“अरे, शादी को पूरे बीस साल हो गए… लेकिन आज तक इनके घर में बच्चे की किलकारी नहीं गूंजी।”
गांव की चौपाल हो, किसी की शादी हो या कोई त्योहार, रवि और मीरा जहां भी जाते, लोगों की बातें उनका पीछा नहीं छोड़ती थीं।
“इतने साल हो गए, अब तो उम्मीद ही छोड़ देनी चाहिए।”
“पता नहीं पिछले जन्म का कौन-सा पाप है।”
ऐसी बातें सुन-सुनकर मीरा का दिल हर बार टूट जाता था। लेकिन वह किसी से कुछ नहीं कहती। बस चुपचाप अपने आंसू पोंछ लेती।
रवि हमेशा उसका हौसला बनकर खड़ा रहता।
वह मुस्कुराकर कहता,
“दुनिया का काम बोलना है मीरा… और हमारा काम महादेव पर भरोसा रखना।”
उनका छोटा-सा घर बहुत साधारण था, लेकिन उसमें प्यार की कोई कमी नहीं थी। दोनों एक-दूसरे का इतना ख्याल रखते कि देखने वाले कहते, “भगवान ने इन्हें संतान भले न दी हो, लेकिन इनके रिश्ते में कभी कमी नहीं आने दी।”
हर सोमवार दोनों सुबह-सुबह उठकर महादेव के मंदिर जाते। मीरा अपने हाथों से शिवलिंग पर जल चढ़ाती और आंखें बंद करके बस एक ही प्रार्थना करती,
“महादेव… अगर हमारी किस्मत में संतान है तो जरूर देना, और अगर नहीं है तो इतना धैर्य देना कि कभी आपसे शिकायत न करूं।”
रवि भी हाथ जोड़कर कहता,
“भोलेनाथ, हमें आपकी हर मर्जी मंजूर है।”
समय अपनी रफ्तार से चलता रहा।
एक दिन रवि के छोटे भाई के बेटे का जन्मदिन था। पूरा परिवार खुशियां मना रहा था।
मीरा भी अपने हाथों से बच्चे के लिए केक और मिठाइयां लेकर गई।
तभी एक रिश्तेदार ने ताना मारते हुए कहा,
“दूसरों के बच्चों पर इतना प्यार लुटाने से क्या होगा? अपना बच्चा होता तो बात ही अलग थी।”
दूसरी औरत भी हंसते हुए बोली,
“भगवान हर किसी की झोली नहीं भरता।”
ये सुनते ही मीरा की आंखें भर आईं।
उसके हाथ से मिठाई की प्लेट लगभग गिर ही गई।
रवि ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया और बिना किसी से कुछ कहे वहां से निकल आया।
घर लौटते समय पूरे रास्ते दोनों चुप रहे।
कुछ देर बाद मीरा रोते हुए बोली,
“क्या सच में मेरी ही कमी है? क्या मैं कभी मां नहीं बन पाऊंगी?”
रवि ने गाड़ी रोक दी।
उसने मीरा का चेहरा अपने हाथों में लिया और कहा,
“मेरी नजर में तुम दुनिया की सबसे अच्छी पत्नी हो। अगर पूरी जिंदगी भी हम दोनों अकेले रहे, तब भी मुझे कोई दुख नहीं होगा। मुझे सिर्फ तुम्हारी मुस्कान चाहिए।”
मीरा और भी ज्यादा रो पड़ी।
उस रात दोनों ने खाना भी नहीं खाया।
वे सीधे घर के मंदिर में जाकर महादेव की मूर्ति के सामने बैठ गए।
न कोई शिकायत…
न कोई सवाल…
बस आंखों में आंसू और दिल में भरोसा था।
दिन महीने बने…
महीने साल बने…
और देखते ही देखते शादी के पूरे बीस साल बीत गए।
अब गांव वालों ने ताने देना भी कम कर दिया था, क्योंकि उन्हें लगने लगा था कि अब इनके घर कभी बच्चा नहीं आएगा।
लेकिन रवि और मीरा का विश्वास आज भी पहले जैसा अटल था।
सावन का महीना शुरू हुआ।
रवि ने कहा,
“मीरा, इस बार हम पैदल चलकर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करेंगे।”
मीरा मुस्कुराकर बोली,
“जहां महादेव बुलाएंगे, वहां तक जरूर चलेंगे।”
दोनों ने यात्रा शुरू की।
रास्ता आसान नहीं था।
कभी तेज धूप पड़ती…
कभी मूसलाधार बारिश शुरू हो जाती…
कभी पथरीले रास्तों पर पैर छिल जाते…
लेकिन दोनों के होंठों पर सिर्फ एक ही जयकारा था—
“हर हर महादेव!”
यात्रा के आखिरी दिन जब दोनों मंदिर पहुंचे तो मीरा शिवलिंग के सामने बैठते ही फूट-फूटकर रोने लगी।
उसने हाथ जोड़कर कहा,
“महादेव… आज मैं आपसे कुछ मांगने नहीं आई हूं। बस अपना सारा दुख आपके चरणों में छोड़ने आई हूं। अब जो आपकी इच्छा, वही हमारी किस्मत।”
पास ही बैठे एक वृद्ध साधु काफी देर से दोनों को देख रहे थे।
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा,
“बेटी, याद रखना… भोलेनाथ के घर देर हो सकती है, लेकिन अंधेर कभी नहीं होता। तुम्हारा विश्वास खाली नहीं जाएगा।”
रवि और मीरा ने उनके चरण छुए और मन में नई उम्मीद लेकर घर लौट आए।
करीब दो महीने बाद मीरा की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। उसे बार-बार चक्कर आने लगे और कमजोरी महसूस होने लगी।
रवि घबरा गया और तुरंत उसे शहर के अस्पताल लेकर पहुंचा।
डॉक्टर ने कुछ जांचें लिखीं और दोनों को बाहर इंतजार करने के लिए कहा।
रिपोर्ट आने तक दोनों की धड़कनें तेज थीं।
मीरा बार-बार महादेव का नाम जप रही थी, जबकि रवि उसकी हथेली थामे चुपचाप बैठा था।
थोड़ी देर बाद डॉक्टर मुस्कुराते हुए बाहर आए…
और बोले,
“बधाई हो… आप दोनों माता-पिता बनने वाले हैं।”
यह सुनते ही दोनों एक-दूसरे को देखते रह गए।
उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि बीस साल का इंतजार आखिरकार खत्म होने वाला है।
डॉक्टर के कमरे से बाहर निकलते ही मीरा ने कांपते हाथों से अपनी रिपोर्ट सीने से लगा ली। उसकी आंखों से खुशी के आंसू लगातार बह रहे थे। वह बार-बार आसमान की ओर देखकर बस एक ही बात कह रही थी,
“महादेव… आपने मेरी सुन ली।”
रवि की आंखें भी नम थीं। वह अस्पताल के छोटे-से मंदिर में गया और घुटनों के बल बैठ गया। उसने दोनों हाथ जोड़कर कहा,
“भोलेनाथ… बीस साल तक आपने हमारी परीक्षा ली, लेकिन आज आपने हमारी झोली खुशियों से भर दी। आपका लाख-लाख धन्यवाद।”
इतने वर्षों तक उसने हर ताना मुस्कुराकर सहा था। उसने कभी अपनी पत्नी को अकेला महसूस नहीं होने दिया। आज उसे लग रहा था कि उसका हर आंसू, हर प्रार्थना और हर सोमवार का व्रत सफल हो गया।
दोनों सबसे पहले घर पहुंचे। उन्होंने महादेव की तस्वीर के सामने घी का दीपक जलाया। पूरे घर में अगरबत्ती की सुगंध फैल गई। दोनों ने मिलकर शिव चालीसा का पाठ किया।
मीरा ने हाथ जोड़कर कहा,
“भोलेनाथ, आपने हमें दुनिया की सबसे बड़ी खुशी दी है। अब बस इतनी कृपा करना कि हम इस बच्चे को अच्छे संस्कार दें और हमेशा आपके बताए रास्ते पर चलना सिखाएं।”
उस दिन के बाद घर का माहौल पूरी तरह बदल गया। जहां कभी सन्नाटा रहता था, वहां अब आने वाले नन्हे मेहमान की बातें होने लगीं। रवि रोज़ छोटे-छोटे कपड़े, खिलौने और झूले देखकर मुस्कुरा देता।
नौ महीने जैसे-तैसे बीत गए।
आखिर वह दिन भी आ गया जिसका दोनों ने बीस साल तक इंतजार किया था।
अस्पताल के बाहर रवि बेचैनी से टहल रहा था। उसके होंठों पर लगातार “ॐ नमः शिवाय” का जाप चल रहा था।
कुछ देर बाद डॉक्टर बाहर आए और मुस्कुराते हुए बोले,
“बधाई हो… लक्ष्मी आई है। आपके घर बेटी ने जन्म लिया है।”
यह सुनते ही रवि की आंखों से आंसू छलक पड़े। उसने तुरंत हाथ जोड़कर आसमान की ओर देखा और कहा,
“महादेव… आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।”
जब उसने पहली बार अपनी नन्ही-सी बेटी को गोद में लिया, तो उसकी आंखों से आंसू बच्ची के माथे पर गिर पड़े। उसने प्यार से उसके माथे को चूमते हुए कहा,
“तुम हमारी बीस साल की तपस्या का फल हो।”
मीरा अपनी बेटी को सीने से लगाकर रोए जा रही थी। यह दुख के नहीं, बल्कि बरसों की अधूरी इच्छा पूरी होने की खुशी के आंसू थे।
कुछ दिनों बाद रवि अपनी बेटी को गोद में लेकर सबसे पहले महादेव के मंदिर पहुंचा।
उसने बच्ची को शिवलिंग के सामने झुकाकर कहा,
“भोलेनाथ, यह हमारी नहीं… आपकी अमानत है। आपने इसे हमें संभालने के लिए भेजा है।”
मंदिर में मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं।
धीरे-धीरे पूरे गांव में यह खबर फैल गई।
जो लोग कभी ताने मारते थे, वही आज मिठाई लेकर उनके घर आने लगे।
उन्हीं रिश्तेदारों में से एक महिला, जिसने कभी मीरा का मजाक उड़ाया था, बेटी को गोद में लेकर रो पड़ी।
वह बोली,”बहू… मुझे माफ कर देना। मैंने तुम्हें बहुत दुख पहुंचाया।”
मीरा मुस्कुराई और बोली,
“जब महादेव ने सब माफ कर दिया, तो मैं कौन होती हूं किसी से नाराज़ रहने वाली?”
उसकी बात सुनकर वहां खड़े सभी लोगों का सिर शर्म से झुक गया।
उस दिन गांव के हर इंसान ने एक बात सीखी—
किसी के दुख का मजाक कभी नहीं उड़ाना चाहिए। क्योंकि इंसान सिर्फ आज देखता है, लेकिन भगवान सही समय देखकर देते हैं।
आज भी हर सोमवार रवि, मीरा और उनकी नन्ही बेटी हाथों में पूजा की थाली लेकर महादेव के मंदिर जाते हैं।
पहले वे दो लोग महादेव से एक संतान मांगने जाते थे…
और आज वही तीनों हर बार सिर्फ धन्यवाद कहने जाते हैं।
मंदिर की घंटियां बजती हैं, उनकी बेटी भोलेनाथ को दे
खकर मुस्कुरा देती है, और रवि-मीरा की आंखें फिर से नम हो जाती हैं।
वे समझ चुके थे कि सच्ची श्रद्धा कभी व्यर्थ नहीं जाती। भगवान हर प्रार्थना सुनते हैं, बस उसका उत्तर अपने सही समय पर देते हैं।
हर हर महादेव!

मैं हर बार कुछ बेहतर की कोशिश करती हूं
अपनी कलम से जज़्बात लिखा करती हूं
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