एपिसोड – 31 : पुराने अस्पताल का बंद कमरा
रात के करीब ग्यारह बज चुके थे।
पुराने सिटी अस्पताल की इमारत अंधेरे में किसी डरावने खंडहर जैसी दिखाई दे रही थी। जगह-जगह टूटी खिड़कियां, दीवारों पर उखड़ा हुआ प्लास्टर और चारों तरफ फैली खामोशी उस रात को और भी भयावह बना रही थी।
आरव अस्पताल के मुख्य गेट के सामने खड़ा था।
उसके हाथ में वही फोन था, जिसमें कुछ देर पहले उसके माता-पिता की तस्वीर आई थी।
माधवी और शेखर दोनों कुर्सियों से बंधे हुए थे।
आरव के अंदर गुस्सा उबल रहा था।
आरोही उसके पास आकर खड़ी हुई।
“आरव…”
आरव ने उसकी तरफ देखा।
“हां?”
“तुम अंदर अकेले नहीं जाओगे।”
आरव ने तुरंत कहा,
“लेकिन उसने साफ कहा है कि मुझे अकेले आना है।”
आरोही ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा,
“और तुम उसकी बात मानोगे?”
“अगर मां-पापा की जान खतरे में हो तो हां।”
आरोही ने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया।
“तुम्हें अगर कुछ हो गया तो?”
आरव कुछ पल चुप रहा।
फिर उसने कहा,
“तुम्हें पता है, जब से तुम मेरी जिंदगी में आई हो… मुझे पहली बार किसी को खोने का डर लगा है।”
आरोही की आंखें नम हो गईं।
“तो मुझे छोड़कर मत जाना।”
आरव ने उसके माथे पर हल्का सा हाथ रखा।
“मैं वापस आऊंगा।”
आरोही ने सिर हिलाया।
“वादा?”
“वादा।”
पीछे खड़ा अमन उन्हें देख रहा था।
उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी।
“तुम दोनों को देखकर लगता है कि इस दुनिया में अभी भी कुछ अच्छा बचा है।”
आरव ने उसकी तरफ देखा।
“और तुम?”
अमन ने कहा,
“मैं भी कोशिश करूंगा कि कुछ अच्छा बचा रहे।”
तीनों धीरे-धीरे अस्पताल के अंदर दाखिल हुए।
रुद्र बाहर ही रुक गया।
आरव ने पूछा,
“तुम अंदर नहीं आ रहे?”
रुद्र ने कहा,
“मुझे बाहर से निगरानी करनी है।”
“क्यों?”
“क्योंकि सम्राट सिर्फ अंदर नहीं है।”
रुद्र ने चारों तरफ देखा।
“उसके लोग पूरे इलाके में हैं।”
अमन ने पूछा,
“तुम्हें कैसे पता?”
रुद्र ने कहा,
“क्योंकि मैं उनमें से कई को पहचानता हूं।”
आरव ने सिर हिलाया।
“सावधान रहना।”
रुद्र ने कहा,
“तुम भी।”
आरव, आरोही और अमन अंदर चले गए।
अंदर जाते ही अमन रुक गया।
उसकी आंखों के सामने जैसे धुंधली-सी तस्वीरें घूमने लगीं।
एक महिला…
गोद में बच्चा…
जलता हुआ कमरा…
लोगों की चीखें…
और एक आवाज—
“अमन को लेकर भागो!”
अमन ने अपना सिर पकड़ लिया।
आरव तुरंत उसके पास आया।
“क्या हुआ?”
“मुझे… कुछ याद आया।”
“क्या?”
“मैं यहां पहले भी आया हूं।”
आरोही ने पूछा,
“लेकिन तुम तो बहुत छोटे थे।”
अमन ने दीवार को छूते हुए कहा,
“कुछ जगहें यादों को संभालकर रखती हैं।”
फिर उसने धीरे से कहा,
“मेरी मां यहीं मरी थी।”
आरव ने उसका कंधा पकड़ लिया।
“इस बार तुम अकेले नहीं हो।”
अमन ने उसकी तरफ देखा।
“हां।”
वे अस्पताल की पहली मंजिल पर पहुंचे।
वहां पुराने मरीजों के रिकॉर्ड वाले कमरे थे।
अमन ने एक दरवाजा देखा।
उस पर लिखा था—
RECORD ROOM
उसने दरवाजा खोला।
अंदर सैकड़ों पुरानी फाइलें थीं।
आरोही ने कहा,
“हमें सिया की फाइल ढूंढनी होगी।”
आरव ने पूछा,
“इतनी सारी फाइलों में कैसे?”
अमन ने कहा,
“मुझे तारीख याद है।”
“कौन सी?”
“14 अगस्त।”
आरव ने फाइलें देखना शुरू किया।
कुछ देर बाद आरोही को एक फाइल मिली।
उस पर लिखा था—
Patient: Siya
अमन के हाथ कांपने लगे।
“मां…”
उसने फाइल खोली।
पहले पन्ने पर लिखा था—
स्थिति: गंभीर
दूसरे पन्ने पर—
बच्चा सुरक्षित।
तीसरे पन्ने पर एक लाल मुहर थी—
DEAD
अमन की आंखों से आंसू निकल आए।
“ये सब झूठ था।”
आरव ने पूछा,
“क्या?”
“मेरी मां की मौत की रिपोर्ट।”
“क्यों?”
अमन ने फाइल का आखिरी पन्ना दिखाया।
उस पर डॉक्टर के हस्ताक्षर थे।
लेकिन उसके नीचे लिखा था—
“मृत्यु की पुष्टि नहीं हुई।”
आरोही ने कहा,
“मतलब…”
अमन ने फाइल बंद कर दी।
“मेरी मां शायद उस रात मरी ही नहीं थी।”
तभी कमरे के पीछे से हल्की आवाज आई।
ठक… ठक…
तीनों चौंक गए।
आरोही ने पूछा,
“ये आवाज कहां से आई?”
अमन ने दीवार की तरफ देखा।
“वहां।”
आरव ने दीवार पर हाथ मारा।
आवाज अंदर से आ रही थी।
“यहां कोई कमरा है।”
उन्होंने दीवार के पास रखी पुरानी अलमारी हटाई।
पीछे एक छोटा दरवाजा दिखाई दिया।
दरवाजे पर कोई ताला नहीं था।
आरव ने उसे खोला।
अंदर पूरी तरह अंधेरा था।
अमन ने टॉर्च जलाई।
कमरे के बीच में एक पुरानी कुर्सी थी।
और कुर्सी पर…
एक टेप रिकॉर्डर रखा था।
अमन धीरे-धीरे उसके पास गया।
उसने रिकॉर्डर उठाया।
उस पर एक कागज चिपका था—
“मेरे बेटे अमन के लिए।”
अमन की सांस रुक गई।
“मां…”
उसने रिकॉर्डर चलाया।
कुछ सेकंड तक सिर्फ शोर आया।
फिर एक महिला की कांपती आवाज सुनाई दी।
“अमन… अगर तुम कभी ये आवाज सुन रहे हो, तो इसका मतलब है कि मैं तुम्हारे पास नहीं हूं।”
अमन की आंखों से आंसू बहने लगे।
आरव और आरोही भी चुपचाप सुनने लगे।
सिया की आवाज आगे आई—
“मैं चाहती हूं कि तुम नफरत में अपनी जिंदगी बर्बाद मत करना।”
अमन ने आंखें बंद कर लीं।
“मां…”
रिकॉर्डिंग में सिया कह रही थी—
“तुम्हें शायद बताया जाएगा कि तुम्हारी मां की मौत के लिए आरव का परिवार जिम्मेदार था।”
आरव चौंक गया।
अमन ने रिकॉर्डर कसकर पकड़ लिया।
“लेकिन ये सच नहीं है।”
अमन की सांस तेज हो गई।
“तो फिर कौन?”
रिकॉर्डिंग में सिया की आवाज आई—
“जिसने मुझे सबसे ज्यादा धोखा दिया… वो वही था जिस पर मैंने सबसे ज्यादा भरोसा किया।”
आरोही ने धीरे से कहा,
“कौन?”
सिया आगे बोली—
“उसका नाम है…”
रिकॉर्डिंग अचानक बंद हो गई।
अमन ने रिकॉर्डर को थपथपाया।
“नहीं!”
आरव ने कहा,
“शायद टेप खराब है।”
अमन ने उसे दोबारा चलाया।
कुछ नहीं हुआ।
तभी कमरे के कोने में एक छोटी लाल बत्ती जल उठी।
आरोही ने कहा,
“आरव…”
आरव ने उसकी तरफ देखा।
“क्या?”
“हमें यहां से निकलना चाहिए।”
अमन ने पूछा,
“क्यों?”
“क्योंकि ये कमरा हमें रिकॉर्डिंग सुनाने के लिए नहीं खोला गया था।”
आरव ने चारों तरफ देखा।
“तो?”
आरोही ने ऊपर लगे कैमरे की तरफ इशारा किया।
“हमें देखने के लिए खोला गया था।”
अचानक कमरे की लाइट जल गई।
दीवार पर लगा स्क्रीन चालू हुआ।
स्क्रीन पर एक आदमी दिखाई दिया।
काला सूट।
चेहरे पर हल्की मुस्कान।
आरव ने कहा,
“सम्राट।”
आदमी मुस्कुराया।
“आखिर तुम यहां पहुंच ही गए।”
अमन गुस्से में बोला,
“मेरी मां की रिकॉर्डिंग पूरी क्यों नहीं होने दी?”
सम्राट ने कहा,
“क्योंकि कुछ सच समय से पहले सुनना खतरनाक होता है।”
अमन ने कहा,
“सामने आ!”
“जल्द।”
आरव ने पूछा,
“मेरे माता-पिता कहां हैं?”
सम्राट ने स्क्रीन पर दूसरी तस्वीर दिखाई।
माधवी और शेखर अभी भी बंधे हुए थे।
लेकिन इस बार उनके पास एक और आदमी खड़ा था।
आरव की आंखें फैल गईं।
“रुद्र?”
अमन भी चौंक गया।
सम्राट हंसा।
“तुम्हें लगता है तुम्हारा रक्षक तुम्हारे साथ है?”
आरव ने तुरंत फोन निकाला और रुद्र को कॉल किया।
फोन नहीं उठा।
आरोही ने कहा,
“क्या हुआ?”
आरव ने कहा,
“रुद्र फोन नहीं उठा रहा।”
स्क्रीन पर सम्राट बोला—
“क्योंकि रुद्र अब मेरे साथ है।”
अमन ने गुस्से में कहा,
“झूठ!”
सम्राट मुस्कुराया।
“तो खुद जाकर देख लो।”
आरव, आरोही और अमन तेजी से दूसरी मंजिल की तरफ दौड़े।
वहां एक कमरे का दरवाजा खुला था।
अंदर कोई नहीं था।
लेकिन फर्श पर खून के निशान थे।
आरोही ने घबराकर कहा,
“आरव…”
आरव नीचे झुका।
उसने खून को छुआ।
“ये ताजा है।”
अमन ने कहा,
“रुद्र का?”
आरव ने सिर हिलाया।
“पता नहीं।”
तभी पीछे से आवाज आई—
“रुद्र का नहीं।”
तीनों पलटे।
दरवाजे पर एक बूढ़ा डॉक्टर खड़ा था।
उसके हाथ में पुरानी फाइल थी।
अमन ने पूछा,
“आप कौन हैं?”
डॉक्टर ने कहा,
“मैं वही डॉक्टर हूं जिसने तुम्हें जन्मते देखा था।”
अमन की आंखें फैल गईं।
“आप…”
डॉक्टर ने कहा,
“हां।”
आरव आगे बढ़ा।
“हमें सच्चाई चाहिए।”
डॉक्टर ने कहा,
“सच्चाई सुनने के लिए तुम्हें तैयार रहना होगा।”
“मैं तैयार हूं।”
डॉक्टर ने कहा,
“तुम दोनों के जन्म की रात अस्पताल में आग नहीं लगी थी।”
अमन ने पूछा,
“तो?”
डॉक्टर ने कहा—
“आग लगाई गई थी।”
“किसने?”
डॉक्टर ने आरव और अमन दोनों को देखा।
फिर कहा—
“तुम्हारे जन्म से पहले ही तुम्हें मारने का आदेश दिया गया था।”
आरव ने पूछा,
“किसने?”
डॉक्टर ने जवाब दिया—
“जिसने आदेश दिया था, उसका नाम रिकॉर्ड में है।”
उसने फाइल आरव को दी।
आरव ने फाइल खोली।
पहले पन्ने पर कई नाम थे।
लेकिन आखिरी नाम देखकर उसका चेहरा सफेद पड़ गया।
उसने फाइल हाथ से गिरा दी।
आरोही ने पूछा,
“क्या हुआ?”
आरव कुछ नहीं बोला।
आरोही ने फाइल उठाई।
उसकी आंखें भी फैल गईं।
क्योंकि उस फाइल में लिखा था—
आदेश देने वाला: शेखर।
अमन ने फाइल छीन ली।
“नहीं!”
डॉक्टर चुपचाप खड़ा रहा।
आरव की आंखों में आंसू थे।
“पापा ऐसा नहीं कर सकते।”
तभी डॉक्टर ने कहा—
“कागज पर नाम शेखर का है।”
“लेकिन असली आदेश…”
वह रुक गया।
“किसका था?”
डॉक्टर ने धीमे से कहा—
“ये जानने के लिए तुम्हें तहखाने में जाना होगा।”
अमन ने पूछा,
“वहां क्या है?”
डॉक्टर ने दरवाजे की तरफ देखते हुए कहा—
“सिया की आखिरी गवाही।”
उसी वक्त ऊपर से जोरदार धमाका हुआ।
धड़ाम!
पूरी इमारत हिल गई।
आरव ने आरोही का हाथ पकड़ लिया।
डॉक्टर चिल्लाया—
“जल्दी करो! सम्राट ने अस्पताल में आग लगा दी है!”
धुआं पूरे गलियारे में फैलने लगा।
अमन ने कहा—
“तहखाना कहां है?”
डॉक्टर ने फर्श की तरफ इशारा किया।
“यहीं नीचे।”
आरव ने पूछा,
“लेकिन रास्ता?”
डॉक्टर ने फर्श पर एक छिपा हुआ लीवर दबाया।
फर्श का एक हिस्सा धीरे-धीरे खुलने लगा।
नीचे अंधेरी सीढ़ियां दिखाई दीं।
और उसी समय…
अंधेरे तहखाने से एक महिला की आवाज आई—
“अमन…”
अमन वहीं जम गया।
उसकी आंखों से आंसू निकल पड़े।
“ये…”
आरव ने पूछा,
“क्या हुआ?”
अमन ने कांपती आवाज में कहा—
“ये मेरी मां की आवाज है।”
जारी रहेगा…

NSW अनुभवी लेखक -🥇

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