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“आरव…”
लेकिन आरव कुछ सुन नहीं रहा था।
उसके दिमाग में बचपन की तस्वीरें घूमने लगीं।
एक महिला उसे गोद में उठाए हुए थी।
एक औरत उसके माथे पर चूम रही थी।
उसकी आवाज—
“मेरे बच्चे…”
आरव की आंखों से आंसू निकल आए।
“वो… नैना थीं?”
डॉक्टर ने कहा—
“हां।”
आरव ने डॉक्टर को देखा।
“फिर आपने मेरी यादें क्यों मिटाईं?”
डॉक्टर ने कहा—
“क्योंकि अगर तुम्हें नैना याद रहतीं, तो तुम राजवीर तक पहुंच जाते।”
राजवीर हंस पड़ा।
“और यही मैं नहीं चाहता था।”
अमन ने पूछा—
“तुम्हें हमसे क्या चाहिए?”
राजवीर ने कहा—
“तुम तीनों की जरूरत है।”
“किसलिए?”
राजवीर ने अपनी छड़ी जमीन पर मारी।
“क्योंकि तुम्हारी मां ने मरने से पहले अपनी सारी संपत्ति और सबूत तुम्हारे नाम कर दिए थे।”
शेखर चौंक गया।
“क्या?”
राजवीर ने कहा—
“हां।”
“लेकिन नैना की सारी संपत्ति तो खत्म हो गई थी।”
“तुम्हें ऐसा लगा।”
राजवीर मुस्कुराया।
“उसने सब कुछ एक गुप्त ट्रस्ट में रखा था।”
आरव ने पूछा—
“और उसकी चाबी?”
राजवीर ने उसकी तरफ देखा।
“तुम्हारे पास है।”
आरव ने अपनी जेब टटोली।
वही छोटी चाबी।
उसकी आंखें फैल गईं।
—
चाबी किसकी थी?
राजवीर ने कहा—
“वही चाबी मुझे दे दो।”
आरव ने चाबी कसकर पकड़ ली।
“नहीं।”
“तो तुम्हारे भाइयों में से एक मर जाएगा।”
अमन आगे बढ़ा।
“पहले मुझे मार।”
विहान भी उसके पास खड़ा हो गया।
“और मुझे भी।”
आरव ने दोनों को देखा।
उसकी आंखों में आंसू आ गए।
“हम तीनों साथ हैं।”
आरोही ने कहा—
“और मैं भी।”
राजवीर हंसा।
“तुम्हें लगता है प्यार और भाईचारा तुम्हें बचा लेगा?”
आरव ने दृढ़ता से कहा—
“हां।”
राजवीर ने इशारा किया।
उसके आदमी बंदूकें उठाने लगे।
तभी अचानक हवेली की सारी खिड़कियां बंद हो गईं।
रुद्र ने चौंककर कहा—
“ये किसने किया?”
डॉक्टर मुस्कुराया।
“मैंने।”
राजवीर उसकी तरफ मुड़ा।
“तुम?”
डॉक्टर ने कहा—
“तुम भूल गए कि इस हवेली का गुप्त सिस्टम किसने बनाया था।”
अचानक फर्श के नीचे से लोहे की आवाज आई।
दीवारें खिसकने लगीं।
एक गुप्त रास्ता खुल गया।
डॉक्टर ने कहा—
“तीनों भाई अंदर जाओ!”
आरव ने पूछा—
“और आप?”
डॉक्टर मुस्कुराया।
“मुझे अपना पुराना हिसाब चुकाना है।”
आरव ने कहा—
“नहीं!”
लेकिन डॉक्टर ने दरवाजा बंद कर दिया।
आरव, अमन, विहान और आरोही उस गुप्त रास्ते में चले गए।
दरवाजा बंद होते ही बाहर से गोलियों की आवाज सुनाई देने लगी।
धांय! धांय! धांय!
विहान डर गया।
“डॉक्टर!”
आरव ने कहा—
“हम उन्हें अकेला नहीं छोड़ सकते।”
अमन ने कहा—
“लेकिन रास्ता बंद है।”
तभी सामने एक लोहे का दरवाजा दिखाई दिया।
उस पर तीन शब्द लिखे थे—
“नैना के बच्चे।”
आरव ने चाबी निकाली।
लेकिन ताले में चाबी लगाने से पहले ही उसके पीछे से आरोही की आवाज आई—
“आरव…”
वह मुड़ी हुई दीवार की तरफ देख रही थी।
वहां एक तस्वीर लगी थी।
तस्वीर में नैना थी।
उसकी गोद में तीन छोटे बच्चे थे।
और उनके पीछे खड़ा था…
अभय।
लेकिन तस्वीर के कोने में एक और आदमी खड़ा था।
आरव ने उसे देखते ही कहा—
“ये कौन है?”
विहान ने तस्वीर को गौर से देखा।
फिर उसके चेहरे पर डर छा गया।
“मैं इसे जानता हूं।”
अमन ने पूछा—
“कौन है?”
विहान ने कांपते हुए कहा—
“ये आदमी… मुझे बचपन से सपनों में दिखाई देता था।”
और उसी पल दरवाजे के पीछे से एक आवाज आई—
“क्योंकि मैं तुम्हारा असली पिता हूं।”
तीनों भाई जम गए।
जारी रहेगा…

NSW अनुभवी लेखक -🥇

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